
Friday, December 28, 2018
Wednesday, December 26, 2018
उत्तरप्रदेश राज्य सूचना आयोग में अनियमितताओ के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण सुझाव एवम शिकायत
दिनांक : २७ दिसम्बर २०१८
महामहिम राज्यपाल , उत्तरप्रदेश ,
राज भवन , लखनऊ . द्वारा जिलाधिकारी , अलीगढ
विषय: उत्तरप्रदेश राज्य सूचना आयोग में अनियमितताओ
के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण सुझाव एवम शिकायत
मान्यवर ,
सूचना अधिकार कानून २००५ को लागू हुवे १४ वर्ष हो चुके , किन्तु उत्तरप्रदेश में यह कानून अपने लक्ष्य को प्राप्त ही नहीं कर पा रहां , इसका स्पष्ट कारण यहाँ के राज्य आयोग में व्याप्त अनियमितताओ को ही जाता है और राज्य सरकार भी इसे दुरुस्त करने में कोई रूचि नहीं दिखा रही, तत्क्रम में आपका ध्यान निम्नलिखित बिंदुओ की तरफ आकृष्ठ करना चाहता हूँ:-
१) मान्यवर , राज्य सूचना आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसमे 1 मुख्य सूचना आयुक्त एवम 10 सूचना आयुक्त के पद है , केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त व्यवस्था के अनुसार ये सभी पद एक Search and Selection Committee गठित कर की जानी चाहिए , किन्तु खेद का विषय है कि राज्य सरकार इस व्यवस्था का पालन न करते हुये अपने मनमाने तरीके से अपने राजनीतिक कार्यकर्ताओं या रिश्तेदारों को इन पदों पर आसीन कर देती है , जिनको न तो इस कानून की बरीकियों का ही ज्ञान है और न ही उक्त अधिनियम की धारा 19(3) व धारा 18 में प्राविधानित प्राविधानों का अनुपालन कराने में दक्षता और ना ही आवेदकों को सूचनाओं को प्रदान कराये जाने में रुचि | उनको तो सरकारी सुविधा और ओहदे का जायज और नाजायज लाभ ही उठाते हुवे अपने ५ वर्षो के कार्यकाल को पूर्ण करना है |
२) उत्तर प्रदेश देश की जनसंख्या और क्षेत्रफल के अनुसार सबसे बड़ा राज्य है , प्रदेश में ८० जिले है और इन सभी जिलो के सूचना अधिकारियों एवम सूचना के आवेदनकर्ता को आयोग में अपील की सुनवाई के लिए लखनऊ जाना पड़ता है , नतीजन सरकार के काम काज में औसतन २ दिन का व्यवधान और अतिरिक्त धन (यात्रा व्यय एवं भत्ते में) खर्च हो जाता है , उसी तरह आवेदकों का भी बहुमूल्य समय का नुकसान होता है वही धन की भी क्षति उठाने को मजबूर होना पड़ता है ।
पृष्ठ -२-
३) राज्य आयोग द्वारा प्रत्येक मामले में आवदेक को अपने समक्ष आने को मजबूर कर दिया जाता है तथा यदि किन्ही कारणों से आवेदक सुनवाई में उपस्थित होने में असमर्थ है तो उसे अवसर दिए बिना ही आवेदक द्वारा प्रस्तुत अपील में प्रस्तुत तथ्यों को नजर अंदाज कर प्रतिवादी (सरकारी पक्ष) के कथन मात्र पर विश्वास कर अपील को निस्तारित कर दिया जाता है । आयोग के ऐसे पक्षपात रवैये से आवेदक का नैसर्गिक न्याय का हनन होता है | इस बाबत हमने कई ज्ञापन देते हुवे राज्य में सूचना आयोग की ३ या ४ अतिरिक्त बेंच बनाने की मांग करते आ रहे है जिससे सरकार और जनता के समय और धन की बचत हो सके
४) उत्तर प्रदेश राज्य सुचना आयोग ही देश में इकलौता आयोग है जिसमे कोर्ट की तरह से तारीख पर तारीख पड़ती रहती है , जिससे आवेदनकर्ता हताश होकर बैठ जाता है जबकि केन्द्रीय सूचना आयोग एवम देश के अन्य राज्यों के आयोगो में जहां एक या दूसरी सुनवाई में ही फैसला कर आवेदनकर्ता को त्वरित सूचना उपलब्ध कराई जाती है
५) केन्द्रीय सूचना आयोग में तो वीडिओ कांफ्रेंस के द्वारा सुनाई की जाती है जिससे पैसे और समय दोनों की बचत होती है , वहीँ महाराष्ट्र जैसे राज्य में तो सूचना आयोग की ५ बेंच बनाकर आवेदनकर्ताओ को सुविधा प्रदान की गई है जो कि जनसंख्या व क्षेत्रफल में जहाँ उत्तर प्रदेश से कमतर ही है ।
६) उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में सन २०१२ से धारा 20(1) के अंतर्गत लगाए गए जुर्माने की ५ प्रतिशत के करीब ही रकम वसूल की जा सकी , वसूली न होने से राज्य के लगभग सभी विभागों के ज्यादातर जन सूचना अधिकारी निरंकुश एवम निडर हो गए है और समय से सूचना ही नहीं देते
७) उत्तरप्रदेश राज्य आयोग अपने द्वारा किये गए जन सूचना अधिकारी के विरुद्ध जुर्माने के फैसलों को बिना प्रतिवादी द्वारा प्रस्तुत वैध स्पस्टीकरण के ही पलटते हुवे जुर्माने की रकम ही माफ़ कर देते है , जो की गैर कानूनी है जबकि पुनर्विचार याचिका को स्वीकार करने के संदर्भ में उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 के नियम 12(1) में स्पष्ट प्राविधानित है जिसको पूर्णतया नजर अंदाज कर दण्ड माफ कर दिए जाते है , आयोग के ऐसे निर्णयों में कही न कही व्यक्तिगत स्वार्थ भी हो सकता है , जिसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता ।
पृष्ठ -३-
८) बार बार तारीख पर तारीख देने के बाद भी सूचना न देने अथवा विलंब से देने पर आवेदंनकर्ता द्वारा धारा 19(8)(ख) के अंतर्गत मांगी गई क्षतिपूर्ति भी प्रदान नहीं कराई जाती, यहाँ तक कि प्रतिवादी की तरफ से स्वयं या अन्य किसी जिम्मेदार विभागीय अधिकारी की अनुपस्थिति में उनके द्वारा नियुक्त वकीलों के द्वारा बार बार तारीख लेने के कारण आवेदक को समय से सूचनाएं प्राप्त होने में बाधा उत्पन्न होती है जो एक सुनियोजित तरीके से जानबूझकर किया जाता है एवम जिसमे आयुक्तों का संरक्षण भी प्राप्त होता है । जो अधिनियम की मूल भावना के विरुद्ध है।
९) उत्तरप्रदेश राज्य सूचना आयोग में आयुक्तों एवम कर्मचारियों द्वारा जनता
के साथ अभद्र व्यवहार और प्रताड़ित भी किया जाता है
अतः माननीय महोदय से विनम्र अनुरोध है कि अलीगढ़ जैसे दूरस्त के जनपदो से संबंधित अपीलों की सुनवाई मंडल जनपद स्तर पर करने , प्रतिवादी पक्ष की तरफ से वकीलों के प्रतिनिधित्व पर रोक लगाने, नियम विरुद्ध तरीके से माफ किये गए दण्ड की जांच कराने तथा आवेदकों को सूचना उपलब्ध कराने एवम क्षतिपूर्ति दिलाने के साथ RTI कार्यकर्ताओ को भी समुचित सुरक्षा दिलाये जाने हेतु उचित दिशा निर्देश देने की कृपा करें।
धन्यवाद सहित
भवदीय ,
महामहिम राज्यपाल , उत्तरप्रदेश ,
राज भवन , लखनऊ . द्वारा जिलाधिकारी , अलीगढ
विषय: उत्तरप्रदेश राज्य सूचना आयोग में अनियमितताओ
के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण सुझाव एवम शिकायत
मान्यवर ,
सूचना अधिकार कानून २००५ को लागू हुवे १४ वर्ष हो चुके , किन्तु उत्तरप्रदेश में यह कानून अपने लक्ष्य को प्राप्त ही नहीं कर पा रहां , इसका स्पष्ट कारण यहाँ के राज्य आयोग में व्याप्त अनियमितताओ को ही जाता है और राज्य सरकार भी इसे दुरुस्त करने में कोई रूचि नहीं दिखा रही, तत्क्रम में आपका ध्यान निम्नलिखित बिंदुओ की तरफ आकृष्ठ करना चाहता हूँ:-
१) मान्यवर , राज्य सूचना आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसमे 1 मुख्य सूचना आयुक्त एवम 10 सूचना आयुक्त के पद है , केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त व्यवस्था के अनुसार ये सभी पद एक Search and Selection Committee गठित कर की जानी चाहिए , किन्तु खेद का विषय है कि राज्य सरकार इस व्यवस्था का पालन न करते हुये अपने मनमाने तरीके से अपने राजनीतिक कार्यकर्ताओं या रिश्तेदारों को इन पदों पर आसीन कर देती है , जिनको न तो इस कानून की बरीकियों का ही ज्ञान है और न ही उक्त अधिनियम की धारा 19(3) व धारा 18 में प्राविधानित प्राविधानों का अनुपालन कराने में दक्षता और ना ही आवेदकों को सूचनाओं को प्रदान कराये जाने में रुचि | उनको तो सरकारी सुविधा और ओहदे का जायज और नाजायज लाभ ही उठाते हुवे अपने ५ वर्षो के कार्यकाल को पूर्ण करना है |
२) उत्तर प्रदेश देश की जनसंख्या और क्षेत्रफल के अनुसार सबसे बड़ा राज्य है , प्रदेश में ८० जिले है और इन सभी जिलो के सूचना अधिकारियों एवम सूचना के आवेदनकर्ता को आयोग में अपील की सुनवाई के लिए लखनऊ जाना पड़ता है , नतीजन सरकार के काम काज में औसतन २ दिन का व्यवधान और अतिरिक्त धन (यात्रा व्यय एवं भत्ते में) खर्च हो जाता है , उसी तरह आवेदकों का भी बहुमूल्य समय का नुकसान होता है वही धन की भी क्षति उठाने को मजबूर होना पड़ता है ।
पृष्ठ -२-
३) राज्य आयोग द्वारा प्रत्येक मामले में आवदेक को अपने समक्ष आने को मजबूर कर दिया जाता है तथा यदि किन्ही कारणों से आवेदक सुनवाई में उपस्थित होने में असमर्थ है तो उसे अवसर दिए बिना ही आवेदक द्वारा प्रस्तुत अपील में प्रस्तुत तथ्यों को नजर अंदाज कर प्रतिवादी (सरकारी पक्ष) के कथन मात्र पर विश्वास कर अपील को निस्तारित कर दिया जाता है । आयोग के ऐसे पक्षपात रवैये से आवेदक का नैसर्गिक न्याय का हनन होता है | इस बाबत हमने कई ज्ञापन देते हुवे राज्य में सूचना आयोग की ३ या ४ अतिरिक्त बेंच बनाने की मांग करते आ रहे है जिससे सरकार और जनता के समय और धन की बचत हो सके
४) उत्तर प्रदेश राज्य सुचना आयोग ही देश में इकलौता आयोग है जिसमे कोर्ट की तरह से तारीख पर तारीख पड़ती रहती है , जिससे आवेदनकर्ता हताश होकर बैठ जाता है जबकि केन्द्रीय सूचना आयोग एवम देश के अन्य राज्यों के आयोगो में जहां एक या दूसरी सुनवाई में ही फैसला कर आवेदनकर्ता को त्वरित सूचना उपलब्ध कराई जाती है
५) केन्द्रीय सूचना आयोग में तो वीडिओ कांफ्रेंस के द्वारा सुनाई की जाती है जिससे पैसे और समय दोनों की बचत होती है , वहीँ महाराष्ट्र जैसे राज्य में तो सूचना आयोग की ५ बेंच बनाकर आवेदनकर्ताओ को सुविधा प्रदान की गई है जो कि जनसंख्या व क्षेत्रफल में जहाँ उत्तर प्रदेश से कमतर ही है ।
६) उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में सन २०१२ से धारा 20(1) के अंतर्गत लगाए गए जुर्माने की ५ प्रतिशत के करीब ही रकम वसूल की जा सकी , वसूली न होने से राज्य के लगभग सभी विभागों के ज्यादातर जन सूचना अधिकारी निरंकुश एवम निडर हो गए है और समय से सूचना ही नहीं देते
७) उत्तरप्रदेश राज्य आयोग अपने द्वारा किये गए जन सूचना अधिकारी के विरुद्ध जुर्माने के फैसलों को बिना प्रतिवादी द्वारा प्रस्तुत वैध स्पस्टीकरण के ही पलटते हुवे जुर्माने की रकम ही माफ़ कर देते है , जो की गैर कानूनी है जबकि पुनर्विचार याचिका को स्वीकार करने के संदर्भ में उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 के नियम 12(1) में स्पष्ट प्राविधानित है जिसको पूर्णतया नजर अंदाज कर दण्ड माफ कर दिए जाते है , आयोग के ऐसे निर्णयों में कही न कही व्यक्तिगत स्वार्थ भी हो सकता है , जिसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता ।
पृष्ठ -३-
८) बार बार तारीख पर तारीख देने के बाद भी सूचना न देने अथवा विलंब से देने पर आवेदंनकर्ता द्वारा धारा 19(8)(ख) के अंतर्गत मांगी गई क्षतिपूर्ति भी प्रदान नहीं कराई जाती, यहाँ तक कि प्रतिवादी की तरफ से स्वयं या अन्य किसी जिम्मेदार विभागीय अधिकारी की अनुपस्थिति में उनके द्वारा नियुक्त वकीलों के द्वारा बार बार तारीख लेने के कारण आवेदक को समय से सूचनाएं प्राप्त होने में बाधा उत्पन्न होती है जो एक सुनियोजित तरीके से जानबूझकर किया जाता है एवम जिसमे आयुक्तों का संरक्षण भी प्राप्त होता है । जो अधिनियम की मूल भावना के विरुद्ध है।
९) उत्तरप्रदेश राज्य सूचना आयोग में आयुक्तों एवम कर्मचारियों द्वारा जनता
के साथ अभद्र व्यवहार और प्रताड़ित भी किया जाता है
अतः माननीय महोदय से विनम्र अनुरोध है कि अलीगढ़ जैसे दूरस्त के जनपदो से संबंधित अपीलों की सुनवाई मंडल जनपद स्तर पर करने , प्रतिवादी पक्ष की तरफ से वकीलों के प्रतिनिधित्व पर रोक लगाने, नियम विरुद्ध तरीके से माफ किये गए दण्ड की जांच कराने तथा आवेदकों को सूचना उपलब्ध कराने एवम क्षतिपूर्ति दिलाने के साथ RTI कार्यकर्ताओ को भी समुचित सुरक्षा दिलाये जाने हेतु उचित दिशा निर्देश देने की कृपा करें।
धन्यवाद सहित
भवदीय ,
बिमल कुमार खेमानी, संरक्षक
ई. विक्रम सिंह , अध्यक्ष
विनोद वार्ष्णेय , सचिव
उमेश श्रीवास्तव
मजहर-अल-कमर
नागेन्द्र चौहान
उमेश शर्मा
अभय शर्मा
ई. राधेश्याम शर्मा
ई. विक्रम सिंह , अध्यक्ष
विनोद वार्ष्णेय , सचिव
उमेश श्रीवास्तव
मजहर-अल-कमर
नागेन्द्र चौहान
उमेश शर्मा
अभय शर्मा
ई. राधेश्याम शर्मा
प्रतिलिपि डाक से
१. सचिव , राज्यपाल महोदय
२. मुख्य मन्त्री , उत्तरप्रदेश शासन
३. प्रमुख सचिव , उत्तरप्रदेश शासन
४. मुख्य सचिव , प्रशासनिक सुधार विभाग , उत्तरप्रदेश शासन
५. मुख्य सूचना आयुक्त , उत्तरप्रदेश राज्य सूचना आयोग , लखनऊ
१. सचिव , राज्यपाल महोदय
२. मुख्य मन्त्री , उत्तरप्रदेश शासन
३. प्रमुख सचिव , उत्तरप्रदेश शासन
४. मुख्य सचिव , प्रशासनिक सुधार विभाग , उत्तरप्रदेश शासन
५. मुख्य सूचना आयुक्त , उत्तरप्रदेश राज्य सूचना आयोग , लखनऊ
Saturday, December 22, 2018
cake making work shop
Special batch for Christmas and New Year
Two days Workshop
Time - 12 to 2:30 pm
Registration Fees - Rs. 2500/-
Contact - Khattry's Cooking Classes
Sector-C, Aliganj, Lucknow
☎ 8799690881
Sector-C, Aliganj, Lucknow
☎ 8799690881
In class you have to learn -
1. How to make sponge 1. Vanilla 2. Chocolate
2. Pineapple Icing
3. Chocolate Icing
4. Black Forest Icing
5. White Ganache Marble Icing
6. How to make doll cake
(Totally eggless class)
1. How to make sponge 1. Vanilla 2. Chocolate
2. Pineapple Icing
3. Chocolate Icing
4. Black Forest Icing
5. White Ganache Marble Icing
6. How to make doll cake
(Totally eggless class)
In class we also discuss different flavors and designs of cakes 🎂🥧🍰🍮
* Fully Hands on Class
* Printed Recipes
* Take away all goodies
* Lifetime Guidance and Experience
* Printed Recipes
* Take away all goodies
* Lifetime Guidance and Experience
Prior Registration is compulsory.
Sunday, December 9, 2018
choclate making wok shop

कुकीज़ बनाने की कार्यशाला 🍩🍪🍘🍥
रविवार को विशेष बैच
दिनांक-25 नवंबर, 2018
समय-12:30 से 5 बजे तक
दिनांक-25 नवंबर, 2018
समय-12:30 से 5 बजे तक
रजिस्ट्रेशन फीस - rs. 1200 /-
स्थान - aliganj (आस-पास aliganj पोस्ट कार्यालय और cms), लखनऊ
संपर्क - khatry की चॉकलेट
☎ 8799690881
☎ 8799690881
कक्षा में आपको 9 प्रकार के कुकीज़ सीखना पड़ता है -
1. नमकीन जीरा कुकी
2. मिक्स ड्राई फ्रूट्स कुकी
3. नट मोचा कुकी
4. नारियल कुकी
5. जिम जाम कुकी
6. मार्बल कुकी
7. tutty fruty कुकी
8. आत्ता कुकी
9. नानख़ताई कुकी
1. नमकीन जीरा कुकी
2. मिक्स ड्राई फ्रूट्स कुकी
3. नट मोचा कुकी
4. नारियल कुकी
5. जिम जाम कुकी
6. मार्बल कुकी
7. tutty fruty कुकी
8. आत्ता कुकी
9. नानख़ताई कुकी
क्लास में हम भी कुकीज़ के अलग-अलग जायके पर चर्चा करते हैं
सभी सामग्री प्रदान की जाएगी और छात्र अपने द्वारा बनाए गए कुकीज़ का एक बॉक्स ले जाते हैं 🍥🍩🍪🍩
पहले पंजीकरण अनिवार्य है.
Subscribe to:
Posts (Atom)


