Thursday, March 29, 2018

खुद तैयार करें खाद

खुद तैयार करें खाद
- कंपोस्ट यानी कूड़े से बनी खाद आप इसे नर्सरी से खरीद सकते हैं या खुद भी बना सकते हैं, लाल मिट्टी, रेत और गोबर की खाद बराबर मात्रा में मिलाएं। अगर जगह हो तो कच्ची जमीन में एक गहरा गड्ढा खोदें, वरना एक बड़ा मिट्टी का गमला लें। इसके तले में मिट्टी की मोटी परत डालें। इसके ऊपर किचन से निकलने वाले सब्जियों और फलों के मुलायम छिलके और गूदा डालें। अगर यह कचरा काफी गीला है तो इसके ऊपर सूखे पत्ते या अखबार डाल दें। इसके ऊपर मिट्टी की मोटी परत डालकर ढक दें। गड्ढा या गमला भरने तक ऐसा करते रहें। इस मिश्रण के गलकर एक-तिहाई कम होने तक इंतजार करें। इसमें तकरीबन 3 महीने लगते हैं। अब इस खाद को निकालकर किसी दूसरे गमले में मिट्टी की परतों के बीच दबाकर सूखे पत्तों से ढककर रख दें। 15 से 20 दिन में यह खाद इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगी। मिट्टी के साथ मिलाकर सब्जियां और फल उगाने के लिए इसका इस्तेमाल करें। खाली हुए गड्ढे या गमले में खाद बनाने की प्रक्रिया दोहराते रहें।
- बाजार से सरसों की खली खरीदकर लाएं। खली को पौधों में डालने के लिए इस तरह पानी में भिगोकर रात भर रखें कि अगले दिन वह एक गाढ़े पेस्ट के रूप में तैयार हो जाए। इस पेस्ट को मिट्टी में अच्छी तरह से मिलाकर इसे अपने गमलों में डालें। मिट्टी और खली का अनुपात 10:1 होना चाहिए यानी 10 किलो मिट्टी में 1 किलो खली मिलाएं। इसे गमलों में डालने के बाद मिट्टी की गुड़ाई कर दें ताकि खली वाली मिट्टी गमले की मिट्टी के साथ मिल जाए।
- मार्केट में नीकीड़े से कैसे निपटेंम खली या नीम का तेल आता है। पैकेट पर लिखी मात्रा के अनुसार पानी में मिलाकर इस्तेमाल करें। इससे कीड़े मर जाते हैं।
- कीड़े मारने की दवा खुद भी तैयार कर सकते हैं। गोमूत्रए गाय के दूध से बनी लस्सी बराबर मात्रा ले लें। फिर इसमें थोड़े-से नीम के पत्ते, आक के पत्ते और धतूरे के बीज कूटकर डाल दें। सर्दियों में 15-20 दिन और गर्मियों में एक हफ्ता छोड़ दें। फिर छान लें और स्प्रे बोतल में भर लें। एक हिस्सा दवा लें और 50 हिस्सा पानी। फिर पौधों पर छिड़काव करें। यह दवा कीड़े मारने के अलावा, फंगस को दूर करती है।
कुछ और टिप्स
- गमलों या क्यारियों की मिट्टी में हवा और पानी अच्छी तरह मिलता रहेए इसके लिए पौधों की गुड़ाई करना जरूरी है। गमलों की मिट्टी में उंगली गाड़कर देखें। अगर मिट्टी बहुत सख्त है तो गुड़ाई करें। कम-से-कम महीने में एक बार मिट्टी की गुड़ाई करें।
- बारिश खत्म होने के बाद हर साल अगस्त-सितंबर में सारे पौधों की जड़ें निकाल दें और उन जड़ों को मिट्टी में ही मिला दें। इसे पौधा बड़ा होता रहेगा लेकिन उसकी जड़ें नहीं फैलेंगी।

सब्जियां

सब्जियां
गर्मिया- करेला, भिंडी, घीया, तोरी, टिंडा, लोबिया, ककड़ी आदि। ककड़ी व बैंगन जनवरी के आखिर तक लगा दें, जबकि बाकी सब्जियां फरवरी-मार्च में लगाएं।
सर्दियां- मूली, गाजर, टमाटर, गोभी, पत्ता गोभी, पालक, मेथी, लहसुन, बैंगन, मटर आदि। ये सभी सब्जियां अक्टूबर, नवंबर में लगाई जाती हैं।
कितना पानी, कितनी धूप जरूरी
- किसी भी पौधे के लिए धूप बहुत जरूरी है। यह नियम सब्जियों के पौधों पर भी लागू होता है। अंकुर फूटते समय बीजों को धूप लगना जरूरी है। ऐसा न करने पर ये आकार में छोटे और कमजोर रह जाएंगे। रोजाना 3-4 घंटे की धूप काफी है लेकिन गर्मियों में दोपहर की कड़ी धूप से पौधों को बचाएं। इसके लिए पौधों के थोड़ा ऊपर एक जालीदार शेड बनवा दें तो बेहतर है।
- ज्यादा पानी से मिट्टी के कणों के बीच मौजूद ऑक्सिजन पौधों की जड़ों को नहीं पहुंच पाती इसलिए जब गमले सूखे लगें, तभी पानी डालें। मौसम का भी ध्यान रखें। सर्दियों में हर चौथे-पांचवें दिन और गर्मियों में हर दूसरे दिन पानी डालना चाहिए। बारिश वाले और उससे अगले दिन पौधों में पानी देने की जरूरत नहीं होती।
- पानी सुबह या शाम के वक्त ही देना चाहिए। भूलकर भी तेज धूप में पौधों में पानी न डालें। इससे पौधों के झुलसने का खतरा रहता है।
- अगर किसी वजह से पौधों को अकेला छोड़कर कुछ दिनों के लिए बाहर जाना पड़े, तो उनके गमलों में पानी ऊपर तक भर दें। गर्मियों में गमलों को किसी टब में रखकर, टब में भी थोड़ा पानी भर दें।
- अगर 10-15 दिनों के लिए घर से बाहर जा रहे हैं तो जाने से पहले गमले या पॉट में लीचन मॉस तालाब में उगने वाले कुछ खास पौधे जो नर्सरी से मिल जाएंगे को अच्छी तरह बिछा कर पानी डालें इससे लंबे समय तक पौधों में नमी बनी रहेगी।
खाद कितना लगाएं
किसी भी पौधे को ज्यादा खाद की जरूरत नहीं होती। आमतौर पर पौधे लगाते समय और दोबारा उनमें फल-फूल या सब्जी आते समय खाद दी जाती है। खाद हमेशा जैविक ऑर्गनिक ही इस्तेमाल करें। यह खाद जीवों से बनती है, जैसे गोबर की खाद, पशुओं-मनुष्यों के मल-मूत्र से बनने वाली खाद आदि। इनमें हानिकारक केमिकल्स नहीं होते।
- नीम, सरसों या मूंगफली की खली भी खाद के रूप में इस्तेमाल की जाती है। इनमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है।
- किसी अच्छी नर्सरी से ऑर्गेनिक खाद के पैकेट मिल जाते हैं। यह आमतौर पर 40 से 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलती है।
नोट- खाद तभी डालें, जब गमलों की मिट्टी सूखी हो। खाद देने के बाद मिट्टी की गुड़ाई कर दें। इसके बाद ही पानी दें।

कौन से फल सब्जिया लगाये

मिट्टी कैसे तैयार करें
- आमतौर पर क्यारी या गमलों की तैयारी सितंबर के आखिर और फरवरी के शुरू तक करनी चाहिए। यह बुवाई के लिए सही वक्त है।
- मिट्टी खेतों से मंगाएं या फिर पार्क आदि से भी ले सकते हैं। अगर मिट्टी में कीड़े हैं तो वर्मी कंपोस्ट यानी केंचुए की खाद मिलाएं। मिट्टी तैयार करते हुए 2 हिस्से मिट्टी, 1 हिस्सा गोबर की सूखी खाद और 1 हिस्सा सूखी पत्तियों का रखें। इन्हें अच्छी तरह मिला लें। थोड़ी-सी रेत भी मिला लें।
- तैयार मिट्टी को अच्छी तरह मिलाकर क्यारी में भर दें। क्यारी को ऊपर से करीब 15 सेंमी खाली रखें। इसी तरह गमलों को तैयार करें।
- तैयार मिट्टी को गमलों में भरने से पहले गमले के बॉटम में जहां पानी निकलने की जगह बनी होती है पॉट के टूटे हुए टुकड़े या छोटे पत्थर रखें, ताकि पानी के साथ मिट्टी का पोषण बाहर न निकले। गमले का एक तिहाई हिस्सा खाली रहना चाहिए, ताकि पानी डालने पर इसमें ऊपर से मिट्टी और खाद बाहर बहकर न निकले।
- फिर मिट्टी में बीज लगाएं। जब भी कोई बीज रोपें, इसे इसके आकार की दोगुना मोटी मिट्टी की परत के नीचे तक ही भीतर डालें वरना अंकुर फूटने में लंबा वक्त लगेगा और कोंपल के बाहर आने में हफ्तों लग जाएंगे। मिट्टी डालने के बाद हल्का पानी डाल दें। इसके बाद गमलों को कागज से ढक दें ताकि पक्षी बीजों को न निकाल पाएं। अंकुर निकलने के बाद कागज को हटा लें। अगर पौधों को दूसरे गमले में लगाना है तो शाम या रात को यानी ठंडे वक्त पर ट्रांसफर करें और तब करें, जब पौधों में 4.6 पत्तियां आ चुकी हों।

नोटरू मिट्टी तैयार करते हुए उसमें अगर नीम की सूखी पत्तियां डाल दें तो कीड़े नहीं लगेंगे। इसी तरह अगर पौधों में केंचुए नजर आएं तो उन्हें मारे या फेंकें नहीं। ये पौधों के लिए बहुत अच्छे होते हैं।
बीज कहां से लें
- फल या सब्जियां उगाने के लिए हमेशा नैचरल ब्रीडिंग वाले बीजों का इस्तेमाल करें, न कि हाइब्रिड बीजों का।
- बीज पड़ोस की नर्सरी या बीज की दुकान से खरीद सकते हैं लेकिन किसी सरकारी संस्थान या ऐसी जगह से लेना बेहतर हैए जिसे अच्छे बीजों के लिए जाना जाता हैए जैसे कि दिल्ली में पूसा इंस्टिट्यूट और कृषि भवन।
- ऑनलाइन साइट्स से भी बीज मंगा सकते हैं। ऐसी ही कुछ साइट्स हैंरू
nurserylive.com
seedbasket.in
thespicemarket.in
amazon.in
flipkart.com
नोटरू प्याज, टमाटर, गोभी, बैंगन, गोभी आदि की पौध भी नर्सरी से लाकर लगा सकते हैं।
कौन से फल सब्जिया लगाये
- शुरुआत में आसानी से उगने वाली सब्जियां या फल उगाकर आप धीरे-धीरे गार्डनिंग की तकनीक सीख जाएंगे। आसानी से उगने वाली सब्जियां हैं मिर्च, भिंडी, टमाटर और बैंगन। ये 45 दिनों के भीतर तैयार हो जाती हैं।
- पालक, बींस, पुदीना, धनिया, करी पत्ता, तुलसी, मेथी, टमाटर और बैंगन जैसी सब्जियां किसी भी पॉट या छोटे गमले में आप बालकनी में आसानी से उगा सकते हैं। करेला और खीरा जैसी सब्जियों की बेलें न सिर्फ आपको फल देंगी बल्कि आपकी बालकनी की खूबसूरती भी बढ़ाएंगी। इनमें 45.50 दिन में सब्जियां आने लगती हैं।
- एक बार शुरुआत करने पर आप प्याज, आलू, बींस, पत्तागोभी, शिमला मिर्च जैसी तमाम सब्जियां उगा सकते हैं।
- 70x70 सेंमी वाले ड्रम में आम, केला, अमरूद, नीबू, आडू, अनन्नास जैसे फलों के पौधे भी लगाए जा सकते हैं। इनमें करीब 3 साल में फल आते हैं।
- फलदार पौधों के लिए आपको इसके कलम किए हुए पौधे की जरूरत होगी। अमरूद और आम की ऐसी किस्में भी मार्केट में मिल जाएंगी, जो साइज में छोटी होती हैं लेकिन फल भरपूर देती हैं।

अपने घर के आसपास के वातावरण को पौधे लगाने के जरिए हरा-भरा और शुद्ध ब

नई दिल्ली । अपने घर के आसपास के वातावरण को पौधे लगाने के जरिए हरा-भरा और शुद्ध बनाएं रखने की सलाह हमेशा दी जाती है।
एलोवेरा, स्पाइडर प्लांट जैसे पौधे हवा को शुद्ध करते हैं। बगीचे से जुड़ी उत्पादों को बेचने वाली कंपनी 'अर्थली क्रिएशंस' की संस्थापक व विशेषज्ञ हरप्रीत अहलूवालिया ने ऐसे छह पौधों के बारे में बताया है, जो आसपास के वातावरण व हवा को शुद्ध करने का काम करते हैं:
  • एलोवेरा (घृत कुमारी) कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड को अवशोषित कर लेता है। घर में लगाए जाने वाले लाभकारी पौधों में से यह एक है। यह ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाता है। ऐसा माना जाता है कि एक एलोवेरा का पौधा नौ एयर प्यूरीफायर (हवा को शुद्ध करने वाला उपकरण) के बराबर होता है। यह हर मौसम और मिट्टी में आसानी से लग जाता है।
  • बैंबू (बांस) के पौधे को पर्याप्त सूरज की रोशनी की भी जरूरत नहीं होती और यह घर के अंदरूनी भागों जैसे कमरों आदि में रखे जाने पर भी आसानी से विकसित होता है। हवा को शुद्ध करने साथ ही यह घर में सौभाग्य भी लाता है। यह वातावरण को रोगाणु मुक्त भी रखता है। कम पानी में भी आसानी से लग जाने वाला यह पौधा नजदीकी पौधों के दुकानों में आसानी से मिल जाता है।
  • आइवी पौधा अपने रोपण के छह घंटे के भीतर ही हवा को शुद्ध करना शुरू कर देता है। यह हवा में मौजूद अवशिष्ट कणों को 58 प्रतिशत और हानिकारक विषाक्त कणों को 60 प्रतिशत तक दूर कर देता है।
  • स्पाइडर पौधा कम धूप में भी अच्छे से प्रकाश संश्लेषण करने के लिए जाना जाता है। यह कार्बन मोनोऑक्साइड, स्टेरीन और गैसोलीन को हटाकर हवा को शुद्ध करता है, जिससे बच्चे और वयस्क आराम से सांस ले सकते हैं

be mishal

Wednesday, March 28, 2018

तीनों दोस्त खान-पान के कारोबारियों से संपर्क करते हुए मनपसंद फूड की सप्लाई के काम में लग गए

तीनों दोस्त खान-पान के कारोबारियों से संपर्क करते हुए मनपसंद फूड की सप्लाई के काम में लग गए। ऑनलाइन आर्डर्स की लगभग रोजाना साठ-सत्तर से अधिक डिलीवरी के ऑर्डर बुक होने लगे। निशित का मानना है कि किसी भी काम की सफलता उसके बिजनेस आइडिया और अपनी मेहनत पर निर्भर करती है। जब खान-पान की डिलिवरी का आइडिया उनके दिमाग में आया तो एक तो बिरहाना रोड और सिविल लाइन क्षेत्रों में इस तरह के बिजनेस डिफरेंस पर ध्यान गया, दूसरे एक और आइडिया से बल मिला कि जो लोग कानपुर आते-जाते रहते हैं, उन्हें नापसंदगी के बावजूद होटलों में भोजन करना पड़ता है। यदि उन्हे घर जैसा भोजन उपलब्ध कराने लगें तो हमारा बिजनेस चल निकलेगा।
आज उन्होंने अपनी कंपनी के काम में लगभग दो दर्जन और लड़कों को जोड़ लिया है। ऑर्डर के मुताबिक शहर के किसी भी कोने में उनके लड़के खाने का सामान चटपट दे आते हैं। वे लड़के जितनी दूर जाना होता है, उसके हिसाब से सर्विस चार्ज ले लेते हैं। 'ओए काके' की तरह कम लागत के और भी कई सफल बिजनेस मॉडल आजमाए जा सकते हैं। मसलन, मात्र एक लाख रुपए की लागत से मेलों प्रदर्शनियों में लजीज व्यंजनों के स्टॉल लगाना। घर बैठे रेस्टोरेंट, होटल वालों के तालमेल से यह बिजनेस और भी कम लागत पर शुरू किया जा सकता है। बस करना कुछ नहीं है, साथ में कुछ लड़के रखकर होटल-रेस्टोरेंट से तैयार व्यंजन की मेला अथवा प्रदर्शनी स्थल तक आपूर्ति कर देना है।
इसी तरह खुद की एक बेवसाइट के माध्यम से कई तरह की डिलीवरी के ऑर्डर लिए जा सकते हैं। यह भी घर बैठे का काम है। ऐसा भी है कि एक काम से कई काम जुड़े रहते हैं। यदि आप मेला-प्रदर्शनियों में व्यंजन सप्लाई करते हैं, तो साथ में उन्ही होटलों एवं रेस्टोरेंट के लिए उन्हीं डिलीवरी ब्वॉय की मदद से पानी की बोतलें सप्लाई करने के ऑर्डर भी ले सकते हैं। ऐसे और भी तमाम काम हैं, जैसेकि शहर की महिलाओं को सैलून सर्विसेज देने के लिए ब्यूटी थेरेपिस्ट्स का काम। इस काम में करीब एक तिहाई बुकिंग उसी दिन के लिए होती है और थेरेपिस्ट्स एक-डेढ़ घंटे के भीतर सर्विसेज देने घर पर पहुंच जाते हैं। इसमें सावधानी बरतनी होती है कि वीकेंड्स पर कस्टमर्स से एक दिन पहले बुकिंग करा ली जाती है। इस काम में डिलीवरी बेस्ड सर्विसेज की जबरदस्त मांग है।
सबको पता है कि इन दिनों कई तरह के बिजनेस मॉडल वेबसाइट, वाट्सएप, मोबाइल के भरोसे चल रहे हैं। आजकल टिफिन सर्विस हर शहर की जरूरत बन गई है। घर से दूर रह रहे युवाओं की तो इस पर ही पूरी तरह निर्भरता बन गई है। जरुरत ज्यादातर कॉलेज स्टूडेंट या वर्किंग बैचलर को होती है। लड़कियां इस बिजनेस को ज्यादा सफलता से चला सकती हैं। बस इस काम को शुरू करने से पहले ठीक से स्वयं सर्वे कर लेना होगा यानी होम वर्क कि सीधे संपर्क कर पूछताछ कर लें, महीने में कितने पैसे देने हैं , कूपन सिस्टम किस तरह का होना चाहिए, रोजाना टिफिन में कौन कौन सा आइटम रखना बिजनेस प्रॉफिट की दृष्टि से ठीक रहेगा। इसमें पम्फलेट, मोबाइल एसएमएस, इंटरनेट आदि का सहारा लिया जा सकता है। ऐसे हजारों सक्सेज सामने आ चुके हैं।

batti chokha

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Monday, March 26, 2018

NEED A DOCTER

MAHA DEVI VERMA

Tissue culture/Route trainer विधि से सागवान Commercial प्रोजेक्ट से किसान हो सकते हैं मालामाल

Tissue culture/Route trainer विधि से सागवान Commercial प्रोजेक्ट से किसान हो सकते हैं मालामाल 👉ज़रूरत है systematic and technology से लगाये
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देश में किसानों की दयनीय हालत अब आम हो चुकी है।आए दिन कर्ज से दबे किसानों की आत्महत्या की खबरें प्रिन्ट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की सुर्खिया बनती रहती हैं।इन सबके बीच किसानों के लिए एक राहत भरी खबर है कि किसान अपने परंपरागत खेती के साथ ही सागवान के पौधे लगवाकर न सिर्फ कर्ज के बोझ से निजात पा सकते हैं बल्कि कुछ ही वर्षों में लाखों रुपये कमा सकते हैं।महत्वपूर्ण यह है कि इस मॉडल को अपनाने से किसानों की आर्थिक तरक्की के साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। देश के कई राज्यो के किसानों ने अब पारंपरिक तरीके से खेती करना छोड़ दिया है तथा इस नए मॉडल को अपनाकर अपने खेतों में सागवान के पेड़ लगाने के साथ ही दोहरी खेती कर आर्थिक रूप से मजबूत बन रहे हैं।
कैसे करें सागवान के साथ दोहरी खेती:
एक हेक्टेयर खेत में किसान दो हजार पौधे लगा सकते हैं।पौधे लगने के एक साल बाद किसान खेत में इंटरकापिंग(सहखेती) करके उस खेत में ऑर्गेनिक सब्जियां, लहसन,अदरक,हल्दी,एलोबेरा आदि फसल उगा सकता है जिनकी आज बाजारों में अच्छी कीमत मिल रही है।इन फसलों से प्रति हेक्टेयर करीब दो लाख रूपए की अतिरिक्त कमाई की जा सकती है,जो पारंपरिक फसलों से होने वाले मुनाफे से कई गुना ज्यादा होता है
सागवान से होने वाला मुनाफा।:
सागवान की कीमत आजकल आसमान छू रही है।इसका कारण यह है कि हर घर में इस्तेमाल होने वाले फर्नीचर के लिए लोग सागवान की लकड़ी को ही पहली प्राथमिकता दे रहे हैं।इसके कारण सागवान की कीमत आगे भी बढ़ने की आशा है।
एक हेक्टेयर खेत में औसतन दो हजार पौधे तैयार किये जा सकते हैं।एक पौधे से न्यूनतम दस घन फीट लकड़ी तैयार होती है।
वर्तमान समय में teak wood ख़रीदने की कीमत3500 रूपये प्रति घन फीट से 5000 रुपए तक है।इस तरह प्रती घनफ़ीट किसान 2500×10=25000रूपये तथा प्रति हेक्टेयर 25000×2000=50000000 अर्थात पाँच करोड़ रुपये आमदनी की जा सकती है जो पारंपरिक रूप से की गई खेती से हुए मुनाफे से अतिरिक्त होगा।
सागवान की प्रजातियाँ।:
सागवान की बहुत सारी प्रजातियाँ है लेकिन भारत में मुख्य रूप से वर्माटिक कामयाब है।वर्माटिक को develop करने का चार तरीक़ा हैं।1. देशी सागवान, 2.हाई ब्रीड ,3.टीशू कल्चर ,और 4.रूट ट्रेनर प्रमुख है।
1-देशी सागवान लगभग चालीस से पचास साल में तैयार होता है। यह पौधा जब पेड़ के रूप में तैयार होता है तो अन्य प्रजातियों की अपेक्षा इसकी लंबाई कम मोटाई ज्यादा होती है।
2-हाइब्रिड-देशी सागवान की अपेक्षा हाइब्रिड सागवान को पूरी तरह तैयार होने में कुछ कम समय लगता है।हाइब्रिड सागवान बीस से पच्चीस साल में तैयार होता है।
3-टिशू कल्चर-टिशू कल्चर की प्रजाति का पौधा लगभग दस से बारह साल मे तैयार होता है।बारह साल में इस प्रजाति का पौधा लगभग तीन फीट मोटा होता है तथा इसकी उचाई करीब पैतीस फीट से ज्यादा होती है
4-रूट ट्रेनर-रूट ट्रेनर की प्रजाति का पौधा दस से बारह साल में ही तैयार हो जाता है।रूट ट्रेनर और टिशू कल्चर में बहुत अंतर नहीं होता है।
सागवान लगाने का तरीका।:
वेटिकन सोना एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी Vatican Shona Agrotech Pvt Ltd ( A Leading Sagwan Project Company)के सी ई ओ (C.E.O.) “राजेश सिंह राठौर “के अनुसार
सागवान लगाने के लिए सबसे पहले खेत के मिट्टी की जाँच करानी चाहिए।जाँच के आधार पर तीन तरह के रिपोर्ट तैयार की जाती है।पहला रिपोर्ट के आधार पर जमीन का पी एच (P.H.)वैल्यू निकाला जाता है।पी एच वैल्यू 6.5 से उपर होना चाहिये।इसके बाद मिट्टी की आवश्यकतानुसार
1.Land preparation Report पौधारोपण के पहले और उसके बाद की ज़मीन तैयारी करनी चाहिए।2.Irrigation Report दूसरे नंबर पर सिंचाई की रिपोर्ट होती है।कंपनी सिंचाई के लिए किसानों को ड्रिप एरिगेशन की सलाह देती है।ड्रिपएरिगेशन से पानी की बचत होती है साथ ही यह सभी पौधों के पास उनकी आवश्यकता के अनुसार पानी पहुँच जाता है।ड्रिप एरिगेशन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसकी कुल लागत का पच्चासी प्रतिशत धनराशि सबसिडी के रूप में सरकार वहन करती है।
3.Fertilizer Report
मूल रूप से बिहार के सिवान जिले के रहने वाले राजेश सिंह राठौर पहले बैंकिंग एंड इन्स्योरेन्स सेक्टर में ऊँचे प्रबंधन पद पर कार्यरत थे।इसके बाद वे सागवान की प्रजातियों पर रिसर्च करना शुरु किए।दो साल रिसर्च के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने अपने गांव एक हेक्टेयर जमीन में खुद के दो हजार पौधे लगवाए।पौधों के साथ ही श्री राजेश ऑर्गेनिक सब्जियों तथा और भी महँगी बिकने वाली फ़सलों की भी खेती करते हैं।इसके बाद राजेश ने वर्ष 2016 में वेटिकन सोना एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी बनाकर किसानों को Tissueculture/रूटट्रेनर teakसागवान के पौधे लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।राजेश बताते हैं कि वर्तमान में कंपनी के तहत बिहार,यूपी, झारखण्ड,वेस्टबंगाल,हरियाणा, आदि राज्यों के बड़े पैमाने पर किसान अपने खेतों में सागवान लगाकर इंटरकापिंग(सहखेती) कर रहे हैं।तथा राजस्थान,दक्षिण भारत,मध्यप्रदेस,महाराष्ट्र, पंजाब के भी किसान इसका लाभ समझ कर हमारी कम्पनी से सम्पर्क कर रहे हैं।किसानो के proper सर्विस मिल सके इसके लिए अलग अलग राज्यों में कई शाखाएँ काम कर रही है और बहुत मात्रा में लोग काम करने के लिए Associate हो रहें है।उन्होंने बताया कि तैयार होने पर किसान की सहमति से सागवान को उचित कीमत पर बिकवाने की भी जिम्मेदारी कंपनी उठाती है।उनके अनुसार कंपनी सिर्फ टिशू कल्चर और रुट ट्रेनर प्रजाति के ही पौधे लगवाती है।सागवान लगाने में प्रति हेक्टेयर ढाई लाख रुपये का खर्च आता है तथा सालाना इसके रखरखाव पर भी तीस हजार रुपए खर्च होते हैं।जबकि दस से बारह साल बाद एक हेक्टेयर में लगे सागवानो की कीमत करीब पांच करोड़ रुपये तक होती है।यह सह खेती से की गई कुल कमाई के अतिरिक्त है।कुल मिलाकर सागवान के पेड़ के साथ सहखेती करने से किसानों की आर्थिक स्थिति तो मजबूत होगी ही देश के सामने पर्यावरण संरक्षण की जो समस्या वर्तमान में खड़ी है उस पर इससे काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

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ग्राहक पंचायत कोलार इकाई का निःशुल्क छटवां स्वास्थ्य शिविर*

*ग्राहक पंचायत कोलार इकाई का निःशुल्क छटवां स्वास्थ्य शिविर*
कोलार इकाई का निःशुल्क छटवां स्वास्थ्य शिविर रविवार दिनांक 11/03/20018,को *प्रातः:- 10:00 बजे दुर्गा जी स्थल, पहाड़ी मन्दिर, गरीब नगर ,कोलार रोड भोपाल* पर रखा गया है!
कोलार क्षेत्र के समस्त रहवासियों से अनुरोध है की समय पर पहुंच कर कार्यक्रम को सफल बनावें, शिविर को सफल बनाने आप सभी की सहभागिता आवश्यक है!💐🙏
निवेदक
राजकुमार चावरिया (अध्यक्ष)
8839304828
कु. सिमरन गौड़(उप- इकाई- सचिव) मो.8959277731

आपके निकट कोई एक ऐसी निर्धन परिवार की बेटी जिसकी शादी में आर्थिक कारणों से दिक्कत आ रही तो जरूर बताएं,

1. आपके निकट कोई एक ऐसी निर्धन परिवार की बेटी जिसकी शादी में आर्थिक कारणों से दिक्कत आ रही तो जरूर बताएं, मेरे एक करीबी भाई उनका कन्यादान करना चाहते हैं।
2. आपके करीब कोई ऐसा होनहार छात्र/छात्रा पैसे की तंगी की वजह से अगर नही पढ़ पा रहा हो तो मुझे सूचित करें इनबॉक्स में। उसकी पूरी जिम्मेदारी उठायी जाएगी पढ़ाई की, बशर्ते वह टाइमपास ना करे और मेधावी हो।
रविन्द्र सिंह क्षत्री
सुमित फॉउंडेशन "जीवनदीप"

family snape 2013

'Badmash compney'

नेहरू द्वारा बनाये गये इस मधुमख्खी के छत्ते में साठ साल में पहली बार किसी ने लाठी मारी है !!

नेहरू द्वारा बनाये गये इस मधुमख्खी के छत्ते में साठ साल में पहली बार किसी ने लाठी मारी है !!
‘सत्ता’ का असली अर्थ समझना हो तो दिल्ली में स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) घूम आइये.. इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) वो जगह है जहाँ सत्ता सोने की चमकती थालियों में परोसी जाती है 
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) एक शांत और भव्य बंगले में स्थित है जिसमे हरे भरे लॉन , उच्च स्तरीय खाने और पीने की चीजों के साथ शांति से घूमते हुए वेटर हैं ऊपर वाले होंठो को बगैर पूरा खोले ही मक्खन की तरह अंग्रेजी बोलने वाले लोग हैं 
लिपिस्टिक वाले होठों के साथ सौम्यता से बालों को सुलझाती हुई महिलायें हैं जो बिना शोर किये हाथ हिलाकर या गले मिलकर शानदार स्वागत करते हैं !
भारत सरकार द्वारा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) की स्थापना एक स्वायत्त संस्था के रूप में स्वछन्द विचारधारा और संस्कृति के के उत्थान के लिए की गयी थी 
वहाँ आपको वो सब बुद्धिजीवी दिखेंगे जिनके बारे में आप अंग्रेजी साहित्य और पत्रिकाओं के माध्यम से जानते है 
यू.आर.अनंतमूर्ति वहां पिछले पाँच सालो से एक स्थायी स्तम्भ की तरह जमे हुए थे 2014 में मरने से पहले 
गिरीश कर्नाड, प्रीतिश नंदी, मकरंद परांजपे , शोभा डे जैसे जाने कितने लेखक ,पत्रकार और विचारक IIC के कोने कोने में दिख जायेगे 
नयनतारा सहगल यहाँ प्रतिदिन “ड्रिंक करने” के लिए आया करतीं हैं, साथ ही राजदीप सरदेसाई और अनामिका हकसार भी वहां रोजाना आने वालों में से ही हैं 
बंगाली कुरता और कोल्हापुरी चप्पलें पहने हुए, आँखों पर छोटे छोटे शीशे वाले चश्मे लगाये बुद्धिजीवियों के बीच सफ़ेद बालों और खादी साड़ी में लिपटी कपिला वात्स्यायन और पुपुल जयकार भी नज़र आ जायेगी !
इस भीड़ का तीन चौथाई भाग महज कौवों का झुण्ड है 
विभिन्न पॉवर सेंटर्स के पैरों तले रहकर ये अपना जीवन निर्वाह करते हैं...
इनमें से ज्यादातर लोग सिर्फ सत्ता के दलाल हैं !
लेकिन ये वो लोग हैं हैं जो हमारे देश की संस्कृति का निर्धारण करते हैं 
एक निश्चित शब्दजाल का प्रयोग करते हुए ये किसी भी विषय पर रंगीन अंग्रेजी में घंटे भर तो बोलते हैं परन्तु इकसाठवें मिनट में ही इनका रंग फीका पड़ना शुरू हो जाता है 
वास्तव में ये किसी चीज के बारे में कुछ नहीं जानते 
सेवा संस्थानों और सांस्कृतिक संस्थानों के नाम इनके पास चार पांच ट्रस्ट होते हैं और ये उसी के सम्मेलनों में भाग लेने के लिए इधर उधर ही हवाई यात्रायें करते रहते हैं 
एक बार कोई भी सरकारी सुविधा या आवास मिलने के बाद इन्हें वहां से कभी नहीं हटाया जा सकता 
अकेले दिल्ली में करीब पांच हज़ार बंगलो पर इनके अवैध कब्जे हैं !
तो सरकार खुद इन्हें हटाती क्यों नहीं ?
पहली बात तो सरकार इस बारे में सोचती ही नहीं क्यों कि नेहरू के ज़माने से ही ये लोग इसे चिपके हुए हैं 
ये लोग एक दुसरे का सपोर्ट करते हैं 
इसके अलावा एक और बात है 
ये महज एक परजीवी ही नहीं हैं अपितु स्वयं को प्रगतिशील वामंथी कहकर अपनी शक्ति का निर्धारण करते हैं 
दुनिया भर में विभिन्न प्रकार के सेमीनार में उपस्थित होने के कारण ये दुनिया भर में जाने जाते हैं 
ये बहुत ही अच्छे तरीके से एक दुसरे के साथ बंधे हुए हैं 
दुनिया भर के पत्रकार भारत में कुछ भी होने पर इनकी राय मांगते हैं 
ये सरकार के सिर पर बैठे हुए जोकर की तरह हैं और कोई भी इनका कुछ नहीं कर सकता और ये भारत की कला , संस्कृति और सोच का निर्धारण करते हैं !
अफवाहों को उठाकर “न्यूज” में बदल देने वाले इन बुद्धिजीवियों के अन्दर शाम होते ही अल्कोहल सर चढ़कर बोलता है 
मोदी जी ने इस चक्रव्यूह को तोड़ने की हिमाकत की ीवियों” द्वारा किसी अंग्रेजी अखबार के बीच वाले पेज पर परोसे गए “ ज्ञान के रत्नों” पर हुई राजनैतिक बहस में भागीदारी करते हैं 
बरखा दत्त की टाटा के साथ की गयी "दलाली"नीरा रडिया टेप के लीक होने पर प्रकाश में आई थी..लेकिन इतने भीषण खुलासे के बाद भी बरखा को एक दिन के लिये भी पद से नहीँ हटाया जा सका था..ये हैं इनकी शक्ति का स्तर..
मोदी जी ने इस चक्रव्यूह को तोड़ने की हिमाकत की...
चेतावनियाँ सरकार बनने के छह महीने से ही इन्हें दी जाती रही 
फ़िर सांस्क्रतिक मंत्रालय ने इन्हें नोटिस भेजा 
“असहिष्णुता” की आग फैलाने का कारण यही था शायद 
उदाहरण के लिए पेंटर जतिन दास, जो की बॉलीवुड एक्टर नंदिता दास के पिता हैं , इन्होने पिछले कई सालों से दिल्ली के जाने माने एरिये में एक सरकारी बंगले पर कब्ज़ा कर रखा है 
सरकार ने उन्हें बंगले को खाली करने का नोटिस दिया था 
इसके बाद से ही नंदिता दास लगातार अंग्रजी चैनलों पर असहिष्णुता के ऊपर बयानबाजी कर रही है और अंग्रेजी अखबारों में कॉलम लिख रही हैं !
मोदी जी जैसे एक मजबूत आदमी ने लगता है इनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया है 
ये तथाकथित बुद्धिजीवी बेहद शक्तिशाली तत्व हैं 
मीडिया के द्वारा ये भारत को नष्ट कर सकते हैं
ये पूरी दुनिया की नजर में ये ऐसा दिखा सकते हैं कि जैसे भारत में खून की नदियाँ बह रही हों 
ये विश्व के बिजनेसमैन लॉबी को भारत में निवेश करने से रोक सकते हैं 
टूरिस्म इंडस्ट्री को बर्बाद कर सकते हैं 
सच्चाई ये है की इनके जैसी भारत में कोई दूसरी शक्ति ही नहीं हैं 
भारत के लिए इनको सहन करना मजबूरी हैं !!
पर उम्मीद है मोदी जी इन को धोयेंगे ज़रूर ॥
( 25 मार्च 2016की पोस्ट )

About the Fundraiser

About the Fundraiser

Our 9-year-old Sathwik suffers from a painful chronic liver disease. The smallest falls could result in him getting a fracture. Doctors have said that his bones have become thin and brittle after he started suffering this ailment. Since he is a naughty child we need to keep a vigil on him. In 2011, he came crying to me with a wounded fractured hand. Doctors told me that he’ll need a rod in his hand to alternate the broken bone. I didn’t have a penny on me at that time, without thinking much I immediately took my bike and sold it off for Rs. 15,000 to start his treatment. The same incident happened the next year when he fractured his left hand after falling off from his bed. This time we sold off our gold for his treatment. We’ve only been seeing money flow out of our pockets after his diagnosis.
My name is Sridhar Kotturi. Our family is heartbroken to see Sathwik get injured all the time. Due to his ailment, the blood in his body does not circulate leaving clots and he ends up itching, to the extent that he starts bleeding. He shouts at me saying, ‘Appa, let us go to the hospital!’ It’s very devastating to see him tremble with this pain. I apply a cream on his body that decreases his pain up to some extent. He was diagnosed with this ailment after 45 days of his birth and underwent a surgery for it as well. As time passed-by he lived like every other normal child. However, on 2nd October 2017 his ailment took a U-turn to disturb him again. The only way that my son will escape his weak body is a liver transplant that costs a whopping Rs. 28 lakh. We’ve found my wife to be a match for this transplant, however we have drained all our finances right now. 
With your help in the form of donations, Sathwik can win this battle against his liver ailment. 
My wife and I work as tailors in 2 different shops and earn a combined income of Rs. 20,000. We have 5 members to fend for, however most of our money is directed and drained towards his treatment. After selling off our home, gold, bike and taking a loan, we’ve spent off Rs. 30 lakh for his treatment. Despite making such high expenses, he still hasn’t got any relief. We pay a rent of Rs. 3000 since we don’t have our home anymore. We do not have anything more to sell and recover the transplant amount - Rs. 28 lakh. 
Our son has been forced to stop his schooling after this ailment. Since he has nothing to do, he asks me if he can go out and play. It breaks my heart to tell him ‘no’ every time he asks this question. I wish I could let him play to his heart's content but doing that would mean another fracture and that's something I want to avoid. In order to make him feel better, I take him to his school when it closes so that he can meet his school friends. After meeting them for 10 minutes, we head towards home as he shouldn't be out for too long. On our way back, he would beg me that he wants to stay back with his friends. However, I cannot allow him outdoors because he is prone to skin diseases as well. 
Sridhar Kotturi is struggling to support his son’s liver transplant. You can help him by donating generously to his fundraiser. 
Sathwik’s favorite show is CID. Whenever he watches this show he tell me, ‘Appa, when I become big, I want to be like ACP Pradyuman. Our son has always wanted to be a policeman. We do not wish to see Sathwik suffer anymore and need help for his expensive liver transplant. Please donate to help our son. 
You can help Sridhar by donating to his fundraiser on Ketto here. 



RAHAK JAGO

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Saturday, March 24, 2018

‘मुसाफ़िर टूर्स

तो दोस्तों... आज रविवार है... और रविवार को हम आपकी जेब खाली करने की ताक में रहते हैं... इस दिन हम बताया करते हैं कि हम कब-कब सामूहिक यात्राएँ आयोजित कर रहे हैं और कितना-कितना खर्चा आना है...
आगे बढ़ने से पहले लेटेस्ट बात यह है कि ‘मुसाफ़िर टूर्स’ नाम से हमने कुछ रजिस्टर कर लिया है... बल्कि हमने कुछ नहीं किया, सी.ए. साहब ने ही सब करके हमें दे दिया... वो कंपनी है, या खाली नाम है, या पता नहीं क्या है... लेकिन कुछ तो रजिस्टर हुआ है... जी.एस.टी. नंबर भी मिल गया है... और जल्दी ही करंट एकाउंट भी खुल जायेगा... फिर इस ‘मुसाफ़िर टूर्स’ का क्या करना है, वो अभी हमने नहीं सोचा...
दूसरी बात, यह जो फेसबुक पेज है ‘नीरज मुसाफ़िर’... इसका एक एडमिन है और एक मॉडरेटर... एडमिन कौन है, वो आप समझो या न समझो, लेकिन मैं यानी नीरज कुमार यानी नीरज जाट यानी जाटराम यानी जो यात्रा-वृत्तांत लिखता है यानी जिसकी किताबें प्रकाशित हुई हैं... वो इस पेज का एक ‘मॉडरेटर’ है... इसका कोई भी ‘मॉडरेटर’ या ‘एडमिन’ इस पेज पर कुछ भी लिखता है, चैट करता है या लाइक, कमेंट करता है, वो सब आपको इस पेज यानी ‘नीरज मुसाफ़िर’ के नाम से ही दिखेगा... ‘नीरज मुसाफ़िर’ पेज की तरफ से कोई भी एक्टिविटी होती है, तो आप कभी नहीं जान सकते कि वो एक्टिविटी किस ‘एडमिन’ ने की या किस ‘मॉडरेटर’ ने की... हालाँकि लगभग सौ प्रतिशत एक्टिविटी मैं यानी नीरज कुमार ही करता हूँ...
अब बात करते हैं सामूहिक यात्राओं की... तो जी, सौ बातों की एक बात ये है कि इन यात्राओं से हम भी कुछ आमदनी करते हैं... सारे खर्चे जोड़ने के बाद थोड़ा-सा अपना मार्जिन... और फिर घोषणा कर देते हैं कि फलां यात्रा में दस हज़ार रुपये लगेंगे या बारह हज़ार लगेंगे... हालाँकि इतना खर्चा सुनते ही मेरा भी सिर चकराने लगता है... तो एडमिन साहिबा ने कहा कि अगर सस्ती यात्राएँ आयोजित करेंगे, तो ज्यादा लोग आयेंगे और उन्हें हैंडल करना भी मुश्किल होगा... इसलिए महंगाई कुछ बढ़ा देनी चाहिए...”
इस बात से मुझे आपत्ति थी... “लेकिन मेरे तो दोस्त वे ही हैं, जिन्होंने हमेशा सस्ती यात्राओं के वृत्तांत पढ़े हैं और सस्ती ही यात्राएँ करना चाहते हैं... फिर भला क्यों वे इन महंगी यात्राओं में दिलचस्पी लेंगे?”
तो सोलूशन ये निकला कि जो दोस्त सस्ती यात्राएँ करने वाले हैं, उन्हें मेरा फुल सपोर्ट रहेगा... और मैं बताऊंगा कि किस तरह फूलों की घाटी की यात्रा ढाई तीन हज़ार में हो सकती है...
और जो दोस्त एडमिन साहिबा के सपोर्टर हैं... उन्हें तो ज्यादा कुछ सोचना ही नहीं है... उनकी सारी सिरदर्दी एडमिना अपने ऊपर ले लेगी...
अब आते हैं असली मुद्दे पर... अभी फिलहाल इन यात्राओं की योजना बनी है... आप अपनी इच्छानुसार किसी भी यात्रा में शामिल हो सकते हैं... सभी यात्राओं की ज्यादा जानकारी के लिए उनके नीचे लिंक भी लगा है...
1. जंजेहली, शिकारी देवी यात्रा, हिमाचल... 29 मार्च से 1 अप्रैल 2018... जंजेहली से जंजेहली... 5000 रुपये... इस यात्रा में मैं भी साथ रहूंगा... और हम स्वयं इस यात्रा को बाइक से करेंगे... सभी लोग जंजेहली मिलेंगे...
https://www.facebook.com/events/146464296041673/
2. जंजेहली, शिकारी देवी, जलोडी जोत, हिमाचल... 12 मई से 16 मई... 9000 रुपये...
https://www.facebook.com/events/156158288390442/
3. चकराता, लाखामंडल, देवबन, उत्तराखंड... 2 जून से 6 जून... देहरादून से देहरादून... 11000 रुपये...
https://www.facebook.com/events/1784885118208615/
4. हरसिल, धराली, गंगोत्री, उत्तराखंड... 23 जून से 27 जून... हरसिल से हरसिल... 11000 रुपये...
https://www.facebook.com/events/721056738283200/
5. फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब, उत्तराखंड... 28 जुलाई से 1 अगस्त... गोविंदघाट से गोविंदघाट... 9000 रुपये...
https://www.facebook.com/events/1700360650071035/

Friday, March 23, 2018

सुमित फाउंडेशन "जीवनदीप

दैनिक भास्कर समाचार पत्र के 08/01/2018 ऑल इंडिया एडिशन में हमारा सुमित फाउंडेशन "जीवनदीप" ---
आप सभी के प्यार,सहयोग, मार्गदर्शन का ही नतीजा है की आज जीवनदीप की मुहीम को दैनिक भास्कर समूह ने अपने ऑल इंडिया संस्करण के फ्रंट पेज पर जगह दी है| सभी के लिए गर्व का पल है यह| यहाँ तक पहुचने के लिए बहुत कुछ खोना पडा है.. कुछ दर्द ऐसे हैं जो शायद कभी नहीं भर पाएंगे, पर उस दर्द को ताकत मानकर जिंदगियां बचाने की इस मुहीम को जारी रखना है|
इस तरह अपना आशीर्वाद देते रहिये, जहाँ भी जिंदगी की सम्भावना होगी, हम जीवनदीप का दिया वहां वहां जलाते चलेंगे, जिसकी लौ कभी नहीं बुझेगी| अच्छा लगता है जब किसी के धडकते दिल का कारन आप बनते हैं| एक अलग सा सुकून मिल जाता है, जब किसी की खुशियों की वजह आप होते हैं| दोस्तों जिंदगी में निजी जीवन के अलावा भी बहुत कुछ है| थोडा बाहर निकल कर देखिये.. लोगो को आपकी बहुत जरुरत है.. सिर्फ एक प्रयास ही तो करना है|
मेरे प्यार भाई सुमित तुम ये सब देख रहे हूँ मैं जानता हु और आज भी हम सब इन्तजार कर रहे है तुम्हारे आने का| मैं जानता हु तुम एक दिन जरुर लौटोगे और मैं उस दिन तुमसे बहुत लड़ाई करूँगा..कुछ नहीं बदला है सुमित..मैं आज भी उतना ही लापरवाह हु और आज भी मम्मी पापा और सभी तुम्हे ही जादा प्यार करते हैं| मेरा नम्बर हमेशा तुम्हारे बाद ही आता है|
तुम्हारी सारी चीजे वैसे ही सम्भाल कर रखी है| हा मैं पहले से और जादा जिद्दी हो चूका हु. जिसकी वजह तुम हो|| जल्दी आ जाओ सुमित|| हम सब बहुत प्यार करते हैं सुमित तुमसे..
(दैनिक भास्कर एडिटोरियल टीम के संजय मिश्रा भैया जी को आभार जो हम सबको इस लायक समझा)-- 08/01/2018
-रविन्द्र सिंह क्षत्री, सुमित फाउंडेशन "जीवनदीप"
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Sumit Foundation (सुमित फाउंडेशन),
Federal Bank a/c no. (फेडरल बैंक)- 16660100056756
IFSC कोड - FDRL0001666
व्यापार विहार ब्रांच, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)Image may contain: 3 people, people smiling

नीचे कुछ और विक्रेताओं के नंबर और पते दिए जा रहे हैं जिनसे किसान सीधे भी संपर्क कर सकते हैं

नीचे कुछ और विक्रेताओं के नंबर और पते दिए जा रहे हैं जिनसे किसान सीधे भी संपर्क कर सकते हैं।
डाबर इंडिया लिमिटेड
8/3, आसफअली रोड, नई दिल्ली 110002
फोन नं- 0120- 3962100
एके जैन (आर्यन इंटरनेशनल)
डी- 184 फ्रीडम फाइटर इंक्लेव
नबी सराय, नई दिल्ली फोन नंबर- 011-26659020
मोबइल नंबर- 98113000884, फैक्स- 011-26659022
रासिक लाल हिमानी एजेन्सीज प्राइवेट लि.
508, खारी बावली, दिल्ली- 110006
फोन नं-011-23273875, 23273926
साई ट्रेडिंग कंपनी (गौरव गुप्ता)
1/2249, 3 लोर-2 स्ट्रीट नंबर- 12 निकट शांति
आप्टिकल्स, सुभाष रोड, रामनगर –शाहदरा दिल्ली 110032
मो- 8447518302, 9891067409, 9891340865
गुलाब सिंह जौहरी माल (मुकुल गुन्धी)
302, दरीबा कलां, चांदनी चौक, नई दिल्ली
मो- 9811131890, मोबाइल- 011- 23263743, 23271345
रासिक लाल हिमानी एजेंसीज प्राइवेट लि.
प्रथम तल, सब हाउस 3/8 आसफ अली रोड नई दिल्ली
फोन- 011-23273875, 9971113565
विराट एक्सपोर्टर्स
23/3, ईस्ट पटेल नगर
नई दिल्ली-110008
फोन-011-2576182
उत्तर प्रदेश
गुलाब एंड कंपनी, मातादीन रोड सआदतगंज, लखनऊ
फोन- 0522- 2649101, 2649102 मो. 9415108206
पंचशील ट्रेडर्स
सआदतगंज, लखनऊ
फोन नं- 0522-2649619,2649054
आशा ग्रामोद्योग संस्थान
647 बी/सी,144/ 1 (पी-18) जानकीपुरम गार्डेन, नियर नावेल सीटी एकेडमी
लखनऊ- 226021, मोबाइल- 9415753154
ईमेल- ashagramodyog@gmail.com
महावीर ट्रेडिंग कंपनी
पासरत्ता गली, सआदतगंज, लखनऊ
मो. 9415026388, फोन- 0522-2649389
पुण्य ट्रेडिंग कंपनी
सआदतगंज, लखनऊ, मोबाइल नंबर- 9450009431
पीयूश ट्रेडर्स कंपनी
सआदतगंज, लखनऊ, मोबाइल- 9335242927
गुप्ता ट्रेडिंग कंपनी
सआदतगंज, लखनऊ- मोबाइल- 9336011458
गंभीर चंद जैन किराना स्टोर
अन्नपूर्णा मंदिर के बगल में, सआदतगंज, लखनऊ
फोन- 0522-2649114, 2649115
मोबाइल- 9415023623, 9415087294
कन्हैया लाल अशोक कुमार
252/6 रकाबगंज, लखनऊ-3
मोबइल- 9750200186, 9750299185
आनंद ट्रेडिंग एंड मैनुफैक्चिंग कंपनी
133/148 ब्लाक ओ. किदवाईनगर कानपुर- 208023
मोबइल- 9455511783, इमेल- ajpltd27@gmail.com
मेंता एंड एलाइड केमिकल्स
रामपुर, ब्लाक आफिस बाराबंकी
फोन- 05248-224094, 223508
मो. नं.- 9839174125, 9712718425 ईमेल- raj_sri57@rediffmail.com
परफ्यूमर्स एंड एसेन्सियल आयल
47 48, न्यू मार्केट पीओ बॉक्स-165
कैसरबाग लखनऊ, फोन- 0522-2612309
सुगंध व्यापार
7 कामर्स हाउस, हबीबुल्ला स्टेट, हजरतगंज, लखनऊ
फोन- 0522-3019045, मोबाइल- 09415029776
नियो फ्रेगरेंस
बध्व नरेश कुमार कनौजियां कटरा, बहादुर कन्नौज
फोन- 945301753, 9695803408
ईमेल- neofragrance@yahoo.in
एरोमेड हर्बल्स
मकान नंबर- 41, सेक्टर- 25 इंदिरानगर लखनऊ- 226016
फोन- 0522-4022273, मो- 9336814123
शैव इंडस्ट्रीज, साकेत पल्ली, नरही लखनऊ-226001
फोन- 0522-2288134, 2239152
लखनऊ किराना कंपनी
88, सुभाष मार्ग, लखनऊ फोन- 0522-2265961
बबलू जैन किराना आढ़ती मातादीन रोड छोटा चौराहा
सआदतगंज, लखनऊ-3 फोन- 0522-2648226
मो-9935367206
पद्मावती हर्ब्स
35-बी/ 2माडल टाउन, हरि मंदिर, बारात घर के पीछे
बरेली, उत्तर प्रदेश, फोन- 0581-3959932
मोबाइल- 9837003601
टेकचंद
बी/566, लखपेड़ाबाग, बाराबंकी
अनिल कुमार बनरवाल
के 64/गोलादीना नाथ, कबीर लोरा वाराणसी
मो. 9415201873
निशांत अग्रवाल सुगंध एरोमेटिक
536/268 इंदिरा नगर बरेली- 243122
मोबाइल- 9758876700, 9837087670
हिंदुस्तान मिंट एंड एग्रो प्रोडक्टस प्रा. लि
चंदौसी, मुरादाबाद- 244412
फोन- 05921-250540-251900
ईमेल- hindustan@sancharnet.in
भज्जामल छंगामल, पुराना देशी दवाखाना
नीम के पेड़ वाली दुकान, बजाजा, फैजाबाद
मोबाइल- 9415719455
जगत एरोमा आयल्स डिस्टीलेशन
कन्नौज- 05694-2344041
राजस्थान
एलो नेचरलस
20/1 लाइट इंड्रस्ट्रीय एरिया जोधपुर- 342003 राजस्थान
पंजाब
के.एस. एरोमा एंड कंपनी
स्वांक मंडी, अमृतसर 143001, पंजाब
ओरिएटंल ट्रेडर्स
615/6 बाग झंडा सिंह, फर्स्ट लोर, अमृतसर- 143001
उत्तराखंड
नैचुरल कान्सेट्स इंडिया, सीपी-12, आवास विकास
निकट ओबीसी, रुद्रपुर 263153
मोबाइल- 9810202915, 9216447232 ईमेल- naturalconcepts609@gmail.com
ए.एस शारदा इंटरप्राइजेज
नेहरू मार्ग, टनकपुर- 272309
फोन- 9897737133, 9897638133
आदित्य प्रकाश अग्रवाल
पैथ पराओ, रामनगर जिला-नैनीताल- 224715
फोन- 05942-251596
अग्रवाल ट्रेडिंग कंपनी
जीबी पंत, मार्ग, टनकपुर, जिला चंपावत
फोन- 05942-251596
आनंद ट्रेडिंग कंपनी
निंबूवाला, देहरादून कैंट, उत्तराखंड 0135-248003
आर्य वस्तु भंडार
एबीसी हाउस 46, डिस्पेंसरी रोड देहरादून-248001
फोन- 0135-2654884, 2654994
बनारसीदास छन्नामल
मेन बाजार, काशीपुर, उधमसिंहनगर- 244713 फोन- 274839
दीनदयाल राधेश्याम
सी-11 न्यू गल्ला मंडी, हल्दवानी, नैनीताल- 247515, फोन- 253165
उत्तरांचल डिस्ट्रीब्यूटर्स
पो. आ. गुरुकुल कांगडी- 249404 जिला हरिद्वार, उत्तराखंड, फोन- 9837027196
हैदराबाद
जेना बायो हर्बल प्राइवेट लिमिटेड
मकान नंबर- 3-6-294 हैदरगुडा, हैदराबाद- 500029
फोन- 040-65166568, मोबाइल- 7053127949
केरल
एम.एम अब्दुल हमीद एंड संस
एसेन्सियल आयल एक्सोर्टर
पीवी- बाक्स- 12, अशोकापुरा, आल्वे- 683101
फोन- 0484-2624014
तमिलनाडु
एन. सुंदर जेरेनियम प्लांटर
पुडुमुंड, ऊटी- मोबाइल- 944302377
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़
राज एड कंपनी
काटजू बाजार के पीछे, निकट पारसी मंदिर नीमच मध्य प्रदेश
फोन- 07423-221600, मो. 9826021601
ईमेल- rajspice@sancharnet.in
परफेक्ट हर्बल्स एंड आयल
एच- 401 अशोका हाईट्स, मोवा रायपुर- 492007 छत्तीसगढ़
फोन- 0771-4055495, मो. 9926974509
रीवा हर्बल्स
126/136 इंड्रस्ट्रीय एरिया, चोरहता, रीवा मध्य प्रदेश
फोन- 07662-2297250
जसेको न्यूट्री फूड्स
अपोजिट सी- 21 माल, एबी रोड इंदौर, मध्य प्रदेश
मो- 9893000009 फोन- 0731- 2576009
गुजरात
शान्ती फार्म, पोस्ट- बिंडा, तालुका मानडुई
जिला कच्छ, गुजरात- 370001
मो- 9757218555, 9687890372
एम.एम यूनिलिंक कैमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड
हर्बल डिविजन 384, तृतीत मंजिल, टावर- ए, एटलान्टीस के-10, वडोदरा सेंट्रल
साराभाई मेन रोड, वडोदरा- 390007
फोन- 091-265-6544871, 2311146 मोबाइल- 9601184006
केटीसी इंटरनेशनल
ई-1 प्रेम ज्योति टावर ए-वन स्कूल के सामने, निकट सुभाष चौक- मेमनगर
अहमदाबाद, गुजरात- 380052, फोन- 9998732033, 9426065076
बिहार
वैद्यनाथ आयुर्वेद भवन प्रावेट लिमिटेड
वैद्यनाथ भवन रोड, लादीनगर पटना, 800001
फोन- 0612-2368571
नोट- उपरोक्त सभी कंपनियों के नाम और पते सीमैप की वार्षिक पत्रिका औस ज्ञान्या से लिए साभार लिए गए हैं। ये कंपनियां अलग-अलग् उपज (पौधे, जड़, तेल) आदि खरीदती है। इन फसलों के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए सीमैप लखनऊ से संपर्क किया जा सकता है।