Friday, September 29, 2017

ज़िन्दगी के बचे हुए 20 वर्षों में क्या क्या कर लेना चाहिए ।

आज अखबार में है कि ज़िन्दगी के बचे हुए 20 वर्षों में क्या क्या कर लेना चाहिए ।
अकेले कहीं घूमने जाने चाहिए : ( मैं दो साल पहले ही अकेले जयपुर घूम आई )
जिस चीज़ से डर लगे वो काम कर लेना चाहिए , रात में अकेले कोई डरावनी फ़िल्म देखना या कोई एडवेंचर स्पोर्ट ट्राई करना : (ज़िप लाइन और स्कूबा डाइविंग कर लिया )
सोशल मीडिया पर आपके पास 1000 फ्रेंड्स होंगे पर एक बेस्ट फ्रेंड बनाइए, जिसे अब जब चाहे नम्बर घुमा कर बात कर सकें : (हमेशा से ऐसे दोस्त रहे हैं, उन्हें पता है  )
कोई नया खेल सीखिए, दौड़ना, तैरना,बैडमिंटन या जिम में वर्क आउट : ( हाल में ही कुछ शुरू किया है )
कुछ भी जमा करना शुरू कीजिए , जैसे फ्रिज मैग्नेट ।जहां भी घूमने जाते हैं वहां से एक लाकर फ्रिज पर लगा दीजिये। जब भी इस पर नज़र पड़ेगी, यात्रा की सुखद स्मृतियां याद आएगी : ( ये मैं हर जगह से जरूर लाती हूँ, बल्कि मेरी फ्रेंड्स भी मेरे लिए ले आती हैं )
ये सब तो कर ही लिया यानि कि मेरे दिन पूरे हो गए 
आलेख के साथ तस्वीर एक स्त्री की ही है...क्यों भई क्या सारे पुरुष ये सब कर लेते हैं 

Thursday, September 28, 2017

यदि कोई किसान बन्धु एलोवेरा पौधा बेचना एवं केंचुआ खाद हेतु केचुआ खरीदना चाहते हैं तो संपर्क करें

यदि कोई किसान बन्धु एलोवेरा पौधा बेचना एवं केंचुआ खाद हेतु केचुआ खरीदना चाहते हैं तो संपर्क करें

क्या आप एलोबेरा का पौधा बेचना चाहते है |

किसान समाधान से जुड़कर  आप अपनी कृषि और कृषि व्यपार को आगे बढ़ा सकते है |इसी कड़ी में आज आप से एलोबेरा के पौधों के बारे में जानकारी दी जा रही  है | किसान भाई लोग किसान समाधान से सम्पर्क किया है की उन्हें एलोबेरा का पौधा चाहिए | अगर आप में से किसी भी किसान के पास एलोबेरा का पौधा है और वह किसान बेचना चाहता है तो आप किसान समाधान से सम्पर्क कर सकता है |
अगर आप के पास एलोबेरा के पौधे  है तो आप इस नंबर पर सम्पर्क कर सकते है |
मो. :-8602332813, 9098298238

क्या जैविक खेती के लिए केचुएँ की जरुरत है |

किसान भाई आप के लिए किसान समाधान एक नई योजना लेकर आया है , इससे आप अपने कृषि तथा कृषि व्यापर को बड़ा सकते हैं | इस योजना में जो आप को खरीदना है या बेचना है तो किसान समाधान के वेबसाईट में जाकर खरीद विक्री में अपने उत्पाद की जानकारी दे सकते हैं |
किसान समाधान अब आप के द्वारा भेजे गए जानकारी को अपने वेबसाईट पर देगा | आज इसी कड़ी में केंचुआ की जानकारी लेकर आया है | किसान भाई आप अपने घर पर ही केंचुआ खाद बना सकते हैं | इसके लिए जिस किसी को केंचुआ खाद की जरुरत है | किसान समाधान से सम्पर्क कर सकते है | किसान समाधान से एक किसान ने सम्पर्क किया है की उसके पास 30 किलो केंचुआ है जिसका कीमत 500 रु. प्रति किलो है | आप में से किसी भी किसान को केंचुआ खाद खरीदना होगा तो आप इस नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं |

मो.:- 8602332813, 9098298238

Wednesday, September 27, 2017

PRONOUN CHART

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DIVISIBILITY FACTOR-5

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divisibility factor-3

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divisbility factor

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बल्क शॉर्ट मेसेज सर्विस (एसएमएस) व्यवसाय

उन्होंने सातवीं कक्षा तक चंद्रबाबानी मेमोरियल हाई स्कूल में पढ़ाई की उसके बाद उन्होंने 10 वीं कक्षा तक नोपनी हाई स्कूल में अपना अध्ययन कार्य किया।

 वो समझाना चाहते थे कि कंपनी जितना पैसा मैनुअल एडवर्टाइजिंग में खर्च करती है उतना वो उसको डिजिटाइज करने में लगाए तो बड़ा फायदा होगा। क्योंकि यह न केवल मौजूदा ग्राहकों को जगह में रखने में मदद करता है बल्कि उनके व्यापार के अवसरों को भी बढ़ाया है।

एक मध्यवर्गीय परिवार से आने वाले किसी भी शख्स का सपना क्या होता है? यही न कि एक अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के बाद मोटी रकम वाली सम्मानजनक नौकरी मिल जाए। लेकिन दीपक अग्रवाल अपनी इस 9 से 5 वाली और मौटे वेतन वाली नौकरी से संतुष्ट नहीं थे। एक दिन उन्होंने अपने कंफर्ट क्षेत्र से बाहर निकलने का फैसला किया और अपना खुद का उद्यम शुरू किया। और सिर्फ चार वर्षों में, कोलकाता में उनकी डिजिटल मीडिया कंपनी के करीब 3,000 ग्राहक हैं। अगले वित्त वर्ष में इसका कारोबार 10 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा। 31 जनवरी, 2013 को दीपक ने वन एक्स सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को अपने बचत से करीब एक लाख रुपये के निवेश के साथ लॉन्च किया। आज उनका सुव्यवस्थित कार्यालय कोलकाता के प्रतिष्ठित लाल बाजार के पास है। वह 23 लोगों को रोजगार देते हैं और ग्राहकों की उनकी लंबी सूची में पिज्जा हट, केएफसी, शॉपर्स स्टॉप, टेक महिंद्रा, टाटा मोटर्स और एशियाई पेंट्स जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं।
अपना काम शुरू करने की धुन
13 जून, 1987 को कोलकाता में जन्मे दीपक अपने माता-पिता के तीन बच्चों में से सबसे बड़े हैं,। उनके एक छोटे भाई और बहन हैं। उनके पिता हरि किशन अग्रवाल एक दुकान चलाते थे। जहां घड़ियां और अन्य उपहार वस्तुएं बेची जाती थीं। उनके पिता का ये कारोबार काफी लाभप्रद अवस्था में चल रहा था। दीपक अपने उस आरामदायक जीवन के बारे में बताते हैं, दुकान से आमदनी हमारे हर तरह खर्चों को उठाने करने के लिए पर्याप्त थी लेकिन मैं हमेशा अपने लिए एक जगह बनाना चाहता था और मेरे पिता की सहायता करने भर से संतुष्ट नहीं था। उन्होंने सातवीं कक्षा तक चंद्रबाबानी मेमोरियल हाई स्कूल में पढ़ाई की उसके बाद उन्होंने 10 वीं कक्षा तक नोपनी हाई स्कूल में अपना अध्ययन कार्य किया।
अपने ऑफिस में दीपक

दीपक के मुताबिक, मेरी स्नातक स्तर की पढ़ाई के साथ मैंने खुद को चार्टर्ड एकाउंटेंसी (सीए) और कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) पाठ्यक्रमों के लिए एक साथ 2007 में नामांकित करवा लिया था।

दीपक के मुताबिक, मेरे स्कूल के दिनों के दौरान मैंने एक अखबार के साथ एक फ्रीलान्स पत्रकार के रूप में भी काम किया। मैं अलग-अलग व्यक्तित्वों मिलता था और उन्हें साक्षात्कार करता था। मुझे अभी याद है कि लालू प्रसाद यादव और सीताराम येचुरी जैसे राजनीतिक दिग्गजों से मुलाकात काफी उत्साहवर्धक थी। यद्यपि मेरे काम के लिए मुझे भुगतान नहीं किया गया था, लेकिन इस काम से मुझे अपने संचार कौशल को बढ़ाने में मदद मिली। उन्होंने स्कूल की बहस में हमेशा सक्रिय भाग लिया। 2007 में उन्होंने सेंट जेवियर्स के कॉलेज में प्रवेश लिया और 2010 में वाणिज्य में अपनी स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी की। दीपक के मुताबिक, मेरी स्नातक स्तर की पढ़ाई के साथ मैंने खुद को चार्टर्डएकाउंटेंसी (सीए) और कंपनी सेक्रेटरी (सीएस)  पाठ्यक्रमों के लिए एक साथ 2007 में नामांकित करवा लिया था।
मार्च 2010 में उन्हें 18500 के मासिक वेतन के साथ अर्न्स्ट एंड यंग के साथ एक प्रशिक्षु के रूप में पहली नौकरी मिल गई। मैंने दिल्ली में एक वर्ष के लिए एक प्रशिक्षु के रूप में काम किया और फिर मुझे जून 2011 में कोलकाता वापस स्थानांतरित कर दिया गया। मैंने दिसंबर 2012 में पद छोड़ने का निर्णय लेने से पहले कोलकाता कार्यालय में काम करना जारी रखा। तब तक उद्यमशीलता के बीज ने पहले ही अपने मन में अंकुरण शुरू कर दिया था। मेरे परिवार के बारे में अच्छी बात यह थी कि उन्होंने मुझे कुछ भी करने के लिए दबाव नहीं डाला।मेरे कॉलेज के दिनों में मैं अक्सर अपने पिता को अपनी दुकान में सहायता करता था लेकिन उन्होंने मुझे अपने व्यवसाय में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया।
खुद पर भरोसा होता सफलता की पहली सीढ़ी
दीपक ने अपनी 70 हजार वेतन वाली नौकरी छोड़ दी। दीपक के मुताबिक, तब मेरे परिवालों को थोड़ी चिंता सताने लगी। उन्हें लग रहा था कि कहीं मैं जल्दबाजी में तो ये निर्णय नहीं ले रहा। वे मेरे भविष्य के बारे में संदेह कर रहे थे। लेकिन मैं अपने आप में दृढ़ता से विश्वास करता रहा। हर किसी ने सोचा कि मैं पागल हो गया था क्योंकि मैं एक जोखिम भरा व्यवसाय में उतरने के लिए एक कड़ी मेहनत से काम चला रहा हूं। लेकिन अच्छी बात ये थी कि दीपक का स्टार्टअप आइडिया बहुत ही बेहतरीन था, बिल्कुल आउट ऑफ द बॉक्स। वह संभावित ग्राहकों के पास गए और उन्हें समझाया कि कैसे अपने डेटाबेस में किसी भी कंपनी के लिए कॉन्टैक्ट नंबरों और ईमेल को दर्ज कराते रहना महत्वपूर्ण है। उनका आइडिया बिल्कुल ही सिंपल सा था। वो समझाना चाहते थे कि कंपनी जितना पैसा मैनुअल एडवर्टाइजिंग में खर्च करती है उतना वो उसको डिजिटाइज करने में लगाए तो बड़ा फायदा होगा। क्योंकि यह न केवल मौजूदा ग्राहकों को जगह में रखने में मदद करता है बल्कि उनके व्यापार के अवसरों को भी बढ़ाया है।
अपनी वाइफ और कर्मचारियों के साथ दीपक (फोटो साभार- द वीकेंड लीडर)
दीपक के मुताबिक, मेरी कंपनी बल्क शॉर्ट मेसेज सर्विस (एसएमएस) व्यवसाय में काम करती है। जो दो प्रकार के होते हैं ट्रांसेक्शनल और प्रमोशनल संदेश। लेनदेन या गैर-प्रचारक संदेश हैं जिन्हें उत्पाद या सेवा के उपयोग के लिए जरूरी जानकारी देने के लिए हर ग्राहक को भेजा जाता है। ट्रांजैक्शनल संदेशों में बैंक द्वारा एक खाता धारक को उनके उपलब्ध खाता बैलेंस के बारे में या एक ग्राहक द्वारा भेजे गए संदेश के बारे में एक संदेश भेजा जाता है जिसमें एक ऑनलाइन लेनदेन करने के बाद इनवॉइस राशि के संबंध में कोई संदेश शामिल होता है। उन्होंने घर से व्यापार शुरू किया। 1 लाख रुपए इंवेस्ट किए, एक करोड़ एसएमएस भेजने के लिए बल्क एसएमएस खरीदने के लिए। दीपक के मुताबिक योजना को हमारे ग्राहकों के लिए हमारे ग्राहकों के लिए एक प्रीमियम पर एसएमएस भेजना था। शुरू में हमें ठंडे जवाब मिला लेकिन मुझे विश्वास था कि यह अवधारणा सफल होगी।
आखिरकार, बाद में 2013 में, एक शैक्षिक फर्म मुझे दो महीने से अधिक समय तक लगातार उनका पीछा करने के बाद एसएमएस के माध्यम से विज्ञापन का ऑर्डर दे दिया। एक बार जब ग्राहक मिल गए फिर दीपक का व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ने लगा। पहले वर्ष में उनकी कंपनी ने लगभग 32 लाख के करीब 500 ग्राहकों का कारोबार दर्ज किया। दीपक के मुताबिक, हरेक ग्राहक ने हमें अन्य ग्राहकों के बारे में बात करना शुरू कर दिया। हमने हमेशा सबसे अच्छी, पारदर्शी सेवा दी, जो हमारे पक्ष में काम करती थी। दीपक की कंपनी 2017-18 के वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रुपये का कारोबार कर रही है। इस युवा उद्यमी के पास युवाओं के लिए सिर्फ एक सलाह है कि अपने सपने का पीछा करो और हार न दें। यदि आप इसके लिए जाने का फैसला करते हैं तो कुछ भी मुश्किल नहीं है।

Sunday, September 24, 2017

शायद साइकिल से कुछ हेल्प हो पाए

शायद साइकिल से कुछ हेल्प हो पाए 
यश और यश की बहन 4 km अपने दादा दादी की दवाई पैदल लेने जाते है , दोनों inteligent हैँ ,छोटी सी उम्र मै ही माँ बाप का प्यार खो चुके हैं अब बीमार दादा दादी के साथ एक छोटे से कमरे मै rent पर रहते है 
दोनों बच्चे जमीन पर सोते है 😪😪😪
#kukngo
Wats app
9017550001

अधिकृत टिकट बुकिंग एजेंट बनने के लिए पोर्टल ई-रेल डॉट इन (erail.in) पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान अपना विस्तृत डीटेल्स भरकर औपचारिकता पूरी करनी होगी।

ऑथराइज्ड टिकट बुकिंग से टिकट कैंसिलेशन का डर नहीं होगा। तत्काल टिकट जनरल पब्लिक ओपनिंग टाइम के आधे घंटे बाद भी बुक हो जाएंगे। किसी ट्रेड लाईसेंस की जरूरत होगी।

सांकेतिक तस्वीर
अधिकृत टिकट बुकिंग एजेंट बनने के लिए पोर्टल ई-रेल डॉट इन (erail.in) पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान अपना विस्तृत डीटेल्स भरकर औपचारिकता पूरी करनी होगी।

आइआरटीसी की टीम, एप्लीकेशन फॉर्म रजिस्ट्रेशन फॉर्म और रजिस्ट्रेशन फीस मिलने के बाद एजेंसी के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति से संपर्क करेगी। इसके बाद केवाइसी सब्मिशन की प्रक्रिया पूरी होगी। 

भारतीय रेलवे ने टिकट बुकिंग को लेकर एक तरफ तो छह बैंकों पर बैन लगा दिया है, दूसरी ओर टिकट बुकिंग एजेंसी शुरू करने के लिए स्वरोजगार की संभावनाएं खोल दी हैं। रेलवे के संबंधित प्रोसेस पूरा करते हुए कोई भी व्यक्ति टिकट बुकिंग एजेंट बनकर कर कमाई सकता है। इस काम में कोई निवेश नहीं करना है। गौरतलब है कि आइआरसीटीसी की ई-टिकटिंग वेबसाइट से रोज देशभर में लाखों लोग टिकट बुक कराते हैं। इस काम से एजेंट को स्लीपर क्लास पर 10 रुपये और एसी क्लास पर 20 रूपये की कमाई प्रति टिकट आमदमी हो सकती है। जितना अधिक टिकट बुक होंगे, उतनी अधिक कमाई होगी।
आइआरटीसी टिकट बुकिंग एजेंट इसके साथ अन्य भी कई लाभ प्राप्त कर सकते हैं। मसलन, फ्लाइट बुकिंग, बस बुकिंग, कैब-टैक्सी बुकिंग, होटल बुकिंग, आइआरटीसी कस्टोमाइस्ड टूर पैकेज, डोमेस्टिक मनी ट्रांस्फर और मोबाइल डीटीएच रीचार्ज-वन सिम ऑल रिचार्ज जैसी कॉम्प्लीमेंट्री सर्विसिस भी संभव हो जाएगी। अनलिमिटेड टिकट बुक किए जा सकते हैं। ऑथराइज्ड टिकट बुकिंग से टिकट कैंसिलेशन का डर नहीं होगा। तत्काल टिकट जनरल पब्लिक ओपनिंग टाइम के आधे घंटे बाद भी बुक हो जाएंगे। किसी ट्रेड लाईसेंस की जरूरत होगी।
इसके अलावा आईआरसीटीसी ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और आईसीआईसीआई समेत छह बैंकों द्वारा रेल टिकट की ऑनलाइन बुकिंग प्रतिबंधित कर दी। अब यात्री सिर्फ एचडीएफसी, इंडियन ओवरसीज बैंक, केनरा बैंक, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक के कार्ड से ही ई-टिकट का भुगतान कर सकते हैं। सुविधा शुल्क को लेकर आईआरसीटीसी और बैंकों के विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। आईआरसीटीसी ने इस साल के शुरूआत में बैंकों से सुविधा शुल्क की राशि का बराबर-बराबर बांटने के लिए कहा था लेकिन बैंकों का आरोप है कि आईआरसीटीसी शुल्क की पूरी राशि खुद ही रखना चाहती है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय बैंक एसोसिएशन और आईआरसीटीसी के बीच हुई बातचीत भी बेनतीजा रही।

ई-टिकट की बुकिंग के लिए किये गये ऑनलाइन भुगतान हासिल करने वाले सभी मर्चेंट को एक हिस्सा यानी मर्चेंट डिस्काउंट अमाउंट (एमडीआर) संबंधित बैंक को देना होता है, जिसके कार्ड के जरिए भुगतान होता है। एमडीआर भुगतान राशि के अनुसार तय किया जाता है। बैंकों की ओर से इस मसले पर कहा गया कि सामान्य तौर पर जो मर्चेंट होता है, वह संबंधित बैंक को पैसा देता है, लेकिन आईआरसीटीसी ने उन्हें कभी पैसा नहीं दिया, इस वजह से ये राशि ग्राहकों से वसूली जाती रही है।

अधिकृत टिकट बुकिंग एजेंट बनने के लिए पोर्टल ई-रेल डॉट इन (erail.in) पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान अपना विस्तृत डीटेल्स भरकर औपचारिकता पूरी करनी होगी। यह रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया कम्पलीट करने के बाद आईआरसीटीसी के संबंधित अधिकारी प्रार्थी से संपर्क करेंगे। टिकट बुकिंग एजेंसी शुरू करने के लिए 30 हजार रुपए की वन टाईम रजिस्ट्रेशन फीस भी भरनी होगी, जिसमें से 20 हजार रुपए रीफंडेबल होंगे। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन के लिए register.csc.gov.in का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
 इस पोर्टल पर पहले एक रजिस्टर्ड यूजर बनना होगा। लॉग इन करने के बाद सर्विसिस कॉलम में जाकर आइआरटीसी टाइप करें। आइआरटीसी टाइप करने के बाद आइआरटीसी रजिस्ट्रेशन के लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद नया वेब पेज खुल जाने पर उसमें आइआरटीसी रजिस्ट्रेशन फॉर्म का का लिंक खुलेगा। इस पर क्लिक करते ही फॉर्म खुल जाएगा, जिसमें अपनी डीटेल्स के साथ एप्लीकेशन फीस भर कर कम्पलीट करनी होगी।
आइआरटीसी टिकट बुकिंग एजेंट बनने के लिए कई जरूरी पेपर भी जमा करने होंगे। इनमें बैंक मैनेजर/गजटेड ऑफिसर से अटेस्टिड पेन कार्ड की कॉपी, एड्रेस प्रूफ, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, टेलीफोन-बिजली-पानी-एलआईसी का अपना नया बिल, राशन पत्रिका, वोटर आईडी, बैंक खाता विवरण, सेवा कर-वैट पंजीकरण प्रमाणपत्र, गैस कनेक्शन के दस्तावेज, संपत्ति कर एवं नगरपालिका कर रसीद जैसे दस्तावेज जरूरी होंगे। इसके अलावा मोबाइल नंबर, अपना ईमेल आईडी, अपनी पासपोर्ट साईज फोटो की दो प्रतियां, डिजिटल हस्ताक्षर फ़ॉर्म और रजिस्ट्रेशन फॉर्म भी जमा करना अपरिहार्य है।
यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद आइआरटीसी की टीम, एप्लीकेशन फॉर्म रजिस्ट्रेशन फॉर्म और रजिस्ट्रेशन फीस मिलने के बाद एजेंसी के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति से संपर्क करेगी। इसके बाद केवाइसी सब्मिशन की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद ई-टोकन क्रिएट कर दिया जाएगा। फिर ई-मेल, मोबाइल नंबर और शॉप एड्रेस का वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसके बाद एक ओटीपी मिलेगा, जिससे आइआरटीसी सर्विस असाइन होगी। फिर एक ट्रेनिंग और वेलकम किट मिलेगी जिसके बाद आप टिकट बुकिंग शुरू कर सकते हैं।

Friday, September 22, 2017

जाने सरकारी योजना का लाभ कैसे उठायें



अक्सर किसान पूछते हैं की सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे उठायें | किसके पास जाकर फॉर्म भरें , सब्सिडी का लाभ कैसे प्राप्त कर सकते है | सोलर पम्प , ट्रैक्टर, पॉवरटील्लर, पम्प , डीजल पम्प , मोटर, दवा छिडकने वाली मशीन, थ्रेसर, इत्यादि कैसे पर्याप्त कर सकते हैं | आज आप सभी किसान भाई को सरकारी योजनाओं के बारे में बताते हैं | जितनी भी तरह के मशीनरी पार्ट या मशीन है जिस पर सरकार सब्सिडी देता है उन सभी का लाभ आपको कैसे मिल सकता है I

फॉर्म कैसे भरें |

देश के किसी भी जिले के किसानों के लिए यह जानना जरुरी है की सभी मशीन का फार्म ऑनलाइन हो चूका है | किसान सबसे पहले कुछ दस्तावेज एकत्र कर लें | जैसे खसरा नंबर , पहचान पत्र, जाति प्रमाण पत्र (अगर आप कोटे से हैं तो) फोटो, बैंक एकाउंट आदि | यह सभी लेकर नजदीकी इन्टरनेट की दुकान पर जाकर  जिस दुकान से सभी तरह का फार्म भरा जाता है | उस दुकान वाले से कहें की मेरा फॉर्म भर दें | दुकानदार आप का फॉर्म कुछ फीस लेकर भर देगा | फार्म में दो बातों पर ध्यान देना |
  • पहला आप कौन सी मशीन लेना है |
  • दूसरा की कौन सी कम्पनी का लेना है
अगर आप ऑनलाइन काम कर लेते हैं तो आप घर से ही फॉर्म भर सकते हैं |
अगर किसान दोनों तरह से फार्म भरने में नाकाम है तो कोई बात नहीं तीसरा तरीका भी है | किसान सबसे पहले यह तय करे की उसे क्या लेना है | फिर सभी दस्तावेज लेकर नजदीक के उस कम्पनी के एजेंसी या डीलर के पास पहुँच जाएँ जिस कम्पनी का मशीन खरीदना है और उसे बतायें की मुझे यह मशीन खरीदना है  सरकारी सब्सिडी पर | वह एजेंसी आप का फार्म भर देगी या अपने पास के दुकान पर भेज देगा | जंहा पर इस तरह का फार्म भरा जाता है |
सबसे अच्छा तरीका यही रहेगा की किसान अपने पास के एजेंसी या डीलर के पास जाकर अपनी फार्म को भरें  | जिससे डीलर आप को सहायता करेगा |

फार्म भरने के बाद क्या करें |

जैसे ही आप अपना फार्म भरते है वह फार्म सरकारी कार्यालय के पास पहुँच जायेगा | अब आप के द्वारा माँगा गया मशीन या कोई और समान पर कार्यालय में बैठा व्यक्ति उस पर विचार करेगा | आप को यह भी याद रखना चाहिए की कोई भी सब्सिडी की मशीन पहले आओ तथा पहले पाओं पर निर्भर करता है | इस लिए आप जल्द से अपना फार्म भरें | सरकारी कार्यालय में बैठा अधिकारी आप के फार्म पर विचार कर के यह तय करेगा की मशीन आप को दिया जायेगा की नहीं | कार्यलय से आप को मशीन देने के लिए फार्म को स्वीकृत कर लिया जाता है तो आप को रिटन फार्म का एक कॉपी ऑनलाइन भेजेगा | आप उस कॉपी का प्रिंट निकल लें |

अब आगे क्या करें |

किसान नजदीकी डीलर या एजेंसी के पास जाकर अपना सरकारी कागज दिखाएँ | उस कागज पर एक सरकारी कोटेशन लिखा रहेगा | जिसमें मशीन का कुल कीमत | सरकार के द्वारा सब्सिडी | तथा आप कम्पनी को कितना पैसा देना है | डीलर आप को एक कम्पनी का बैंक एकाउंट देगा | जिसमें आप अपना हिस्सा जमा कर दे | कम्पनी सब्सिडी का पैसा सरकार से ले लेगी | आप इस नियम को इस तरह समझें अगर कोई मशीन 1 लाख रूपये की है | और सरकार का सब्सिडी 40% है | तो आप को 60% पैसा कम्पनी या डीलर को देना होगा | इसका मतलब यह हुआ की किसान 1 लाख की मशीन में 60,000 रु. डीलर के पास जमा करना होगा तथा कम्पनी 40,000 रु. सरकार से ले लेगी | आप अपना हिस्सा देने के बाद डीलर से मशीन घर ले जा सकते है |
 अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी तो नीचे दिये गये लाल घंटी को दबाएँ ताकि आप तक और अधिक इस तरह की जानकरी पहुँचती रहे

ABOUT KHOVA BADAM BURFI

ABOUT KHOVA BADAM BURFI

Almonds are filled with health benefits and have a great taste but added to sweet treats they just enhance the sweet flavours with their nutty taste. Bombay Tiffanys brings you their Khova Badam (almond) Burfi. You will love the crunch, texture and flavour of this sweet treat.

CASHEW BURFI

ABOUT CASHEW BURFI

Beautiful diamond cuts of cashew barfi come to you from Bombay Tiffanys Annexe in Mysore. The goodness of cashews in a barfi make for a great post meal sweet bite but these delicious barfis are also great for gifting during festivals. Kids and adults love this dessert and it is sure to disappear within seconds of opening the box!

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➡ Bigshot 
➡ Cuttlebug
➡ Ebosser
➡ Vagabond
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Home decor Decoupage course is organised by The Craft shop in association with Christina's Art Studio. 
Learn to create your own customised home decor products.
The workshop would cover different techniques with International standards. 
Date : 22-9-2017 & 23-9-2017 
Time : 10:30 am to 5:30 pm 
No of techniques: 10 techniques 
No of items : 10 items
Fees : ₹ 8000/- 
Limited seats 

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Thursday, September 21, 2017

किसानों के लिए दुग्‍ध उत्‍पादन को और भी लाभदायक बनाने के लिए भारत सरकार ने शुरू की नई योजना राष्ट्रीय बोवाईन उत्पादकता मिशन

किसानों के लिए दुग्‍ध उत्‍पादन को और भी लाभदायक बनाने के लिए भारत सरकार ने शुरू की नई योजना राष्ट्रीय बोवाईन उत्पादकता मिशन

किसानों के लिए दुग्‍ध उत्‍पादन को और भी लाभदायक बनाने के लिए भारत सरकार ने एक नई योजना राष्ट्रीय बोवाईन उत्पादकता मिशन को 825 करोड़ रुपए के आबंटन के साथ अनुमोदित किया है
भारत 15 वर्षों से दुग्‍ध उत्‍पादन के क्षेत्र में विश्‍व अग्रणी हैं और यह सफलता छोटे डेयरी किसानों, दुग्‍ध उत्‍पादकों, प्रसंस्‍करणकर्ताओं, नियोजकों, संस्‍थानों तथा अन्‍य सभी पणधारियों के कारण है। उन्होंने आगे कहा कि दूध उत्पादन में हम लगातार प्रगति कर रहे हैं लेकिन अभी भी मीलों  का सफर तय करना है ताकि हम देश के हर बच्‍चे को दूध सहित पर्याप्‍त पोषण दे सकें।  कृषि मंत्री ने यह बात आज पूसा, नई दिल्ली में विश्व दुग्ध दिवस पर आयोजित समारोह में कही।
कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में 2011-14 में 398 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ था लेकिन 2014-17 में यह 465.5 मिलियन टन हो गया जो कि 16.9% की वृद्धि है। इसी तरह 2011-14 में किसानों की आमदनी रु. 29 प्रति लीटर थी जो 2014-17 में  रु. 33 प्रति लीटर हो गयी जो कि 13.79% की वृद्धि है।
देशी गोपशुओं की उत्‍पादकता को बढ़ाने के लिए देशी नस्‍लों के विकास और संरक्षण हेतु आबंटन को कई गुना बढ़ाया गया है। देश में पहली बार “राष्‍ट्रीय गौकुल मिशन” नामक एक नई पहल की गई। इसका उद्देश्‍य देशी बोवाईन नस्‍लों का संरक्षण तथा विकास करना है। इस मिशन के अंतर्गत मुख्यतः गोकुल ग्रामो की स्थापना करना, फील्ड परफॉरमेंस रिकॉर्डिंग करना, गोपालको एवं गौपालन से संबंधित संस्थानों को प्रति वर्ष सम्मानित करना, बुलमदर फर्म्स को सुदृढ़ करना, देसी नस्ल के उच्च अनुवांशिक गुणवता के साँड़ को वीर्य उत्पादन केन्द्रों में अधिक संख्या में शामिल करना इत्यादि है ।

देशी नस्‍लों का समग्र और वैज्ञानिक रूप से विकसित तथा संरक्षित करने के लिए उत्‍कृष्‍टता केंद्र के रूप में कार्य करने हेतु दो “राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्रों” की स्‍थापना की जा रही है। राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र देशी जर्मप्‍लाज्‍म का भण्‍डार होने के अलावा देश में प्रमाणित जेनेटिक्‍स के स्रोत भी होंगे। मध्‍य प्रदेश तथा आंध्र प्रदेश दोनों राज्‍यों को क्रमश: उत्‍तरी और दक्षिणी क्षेत्रों में एक-एक राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र की स्‍थापना हेतु 25- 25 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। आंध्र प्रदेश का राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र लगभग तैयार है।   कृषि मंत्री ने देशी नस्लों के बारे में बताया कि उष्‍मा–साध्‍य तथा रोग प्रतिरोधी होने के अलावा गायों की देशी नस्‍लें ए 2 टाइप का दूध उत्‍पादित करने के लिए जानी जाती हैं जो विभिन्‍न पुरानी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं, जैसे ह्दय तथा रक्‍त वाहिकाओं संबंधी मधुमेह तथा स्‍नायु संबंधी विकारों से बचाने के अलावा कई अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी लाभ प्रदान करता है। उन्होंने कहा देश में ए 2 ए 2 दूध को अलग से बेचे जाने की आवश्‍यकता है।  दूध की लगातार बढ़ती मांग पूरा करने तथा किसानों के लिए दुग्‍ध उत्‍पादन को और भी लाभदायक बनाने के लिए भारत सरकार ने एक नई योजना राष्ट्रीय बोवाईन उत्पादकता मिशन को 825 करोड़ रुपए के आबंटन के साथ अनुमोदित किया है। देश में पहली बार राष्‍ट्रीय गौकुल मिशन के अंतर्गत ई पशु  हाट पोर्टल स्थापित किया गया है। यह पोर्टल गुणवत्‍तापूर्ण बोवाईन जर्मप्‍लाज्‍म की उपलब्‍धतता के संबंध में प्रजनकों और किसानों को जोड़ने में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे किसान एवं प्रजनक  देशी नस्ल की गाय एवं भैंसो को खरीद एवं बेच सकेंगे। कृषि मंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री का उद्देश्‍य किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करना है। इस प्रक्रिया में डेयरी क्षेत्र एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभायेगा। उन्होंने कहा कि सभी पणधारियों को इस उद्देश्‍य को प्राप्‍त करने के लिए प्रयास करने होंगे। इस अवसर पर कृषि मंत्री ने गौपालकों को राष्ट्रीय गोपाल रत्न और कामधेनू एवार्ड 2917 पुरस्कार भी प्रदान किया। ये दोनों पुरस्कार वर्ष 2017 से शुरू किए गये हैं।

Tuesday, September 19, 2017

Faridabad may not deserve status as smart city as the Haryana Govt and Faridabad Municipal

Faridabad may not deserve status as smart city as the Haryana Govt and Faridabad Municipal Corporation seems to be failure in even attending to the complaints of sewage blockage for pasr 3/ 4 months. Surprising swatch bharat campaign seems to ineffective even in BJP ruled States. Hope officials will understand and not wait for 2019 elections. By the way wether the cleaning target being fixed for 2022

सोलर पॉवर फेंसिंग की मदद से किसान भाई अपने खेतों को जंगली जानवरों (नीलगाय,बंदर,हिरण,जगली सुअर,गाय,बकरी) को रखे दूर एवं करें अपनी फसलों की रक्षा

सोलर पॉवर फेंसिंग की मदद से किसान भाई अपने खेतों को जंगली जानवरों (नीलगाय,बंदर,हिरण,जगली सुअर,गाय,बकरी) को रखे दूर एवं करें अपनी फसलों की रक्षा

सोलर पॉवर फेंसिंग क्या है

सोलर पावर फेंसिंग में खेत के चारो तरफ स्टील के तार की बाउंड्री बना कर उसमे डी सी करंट थोड़े थोड़े अंतराल में छोड़ा जाता है। जिसके झटके लगने से पशु खेत के पास नही आता हे और मानसिक रूप से उनमें डर बेठ जाता है। साथ ही इसमें एक तेज आवाज का हॉर्न भी लगा सकते है। जिससे किसान को पता चलता हैं। की खेत की बाड़ के कोई सम्पर्क में आया है।

सोलर पॉवर फेंसिंग किस तरह से कम करती है

सोलर फेंसिंग में एक सोलर प्लेट लगी होती है जो की 12वाल्ट की बेटरी को पावर देती है और उसे चार्ज करती है। और उस बेटरी से पावर फेज कंट्रोलर में जोड़ा जाता है। फिर कंट्रोलर के जरिये बाड  या तार फेंसिंग में डी सी करंट छोड़ा जाता है।यह करंट रोक रोक कर एक एक सेकंड के अन्तराल में तारो में जाता है। जो भी जानवर इसके पास आता हे उसे इसका जबर्दस्त झटका लगता है। जिससे वो डर के भाग जाता हें। और इन तारो को स्पर्श होते ही आलार्म बज जाता है जिस से किसान को भी सुचना मिल जाती है।
इस करंट का झटका बहुत तेज होता है। लेकिन इससे किसी भी प्रकार का कोई भी नुकसान नही होता है। क्यों की ये डी सी वोल्टेज का होता हे और रुक रुक के आता हें ।

सोलर पॉवर फेंसिंग से लाभ  

  • किसी भी प्रकार की जनहानि की सम्भवना नही है।
  • यह मान्यता प्राप्त है।
  • किसान इसको खुद आसानी से लगा सकता है।
  • इसका रख रखाव में कम खर्चा होता हे
  • इसका उपयोग ज्यदा समय तक लिया जा सकता है।
  • इसे अलग अलग जानवर के हिसाब से सेट कर सकते है।
  • पर्यावरण के हिसाब से भी उचित है
  • यह जानवरों के मानसिक स्थर को प्रभावित कर उसे नुकसान करने से रोकने में सक्षम है।

सावधानियां

  • तार में करेंट सामान रूप से प्रवाहित होना चाहिए
  • तार एक सिरे से दुसरे सिरे तक एक जेसा हो बिच में जॉइंट न हो।
  • तार से जमीन में अर्थ न मिलना चाहिए इसके लिए तार के पास खतपतवार या अन्य पोधो को दूर रखे।
  • जमीन में अर्थ मिलने से बेट्री कम समय तक ही असर कर पाती है।
  • बाड के लिए 12से 16 गेज के तार का प्रयोग बेहतर रहता है।
  • बाड का निर्माण अलग अलग जानवरों के हिसाब से करे।
  • किसान बाड की मरमत करते समय कंट्रोलर को बंद कर के करे।
  • समय समय पर मरमत और बेट्री को देखते रहें ।
  • उच्च क्वालटी के सिस्टम का उपयोग करे जेसे तार बेट्री सोलर प्लेट आदि।

स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्थाओं में मिली तमाम खामियों के बाद डीआईजी से एक बार फिर एडवाइजरी जारी की है

भोपाल । तमाम आदेशों-निर्देशों के बाद भी शहर के नामी स्कूल बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेपरवाह बने हुए हैं। यही वजह है कि ज्यादातर स्कूलों के न तो स्टाफ का पुलिस वेरीफिकेशन कराया गया है और न ही स्कूल परिसर में व्यवस्थित ढंग से सीसीटीवी कैमरे लगाने की जरूरत समझी गई है। जहां कैमरे लगे हैं. वहां प्रॉपर मॉनिटरिंग नहीं हो रही। यह खुलासा पुलिस अधिकारियों द्वारा निजी स्कूलों में जायजा लेने के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में सामने आया है। गौरतलब है कि रेयान स्कूल में मासूम प्रद्युम्न की हत्या और ब्लू व्हेल गेम के चलते बच्चों द्वारा की जा रही खुदकुशी की घटनाओं को देखते हुए डीआईजी संतोष कुमार सिंह ने न सिर्फ स्कूलों के लिए एडवाइजरी जारी की थी, बल्कि पुलिस अधिकारियों के अपने इलाके के स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों के निरीक्षण के बाद स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्थाओं में मिली तमाम खामियों के बाद डीआईजी से एक बार फिर एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने इस एडवाइजरी का सख्ती से पालन करने के निर्देश भी दिए हैं।
डीआईजी खुद करेंगे निरीक्षण
स्कूलों की निरीक्षण रिपोर्ट सामने आने के बाद डीआईजी ने एडवायजरी जारी करते हुए, सभी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद डीआईजी स्वयं भी स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगे।
फिर जारी की स्कूलों के लिए एडवाइजरी
* स्टाफ का पुलिस वेरीफिकेशन जल्द कराएं।
* स्कूल बसों के ड्रायवर एवं कंडक्टरों का वेरीफिकेशन
* बसों में महिला टीचर की तैनाती की जाए।
* माली, स्वीपर,गार्ड्स का चरित्र सत्यापन कराएं।
* बसों में कैमरे लगाए जाएं।

खराब होने पर तुरंत ठीक कराएं।
* स्कूल परिसर में कैमरे लगाएं उनमें 15 दिन का बैकअप रखें।
* खाली क्लास रूम में ताला लगाया जाए।
* छतों के दरवाजे लॉक रखें।
* स्वीमिंग पूल है तो स्वीमिंग क्लासेस के अलावा विद्यार्थियों को वहां जाने से रोका जाए।
* गर्ल्स-ब्वॉयज के टॉयलेट अलग हों। महिला टॉयलेट की सफाई महिला कर्मी से कराएं।
* किशोर उम्र के विद्यार्थियों को गुड टच, बैड टच पहचानने के लिए कार्यशाला आयोजित करें।
* बच्चों के असामान्य व्यवहार एवं शरीर पर चोट के निशान पाये जाने पर अभिभावक से चर्चा करें एवं बच्चों की काउंसलिंग करें।
* छात्रछात्राओं को ब्लू-व्हेल गेम के बारे में जरूरी जानकारी दें।
* परिसर के बाहर ठेले एवं दुकानों में काम करने वालों का वेरीफिकेशन कराया जाए।

पेरेंट्स ये जरूर करें

गुड़गांव के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में प्रद्युम्न की हत्या, फिर दिल्ली के स्कूल में 5 साल की बच्ची के साथ रेप. स्कूल में बच्चों के साथ होने वाले हादसे और दुर्घटनाएं मन में कई सवाल पैदा करती हैं. स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल उठते हैं. इन घटनाओं को देखकर पेरेंट्स और बच्चों के मन में डर पैदा होने लगा है. बच्चे अब स्कूलों में भी सुरक्षित नहीं हैं.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों की मानें तो साल 2015 में देशभर में बच्चों के खिलाफ क्राइम के 94,172 मामले हुए, जिसमें सबसे ज्यादा 11,420 मामले उत्तर प्रदेश में रजिस्टर किए गए.
वहीं साल 2014 से तुलना करें तो बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध के मामलों में 12.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
स्कूल में बढ़ती असुरक्षा को देखते हुए हमने बाल मनोवैज्ञानिकों से बातचीत की. गंगाराम अस्पताल की सीनियर साइकोलॉजिस्ट डॉ. रोमा कुमार से इस बारे में कहा कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जितनी स्कूल पर है, उतनी ही माता-पिता पर भी है. स्कूल बस में बैठने से लेकर स्कूल पहुंचने तक और फिर स्कूल के दौरान भी बच्चों को ट्रैक करना ना छोड़ें.
पेरेंट्स ये जरूर करें
1. स्कूल बस के ड्राइवर और कंडक्टर का नंबर रखें. स्कूल पहुंचने से पहले तक ड्राइवर और कंडक्टर से बात करते रहें. आजकल वीडियो कॉल फ्री ऑफ कॉस्ट होता है, अगर कंडक्टर या ड्राइवर के पास स्मार्टफोन है तो उससे वीडियो कॉल में बच्चे से बात कराने को कहें.
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2. स्कूल पहुंचते ही बच्चे की अटेंडेंट या क्लास टीचर से सुनिश्च‍ित करें कि बच्चा स्कूल में सुरक्षित पहुंच गया है. आजकल कई तरह के एप्लीकेशन आ गए हैं, जिससे आप अपने बच्चों को ट्रैक कर सकते हैं.
3. बच्चों को डर कर नहीं जीना चाहिए, लेकिन उन्हें ये जरूर समझाएं कि स्कूल में कहीं भी अकेले ना जाए. हमेशा किसी के साथ रहें और जहां कहीं भी जाए अपने दोस्तों और क्लास टीचर को जरूर बताएं.
4. माता-पिता ऐसे स्कूल में ही एडमिशन कराएं, जिसकी घर से दूरी 20 से 25 मिनट की हो. एडमिशन के समय ही यह भी सुनिश्च‍ित कर लें कि स्कूल के सभी क्लास, हॉल, लॉबी, यहां तक कि गार्डन एरिया में भी कैमरे लगे हों और सभी कैमरे काम करते हों और आप उससे कनेक्टेड हों.
5. स्कूल का बाथरूम ट्वायलेट कितना सुरक्षित है इस पर नजर रखें. वहां कोई अटेंडेंट बैठती है या नहीं यह भी ध्यान दें और अपने बच्चे से भी बराबर पूछते रहे. बच्चों का ट्वॉयलेट कहीं बड़े तो इस्तेमाल नहीं करते, यह भी चेक करें.
6. स्कूल में कितने गार्ड हैं और कितनी नैनीज हैं देखें. उन सभी का पुलिस वेरिफिकेशन हुआ है या नहीं. स्कूल में मौजूद सभी टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ का भी पुलिस वेरिफिकेशन हो. और सभी स्टाफ का मेंटल हेल्थ कैसा है इसकी भी जांच हो.
7. बच्चा अगर स्कूल के बारे में कुछ कह रहा है तो उसे नजरअंदाज ना करें. बात छोटी हो या बड़ी, तसल्ली के लिए संबंधित व्यक्ति से जरूर बात करें.
8. बच्चों को गुड टच बैड टच में अंतर जरूर बताएं. किसी बुरे बर्ताव पर या खराब टच पर कैसे शोर मचाना है, वहां से भागना है और कैसे तमाशा बनाना है, जरूर सिखाएं.
9. बच्चे को पसंद नहीं है तो उसे कोई किस ना करे और ना ही गले लगाए. बच्चे को इस तरह तैयार करें कि वो इन चीजों के लिए ना कह सके.
10. यहां तक कि अगर वो किसी व्यक्ति से हाथ नहीं मिलाना चाहता है तो उस पर दबाव ना डालें.
11. बच्चों को यह मालूम होना चाहिए कि उनका शरीर, उनकी मर्जी के बगैर कोई नहीं छू सकता. अगर ऐसा होता है तो उसे शोर मचाना आना चाहिए.
12. बच्चों को ये बताएं कि उनके प्राइवेट पाट्स को कोई नहीं छू सकता और ना ही उनकी तस्वीर खींच सकता है. यहां तक कि निजी अंगों की तस्वीर भी बच्चों को दिखाना क्राइम है. बच्चों को एनिमेशन के जरिये समझाएं कि स्व‍िम शूट एरिया क्या है और उसे छूने की इजाजत किसी भी व्यक्ति को नहीं है.
13. अगर इनमें से कोई भी घटना उनके साथ होती है तो वो अपने माता-पिता को जरूर बताए.
14. बच्चों को यह बताएं कि वो अपने माता-पिता और दादा-दादी और नाना-नानी के अलावा किसी भी दूसरे व्यक्ति पर भरोसा ना करें. अगर घर में ऐसा कुछ होता है तो बच्चा अपनी क्लास टीचर और माता-पिता को जरूर बताए.
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15. माता-पिता के साथ कोई भी बात राज ना रखता हो. अगर बच्चा आपसे कोई बात छुपा रहा है तो उससे बात करें और जानने की कोषिष करें कि वह ऐसा क्यों कर रहा है.

आपके बच्चे के स्कूल में सीसीटीवी नहीं है तो जरूर ये सवाल उठाएं।

ल में सीसीटीवी कैमरा है या नहीं 
सीसीटीवी कैमरे न केवल अपराधी में भय पैदा करते हैं बल्कि अपराध हो जाने की दशा में उसे पकड़ने और सजा दिलाने में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। सीसीटीवी की कॉस्ट बहुत ज्यादा नहीं होती है। अगर आपके बच्चे के स्कूल में सीसीटीवी नहीं है तो जरूर ये सवाल उठाएं।

मैसेज आता है या नहीं 
आपका बच्चा घर से निकला और स्कूल पहुंचा या नहीं इसकी जानकारी आपके पास होनी चाहिए। भले ही बच्चा छोटा हो या बड़ा, आजकल कई स्कूल बच्चों की सेफ्टी के लिए यह कदम उठा रहे हैं। अगर बच्चा स्कूल नहीं आता है तो पैरेंट्स के मोबाइल पर यह मैसेज चला जाता है कि आपका बच्चा स्कूल नहीं आया है। चेक करें इस तरह की व्यवस्था स्कूल में है या नहीं।

बस में ये चीजें हैं या नहीं 
सीबीएसई के निर्देश के मुताबिक, स्कूल बस में सीसीटीवी, स्पीड गर्वनर, अलार्म, सायरन, फर्स्ट एड बॉक्स, आग बुझाने वाला यंत्र होना चाहिए। स्कूल की बस पीले रंग की हो और खिड़कियों पर ग्रील लगी हो। स्कूल बस पर इमरजेंसी नंबर जरूर लिखे हों। आप अपने स्कूल से ये सवाल कर सकते हैं।
स्कूल में ट्रांसपोर्ट मैनेजर है या नहीं 
अगर स्कूल के बच्चे गाड़ी या बस से आते जाते हैं तो स्कूल में एक ट्रांसपोर्ट मैनेजर होना चाहिए। सीबीएसई की ओर से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, स्कूल में ट्रांसपोर्ट मैनेजर होना चाहिए, जिसका नंबर बस के बाहर और भीतर साफ साफ लिखा होना चाहिए। मैनेजर को यह देखना होगा कि ट्रैवल के दौरान बच्चों की सेफ्टी के सभी इंतजाम किए गए हैं या नहीं।

ड्राइवर कंडक्टर और अन्य स्टाफ के बारे में 
ड्राइवर के पास वैलिड लाइसेंस है या नहीं। कंडक्टर के पास लाइसेंस है या नहीं। इन दोनों सहित स्कूल के अन्य स्टाफ का वैरिफिकेशन हुआ है या नहीं। स्कूल के पास ड्राइवर का नाम, पता, बैच नंबर, लाइसेंस नंबर, फोटो सहित सारी जानकारी होनी चाहिए। सीबीएसई के निर्देश यह भी कहते हैं कि स्कूल बसों में एक ट्रेंड लेडी गार्ड होनी चाहिए। इसके अलावा कम से कम एक पैरेंट को बस में ट्रैवल करना चाहिए। वह पैरेंट बस में सफर करने वाले किसी भी बच्चे का हो सकता है।

दिल्ली पब्ल‍िक स्कूल ने छात्रों को रेडियो फ्रीक्वेंसी आईकार्ड जारी

नोएडाः गुरुग्राम के प्रद्युम्न हत्याकांड के बाद देश के सभी पैरेंट्स स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। इसी को ध्यान में रखते हुए नोएडा के दिल्ली पब्ल‍िक स्कूल ने छात्रों को रेडियो फ्रीक्वेंसी आईकार्ड जारी किया है। जो कि समय-समय पर पैरेंट्स को बच्चों की लोकेशन बताता रहेगा। यानि कि अपने कलेजे के टुकड़े की स्कूल बस में हर अपडेट्स मां-बाप को SMS द्वारा मिल जाएगी।

स्कूल में सुरक्षा का अहसास ये रेडियो फ्रीक्वेंसी आईकार्ड 
नोएडा के DPS छात्रों की सुरक्षा और उनके पेरेंट्स की चिता को ध्यान में रखते हुए सभी छात्रों के लिए रेडियो फ्रिक्वेंसी आई कार्ड जारी किए हैं। इन कार्ड्स की मदद से पैरेंट्स और स्कूल प्रशासन को बच्चों की मूवमेंट का पता चलता रहेगा। 

5वीं तक के छात्रों को जारी हुए कार्ड 
स्कूल प्रशासन के एक कर्मचारी ने जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल प्रशासन ने नर्सरी से 5वीं तक के छात्रों के रेडियो फ्रीक्वेंसी आईकार्ड जारी कर दिए हैं। जल्द ही बाकि क्लास के छात्रों को भी ये आईकार्ड जारी कर दिए जाएंगे।

स्कूल में एंट्री और एगजिट का मिला SMS 
बता दें स्कूल प्रशासन ने गेट पर इन कार्ड्स के लिए मशीन लगाई है, जिससे पैरेंट्स को घर बैठे बच्चे की लोकेशन के हिसाब से फोन पर मैसेज पहुंच जाएगा। जब भी बच्चे स्कूल परिसर में एंट्री लेंगे या बाहर जाएंगे, तब यह मशीन इन आईकार्ड में लगे चिप को डिटेक्ट कर पैरेंट्स के रजिस्टर्ड फोन नंबर पर मैसेज भेज देगी।

स्कूल द्बारा बच्चों के पेरेंट्स को एक सर्कूलर जारी कर इसकी जानकारी दी गई है। जिसमें लिखा है कि कार्ड खो जाने पर नया कार्ड जारी करने के लिए 500 रुपए फीस देनी होगी।