Wednesday, July 31, 2019

एक साल में सात बेसहारा बच्चों की देखभाल पर 40 लाख रुपए का खर्च।

एक साल में सात बेसहारा बच्चों की देखभाल पर 40 लाख रुपए का खर्च। ऐसी किस्मत तो इस देश में अच्छे खासे खाते पीते परिवारों के बच्चों की भी नहीं होती है। लेकिन इन सात बच्चों का दुर्भाग्य है कि उनके नाम पर हे रहा यह खर्च महज़ दिल्ली सरकार के कुछ अफसरों की जेब गर्म कर रहा है। यह जानकारी खुद दिल्ली सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग ने सूचना अधिकार आवेदन के जवाब में दी है। सामाजिक कल्याण विभाग 24 आश्रय गृह संचालित करता है। यह आश्रय गृह बेघर बच्चों, महिलाओं और भिखारियों के लिए बनाए गए हैं। इनमें से प्रत्येक में औसतन 100 से 150 व्यक्ति रहते हैं। प्रत्येक आश्रय गृह का औसतन सालाना खर्च 40 से 50 लाख रूपये के बीच है। जो प्रति व्यक्ति के हिसाब से करीब 4 हजार रूपये महीना बैठता है। एक भिखारियों के आश्रय गृह पर तो विभाग ने साल में १.5 करोड़ रूपये खर्च किए हैं। यह जानकारी प्रतिधि संस्था के राजमंगल प्रसाद ने हासिल की है।
राजमंगल ने बताया कि जिन 16 एजेन्सी से इन आश्रय गृहों की वस्तुएं खरीदी जाती थीं, उनमें 1५ फर्जी पाई गई हैं। उनका अनुमान है कि इसमें लगभग 20 करोड़ का घोटाला हुआ है और कम से कम दो दर्जन अधिकारी इसमें लिप्त हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अèयक्ष मोहिनी गिरी का इस बारे में कहना है कि इन गृहों में रहने वाले प्रति व्यक्ति पर करीब 4 हजार रूपये खर्च हो ही नहीं सकते। उन्होंने बताया कि अक्सर यहां रहने वाले बुजुर्गों और मानसिक रूप से कमजोर लोगों को ऐसी दवाईयां भी दी जाती हैं, जिससे वह दिनभर सोते रहें। उनके अनुसार ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि कर्मचारिओं को इनकी देखभाल से मुक्ति मिल जाए और खाने की बचत हो।

राजमंगल ने इन आश्रय गृहों में हुई मौतों की जानकारी भी आरटीआई के जरिए मांगी थी। उनका कहना है कि शुरू में विभाग ने यह जानकारी नहीं दी। लेकिन बाद में दबाव के कारण विभाग को इस बारे में जानकारी देनी पड़ी, जो काफ़ी चौंकाने वाली थी। विभाग ने बताया कि 2007 में एक माह के दौरान निर्मल छाया बाल गृह में 12 मौतें हुई हैं। जबकि 2007-08 में चार बाल गृहों में 89 बच्चों की मृत्यु हुई हैं। कुछ मामलों में बच्चों की मौत की वजह पिटाई भी रही है। इन गृहों में होने वाली हर मौत की जानकारी राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को देना अनिवार्य है, लेकिन आयोग को यह जानकारी नहीं दी गई। आयोग ने दिल्ली सरकार को इस बारे में नोटिस भी जारी किया है, लेकिन सरकार ने इस संबंध में कोई कारवाई नहीं की।

Sunday, July 28, 2019

राहुल का केला काण्ड

राहुल बोस को चाहिए कि वह एक बार मल्टीप्लेक्स में जाकर फ़िल्म देखें। एक कोक और पॉपकॉर्न आर्डर करें। 300 रुपये के बिल को ट्वीट करें ताकि सालों से छले जा रहे दर्शकों की बात ऊपर पहुंचे। राहुल के साथ जो 'केला कांड' घटा, वह मल्टीप्लेक्स दर्शक के साथ रोज घटता है। 150 रुपये के दो समोसे, पचास ग्राम कॉर्न 100 रुपये का, एक पानी की बोतल 75 रुपये की।

तुम केला खाओ तो सारे जहां में शोर मच जाता है, यहां पॉपकॉर्न जेब खाली कर दे तो भी खबर नहीं होती

राहुल  का  केला  काण्ड  

Saturday, July 27, 2019

TIFFIN SERVICE

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