सिंदूर ,बिछुवे, शहनाई ने नही किया पराया ,
घर जाने पे मेरा बैग मुझे है चिढ़ाता ,
तू मेहमान अब ,ये पल पल बताता |
माँ कहती रहती , सामान बैग में फ़ौरन डालो ,
हर बार तुम्हारा कुछ ना कुछ छुट जाता ...|...तू एक मेहमान अब, पल पल बताता
घर जाने पे मेरा बैग मुझे है चिढ़ाता ,
तू मेहमान अब ,ये पल पल बताता |
माँ कहती रहती , सामान बैग में फ़ौरन डालो ,
हर बार तुम्हारा कुछ ना कुछ छुट जाता ...|...तू एक मेहमान अब, पल पल बताता
घर पहुँचने से पहले लौटने की टिकट,
घर पहुँच वक़्त परिंदे सा उड़ता जाता |
उंगलियों पे लेकर जाती गिनती के दिन,
फिसलता लौटने का दिन भी आता ..|....तू एक मेहमान है पल पल बताता
घर पहुँच वक़्त परिंदे सा उड़ता जाता |
उंगलियों पे लेकर जाती गिनती के दिन,
फिसलता लौटने का दिन भी आता ..|....तू एक मेहमान है पल पल बताता
कब होगा आना पूछे सब ये सवाल ,
क्या दूँ जवाब सोच मन पिघलता जाता |
मनुहार से दरवाजे में निकलते तक ,
बैग में कुछ न कुछ भरते जाता .|..तू एक मेहमान ये पल पल बताता
क्या दूँ जवाब सोच मन पिघलता जाता |
मनुहार से दरवाजे में निकलते तक ,
बैग में कुछ न कुछ भरते जाता .|..तू एक मेहमान ये पल पल बताता
चीनी मत डालना चाय में मेरी ,
पापा का रसोई में आकर बताना ।
सुगर पोजिटिव निकला था न अभी ,
फ़ोन पे तुमको भला क्या क्या सुनाता | ......तू एक मेहमान अब ये पल पल बताता
पापा का रसोई में आकर बताना ।
सुगर पोजिटिव निकला था न अभी ,
फ़ोन पे तुमको भला क्या क्या सुनाता | ......तू एक मेहमान अब ये पल पल बताता
जिस बगीचे की गौरय्या भी पहचानती थी ,
अरे अमरुद पेड़ पापा ने कब लगाया ??
कमरे के चप्पे चप्पे में बसती थी मैं ,
आज लाइट्स ,फैन के स्विच भूल हाथ डगमगाता .|...तू एक मेहमान अब ये पल पल बताता
अरे अमरुद पेड़ पापा ने कब लगाया ??
कमरे के चप्पे चप्पे में बसती थी मैं ,
आज लाइट्स ,फैन के स्विच भूल हाथ डगमगाता .|...तू एक मेहमान अब ये पल पल बताता
पास पड़ोस जहाँ बच्चा बच्चा वाकीफ ,
"बिटिया कब आई" पूछने है आता ..|
कब तक रहोगी पूछ अनजाने में वो ,
विदाई के जख्म को अंजाने कुरेद जाता ..| .तू एक मेहमान ये पल पल बताता
"बिटिया कब आई" पूछने है आता ..|
कब तक रहोगी पूछ अनजाने में वो ,
विदाई के जख्म को अंजाने कुरेद जाता ..| .तू एक मेहमान ये पल पल बताता
बैग बंद कर सोचती सब रख लिया ,
जाने क्या यहाँ अब भी छूटा जाता |
चलो वक़्त हो गया सुन डूबते दिल से,
कोना कोना आँखों में भर के आता ..|तू एक मेहमान ये पल पल बताता
जाने क्या यहाँ अब भी छूटा जाता |
चलो वक़्त हो गया सुन डूबते दिल से,
कोना कोना आँखों में भर के आता ..|तू एक मेहमान ये पल पल बताता
ट्रेन में तुम्हारे हाथों की रोटियों का ,
आंसू भरी आँखों में आकार डगमगाता |
लौटते वक़्त वजनी हो गया बैग ,
सीट के नीचे खुद भी उदास हो जाता ....| .तू एक मेहमान ये पल पल बताता ......( घर से दूर जाते हर बेटे और बेटी की पीड़ा को समर्पित मेरी यह कविता
😢
😢)
MADHU: writer at film association MUMBA
आंसू भरी आँखों में आकार डगमगाता |
लौटते वक़्त वजनी हो गया बैग ,
सीट के नीचे खुद भी उदास हो जाता ....| .तू एक मेहमान ये पल पल बताता ......( घर से दूर जाते हर बेटे और बेटी की पीड़ा को समर्पित मेरी यह कविता
MADHU: writer at film association MUMBA