Friday, May 24, 2019

kismt ka likha koi tal nhi skta ...

एक पण्डित को एक बार किसी गाँव के बाहर एक कपाल मिला जिस पर एक कुत्ता पेशाब कर रहा था.
उस कपाल के माथे पर लिखा था..ऊषण मरण विदेश अभी कुछ होनी है.
पण्डित को बड़ा ताज्जुब हुआ कि आत्मीय जनों से दूर परदेश में मरने वाले इस व्यक्ति की इतनी दुर्दशा तो हो ही गई है, अब और क्या होनी है यह जानने की उत्सुकता में उसने वह कपाल अपने थैले में रख लिया.
भोर में मुँह अंधेरे ही उसे कुछ कूटने की आवाज़ सी सुनाई दी. पास जाकर देखा तो पण्डिताइन कुछ कूट रही थी.
इतनी सुबह क्या कूट रही हो पण्डिताइन? पण्डित ने पूछा.
आप कल जो भिक्षा लाए हैं,कूट पीसकर उसी की रोटियाँ बनाने की सोच रही हूँ.आज घर में और कुछ था नही..
"ऊषण मरण विदेश अभी कुछ होनी है...."
स्क्रीनशॉट लेकर रख लीजिए.

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