Wednesday, April 24, 2019

TECNOLOGY CAN'T REPLACE TEACHERS IN CLASS ROOM

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हेमंत करकरे

आजकल सेक्युलर गैंग, मीडिया की बबासीर एक नाम की वजह से भीषण दर्द के साथ रक्त बहा रही है और वो नाम है *हेमंत करकरे.....*
हाय शहीद को जे कह दिया, किलकिल कर दी, फलाना ढिमका...... तो सोचा कुछ सवाल पूछ लूं कुछ कथा सुना दूं.....
थोड़ी ताज़ा सी पुरानी बात है यही चालीस एक साल पहले मुम्बई बॉम्बे हुआ करता था और और इस बॉम्बे में उस समय अंडर वर्ल्ड पर कब्जे की तगड़ी लड़ाई छिड़ी थी कई गुट आपस में टकरा रहे थे..... ऐसे में बॉम्बे पुलिस की सीधी रणनीति थी अच्छा है साले आपस में लड़ें मारें अपना क्या जाता है..... सब ठीक ठाक चल रहा था के ऐसे में तब के एक उभरते डॉन दाऊद इब्राहिम के भाई शब्बीर को मनोहर सुर्वे ने कुत्ते की तरह दौड़ा दौड़ा कर बीच बाजार मार डाला इस घटना ने दाऊद को बिल में घुसने पर मजबूर कर दिया और मान्या सुर्वे को पोलिटिकल सपोर्ट भी खूब मिल गया....
ऐसे में दाऊद ने एक नई चाल चली पहली बार बॉम्बे पुलिस के साथ सौदा पटाया और मान्या की सुपारी लेने वाला था इंस्पेक्टर Y. D. Bhide 1982 में ये पहला मौका था जब मुम्बई पुलिस ने एनकाउंटर की सुरुआत की... भिंडे ने मान्या को मारा और दाऊद का सिक्का चमक गया..... साथ ही मुम्बई पुलिस की अंडरवर्ल्ड से रिश्तेदारी भी चालू करवा दी.... इसी क्रम में आगे का बड़ा कांड था दाऊद से अलग हो मुम्बई में खुद का गैंग बनाने वाले माया डोलस का एनकाउंटर...... 1991 में इस एनकाउंटर के बदले बताते है दाऊद ने अपने खास मुंबई क्राइम ब्रांच के आफताब अहमद खान और उसकी टीम को एक करोड़ सत्तर लाख का ईनाम दिया......!
यहां से मुंबई पुलिस और दाऊद का आपस का धंधा जोरों पर चल निकला, दाऊद के विरोधी गुट के भी पुलिस से
गहरे_बिज़नेस_रिलेशन थे और दोनों पक्ष एक दूसरे के शूटरों को मरवाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल धड़ल्ले से करते थे जहां प्रदीप शर्मा जैसे अधिकारी सेना गुट से जुड़े वहीं हेमंत करकरे व सालस्कर आदि दाऊद गुट के थे.... दाऊद गुट को यहां राजनीतिक सपोर्ट मिलता था शरद पवार से तो सेना गुट के सर पर बाला साहिब का हाथ रहता था....!
*हेमंत करकरे* का सबसे खास शूटर (यहां यही शब्द ज्यादा उचित है) था *विजय सालस्कर* अब कमाल देखिये इसने 75 के करीब एनकाउंटर में अपराधियों को मारा जिनमें एक भी दाऊद गैंग का नहीं था सभी के सभी अरुण गवली या राजन गैंग के थे......!
इसके बदले इन्ह मिलते थे नगद पैसे, विदेश में बढ़िया ट्रिप, मौके की प्रॉपर्टी, मज़बूत राजनीतिक रिश्ते....... कोई भी आसानी से करकरे की तनख्वाह और अर्जीत संपत्ति के आंकड़े खोज उसकी ईमानदारी और देशभक्ति को जांच सकता है...... कहते हैं कफ़न के नीचे हर बुराई ढंक जाती है हेमंत करकरे इसका सबसे बड़ा प्रमाण है......
*करकरे* जब मरा मुम्बई क्राइम ब्रांच ऑफिस से सिर्फ 50 कदम दूरी पर था और वहां पर उन्नत हथियार और फोर्स दोनों मौजूद थे......
पर शायद जिस स्क्रिप्ट पर वो काम कर रहा था उसमें मरने का सीन नहीं था..... जो हुआ वो स्क्रिप्ट से अलग था...... स्क्रिप्ट में कसाब और इब्राहिम को मार कर फैंकना और उनकी जगह किसी हिन्दू को प्लांट करना था पर इब्राहिम ने खेल बिगाड़ दिया........
इस सब में एक नाम बेहद महत्वपूर्ण है जिसने शायद मेरे अनुमान से ये सीन लिखा होगा *एसएम मुशरिफ़* पूर्व IG जिसने सबसे पहले हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी तैयार की.... ये इत्तेफ़ाक़ नहीं हो सकता के करकरे इसका बेहद करीबी था और एसएम मुशरिफ़ पर दाऊद के लिए काम करने के आरोप तेलगी केस के समय भी लगते रहे....!
*करकरे* की भक्ति देश के लिए नहीं थी, कांग्रेस के लिए थी...... एक भ्रष्ट, षणयंत्रकारी, धर्मद्रोही का नाम था हेमंत करकरे!!

Monday, April 22, 2019

खटखटा बाबा

ब्रिटिश हुकूमत के दौर में इटावा जिले की भरथना तहसील में एसडीएम बनकर बंगाल से आये थे एसडीएम सर सप्रू, वे नियमित दिनचर्या निपटाकर चारपाई पर लेटे थे, सेवक मनोहर नाई पैर दबा रहा था। सर सप्रू बोले- कोई कहानी सुनाओ।
मनोहर सुनाने लगा- अफगान के बादशाह ने एक दि‍न अपनी दासी से फूलों की सेज सजाने को कहा। दासी ने मनोयोग से सेज सजाई, सोचा-बेगम रोज इस पर सोती है बड़ा अच्छा लगता होगा। बादशाह और बेगम के आने में अभी वक्त है, मैं पल भर इस पर लेटकर देखती हूं, कैसा लगता है? इसी जिज्ञासा में वह फूलों की सेज पर लेट गई और तत्काल आंख लग गई, इसी दौरान बादशाह और बेगम आ गये, दासी को शाही-सेज पर सोता देख, आग बबूला हो गये। बेगम के गुस्से से भरे अल्फाज से दासी जाग गई और शाही दम्पति के पैरों गिरकर माफी मांगने लगी। बेगम ने दासी के अक्षम्य अपराध के लिए कोड़े लगाने का हुक्म दिया। कोड़े पड़ना शुरू हुआ,चीखने लगी जैसे-जैसे पड़ते गये,वह रोना-चीखना भूलकर खिलखिला कर हसने लगी। कोड़ों के आघात की तीव्रता की गति से ही उसके खिलखिलाने की गति बढ़ती गई।
निर्धारित दंड हंस कर झेलते ही बादशाह ने पूछा- तुम पहले रोई और फिर हंसने लगी, आखिर क्यो? दासी बोली- सरकार! पहले तो दर्द से चीख निकल गई, मैने सोचा जिस सेज पर मेरे थोड़ी देर सोने पर इतनी सजा मिली है तो, पता नहीं खुदा उन्हें कितनी सजा देगा, जो वर्षों से हर रात इसी सेज पर सोते हैं। यह सोचने से दर्द दूर हो गया और हंसी आने लगी।
दासी के वचन सुनकर बादशाह के दिव्यचक्षु खुल गये,और शाही पोशाक उतार कर, फकीर बन गये। मनोहर नाई की इस कहानी सुनते ही भरथना के डिप्टी कलक्टर सप्रू की अन्तर्दृष्टि जाग्रत हो गई, और लोकसेवक पद से त्यागपत्र देकर परमात्म-सेवक (संत) के रूप में इष्टिकापुरी के यमुना तट पर रहने लगे। हाथ में सोटा लेकर खटखटाते हुए कुछ रोटियां मांग लाते, खुद खाकर बची हुई रोटियां पशु-पक्षियों को खिला देते। सोटा खटखटाना उनकी पहचान तो बनी ही,लोगों ने नाम दिया-खटखटा बाबा।
अनासक्त एसडीएम सर सप्रू की इष्टसाध्य इष्टापथ की एकादशरुद्री धाम पर तपश्चर्या और साधना से दिव्यता स्वरूप ऋद्धियां-सिद्धियां उनकी सेवा में हाजि‍र हो गई। एक बार सूर्यतनया कालिन्दी उफन रही थी। बाढ़ का मुआयना करने मैनपुरी के जनपद न्यायाधीश पधारे थे,और प्रत्यक्ष देखा- उफनती यमुना नदी में चटाई पर आसन लगाये एक सिद्धसंत बहते हुए आ रहे थे, इटावा तट पर आते ही वे चटाई समेत तीव्र जल प्रवाह में ठहर गये और बोले- मुझे प्यास लग रही है। कोई पानी पिला दे। यह सुनकर खटखटा बाबा ने कहा- ठहरो मैं आया। वे जलपात्र लेकर आगे बढ़े और जल पर चलहि थलहि की नाईं खटखट करते हुए पहुंच गये,और अतिथि संत को जल पिलाया। यह दृश्य देखकर मुआयना कर रहे जिला जज मैनपुरी भौचक्के ही नहीं रह गये,बल्‍कि‍ वह खटखटा बाबा के शिष्य भी बन गये। खटखटा बाबा ने एक यज्ञानुष्ठान कराया, भंडारा चल रहा था। पता चला-घी कम पड़ गया है। शिष्यों ने कहा -गुरुजी! घी मंगाना होगा। बाबा ने जरूरत भर यमुना जल लाकर कढ़ाई में डालने का आदेश दिया। खटखटा बाबा का चमत्कार- कढ़ाई में गिरते ही यमुना जल घृत बन गया। भंडारा ख्‍त्‍म होने के बाद बाबा ने ऋण अदायगी का आदेश देते हुए उतना ही घी मंगवाकर यमुना में डलवाया। फिर चमत्कार दिखा, यमुना में घी गिरते ही जल हो गया।
आगे चलकर सिद्ध संत खटखटा बाबा ने इटावा यमुना तट पर सरस्वती विद्यापीठ की स्थापना जो, उनकी समाधि के पास आज भी मौजूद है,जिसमें वैदिक वांगमय, संस्कृत और पाली भाषाओं का दुर्लभ साहित्यिक भंडार है।

Sunday, April 7, 2019

success fuland unsuccess ful people

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NEED FOR HELP

Hello friends, my sister ekta needs your help. She is currently fighting for her life in Apollo Hospital, Sarita Vihar. He needs your prayers and help very much. She has to be operated. Her above blood vessel has blocked. The doctor spoke about the operation as soon as possible. The doctor has spoken to a stand today, which is to be done quickly. For this, the hospital has demanded 1.75 lakh. Also Other medicines and other tests are mentioned. Ekta had a liver transplantation a year ago. It costed 22 lakhs. In it all the savings of my father and the house were also gone. Our financial situation has deteriorated. Due to illness, studies of Ekta had also discontinued. We are struggling quite a lot. Please support us at this hard time. My parents are unable to do it alone. I request you all the gentlemen that if all of you come forward for the help of my sister, then she can escape death . All of you have requested please cooperate as soon as possible. Your cooperation and suggestions are invited . A little bit of your cooperation can save my sister's life.
You can deposit your contribution amount into the bank account.

VARMI WASH

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Friday, April 5, 2019

महालय से महाप्रलय की यह 9 चरणों की महायात्रा

मित्रो आज से नवरात्री का प्रारम्भ है ,महालय से महाप्रलय की यह 9 चरणों की महायात्रा है ।सनातन में हर एक कथा के , परम्परा व पर्व के पीछे अनेकों गूढ़ संकेत छुपे है जो गहन चिंतन की अवस्था में साधकों को प्रत्यक्ष होते है ।
मार्कण्डेय पुराण अनुसार ये 9 दिन देवी और असुरों के मध्य हुए युद्ध के है । 
देवी और असुरों के इस युद्ध का वर्णन श्री मार्कण्डेय पुराण में सात सौ श्लोकों में वर्णित है जिसे श्री दुर्गासप्तशती कहते है ।
नवरात्रि के 9 दिन शक्ति के 9अवतारों की पूजा की जाती है । पौराणिक रूप से ये 9 अवतार अलग अलग समय पर अलग अलग कार्यो हेतु हुए , जिनकी विस्तृत कथा अनेकों पुराणों और ग्रन्थों में वर्णित है । जैसे प्रथम शैलपुत्री (हिमालय की पुत्री पार्वती जी ) की कथा रामायण , मानस में वर्णित है ।
ये कथाएं ऐहिक धरातल पर जितनी दिव्यता बिखेरती है उतना ही दिव्य अर्थ आध्यात्मिक धरातल पर भी प्रकट करती है ।
प्रथमं शैलपुत्री द्वितीयं ब्रम्हचारिणी तृतीयं ।
चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम ।।
पंचमम स्कन्दमातेती षष्ठम कात्यायिनी च ।
सप्तमं कालरात्री महागौरी चा अष्टमं ।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः ।
उक्तान्येतानी नामानी ब्राह्मणेव् महात्मना ।।
(चंडीकवच 3-5)
शक्ति के यह 9 अवतार सृष्टि के लय ( निर्माण ) के 9 चरण भी है । यहां हम सृष्टि निर्माण के इन्ही चरणों के दर्शन करेगें ।
#प्रथमं_शैलपुत्री
सृष्टि निर्माण या महालय ब्रह्म के संकल्प *एको अहम बहु स्याम* अर्थात एक से बहुत हो जाऊं से प्रारम्भ हुआ था । यह संकल्प ॐ की अनाहत नाद के रूप में गुम्फित हुआ (नाद अथवा ध्वनि तभी उत्तपन्न होती है जब किसी वस्तु को ठोका या आहत किया जाय अतः सांसारिक ध्वनि आहत नाद कहलाती है , किन्तु ॐ नाद जब उत्तपन्न हुआ तब व्यक्त पदार्थ था ही नही अतः ॐ नाद स्वतः उत्तपन्न हुआ न की किसी पदार्थ के आहत होने पर । इसीलिए इसे अनाहत नाद कहते है ।
तब ऊर्जा या त्रिगुणात्मक प्रकृति (देवी )अपने तीनों गुणों (सत, रज, तम) के साम्यावस्था में होने से निष्क्रिय थी ।
ॐ नाद के स्पंदन से इस अक्रिय ऊर्जा में सक्रियता उत्तपन्न हुई और 9 चरणों में इस ऊर्जा या त्रिगुणात्मक प्रकृति से क्रमशः सृष्टि का लय और पुनः प्रलय हुआ ।
सृष्टि के निर्माण के प्रथम चरण में शक्ति सुप्त अवस्था में शून्य के रूप में रहती है ।
* प्रकृती पुरुषात्मकम जगतः ।
मत्तः शून्यं चा अशून्यं ।। (देव्याथर्वशीर्ष -2)
प्रथम चरण में यह ऊर्जा गहन काली , जड़ , घनीभूत शैल स्वरूप (अभेद आवरण ) हो अक्रिय अवस्था में होती है । जब अभी ॐ नाद गुंजाय मान नही हुआ था । किन्तु महत्तत्त्व (परमात्मा का संकल्प ) उत्तपन्न हो चुका था ।
इस गहन तमस युक्त प्रकृति को महाविष्णु की योग निंद्रा या परा प्रकृति भी कहते है । प्रलय पूर्व के समस्त जीवों की आत्मा तो इस समय परमात्मा में विलीन रहती है किंतु उनके करण शरीर अर्थात संस्कार (कर्म बीज ) इसी शैलपुत्री के गर्भ में सुरक्षित रहते है ।
इन बीजों के आधार पर ही नई सृष्टि में जीवों को ब्रह्मा से लेकर शेष सभी योनियां प्राप्त होती है ।
सनातन में नवरात्र के प्रथम दिवस हिमालय पुत्री जिन्हें देवी का शैलपुत्री रूप कहते है , की साधना करी जाती है ।
सभी मित्रों को नवरात्र पर्व की बधाई ।

मुद्दा, मुझे जबाब चाहिए श्रीमान:

भागलपुर का यह 80 मुद्दा, मुझे जबाब चाहिए श्रीमान:
1. जैन मंदिर रोड क्यों नहीं बना?
2. भागलपुर को मिला था रेल मंडल, हुआ क्या?
3. भागलपुर का चयन स्मार्ट सिटी में, हुआ क्या?
4. भागलपुर से उड़ने वाला जहाज का क्या हुआ?
5. भोलानाथ पुल पर बनने वाले ओवर ब्रिज का क्या हुआ?
6. घोषित बिक्रमशिला विश्वविद्यालय अधर में क्यों?
7. गंगा ब्रिज के समानांतर पुल की अद्यतन स्थिति क्या है?
10. जाम की समश्याओ का निराकरण क्यों नहीं?
11. अष्टांग आयुर्वेदिक कालेज बंद क्यों?
12. सिल्क इंस्टीटूट का अस्तित्व खतरे में क्यों?
13. कृषि बाजार समिति क्यों अस्तित्व की आंसू रो रहा है?
14. भागलपुर के टेक्सटाइल मेगा कलस्टर का क्या हुआ?
15. भागलपुर को मिला था फूड पार्क, हुआ क्या?
16. लाजपत पार्क का बुरा हाल क्यों?
17. चिल्ड्रन पार्क में विद्यालय क्यों खोल दिया गया?
18. दान की जमीन पर बने लाजपत पार्क के कुछ हिस्सों का व्यवसाईक उपयोग क्यों?
19. थॉमसन मेमोरियल टाउन हॉल (ललित भवन) अतिक्रमित क्यो?
20. अंग संस्कृति भवन अतिक्रमित क्यों?
21. भागलपुर के लिए घोषित सिल्क भवन कब तक?
22. पैन इंडिया द्वारा काटे गए सड़को की मरम्मत क्यों नही?
23. दानवीर कर्ण आज तक उपेक्षित क्यों?
24. प्रथम बिहारी दीपनारायण सिंह उपेक्षित क्यों?
25. गुदरी हाट नाथनगर अतिक्रमित क्यों?
26. वेंडिंग जोन अबतक क्यों नहीं?
27. शहर में मूत्रालय की व्यवस्था क्यों नहीं?
28. सिटी बस सेवा अबतक चालू क्यों नहीं?
29. शहर में पार्किंग व्यवस्था क्यों नहीं?
30. भगवान पुस्तकालय भगवान भड़ोसे क्यों?
31. शिक्षा भवन अबतक क्यों नहीं?
32. सृजन घोटाला भागलपुर क्यों हुआ?
33. बिद्युत तार अबतक अंडरग्राउंड क्यों नही हुआ?
34. स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति अबतक बाधित क्यों?
35. अबतक सड़क अतिक्रमण मुक्त क्यों नहीं?
36. भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण कार्यालय भागलपुर से क्यों छिना?
36. मल्टी लेवल पार्किंग बिल्डिंग क्यों नही बना?
37. विक्रमशिला को बौद्ध टूरिस्ट सर्किट से जोड़ने का क्या पहल किया गया?
38. विक्रमशिला को विश्व धरोहर में शामिल क्यों नहीं कराया गया?
39. भागलपुर के धार्मिक स्थलों को धार्मिक सर्किट से क्यों नहीं जोड़ा गया?
40. भविष्य को ध्यान में रक्खे बिना बाईपास का गलत निमार्ण क्यों?
41. भागलपुर को उपराजधानी का दर्जा क्यों नहीं दिला पाया?
42. उच्च न्यायालय के खडपीठ की स्थापना भागलपुर अबतक क्यों नहीं?
43. भागलपुर में ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त क्यों?
44. तिलकामांझी विश्वविद्यालय में अराजकता, देर से चलने वाले सत्र , पेंडिंग रिजल्ट , गुणवत्ता पूर्ण पढाई का अभाव, क्यों?
45. नगर निगम रहते हुए भी गंदगी व बदबू से क्यों जूझती रहती है शहर?
46. नाले की समुचित व्यवस्था अबतक क्यों नही?
47. भागलपुर का दक्षिणी क्षेत्र उपेक्षित क्यों?
48. जवाहर लाल मेडिकल कॉलेज की कुव्यवस्था का निराकरण क्यों नहीं?
49. जलासय व तालाब गायब क्यों हुआ?
50. नगर निगम क्षेत्र का सरकारी विद्यालय बंद होने के कगार पर क्यों?
51. भागलपुर में कैंसर डिटेक्शन यूनिट खोलने की घोषणा के बाबजूद कागजी प्रक्रिया में अबतक उलझा हुआ क्यों ?
52. सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल जैसे लॉलीपॉप थमा कर AIIMS से वंचित क्यो?
53. ट्रैफिक थाने की नींव 2011, अब भी कार्यरत नही, क्यों?
54. घोषणा के बाबजूद भी "भागलपुर के बुनकरों को क्यों नही बनाय गया '‘स्मार्ट"?
55. अबैद बुचर खाने पर प्रतिबंध क्यों नहीं?
56. गौशाला की जमीन को अतिक्रमण मुक्त क्यो नहीं कराया गया?
57. गंगा घाटों का नवीनीकरण, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना, वृक्षारोपण और जैव विविधता संरक्षण केंद्र अबतक क्यों नहीं खुला?
58. भागलपुर में बनने वाले सेल्फी प्वाइंट का क्या हुआ?
59. बनना था रिवर फ्रंट, क्या हुआ?
60. अंगिका साहित्य और कला अकादमी क्यों नहीं बना?
61. बृद्धाश्रम का हाल बेहाल क्यों?
62. नवगछिया को जिला का दर्जा क्यों नहीं दिला पाए?
63. JLNMCH में अर्ली इंवेंसन सेंटर का क्या हुआ?
64. भागलपुर के लिए जू और जूलोजिकल गार्डन क्यों नही?
65. भागलपुर रेलवे स्टेशन पर बनना था अत्याधुनिक मॉल, हुआ क्या?
66. सल्टेंगंज में बनना था रिवरफ्रंट प्लेटफ़ॉर्म, हुआ क्या?
67. उड़ान योजना क्यों नहीं हुआ प्रारम्भ?
68. प्रोपर बस स्टैंड से भागलपुर महरूम क्यो?
69. भागलपुर होकर चलने वाली राजधानी और जंनसतावादी एक्सप्रेस का क्या हुआ?
70. सुलतानगंज कटोरिया नई रेल लाइन क्यों नहीं बना?
71. रेलवे कॉलनी से क्यों नहीं जुड़ा लोहिया पुल?
73. वन स्टॉप सेंटर (निर्भया सेंटर) क्यों नहीं बना?
74. अंगिका भाषा को संविधान की 8 वी अनुसूची शामिल कराने के लिए क्या प्रयास किया?
75. सव दाह गृह का क्या हुआ?
76. आवारा पसुओं व कुत्तों से शहर को मुक्ति क्यों नही?
77. 7 निश्चय योजना में सिर्फ खाना पूर्ति क्यों?
78. भागलपुर में उद्योग धंधे क्यों नही खुला?
79. अब भी जुगाड़ गाड़ी के संचालन पर अकुश क्यों नहीं?
80. गृह विहीनों को आवास क्यों नही?

CRAFT

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