Wednesday, May 29, 2019

काफी तरह के पौधे

चीकू ( Grafted ) - 120/-
कागजी नींबू ( बूटी विधि ) - 80/-
कागजी नींबू ( kalmi ) ( N 69 ) - 130/-
बिना बीज का कागजी नींबू ( पत्ती )( kalmi ) - 100/-
कोलकाता कागजी नींबू ( kalmi ) - 140/-
लीची ( kalmi ) - 120/-
थाई 1 kg अमरुद - 100/-
ताईवान अमरुद - 120/-
लखनवी अमरुद - 80/- ( Grafted )
इलाहाबादी अमरूद - 100/- ( Grafted )
बर्फखाना अमरुद - 100/- ( Grafted )
कोलकाता अमरुद - 130/-
आंवला ( kalmi ) -100/-
आंड़ू ( kalmi ) - 100/-
कन्धारी अनार ( kalmi ) - 100/-
नारियल ( seeds ) - 300/-
कागजी बेलपत्र ( kalmi ) - 100/-
आम्रपाली आम ( Grafted ) - 200/-
सदाबहार आम ( Grafted ) - 250/-
बारांमासी आम ( Grafted ) - 200/-
पेरटग्रीन आम ( Grafted ) - 650/-
दशहरी आम ( Grafted ) - 150/-
चौंसा आम ( Grafted ) - 150/-
लंगड़ा आम ( Grafted ) - 150/-
राया जामुन ( kalmi ) - 100/-
सफेद जामुन ( kalmi ) - 200/-
सन्तरा ( kalmi ) - 110/-
कीन्नू ( kalmi ) - 110/-
मौसमी ( kalmi ) - 110/-
माल्टा ( kalmi ) - 120/-
नाशपाती ( kalmi ) - 120/-
शरिफा ( Grafted ) - 100/-
कमरक ( kalmi ) - 130/-
केला G - 9 (Tissue culture ) - 60/-
थाई एप्पल बेर हरा ( Grafted ) - 100/- to 150/-
थाई एप्पल बेर लाल ( Grafted ) - 145/- to 275/-
शहतूत ( kalmi ) - 100/-
अंजीर ( kalmi ) - 200/-
कटहल ( kalmi ) - 100/-
झांसी कटहल ( seeds ) - 80/-
लौंग - 180/-
बादाम - 150/-
केलोफोर्निया बादाम - 250/-
सफेद इलायची - 180/-
और भी काफी तरह के पौधे मिल जाएंगे

Friday, May 24, 2019

art work




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kismt ka likha koi tal nhi skta ...

एक पण्डित को एक बार किसी गाँव के बाहर एक कपाल मिला जिस पर एक कुत्ता पेशाब कर रहा था.
उस कपाल के माथे पर लिखा था..ऊषण मरण विदेश अभी कुछ होनी है.
पण्डित को बड़ा ताज्जुब हुआ कि आत्मीय जनों से दूर परदेश में मरने वाले इस व्यक्ति की इतनी दुर्दशा तो हो ही गई है, अब और क्या होनी है यह जानने की उत्सुकता में उसने वह कपाल अपने थैले में रख लिया.
भोर में मुँह अंधेरे ही उसे कुछ कूटने की आवाज़ सी सुनाई दी. पास जाकर देखा तो पण्डिताइन कुछ कूट रही थी.
इतनी सुबह क्या कूट रही हो पण्डिताइन? पण्डित ने पूछा.
आप कल जो भिक्षा लाए हैं,कूट पीसकर उसी की रोटियाँ बनाने की सोच रही हूँ.आज घर में और कुछ था नही..
"ऊषण मरण विदेश अभी कुछ होनी है...."
स्क्रीनशॉट लेकर रख लीजिए.

Thursday, May 23, 2019

DESAH KE HONHAR

ग्राहक पंचायत भर्थना  शाखा  की ओर से इटावा संसदीय क्षेत्र की जनता एवं  सभी देवदुर्लभ  अनुसांगिक  संगठन के  कार्य कर्ताओं  का  कोटि कोटि आभार   जिन्होने  विभिन्न प्रकार की बाधाओं का सामना करते हुए स्वस्थ लोकतंत्र के विकास के लिए साहसिक निर्णय लिया है।  हम यह उम्मीद करते है की आपका सहयोग हमेशा ग्राहक पंचायत को मिलता रहेगा एवं आप सभी ग्राहको के हित मे अपना सहयोग और संगठन के सदस्यो को अपना समय प्रदान करेंगे

 
1) Kanhaiya KUMAR
2) Digvijay Singh

3) Satrughan Sinha
4) Sharad Yadav
5) Raj Babbar
6) Rahul Gandhi
7) Jitin Prasad
8) Salman Khurshid 
9) Mehbooba Mufti
10) Shibu Soren
11) Harish Rawat
12) Miss Bharti
13) Sheila Dixit
14) Ajay Maken
15) Dimple Yadav
16) Raghuvansh Prasad
17) Kumari Shailaja 
18) Mallikarjun Kharge
19) Jyotiraje Scindia
20) Priya Dutt
21) Milind Deora
22) Sushil KUMAR Shinde
23) Mira Kimar
24) HD Devegowda
25) Vaibhav Gehlot 
26) Manavendra Singh 
27) Shivpal Yadav
28) Dimple Yadav
29) RPN Singh 
30) Subodh Kant Sahai
31) Renuka Chaudhary
32) Upendra Kushwaha
33) Sanjay Nirupam
34) Ashok Chavan
35) Bhupendra Hooda
36) Deependra Hooda
37)Kirti Azad 
38) Imran Masood
39) Ajit Singh 
40) Nikhil Kumaraswamy


Monday, May 20, 2019

yamunotri root

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khana khajana

भोजन थीम पोस्ट :
दिनांक : 18-10-2018
पिछले साल मैसूर भ्रमण के दौरान अनिमा माधवा भवन में शुद्ध पुरातन कन्नड़ खाने का आनंद लिया । ये अपने खाने में किसी भी तरह का केमिकल या रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल नहीं करते । यहां जमीन पर आलती पालती मारकर बैठकर थोड़े ऊंची बेंच पर खाने की व्यवस्था है और कुछ लोगों के लिए बाहर टेबल कुर्सी की भी व्यवस्था है । खाना कैले के पत्ते पर परोसा जाता है और हाथ से खाते है । खाने में पहले 2 सब्जी के साथ वेज पुलाव, जिसमें थोड़ा नीबू का टेस्ट था, चपाती, चावल का पापड़, कचूमर सलाद, मिर्च पकोड़ा, मठा, अचार और दलिया की गुड़ में बनी रसखीर परोसी, जो कि फोटो में दिख रहीं है । उसके बाद प्लेन चावल ओर सांभर और फिर मीठी चपाती, जिसका की टेस्ट पूर्न पोली की तरह था, पारोसी । खाना बहुत स्वादिष्ट था और बहुत प्रेम पूर्वक परोसा गया । रस खीर इतनी स्वादिष्ट थी कि मैंने दो बार और ली । अपनी इच्छानुसार जो भी चीज आपको चाहिए, दुबारा ले सकते हैं । स्वादिष्ट ओर पेटभर खाने की कीमत है Rs. 170/-. अगर आप मैसूर विजिट करें तो यहां खाने का आनंदImage may contain: food and text

 जरूर लें ।
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Saturday, May 18, 2019

thali @250

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trea tower

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Leaf curl disease

 Leaf curl disease. Nursery dalne ke samay seeds ko thirum 2g se shodhit kr boyen . Ropai ke samay Jason ko carbendazim ke ghol me 5 minutes duboye saved makkhi ke liye insecticide Ka spray Karen.

pen art

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मुर्गी पालन व्यवसाय

मुर्गी पालन व्यवसाय में बिज़नेस पार्टनर बन कर हर दिन ₹500 - ₹3000 रुपए कमाने 💴का सुनहरा मौका।🤷
👉वास्तुम इंडिया लिमिटेड लेकर आया है आप के लिए बिज़नेस पार्टनर बन कर व्यवसाय करने का का मौका और अच्छे रिटर्न के साथ प्रॉफिट पाने का मौका
👉इस व्यवसाय में आप को कुछ नहीं करना सभी चीजों को कम्पनी करेंगी। मुर्गी के बच्चों 🐣 को बड़ा करना और देख रेख सभी चीजों को कम्पनी करेंगी।
आप को हर महीने आप के बिज़नेस का 13% आप को आप के अकाउंट में मिलेगा। 14 महीने और 18 महीने तक आप को मिलेगा।
👉वास्तुम ग्रुप ऑफ कम्पनीज का पोल्ट्री व्यवसाय प्लान जो कि पूरी तरह से सुरक्षित है और आपके निवेश की पूरी गारंटी जमीन पे एग्रीमेंट के साथ एवम PDC चेक और Rs.10 के स्टम्प पेपर पर नोटरी कर के आप को Agreement देगी।
👉*Business plan*
👉*1. राशि 7500/ = 10% प्रति माह*
👉*2. राशि 15000/= 10% प्रति माह*
👉*3. राशि 30000/= 10% प्रति माह*
*👉4. राशि 75000/- 13% प्रति माह*
👉*5. राशि 1.5 लाख 13% प्रति माह*
👉*6. राशि 3 लाख 13% प्रति माह*
👉*7. राशि 6 लाख 13% प्रति माह*
👉*3 lacks =500 square feet land registry*
👉*6 lacks =1000 square feet land registry*
एवम 💪*13% return every month*
👉यदि आप अपने इन्वेस्टमेंट को सुरक्षित करना चाहते हैं तो आप अपने
लगाये हुए पैसे पर प्लॉट का अग्रीमेंट कर सकते हैं एजैसे :-
यदि आप 3 लाख रुपये लगाते है तो आपको 13% प्रति माह का रिटर्न मिलेगा 14 महीनो तक जो की 42000 रुपये प्रति माह होगा और सिक्योरिटी के लिये आप एक प्लॉट 500 square feet का registry करवा ले
14 महीने मे आपको 5,88000/-का return मिलेगा जबकी आपको emi 5 साल मे देनी हैं आपके द्वारा लगाया हुआ पैसा 15 माह मे प्रॉफिट सहित वापस हो चुका होगा और उसके बाद प्लाट को कंपनी को वापस कर सकते है या उनका अमाउंट देकर आप रजिस्ट्री करा सकते है
👉Note-
हमारी कम्पनी से आप कोई भी गाड़ी 🚘 आधे रेट किसी भी बा़्ड़ की कार आप को दे रही है।
Call me 7786856482

Friday, May 17, 2019

आयकर रिटर्न।

हम निम्नलिखित सेवा प्रदान करते हैं-
1.)जीएसटी बिलिंग और लेखा सॉफ्टवेयर।
पैन कार्ड नया / डुप्लीकेट पैन कार्ड एनआरआई / विदेशी नागरिक
2.) टैन पंजीकरण।
3) जीएसटी, पंजीकरण और परामर्श।
पूरे भारत में GST RETURN।
टीडीएस रिटर्न।
4.) ऑडिट (कंपनी, एलएलपी, एनजीओ.ट्रस्ट, स्कूल)।
आयकर रिटर्न।
5.) बड़ी संख्या में एसएमएस।
6.) कंपनी पंजीकरण। (PVT / LTD) (ऑल ओवर इंडिया)।
7.) कंपनी पंजीकरण। (NIDHI / NBFC) (ऑल ओवर इंडिया)।
8.) कंपनी पंजीकरण अनुभाग 8 (सभी ओवर इंडिया)।
9.) MSME पंजीकरण।
10.) कॉपीराइट पंजीकरण।
11.) ट्रेडमार्क पंजीकरण।
12.) आईएसओ प्रमाण पत्र।
13.) डिजिटल हस्ताक्षर (कक्षा 2, कक्षा 3)
14.) आयात निर्यात लाइसेंस (सभी भारत से)
15.)कंपनी रिटर्न
16.) 15 सीए / सीबी
17.) टीसीएस रिटर्न
18.) आरओसी
19.)कंपनी के निदेशक / पता / नाम / वस्तु परिवर्तन कार्य
20.) कंपनी बंद करने का काम
शेयर ट्रांसफर
21.) एलएलपी - सीमित देयता भागीदारी
22.) परियोजना रिपोर्ट
23.) प्रोजेक्ट बैलेंस शीट
24.) टीसीएस रिफंड
25.) टीसीएस रिफंड (ऑडिट)
वायु

Tuesday, May 14, 2019

नेत्र शिविर का लाभ उठाएं

👁👁नेत्र शिविर का लाभ उठाएं👁👁
आपको यह जानकर अति हर्ष होगा कि हमारी *नवदीप सामाजिक विकास संस्था* के द्वारा दिनांक 16.05.19, दिन गुरुवार प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 03:00 बजे के मध्य में *सरस्वती मेडिकल संस्थान जनपद हापुड़ के सहयोग से एक *विशाल नेत्र शिविर* का आयोजन जनपद बुलंदशहर के सिकंदराबाद क्षेत्र के *गांव निजामपुर में ग्राम प्रधान श्री मेघ सिंह भाटी जी के निवास पर* किया जा रहा है।
👁👁👁👁👁👁👁👁👁👁
*नेत्र शिविर में सरस्वती मेडिकल संस्थान की ओर से निम्न नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सकोंके द्वारा सभी नेत्र रोगियों का निःशुल्क परीक्षण किया जाएगा।*
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1. डॉ.सूर्यदेव तायल, MBBS, MS
2. डॉ.प्रेरणा अग्रवाल, MBBS, MS
3. डॉ रमाशंकर, MBBS, MS
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*इस शिविर में निम्नलिखित सुविधाएं पूर्णतः निशुल्क उपलब्ध रहेंगी।*
*शुगर की जांच
*ब्लड प्रेशर की जांच
*कलर विजन की जांच
*मोतियाबिंद की जांच
*काले मोतियाबिंद की जांच
*चश्मे के नंबर एवं आवश्यकतानुसार चश्मा *आईसाइट की जांच
*कंजेक्टिवाइटिस (आंखों का लाल होना) की जांच
*रोग के अनुसार उपलब्ध दवाइयों का वितरण
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इसके अतिरिक्त जिन नेत्र रोगियों को ऑपरेशन की आवश्यकता होगी, उनका बिना टांके चीरे का ऑपरेशन मात्र लेंस खर्च पर कराने की व्यवस्था भी दी जाएगी़। साथ ही ऑपरेशन के लिए रोगियों को अस्पताल आने जाने की निःशुल्क वाहन सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
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*सिकंदराबाद क्षेत्र के सभी समाजसेवी बंधुओं से यह अपेक्षा एवं आग्रह है कि कृपया अपने अपने स्तर से क्षेत्र में इस शिविर का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए अधिक से अधिक नेत्र रोगियों को शिविर का लाभ दिलाने में पूर्ण सहयोग प्रदान करें।*
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आपका अपना
*सचिन एन.वर्मा*
समाजसेवी/प्रदेश अध्यक्ष
*नवदीप सामाजिक विकास संस्था*
(अखिल भारतीय NGO)
निवासः गुलावठी जिला बुलंदशहर
मोब. 8006941429
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संपर्क सूत्र:-
श्री नवनीत सिसोदिया,
सरस्वती मेडिकल संस्थान
📱8938992802
श्री उमेश कुमार,
नवदीप संस्था सिकंदराबाद
📱9358845838
श्री मेघ सिंह भाटी
ग्राम प्रधान, निजामपुर
📱8006281751

ART MELA

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प्राचीन भारत के 13 विश्वविद्यालय

प्राचीन भारत के 13 विश्वविद्यालय, जहां पढ़ने आते थे दुनियाभर के छात्र। तुर्की मुगल आक्रमण ने सव जला दिया । वहुतो हिन्दू मंदिर लुटे गये।
नही तो मेगास्थनीज अलविरुनी इउ एन सांग के ग्रन्थो मे अति समृद्ध भारत के वर्णन है।
वैदिक काल से ही भारत में शिक्षा को बहुत महत्व दिया गया है। इसलिए उस काल से ही गुरुकुल और आश्रमों के रूप में शिक्षा केंद्र खोले जाने लगे थे। वैदिक काल के बाद जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता गया। भारत की शिक्षा पद्धति भी और ज्यादा पल्लवित होती गई। गुरुकुल और आश्रमों से शुरू हुआ शिक्षा का सफर उन्नति करते हुए विश्वविद्यालयों में तब्दील होता गया। पूरे भारत में प्राचीन काल में 13 बड़े विश्वविद्यालयों या शिक्षण केंद्रों की स्थापना हुई।
8 वी शताब्दी से 12 वी शताब्दी के बीच भारत पूरे विश्व में शिक्षा का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध केंद्र था।गणित, ज्योतिष, भूगोल, चिकित्सा विज्ञान के साथ ही अन्य विषयों की शिक्षा देने में भारतीय विश्वविद्यालयों का कोई सानी नहीं था।
हालांकि आजकल अधिकतर लोग सिर्फ दो ही प्राचीन विश्वविद्यालयों के बारे में जानते हैं पहला नालंदा और दूसरी तक्षशिला। ये दोनों ही विश्वविद्यालय बहुत प्रसिद्ध थे। इसलिए आज भी सामान्यत: लोग इन्हीं के बारे में जानते हैं, लेकिन इनके अलावा भी ग्यारह ऐसे विश्वविद्यालय थे जो उस समय शिक्षा के मंदिर थे। आइए आज जानते हैं प्राचीन विश्वविद्यालयों और उनसे जुड़ी कुछ खास बातों को..
1. नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda university)
Nalanda university History in Hindi
यह प्राचीन भारत में उच्च शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण और विख्यात केन्द्र था। यह विश्वविद्यालय वर्तमान बिहार के पटना शहर से 88.5 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और राजगीर से 11.5 किलोमीटर में स्थित था। इस महान बौद्ध विश्वविद्यालय के भग्नावशेष इसके प्राचीन वैभव का बहुत कुछ अंदाज करा देते हैं।
सातवीं शताब्दी में भारत भ्रमण के लिए आए चीनी यात्री ह्वेनसांग और इत्सिंग के यात्रा विवरणों से इस विश्वविद्यालय के बारे में जानकारी मिलती है। यहां 10,000 छात्रों को पढ़ाने के लिए 2,000 शिक्षक थे। इस विश्वविद्यालय की स्थापना का श्रेय गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम 450-470 को प्राप्त है। गुप्तवंश के पतन के बाद भी आने वाले सभी शासक वंशों ने इसकी समृद्धि में अपना योगदान जारी रखा। इसे महान सम्राट हर्षवद्र्धन और पाल शासकों का भी संरक्षण मिला। भारत के विभिन्न क्षेत्रों से ही नहीं बल्कि कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस तथा तुर्की से भी विद्यार्थी यहां शिक्षा ग्रहण करने आते थे।
इस विश्वविद्यालय की नौवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक अंतरर्राष्ट्रीय ख्याति रही थी। सुनियोजित ढंग से और विस्तृत क्षेत्र में बना हुआ यह विश्वविद्यालय स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना था। इसका पूरा परिसर एक विशाल दीवार से घिरा हुआ था। जिसमें प्रवेश के लिए एक मुख्य द्वार था। उत्तर से दक्षिण की ओर मठों की कतार थी और उनके सामने अनेक भव्य स्तूप और मंदिर थे। मंदिरों में बुद्ध भगवान की सुन्दर मूर्तियां स्थापित थीं। केन्द्रीय विद्यालय में सात बड़े कक्ष थे और इसके अलावा तीन सौ अन्य कमरे थे।
इनमें व्याख्यान हुआ करते थे। अभी तक खुदाई में तेरह मठ मिले हैं। वैसे इससे भी अधिक मठों के होने ही संभावना है। मठ एक से अधिक मंजिल के होते थे। कमरे में सोने के लिए पत्थर की चौकी होती थी। दीपक, पुस्तक आदि रखने के लिए खास जगह बनी हुई है। हर मठ के आंगन में एक कुआं बना था। आठ विशाल भवन, दस मंदिर, अनेक प्रार्थना कक्ष और अध्ययन कक्ष के अलावा इस परिसर में सुंदर बगीचे व झीलें भी थी। नालंदा में सैकड़ों विद्यार्थियों और आचार्यों के अध्ययन के लिए, नौ तल का एक विराट पुस्तकालय था। जिसमें लाखों पुस्तकें थी।
2. तक्षशिला विश्वविद्यालय (Takshashila university)
Takshashila university Story in Hindi
तक्षशिला विश्वविद्यालय की स्थापना लगभग 2700 साल पहले की गई थी। इस विश्विद्यालय में लगभग 10500 विद्यार्थी पढ़ाई करते थे। इनमें से कई विद्यार्थी अलग-अलग देशों से ताल्लुुक रखते थे। वहां का अनुशासन बहुत कठोर था। राजाओं के लड़के भी यदि कोई गलती करते तो पीटे जा सकते थे। तक्षशिला राजनीति और शस्त्रविद्या की शिक्षा का विश्वस्तरीय केंद्र थी। वहां के एक शस्त्रविद्यालय में विभिन्न राज्यों के 103 राजकुमार पढ़ते थे।
आयुर्वेद और विधिशास्त्र के इसमे विशेष विद्यालय थे। कोसलराज प्रसेनजित, मल्ल सरदार बंधुल, लिच्छवि महालि, शल्यक जीवक और लुटेरे अंगुलिमाल के अलावा चाणक्य और पाणिनि जैसे लोग इसी विश्वविद्यालय के विद्यार्थी थे। कुछ इतिहासकारों ने बताया है कि तक्षशिला विश्विद्यालय नालंदा विश्वविद्यालय की तरह भव्य नहीं था। इसमें अलग-अलग छोटे-छोटे गुरुकुल होते थे। इन गुरुकुलों में व्यक्तिगत रूप से विभिन्न विषयों के आचार्य विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करते थे।
3. विक्रमशीला विश्वविद्यालय (Vikramshila university)
Vikramshila university in Hindi
विक्रमशीला विश्वविद्यालय की स्थापना पाल वंश के राजा धर्म पाल ने की थी। 8 वी शताब्दी से 12 वी शताब्दी के अंंत तक यह विश्वविद्यालय भारत के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में से एक था। भारत के वर्तमान नक्शे के अनुसार यह विश्वविद्यालय बिहार के भागलपुर शहर के आसपास रहा होगा।
कहा जाता है कि यह उस समय नालंदा विश्वविद्यालय का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी था। यहां 1000 विद्यार्थीयों पर लगभग 100 शिक्षक थे। यह विश्वविद्यालय तंत्र शास्त्र की पढ़ाई के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता था। इस विषय का सबसे मशहूर विद्यार्थी अतीसा दीपनकरा था, जो की बाद में तिब्बत जाकर बौद्ध हो गया।
4. वल्लभी विश्वविद्यालय (Vallabhi university)
Vallabhi university History in Hindi
वल्लभी विश्वविद्यालय सौराष्ट्र (गुजरात) में स्थित था। छटी शताब्दी से लेकर 12 वी शताब्दी तक लगभग 600 साल इसकी प्रसिद्धि चरम पर थी। चायनीज यात्री ईत- सिंग ने लिखा है कि यह विश्वविद्यालय 7 वी शताब्दी में गुनामति और स्थिरमति नाम की विद्याओं का सबसे मुख्य केंद्र था। यह विश्वविद्यालय धर्म निरपेक्ष विषयों की शिक्षा के लिए भी जाना जाता था। यही कारण था कि इस शिक्षा केंद्र पर पढ़ने के लिए पूरी दुनिया से विद्यार्थी आते थे।
5. उदांत पुरी विश्वविद्यालय (Odantapuri university)
Odantapuri university history in Hindi
उदांतपुरी विश्वविद्यालय मगध यानी वर्तमान बिहार में स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना पाल वंश के राजाओं ने की थी। आठवी शताब्दी के अंत से 12 वी शताब्दी तक लगभग 400 सालों तक इसका विकास चरम पर था। इस विश्वविद्यालय में लगभग 12000 विद्यार्थी थे।
6. सोमपुरा विश्वविद्यालय (Somapura mahavihara)
Somapura mahavihara History in Hindi
सोमपुरा विश्वविद्यालय की स्थापना भी पाल वंश के राजाओं ने की थी। इसे सोमपुरा महाविहार के नाम से पुकारा जाता था। आठवीं शताब्दी से 12 वी शताब्दी के बीच 400 साल तक यह विश्वविद्यालय बहुत प्रसिद्ध था। यह भव्य विश्वविद्यालय लगभग 27 एकड़ में फैला था। उस समय पूरे
विश्व में बौद्ध धर्म की शिक्षा देने वाला सबसे अच्छा शिक्षा केंद्र था।
7. पुष्पगिरी विश्वविद्यालय (Pushpagiri university)
Pushpagiri university History in Hindi
पुष्पगिरी विश्वविद्यालय वर्तमान भारत के उड़ीसा में स्थित था। इसकी स्थापना तीसरी शताब्दी में कलिंग राजाओं ने की थी। अगले 800 साल तक यानी 11 वी शताब्दी तक इस विश्वविद्यालय का विकास अपने चरम पर था। इस विश्वविद्यालय का परिसर तीन पहाड़ों ललित गिरी, रत्न गिरी और उदयगिरी पर फैला हुआ था।
नालंदा, तशक्षिला और विक्रमशीला के बाद ये विश्वविद्यालय शिक्षा का सबसे प्रमुख केंद्र था। चायनीज यात्री एक्ज्युन जेंग ने इसे बौद्ध शिक्षा का सबसे प्राचीन केंद्र माना। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि इस विश्ववविद्यालय की स्थापना राजा अशोक ने करवाई थी।
अन्य विश्वविद्यालय (Other Universities)
प्राचीन भारत में इन विश्वविद्यालयों के अलावा जितने भी अन्य विश्वविद्यालय थे। उनकी शिक्षा प्रणाली भी इन्हीं विश्वविद्यालयों से प्रभावित थी। इतिहास में मिले वर्णन के अनुसार शिक्षा और शिक्षा केंद्रों की स्थापना को सबसे ज्यादा बढ़ावा पाल वंश के शासको ने दिया।
8. जगददला, पश्चिम बंगाल में (पाल राजाओं के समय से भारत में अरबों के आने तक
9. नागार्जुनकोंडा, आंध्र प्रदेश में।
10. वाराणसी उत्तर प्रदेश में (आठवीं सदी से आधुनिक काल तक)
11. कांचीपुरम, तमिलनाडु में
12. मणिखेत, कर्नाटक
13. शारदा पीठ, कश्मीर मे।

Monday, May 13, 2019

कम्पोस्ट बनाना

अपनाएं ये तरीके इसके लिए 6 मी से 7.5मी की लंबाई, 1.5मी से 2.0मी चौड़ाई और 1.0 मी गहराई की खाईयां खोदी जाती है। सभी उपलब्ध भूसे के ढेर और अवशिष्ट या मलबा को मिट्टी के साथ मिला दिया जाता है और छाया में फैला दिया जाता है ताकि वो मूत्र को सोख सके। अगले दिन सुबह, मूत्र का सोखा गया अवशिष्ट या मलबे को गोबर के साथ जमा कर लिया जाता है और उसे गड्ढे में रख दिया जाता है। गड्ढे के एक हिस्से के एक सिरे को इस तरह के अवशिष्ट से भरने के लिए चुन लेना चाहिए। जब वो भाग जमीन से करीब 45 सेमी से 60 सेमी की ऊंचाई तक भर जाता है तब ढेर के हिस्से को गुंबद की तरह बना दिया जाता है और उसे गोबर से लिपाई कर दी जाती है। यह प्रक्रिया चलती रहती है और जब पहला गड्ढा पूरी तरह भर जाता है तब दूसरा गड्ढा तैयार किया जाता है। गुंबद पर लिपाई के करीब चार से पांच महीने के बाद खाद इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है। अगर मूत्र का संग्रह क्यारी में नहीं किया जाता है तो इसे जानवरों के धोने वाले शेड में जहां सीमेंट का गड्ढा होता है वहां जमा किया जा सकता है जो बाद में फार्म की खाद वाले गड्ढे में मिला दिया जाता है। यहां साधारण तौर पर इस्तेमाल किया जानेवाला रसायन जिप्सम और सुपरफॉस्फेट होता है। जिप्स को मवेशी के शेड में फैला दिया जाता है जो मूत्र को सोख लेता है और वो मूत्र में मौजूद यूरिया के वाष्पीकरण को रोक लेता है और वो उसमे कैल्सियम और सल्फर को जोड़ देता है। नुकसान को कम करने में सुपरफॉस्फेट भी इसी तरह काम करता है और फॉस्फोरस की मात्रा को बढ़ा देता है। आंशिक तौर पर गला हुआ फार्म की खाद का प्रयोग बुआई के तीन से चार सप्ताह पहले किया जाता है, जबकि पूरी तरह से गला हुआ खाद का प्रयोग बुआई से ठीक पहले किया जाता है। आमतौर पर 10 से 20 टन प्रति हेक्टेयर खाद का प्रयोग किया जाता है, लेकिन 20 टन प्रति हेक्टेयर से अधिक का इस्तेमाल चारे वाली घास और सब्जियों के लिए किया जाता है। इस तरह के मामले में फार्म की खाद का इस्तेमाल 15 दिन पहले किया जाना चाहिए ताकि नाइट्रोजन के निसंचालन से बचा जा सके। मौजूदा पद्धति में खेतों में खाद को छोटे से ढेर में जहां-तहां लंबे वक्त के लिए छोड़ देने से नाइट्रोजन का नुकसान होता है। इस तरह के नुकसान को कम किया जा सकता है, इसके लिए इस्तेमाल किए जा रहे खाद को फैलाना होगा और तुरत इसकी जुताई करनी होगी। सब्जियों की फसलें जैसे कि, आलू, टमाटर, शकरकंद, गाजर, मूली, प्याज आदि को फार्म की खाद से बहुत फायदा होता है। दूसरे फायदा उठाने वाली फसलें हैं गन्ना, चावल, नेपियर घास और बगीचा वाली फसलों में नारंगी, केला, आम और नारियल। पोषक की पूरी मात्रा जो फार्म की खाद में मौजूद रहता है वो तुरंत नहीं मिलता है। नाइट्रोजन की करीब 30 फीसदी, फॉस्फोरस की 60 से 70 फीसदी और पोटैशियम की 70 फीसदी मात्रा पहली फसल में मौजूद होती है।

तोरई के स्वास्थ्य लाभ

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यदि आप स्वस्थ तरीके से अपना वजन कम करने का तरीका तलाश रहे हैं, तो आप के लिए तोरई के स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानने का समय है। तोरई अच्छी तरह से वजन कम करने के लिए जानी जाती है। इसके अलावा यह नेत्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करती है और विटामिन सी की कमी से होने वाली सभी बीमारियों जैसे स्कर्वी, स्केलेरोसिस आदि को होने से रोकती है। यह अस्थमा का इलाज करने में मदद करती है और इसमें विटामिन सी, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर की उच्च सामग्री होती है।



lovely hut

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Saturday, May 11, 2019

आई लव यू मम्मा

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आई लव यू मम्मा । सुना है आज मदर डे है ,शेष 364 दिन क्या माँ की राते है ? हम भारतीय माता ,पिता ,गुरु के दिवस कैसे मना सकते है ? पश्चिम सभ्यता कुछ भिन्न है,जहाँ माता पिता बदलते रहते है अपने जीवन साथी। बच्चो को ढूंढ़ना पड़ता है माँ किसके साथ है ओर बाप किसके। यह मदर डे फादर डे किसी अभाव ग्रस्त संस्कृति के हो सकते है भारत जैसे सुसंस्कृत देश मे हरगिज नहीं। हमारे जगत पिता सूर्य है। सम्पूर्ण सृष्टी की उत्पत्ति के उपादान कारण रेत या बीज सूर्य में ही पैदा होते है। वही बीज माता पिता के माध्यम से संग्रहित रहता है। बीज की पूर्णता का माध्यम बनते है माता पिता। सृष्टि कर्ता पितृ प्राणो के कारण ही पिता को पितृ कहा जाता है। श्राद्ध पक्ष में पितर से इन्ही को सम्बोधित किया जाता है। किस देश में मातृ देवौ भव पितृ देवों भव कह जाते है? केवल भारत में। माता पिता जीवन भर प्राण रुप मे शरीर मे प्रवाहित रहतें है तब कोन सा दिन मेरे लिए मदर डे ओर कोनसा फादर दे? उनके कारण ही मै हूँ। दिखाई दे रह हूँ । ज़िसके जीवन में अंधकार होता है वहॉँ माता पिता अभाव सूचक है। कभी कभी उनकी याद मे मोम पिघलता है। आज हमारे शिक्षक ,शिक्षा शास्त्री , शिक्षा नीतियों के निर्धारक इसलीए निरर्थक हो गये है क्योकि उन्हे प्राण रुप मे बहना नही आता। ज्ञान का यह अभाव ही मेरी जिंदगी के आर्दशों को एक ही दिन मे समेट जाता है। जुग जुग जिए ऐसे माता पिता जो असली सिखाते नही नकल कर के जीने को मजबूर करतें है।


Saturday, May 4, 2019

Live Painting Competition

For Live Painting Competition visit in our site and register your name, show your talent and get more prizes
First Prize- Rs.31,000/-
Second Prize- Rs.21,000/-
Third Prize- Rs.11,000/-
and we also add 7 more consolation Prizes Rs.5,100/- each
Artists will be provided with canvases and papers.
For more information contact 9811625645 or you can also whatsapp
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दौड़ते रहो. ... .. .रुकना मत. ...

आजकल 10वीं और 12वीं क्लास के रिजल्ट्स आ रहे हैं। 95% स्कोर करने वाले बच्चों के अभिभावक बड़े गर्व से उनका नाम और फोटो डाल रहे हैं। बहुत से मित्रों ने CBSE बोर्ड परीक्षा में अपने पुत्र-पुत्रियों को मिले गौरवशाली अंक साझा किए हैं - भला अपनी संतान की उल्लेखनीय सफलता पर किस माता-पिता को गर्व नहीं होगा ? उनकी छाती चौड़ी नहीं होगी ? ऐसे सभी सफल बच्चों और उनके माता-पिता को बहुत बहुत बधाई
लेकिन उनका क्या जिन बच्चों ने 62% स्कोर किया उनके अभिभावकों के पास गर्व करने के लिए कुछ नहीं है क्या ? ऐसे छात्र और छात्राएँ जो इस परीक्षा में अच्छे अंक नहीं ला सके - अपने माता-पिता की आशाओं और आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतर सके - वे निश्चित ही निराश और हताश होंगे - हो सकता है उन्हें तरह-तरह के तानों का भी सामना करना पड़ रहा हो - यह पोस्ट ऐसे ही छात्र-छात्राओं और अभिवावकों के लिए है 😗
1987 की बात है। Italy के रोम नगर में Athletics की World Championships चल रही थीं। 1500 मी की दौड़ में भारत का प्रतिनिधित्व कश्मीरा सिंह कर रहे थे। 1500 मीटर की दौड़ में ट्रैक के कुल पौने चार चक्कर लगाने होते हैं। यानी पहले राउंड में कुल 300 मीटर और बाकी 3 राउंड में कुल 1200 मी।
दौड़ शुरू हुई... .. . ..कश्मीरा सिंह ने दौड़ शुरू होते ही बढ़त बना ली। ट्रैक पे लगभग 40 से ज़्यादा धावक दौड़ रहे थे। पर कश्मीरा सिंह सबसे आगे थे। कमेंटेटर ने बताया.. ... ..India का Athlete सबसे आगे चल रहा है.. ... .
3rd Round तक कश्मीरा सिंह सबसे आगे चले। पर कमेंटेटर उनकी इस दौड़ से कतई इम्प्रेस नहीं था। वो पीछे चल रहे किन्ही दो अन्य धावकों पे निगाह रखे थे ।
बहरहाल चौथा और आखिरी राउंड शुरू हुआ। एक धावक बढ़ के कश्मीरा सिंह से आगे आ गया। और उसके बाद कश्मीरा सिंह उस भीड़ में खो गए और फिर कभी नहीं दिखे । बाद में जब हम लोगों ने Record Book देखी तो पता चला की शायद कश्मीरा सिंह 40 में से 38वें स्थान पे रहे ।
ज़िन्दगी की दौड़ में इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप पहले राउंड में आगे हैं कि नहीं। फर्क इस बात से पड़ता है कि Finishing लाइन पे सबसे पहले कौन पहुंचा। उस दौड़ में सोमालिया के Abdi Bile फिनिशिंग लाइन पे सबसे पहले पहुंचे और उन्होंने Gold Medal जीता ।
इतिहास में नाम Abdi Bile का दर्ज है न कि कश्मीरा सिंह का।
मित्रों.. ... .अभी तो ज़िन्दगी की Marathon दौड़ का बमुश्किल पहला राउंड पूरा हुआ है. ... ..फिनिशिंग लाइन पे न जाने कौन पहुंचेगा सबसे पहले। शुरू में बहुत तेज़ दौड़ने वाले ज़रूरी नहीं की इसी दमखम से लगे रहे।
सबसे आगे वो आएगा जो धैर्य-पूर्वक लगा रहेगा। जो बिना हार माने दौड़ता रहेगा। वो जिसकी निगाह लक्ष्य पे रहेगी।
जीतना ज़रूरी भी नहीं। मज़ा दौड़ पूरी करने में भी है ।
ज़िन्दगी की दौड़ में अक्सर 60 % भी जीतते हैं।
याद रखना Chinese Bamboo.. . ...सबसे देरी से उगता है पर उगते ही 7 हफ्ते में 40 फुट का हो जाता है।
इस लिये दौड़ते रहो. ... .. .रुकना मत. ... .
और एक अंतिम विनती कि आप अपने बच्चो की तुलना किसी और से न करे...क्योकि हर एक बच्चा अद्वित्य है, अद्भुत है, आतुल्य है I

Thursday, May 2, 2019

तुलसी की खेती करने से लेकर बेचने तक

3 महीने में 3 लाख की कमाई करवाने वाले तुलसी की खेती कैसे करें, पूरी रिपोर्ट पढ़िए।*
*पूरी रिपोर्ट – तुलसी की खेती करने से लेकर बेचने तक*
*ज्यादा वक्त नहीं गुजरा जब लगभग हर भारतीय घर के आंगन में आपको एक तुलसी का छोटा सा पेड़ मिल जाता था। लेकिन शहरीकरण की आंधी में ना आंगन रहे और ना ही तुलसी का पेड़। लेकिन फिर भी तुलसी की मांग दवाई बनाने वाली कंपनियों में कई गुना बढ़ गई। तुलसी का इस्तेमाल दवा बनाने वाली कंपनियां करीब 1 दर्जन से ज्यादा बिमारियों की दवा बनाने में करती हैं।*...
*3 महीने में 3 लाख की कमाई करवाने वाले तुलसी की खेती कैसे करें, पूरी रिपोर्ट पढ़िए।*
*पूरी रिपोर्ट – तुलसी की खेती करने से लेकर बेचने तक*
*ज्यादा वक्त नहीं गुजरा जब लगभग हर भारतीय घर के आंगन में आपको एक तुलसी का छोटा सा पेड़ मिल जाता था। लेकिन शहरीकरण की आंधी में ना आंगन रहे और ना ही तुलसी का पेड़। लेकिन फिर भी तुलसी की मांग दवाई बनाने वाली कंपनियों में कई गुना बढ़ गई। तुलसी का इस्तेमाल दवा बनाने वाली कंपनियां करीब 1 दर्जन से ज्यादा बिमारियों की दवा बनाने में करती हैं।*
*पिछले दिनों उज्जैन के एक किसान की ऐसी ही सफलता की कहानी सामने आई जिसने सिर्फ 3 महीने में 15 हजार रूपए की लागत पर 3 लाख रूपए कमाए।*
*उस खबर के बाद सैकड़ों किसानों ने पूछा कि कि तुलसी की खेती कैसे होती है ये विस्तार से बताएं। आज ये आर्टिकल आपको तुलसी की खेती का विस्तार से विवरण देगा।*
*11 सबसे बड़े इस्तेमाल*
*इसके इस्तेमाल से त्वचा और बालों में काफी सुधार होता हैं।*
*मुंह के छालों की बिमारी के लिए ये काफी कारगर है।*
*बुखार, खांसी, ब्रोकाइटिस और पाचन से जुड़ी समस्या रहने पर इसकी पत्तियों के रस से बनी दवा दी जाती है।*
*कान के दर्द को भी इसी से बनी दवा से दूर किया जाता है।*
*डेंगू और मलेरिया जैसी हर साल फैलने वाली बिमारियों से बचाने में भी इसी से बनी दवा का इस्तेमाल होता है।*
*मूत्र से जुड़ी समस्याओं में तुलसी के बीज से बनी दवा कारगार साबित होती है।*
*गुर्दे से जुड़ी बिमारी और पेट में एेंठन जैसी समस्या के इलाज में भी काम आती है।*
*साबुन, इत्र, शैम्पू और लोशन बनाए जाते हैं।*
*मुंहासे की दवा और त्वचा के लिए मलहम भी इसी से बनता है।*
*मोटापा, मुधमेह जैसी बिमारियों का भी इलाज इसी से होता है।*
*भारत के उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखण्ड और पश्चिमी बंगाल जैसे कुछ राज्यों में तुलसी की खेती व्यावसायिक तौर पर की जाती है।*
*रोपाई*
*तुलसी के पौधे को खेत में लगाने का सही समय जुलाई का पहला हफ्ता होता है। पौधे 45 गुणा 45 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाने चाहिए। जबक RRLOC 12 और RRLOC 14 किस्म के पौधे 50 गुणा 50 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाए जाते हैं। इसके बाद हल्की सिंचाई कर देनी होती है।*
*सिंचाई*
*रोपण के तुरन्त बाद सिंचाई करनी जरूरी होती है। हर हफ्ते या जब जरूरत हो तब भी पानी देना जरुरी है। गर्मियों में हर 12-15 दिन में फसल को पानी देना होता है।*
*जब पहली कटाई हो जाए, तो इसके तुरंत बाद सिंचाई जरुर कर दें। लेकिन ध्यान रहे कि कटाई से 10 दिन पहले पानी देना बंद कर दें।*
*फसल की कटाई कैसे होती है*
*तुलसी की कटाई सही समय पर करनी चाहिए क्योंकि इसका असर तेल की मात्रा पर पड़ता है। जब पौधों की पत्तियां हरे रंग की होने लगें, तभी इनकी कटाई की जाती है। इसके अलावा पौधे पर फूल आने की वजह से यूनीनोल और तेल मात्रा कम हो जाती है। इसलिए जैसे ही पौधे पर फूल आना शुरू हो जाए, तभी कटाई शुरु कर देनी चाहिए।*
*जमीन की सतह से 15-20 मी ऊँचाई पर कटाई की जानी चाहिए। इसका फायदा ये होगा कि जल्द ही नयी शाखाएं निकलने लगेंगी। कटाई के दौरान अगर पत्तियाँ तने पर छोडनी पड़े तो छोड़ दीजिए। इससे फायदा ही होगा।*
*RRLOP 14 नाम के किस्म वाली तुलसी की फसल 3 बार ली जाती है।*
*कमाई*
*एक सीजन में करीब 8 क्विंटल पैदावार होती है। इसकी बाजार कीमत करीब 3 लाख रुपए तक होती है।*
*नीमच मंडी में 30 से 40 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक के भाव तुलसी के बीज बिक जाते हैं।*
*सिंचाई भी सिर्फ 1 बार करना पड़ती है।*
*कहां बेचें???*
*दो रास्ते हैं। पहला अपने पास की मंडी में एजेंट्स से बात करें।*
*दूसरा – तुलसी की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करवाने वाली हमारी संस्था पर सम्पर्क करें ।*
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