Friday, July 27, 2018

जनपद इटावा का महत्वपूर्ण ऐति‍हासि‍क व दर्शनीय स्थल- आसई

जनपद इटावा का महत्वपूर्ण ऐति‍हासि‍क व दर्शनीय स्थल- आसई ...
आसई में पांचाल नरेश ने कि‍या था अश्वमेघ यज्ञ आसई को आशानगरी भी कहा जाती है। आसई का अस्‍ि‍तत्व बस्तुकत इटावा की प्राचीनता का द्योतक है। यमुना के बीहड़ों को काटकर बनाई गई पक्की सड़क एक सकरे से रास्ते से होकर आसई में समाप्‍त हो जाती है। गांव के नि‍कट पूर्व मध्य‍काल में बने दुर्ग के अवशेष्‍ा बि‍खरे हुये हैं। यह कि‍ला 1018 ई0 में महमूद गजनवी ने नष्ट कि‍या था। इस टीले को स्थानीय भाषा में खेरा कहते हैं। इस खेरे को देखकर वि‍श्वास नहीं होता कि‍ पांचाल नरेश शोण सात्रवाह ने यहीं पर 6600 बख्तेबंद योद्धाओं के साथ अश्व मेघ यज्ञ कि‍या था। आसई के अवशेषों के परीक्षण से स्पष्ट हो जाता है कि‍ प्राचीन काल से मध्यकाल तक क्रमि‍क रूप से यह वि‍परीत अवस्था में बना रहा। आसई की पृष्ठभूमि‍ इसे तपस्थल बनाने में अति‍ महत्व पूर्ण है। यहां बैदि‍कोत्तर काल के काले ओर भूरे मृदभांड प्राप्त हुये हैं। आसई में महावीर स्वामी ने भी अपने कुछ वर्षाकाल व्यतीत कि‍ये। जैन ग्रन्थ वि‍वि‍ध तीर्थकल्पस में इसका वर्णन है। वर्षाकाल (चतुर्मास) में एक ही रूथान पर रहकर चि‍न्तन एवं ध्यान की परम्परा रही हैं। यमुना नदी के सानि‍ध्यी की नीरवता महावीर स्वामी के एकान्त-मनन-चि‍तंन के लि‍ये नि‍श्‍ि‍चत रूप से उपयुक्त रही होगी। इसीलि‍ये आसई महावीर स्वामी को अत्यधि‍क प्रि‍य लगता रहा। जैन समाज के कहावत है-सौ बेर काशी, एक बेर आसई। जैन मूर्तिकला का असुरक्षि‍त संग्रहालय जैसा है आसई आसई में नौवीं,दसवीं एवं बारहवीं शताब्दि‍यों मे जैन तीर्थंकरों की मूर्तियॉं बड़ी मात्रा में स्थापि‍त की गई। इन मूर्तियों पर मथुरा कला का स्पष्ट प्रभाव है। आज आसई अपने आपमें जैन मूर्तिकला का एक असुरक्षि‍त संग्रहालय जैसा है। आसई के लगभग प्रत्येक मकान में टीले से नि‍कली कोई मूर्ति अवश्य हैं। पौराणि‍क साहि‍त्य में आसई को द्वैतवन के नाम से भी भी पुकारा गया हैं। पूर्व मध्यकाल में इटावा की राजनीति‍ का वास्तवि‍क केन्द्र आसई ही था। अत्वी की पुस्तक कि‍ताबुल-यामि‍नी के अनुसार 1018 ई0 में महमूद गजनवी ने जब आसई पर आक्रमण कि‍या तब यहां का शासक चन्द्र पाल था। वि‍देशी आकाओं के लि‍ये आसई एक महत्व पूर्ण केन्द्र था। यहॉ पर वि‍जय प्राप्त कि‍ये बि‍ना इटावा क्षेत्र पर अधि‍कार संभव न था। आसई के रक्षकों को यह सुवि‍धा थी कि‍ वे जल्द ही अपने को यहां बीहड़ों में छुपा लेते थे और गुरि‍ल्ला युद्ध शुरू कर देते थे। 1173 ई0 से जब मुहम्मद बि‍न गोरी के आक्रमण भारत पर प्रारम्भ हुये तो आसई अछूता न रहा। 1193 ई0 में तराइन युद्ध के पश्चाजत कुतुबुद्दीन ऐवक ने आसई पर आक्रमण कि‍या। यहां पर उस समय जय चन्द्र की चौकी थी। फरि‍श्ता‍ के अनुसार ऐवक ने यहॉ आक्रमण करके कि‍ले और खजाने को लूटा।
सौ- इटावा लाइव

Monday, July 23, 2018

यह पंचनद संगम है

जानो अपने देश को जानो...
यह पंचनद संगम है । विश्व का एक मात्र स्थान जहाँ पांच नदियों का एक ही स्थान पर मिलन होता है । यह स्थान है बुंदेलखंड के जालौन जिला में जगम्मनपुर के निकट । यहाँ यमुना नदी में चम्बल , सिन्ध , क्वारी , पहूज नदियों का मिलन होता है । यह पावन तीर्थ अब तक अनेक पुराणों में बर्णित होता रहा लेकिन घने जंगल दुर्गम रास्ते , आवागमन के साधनों का अभाव तथा दुर्दांत डाकुओं का आतंक एवं सरकारों में इच्छा शक्ति की कमी इस तीर्थ क्षेत्र के विकास में वाधक रहा । लेकिन अब स्थिति बदल गई है ।श्री मुलायम सिंह जी ने अपने शासन काल में यहाँ सड़को का जाल बिछवा दिया था। सडकें तथा नदियों पर पुल बन जाने से अब यहाँ इटावा औरैया भिण्ड व उर्ई से समान दूरी 60 किमी तय कर सरलता से यहाँ पहुंचा जा सकता है । पर्यटन की दृष्टि से यहाँ जगम्मनपुर का किला कर्ण के किला के खंडहर के बीच प्रसिद्ध कर्ण देवी मंदिर , पंचनद पर प्रसिद्ध बाबासाहव का मंदिर जहाँ तुलसीदास जी भी नमन करने आए। पांडवों द्वारा स्थापित कालेश्वर मंदिर (भरेह मंदिर)आदि अनेक दर्शनीय स्थल है । पुराणों में पंचनद का बहुत महत्व बताया गया है । यहाँ प्रति बर्ष कार्तिक की पूर्णिमा पर दस दिवसीय विराट मेला लगता है ।पंच नद पर प्राचीन शिव मंदिर तथा साधना केंद्र भी है।
Image may contain: outdoor, nature and water

Thursday, July 12, 2018

Consumer Rights Organisation

Join Hands with us
All India Non Political Organisation
One & Only one
Consumer Rights Organisation
Website - www.croindia.org
State Presidents
Some other Posts Vacant in National and Zonals
For Districts at all over India
Haryana / Punjab / UP / Jharkhand / Tamil Nadu / Telangana / Orissa / J & K /
A.P. / Rajasthan
Pls send the filled application form , your Biodata & Profile
with Photograph
Fees can deposit in our account by Bank Transfer / NEFT/ Net Banking / Cash
Note :- Ref.No.or slip send with the form
Name - CONSUMER RIGHTS ORGANISATION
Bank - Central Bank of India
A/c No. - 3685200340
IFSC Code - CBIN0280075
Contact to :
Mr. Nirmal Choudhary -
94720 89412
email -
nirmal.croindia@gmail.com

Saturday, July 7, 2018

csc news

फ़्राडियर - भाग 17

फ़्राडियर - भाग 17
17- बीटिंग, ईटिंग, डम्पिंग ऐंड डिसएन्फ़्रेंचाइज़िंग
हमारे देश की चुनाव प्रक्रिया विश्व की किसी भी फ़्राडियर- संस्था के लिये ज्ञानवर्धक सिद्ध हो सकती है. हम चुनाव में शुचिता की बात करते हैं, परंतु टिकट बांटते समय निर्लज्जता से ‘विनिंग इज़ गेटिंग’ का फ़ार्मूला अपनाकर बाहुबलियों और धनपशुओं को टिकट देते हैं. हम चुनाव में जाति-धर्म का उपयोग न करने की कसम खाते हैं, परंतु टिकट आवंटन, प्रचार-प्रसार और वोट डलवाने की रणनीति जाति-धर्म के आधार पर ही बनाते हैं. हम चुनाव में 15 लाख खर्च करने का शपथ पत्र देते हैं और 150 लाख खर्च करते हैं, और फिर उस 150 लाख की भरपाई हेतु 250 कुकर्म करते हैं. इन सामान्य फ़्राडियरी के कार्यों के अतिरिक्त हम और बहुत कुछ करते हैं, जिसके वैयक्तिक अनुभव प्रस्तुत कर रहा हूं.
अ. बीटिंग बिफ़ोर वोटिंग
वर्ष 1967 के चुनाव के समय श्री चंद्रभानु गुप्ता कांग्रेस के मुख्य मंत्री थे. मुझ (सेनानायक, 23वीं पी. ए. सी., मुरादाबाद) को मुज़फ़्फ़रनगर एस. पी. की सहायता हेतु वहां भेजा गया था. उन्होंने मुझे पर्याप्त पी. ए. सी. के साथ शामली विधान सभा क्षेत्र में यह सुनिश्चित करने हेतु तैनात किया था कि जाट लोग अनुसूचित जाति के लोगों को वोट डालने से रोक न पायें. उन दिनों अनुसूचित जाति के लोग समान्यतः कांग्रेस को वोट देते थे और जाट लोग चौधरी चरन सिंह की पार्टी (जहां तक मुझे याद है- संयुक्त विधायक दल) को वोट देते थे. मैने शामली में मीटिंग की और सभी थानाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वोटिंग के दिन सभी वोटरों को पूर्ण सुरक्षा दें. जाटों को जब मेरे निर्देशों का पता चला तो उन्होंने वोटिंग के एक दिन पहले ही रात्रि के अंधेरे में जहां कोई इक्का-दुक्का दलित दिखा, वहीं बिना किसी कारण के उसके दो-चार लाठी जड़क दीं. रात्रि को खेतों में शौच हेतु जाने वाली महिलायें उनकी आसान शिकार हुईं. सभी जाट बाहुल्य गांवों में आतंक का माहौल व्याप्त हो गया. ऐसे में अनेक गांवों में वोटिंग के दौरान दलित अपने घर से बाहर नहीं निकल रहे थे. इसकी सूचना मुझे मिली, तो मैं एक ट्रक पी. ए. सी. अपने साथ लेकर ऐसे ही एक गांव पहुंचा और सीधे दलितों के मोहल्ले में जाकर उन्हें समझाया कि आप लोग वोट डालने चलें. आप की सुरक्षा के लिये मैं और मेरी पी. ए. सी. आप के आगे पैदल चलेंगे. पहले कुछ युवक और फिर अन्य दलित उठे और हमारे पीछे चल दिये. पोलिंग स्टेशन पहुंचने से पहले रास्ते में एक जाट का मकान पड़ा. वह अपने मकान के लम्बे-चौड़े चबूतरे पर चारपाई पर बैठा हुक्का गुड़गुड़ा रहा था. उसने पहले मुझे और पी. ए. सी. को तिरस्कार भरी निगाह से देखा; फिर हमारे पीछे आते दलितों की ओर भ्रूकुटि तानकर कुछ देर तक देखता रहा. मुझे अपने पीछे कुछ हलचल महसूस हुई और मैने पीछे मुड़कर देखा तो दलित लोग टिड्डीदल की तरह पीछे भागते नज़र आये. मैं पी. ए. सी. के साथ दलितों के मोहल्ले को वापस हो लिया. वहां पहुंचकर उन्हें फिर समझाया कि जब मैं इतनी पी. ए. सी. के साथ उनके साथ हूं, तो उन्हें डरने की कोई बात नहीं है. तब उनमे से एक बुज़ुर्ग बोला कि आज तो मैं उनके साथ हूं, पर कल कौन बचायेगा; फिर उन लोगों की आजीविका भी तो जाटों के खेतों में काम करने पर ही निर्भर है.
मेरे पास इसका कोई उत्तर नहीं था. मैं मान गया कि हमारे देश में ‘बीटिंग बिफ़ोर वोटिंग’ भी चुनावी रणनीति का एक कारगर हथियार है.
ब. ईटिंग बिफ़ोर वोटिंग
लगभग 40 वर्ष पूर्व मेरे एक रिश्तेदार ब्लाक प्रमुख के चुनाव में खड़े हुए थे. उन दिनो ब्लाक प्रमुख को सम्बंधित ब्लाक के प्रधान ही चुना करते थे, जिनकी संख्या 60-70 के आस-पास होती थी. गांठ से पक्के लोग, जो अधिकांश प्रधानो को मैनेज कर सकते थे, ही ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़ा करते थे. मेरे रिश्तेदार के लिये भी 50-60 की संख्या मैनेजेबिल थी. सभी उम्मीदवार अपने-अपने ढंग से प्रधानो को मैनेज करते थे, पर उन्होने जिस तरीके से प्रधानो को मैनेज कर चुनाव जीता था, वह किसी भी मैनेजमेंट-गुरु के लिये ज्ञानवर्धक हो सकता है. उन्होने चुनाव के दिन से 15 दिन पूर्व वैयक्तिक आमंत्रण देकर लगभग सभी प्रधानों को बुलाकर और अत्यंत प्रेमपूर्वक उनका स्वागत करके अपनी एक मिल के विशाल प्रांगण में रोक दिया था. मिल के कमरों में विश्राम हेतु गद्देदार पलंग और ठंडा करने वाले कूलर तो लगे ही थे, खाने के लिये हरेक के पसंदीदा भोजन के अतिरिक्त रबड़ी, मलाई, बालूशाही आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे, पीने के लिये इच्छानुसार बीड़ी-सिगरेट, ठंडा-गरम, देशी-विदेशी उपलब्ध रहते थे और मनोरंजन के लिये रंगीन तस्वीरों वाली पत्रिकायें, ताश, चौपड़, टी. वी. आदि किसी चीज़ की कमी न थी. प्रधानों के घरवालों को कहला दिया गया था कि प्रधान मील में महमानी खा रहे हैं, हारी-बीमारी की कोई समस्या होने पर खबर कर दें, तुरंत प्रबंध किया जायेगा. मिल का गेट एहतियातन बंद करा दिया था, हालांकि इसकी कोई आवश्यकता न थी, क्योंकि प्रधानो के मन में एक ही भाव था - ‘मानूस हम सैयाद से ऐसे हो गये, कि रिहाई मिलेगी तो किधर जायेंगे’.
वोट पड़ने वाले दिन के एक दिन पहले दो लक्ज़री बसों में सभी प्रधानों को तीर्थाटन के लिये हरिद्वार ले जाया गया. गंगा जी में स्नान करते समय सबसे अपनी हथेलियों में गंगाजल भरने को कहा गया और शपथ दिलाई गई कि गत 15 दिन में जिसका नमक खाया है, वोट उसी को देंगे. फिर रात्रिभोज के उपरांत हरिद्वार से बसों को चलाकर प्रातःकाल सीधे पोलिंग बूथ पर लाया गया (जिससे वोट डालने से पहले प्रधानों का कहीं विपक्षियों से सम्पर्क न हो जाये).
वोटिंग में भारतीय परम्परा पर कायम रहते हुए प्रधानों ने नमक का हक़ अदा किया. मेरे रिश्तेदार थम्पिंग-मैजौरिटी से जीते और ठाठ से पांच वर्ष तक बड़े जनप्रिय ब्लाक-प्रमुख रहे और बाद में उन्होने प्रदेश के प्रधान संगठन के अध्यक्ष का पद भी गौर्वान्वित किया.
स. डम्पिंग
“चाचा जी! आप ने आइबे मैं देर कर दई है. हियां तौ दुसरी पार्टी वाले ने डम्पिंग सुरू कराय दई है और कोई उनै रोकऊ नाईं रहो है.”- मैं वर्ष 2005 की एक प्रातः पंचायत चुनाव में वोट डालने लखनऊ से अपने गांव मानीकोठी, जनपद औरैया को चला था और 11 बजे पूर्वान्ह में वहां पहुंच गया था. मेरे पहुंचते ही मेरे भाईसाहब की पुत्रवधु कमलेश दुबे ने निराशा के भाव में अपनी चिंता प्रकट की थी.
उस दिन मेरे गांव में ग्राम पंचायत का चुनाव था और कमलेश दुबे प्रधान पद की उम्मीदवार थी. उसका विशेष आग्रह था कि मैं वोटिंग के प्रारम्भ होने तक अवश्य पहुंच जाऊं. उसने मुझे यह भी बताया था कि मेरा नाम गांव की वोटर-लिस्ट में है और मुझे वोट डालना है. यह सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ था क्योंकि वर्षों से मानीकोठी मेरा सामान्य निवास नहीं था और मैने वहां किसी से मेरा नाम वोटर-लिस्ट में डलवाने को कहा भी नहीं था. फिर मैं समझ गया था कि किसी दूरदृष्टि रखने वाले ग्रामीण ने मेरा नाम वोटर-लिस्ट में डलवा दिया होगा. वोट डालने का अवसर मिलने की जानकारी पर मुझे कुछ-कुछ अनियमितता होने का आभास हुआ था परंतु प्रसन्नता भी हुई थी क्योंकि पूरी पुलिस सेवा के दौरान मुझे एक ही बार वोट डालने का अवसर मिला था. मेरे स्थानांतरण इतनी द्रुत-आवृत्ति से होते थे कि स्वयं को पता ही नहीं चल पाता था कि मेरा नाम कहीं वोटर-लिस्ट में आया है या नहीं. और यदि पता चल भी जाता, तो क्या फ़ायदा था क्योंकि चुनाव के दौरान पुलिस वाले को वोट डालने जाना तो क्या हार्ट-अटैक लाना भी अक्षम्य अपराध माना जाता है.
मैने चुनाव के सम्बंध में डम्पिंग शब्द उस दिन से पहले कभी नहीं सुना था. अतः गांव वालों के अंग्रेज़ी के शब्दों को अपनी इच्छानुसार उच्चारित करने और अपनी सुविधानुसार अर्थ लगाने के कौशल का ध्यान आने पर मन ही मन मुस्कराया था. मुझे याद आया कि एक दिन जब मेरा मोबाइल काम नहीं कर रहा था तो जनपद अम्बेडकरनगर का रहनेवाला मेरा ड्राइवर पूर्ण आत्मविश्वास के साथ बोला था, “साहब, बाद में मिला लीजिएगा. अभी नटवर नहीं है.” यह सुनकर मैं उसके भाषा-विज्ञान का लोहा मान गया था क्योंकि मुझे लगा था कि नेटवर्क के लिये उच्चारण और अर्थ दोनो की दृष्टि से ‘नटवर’ से अधिक उपयुक्त कोई शब्द हो ही नहीं सकता है.
मैं कमलेश द्वारा बोले गये ‘डम्पिंग’ शब्द से यह निःसंदेह समझ गया था कि वोट डालने में धांधली की जा रही है. अतः उसकी बात सुनकर मैने अपने साथ आये गनर से कहा कि वह पोलिंग स्टेशन पर जाकर देखे कि क्या हो रहा है. गनर को आते हुए देखकर डम्पिंग कराने वाले कमलेश के विरोधी खेमे के लोग वहां से खिसक लिये थे. नहाने-धोने और नाश्ता करने के बाद लगभग दो बजे जब मैं अपना वोट डालने वहां पहुंचा, तब वहां शांति थी और डम्पिंग अथवा अन्य कोई फ़्राडियरी होती नज़र नहीं आ रही थी. मैं अपना वोट डालकर चला आया.
बाद में जब चुनाव का नतीजा कमलेश के पक्ष में आया और वह काफ़ी वोटों से जीती थी, तब मैने उससे पूछा,
‘’तुम तो कह रही थीं कि तुम्हारे विपक्षी डम्पिंग करा रहे हैं, पर तुम तो अच्छे मार्जिन से जीती हो?”
इस प्रश्न पर वह कुछ बोली नहीं थी, बस मुस्करा दी थी. उस समय वहां गांव का एक लड़का भी उपस्थित था. शाम को मैं जब खेतों में टहलने निकला, तब वह लड़का मेरे साथ चल दिया, और गांव से कुछ दूर आ जाने पर हिचकिचाते हुए कहने लगा,
“आप न आय गये होते तो भाभी जीततीं थोरेंऊं.”
“क्यों?’’
“दूसरी पार्टी वालिन ने सबकौ धमकाय लओ हतो. फिर डम्पिंग चालू कर दई हती. आप के गनर को देख कें बे डर गये हते और हुआं सै खिसक लये हते.”
फिर मुझे विश्वास में लेने के अंदाज़ में अपनी आवाज़ धीमी कर आगे बताने लगा था,
“उनके जइबे के बाद हम लोगन ने झराझर डम्पिंग सुरू कर दई हती. जाई सै तौ भाभी इतने ज़्यादा बोटन से जीतीं हैं.”
उसकी बात कहने की शैली पर मुझे हंसी आ रही थी, जिसे नियंत्रित करते हुए मैं बोला था, “लेकिन डम्पिंग होती कैसे है?”
तब मेरी अज्ञानता पर आश्चर्य से मेरी ओर देखते हुए उसने मुझे समझाया था,
“जो उम्मीदवार जबर होत है, बू पहलें तौ पोलिंग-पार्टी कौ पटाय लेत है और ना पटै तौ धमकाय देत है. फिर बा की भीड़ पोलिंग बूथ पै कब्जा कर लेत है. फिर एक आदमी रजिस्टर में बोटरन की फ़र्ज़ी हाज़िरी लगात जात है और दुसरो बोट पै ठप्पा लगाय कें बक्सा में डारत जात है. दो-तीन घंटा में पूरो खेल खतम हुइ जात है. बाद में जब असली बोटर आत है, तब बा सै कह दई जात है कि घरै जाव, तुम्हाओ बोट तौ पड़ गओ.”
द. डिसएन्फ़्रैंचाइज़िंग
कमलेश के चुनाव के समय अनियमितता से प्राप्त वोटिंग के अधिकार का उपयोग करने पर मेरे मन में थोड़ा सा ग्लानिभाव घर कर गया था. यह भाव वर्ष 2007 में उस समय मेरे मन से पूर्णतः तिरोहित हो गया, जब मैं प्रादेशिक चुनाव में वोट डालने गोमतीनगर, लखनऊ में पोलिंग स्टेशन गया था. वहां पीठासीन अधिकारी ने मुझे यह कहकर अचम्भित कर दिया था कि वोटर-लिस्ट में मेरा नाम नहीं है. मेरे यह कहने पर कि पिछले चुनाव में तो मैने यहीं वोट डाला था, उसने उत्तर दिया था कि उसे नहीं मालूम कि मेरा नाम वोटर-लिस्ट से क्यों काट दिया गया है परंतु वह इस सम्बंध में कुछ कर सकने में असमर्थ है. मेरे साथ वोट डालने गये भंडारी साहब का नाम भी वोटर-लिस्ट से नदारद था. जब हम अपना सा मुंह लेकर वापस आ रहे थे, तब भंडारी साहब कहने लगे थे कि उन्हें पहले से ही इसका शक था. मेरे द्वारा प्रश्नवाचक भाव से देखे जाने पर वह बोले थे कि तमाम लोग कहते हैं कि इस बार वोटर-लिस्ट पुनरीक्षण के काम में ऐसे जातिभक्त कर्मचारी लगाये गये थे जो यथासम्भव उन वोटरों के नाम काट दें, जिनका वोट सत्ताधारी दल को मिलना संदिग्ध है. उन कर्मचारियों ने अपनी जातिभक्ति के कारण मुझ जैसे सहस्रों संदिग्धों को उस चुनाव में डिसएन्फ़्रैंचाइज़ कर दिया था.
अगले चुनाव से पहले मुझे अपने को पुनः एनफ़्रेंचाइज़ कराने में बड़े पापड़ बेलने पड़े थे.

relway panting

Image may contain: tree, plant, train, sky, outdoor and nature



Image may contain: outdoor

Image may contain: 6 people, people smiling

Image may contain: 6 people, people smiling

शर्म छोड़िए प्लास्टिक छोडिये

यदि आप 200 ग्राम का मोबाइल और 350 ग्राम का पावर बैंक अपनी पॉकेट में ले के निकल सकते है तो 30 ग्राम के कपड़े की
थैली भी आप अपने पास रख सकते हैं ।
“शर्म छोड़िए प्लास्टिक छोडिये"
"आइये अपनी पृथ्वी को बचाएं "
"प्लास्टिक मुक्त दुनिया बनाएं"

Friday, July 6, 2018

जरा सोचिये बस चंद पंक्तियों ने उन छबीस लड़कियों की ज़िन्दगी बदल दी




हम सभी सोशल मीडिया नामक के दैत्य से जूझ रहे हैं. इसके मत्थे हम अपनी नाकामियां छिपा रहे हैं. मगर यह तक तकनीक है और इस तकनीक का प्रयोग आपको कैसे करना है यह आप पर निर्भर करता है. कल एक बहुत ही छोटी सी खबर थी कि रेल यात्री के एक ट्वीट ने 26 लड़कियों को बचाया. जी हाँ, एक या दो नहीं पूरी छब्बीस लड़कियों को एक आदमी की जागरूकता ने बचा लिया, जो उसी डिब्बे में सफ़र कर रहा था. किस्सा यह है कि कोई आदर्श श्रीवास्तव अवध एक्सप्रेस से एस5 में सफर कर रहे थे, उनका शायद ट्विटर पर एकाउंट भी नहीं था. उनके सामने 10 से 14 बरस की 22 से अधिक लडकियां थीं, सभी सहमी हुई और कुछ रो रही थीं. ट्विटर पर शायद उनका एकाउंट नहीं है यह इसलिए कह रही हूँ क्योंकि शायद यही उनका पहला ट्वीट था. उन्होंने फटाफट रेलवे पुलिस और मुख्यमंत्री आदि को टैग करते हुए ट्वीट किया कि कुछ लडकियां मेरे सामने हैं, और बहुत असहज लग रही हैं. उस ट्वीट को रीत्वीट किया गया और प्रशासन हरकत में आया. बनारस के बाद से दो पुलिसकर्मी उस डिब्बे में चढ़े और अंत में उन लड़कियों को बचा लिया गया. पुलिस ने उन दोनों आदमियों को भी पकड़ लिया है जो इन लड़कियों को बेचने जा रहे थे. इन सभी लड़कियों की उम्र केवल 10 से 14 वर्ष के बीच है. जरा सोचिये बस चंद पंक्तियों ने उन छबीस लड़कियों की ज़िन्दगी बदल दी. यदि यह जागरूकता नहीं होती और यह तकनीक न होती, तो आज की सुबह ही वे लडकियां न जाने कहाँ बेच दी गयी होंती. तकनीक बुरी नहीं है, उसका प्रयोग आप किस तरह से करते हैं, यह आप पर निर्भर है. अगर आप कुछ सकारात्मक करेंगे, कुछ सीखेंगे तो सोशल मीडिया आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है,, हाँ मगर यहाँ पर भी आप इसकी बुराई, उसकी बुराई, फेक तस्वीरें आदि शेयर करेंगे तो यह इस ब्रह्माण्ड का सबसे बुरा शाप है.
सजग रहें, इस मंच का सदुपयोग करें. और उस व्यक्ति को दुआएं दें जिसने यह भला काम किया. इस मंच को कोसना बंद करें.


donation of temple

Image may contain: text

सीडलेस लेमन पौधों के लिए संपर्क करें 97523 54919

सीडलेस लेमन पौधों के लिए संपर्क करें 97523 54919
सूचना,कम्पनी थोक दरो पर सभी प्रकार की नर्सरी और प्लानटेशन की सर्विस उप्लवध कराती है जैसे फूल,फलदार पौधे,छायादार पौधे,बोनसाइ पौधे,औषधी पौधे,गम्ले,ड्रिपएरीगेशन,स्प्रिंक्लर,जैविक खाद,जैविक दवाईया भी उप्लवध कराती है!
इकछुक किसान,स्कूल,कोलेज,गार्डन वाले कम्पनी से सम्पर्क करे.
Services By. IDF Agro Company Mob.9669985669

new jila working commetee

Image may contain: indoor


Image may contain: 1 person, smiling


Image may contain: 1 person, smiling




Wednesday, July 4, 2018

झटका मशीन

झटका मशीन लें वो भी 9000 Output Voltage की सिर्फ 5700 रूपये में। Machine + siren + automatic AC charger + 12 volt 12 ah battery. Battery को 24 घण्टे AC चार्जिंग भी दे सकते हैं। जल्दी करें ऑफर सीमित समय तक। 9992190908

templet wami viveka nand

Image may contain: 2 people, text

state of india

No automatic alt text available.

Sunday, July 1, 2018

रमायन का प्राचीन शिव मन्दिर और झील

विकास और सौन्दर्यीकरण की राह देखता रमायन का प्राचीन शिव मन्दिर और झील
भरथना (रिपोर्ट- तनुज श्रीवास्तव)- जनपद इटावा में अनेकों प्राचीन ऐतिहासिक और नैसर्गिक स्थल है, जो अपने वास्तुशिल्प और भव्यता में अनूठा स्थान रखते हैं। नैसर्गिक सौन्दर्य में वे किसी भी प्रसिद्ध स्थलों से कम नहीं है। बस इनका दुर्भाग्य यह है कि ये शासन और प्रशासन की उपेक्षा के शिकार होने के कारण समुचित प्रचार नहीं पा पाते हैं। पुरातत्व और पर्यटन विभाग भी इनकी ओर ध्यान नहीं देते हैं। ऐसा ही एक प्राचीन धार्मिक नैसर्गिक स्थल है भरथना तहसील में झील के किनारे बसे गांव रमायन में स्थित प्राचीन शिव मन्दिर जो भव्य और कलात्मक सौन्दर्य से परिपूर्ण है। अपने वास्तुशिल्प सौन्दर्य में जनपद इटावा में ही नहीं, आसपास के कई अन्य जिलों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
भरथना नगर से 3 किमी0 उत्तर-पूर्व की ओर स्थित गांव रमायन के उत्तर-पश्चिम दिशा में फैली विशाल झील आज शासन और प्रशासन की उपेक्षा के कारण अपना नैसर्गिक सौन्दर्य खो रही है। अतिक्रमण और गन्दगी बढने के कारण आज यह एक विशाल तालाब में परिवर्तित हो रही है। इस झील की गिनती जिले की महत्वपूर्ण झीलों में शामिल थी, जो पुरानी पाठ्य पुस्तकों मंे मिलती है। वर्तमान में यह झील जहाँ वर्षा ऋतु में अपना विस्तार लेकर विशाल रूप ले लेती है। जिसका प्राकृतिक सौन्दर्य देखते ही बनता है। वहीं जाडे की ऋतु में काफी बडी संख्या में विदेशी मेहमान पक्षियों के आने से यह झील पक्षी बिहार का रूप ले लेती है। रंग-बिरंगे विदेशी पक्षियों का कोलाहल, क्रीडा कलरव मनभावन दृश्य उपस्थित करता है। अगर यह रमायन झील का विस्तार कर सौन्दर्यीकरण किया जाये, तो पक्षी बिहार के साथ ही जल बिहार का भी सुन्दर रूप ले सकती है। पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सरकार के लिये आय का स्त्रोत भी बन सकती है। निजी क्षेत्र में सैकडों लोगों की रोजी रोटी का आधार भी बन सकती है।
आइये अब हम आपको यहाँ से प्राचीन शिव मन्दिर पर लेकर चलते हैं। जो सुन्दर सरोवर के किनारे हरे भरे रमजीक स्थल के मध्य स्थित है। इस मन्दिर के विषय में जो भी जानकारी मिली है, वह धार्मिक ग्रामवासियों से मिली है। गांव के वृद्धजनों ने बताया कि इस भव्य मन्दिर का निर्माण यहाँ के पूर्व जमींदार पाठक जी के पूर्वजों ने लगभग 200 वर्ष पूर्व कराया था। ब्रिटिश काल में इस मन्दिर के चारों ओर सुव्यवस्थित उपवन था। जहाँ रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियां थीं। वहीं छायादार फलदार, तरह-तरह के वृक्ष थे। मन्दिर के चारों ओर चैडा रास्ता बाग में जाता था। वरिष्ठ श्रद्धालुजनों ने बताया कि उस समय यह बाग 100 बीघा से भी अधिक क्षेत्र में था। ब्रिटिश काल के बाद मन्दिर का बाग उजडता चला गया। यह प्राचीन शिव मन्दिर कई वास्तुशैलियों में निर्मित है। दक्षिण भारतीय शैली में इसका मुख्य केन्द्रीय बुर्ज विशाल शंकु आकार का है। जिसके शिखर पर स्वर्णपत्र जडित कई कलश लगे हैं। जिसके ऊपर त्रिशूल हैं। इन कलशों की ऊँचाई लगभग 20 फीट है। अपने निर्माणकाल से आज तक इसकी स्वर्ण चमक फीकी नहीं पडी है।
इस मन्दिर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर खुलता है, जो भव्य और कलात्मक हैं। छतरीयुक्त यह द्वार राजस्थानी शैली में बना है। भूतल से सीढिया मुख्य मन्दिर कक्ष के द्वार तक जाती हैं। मुख्य मन्दिर कक्ष में शेषनाग के साथ शिवलिंग विराजमान है। द्वार के सामने बरामदे में भगवान शिव की सवारी नादिया की मूर्ति है। मन्दिर के मुख्य कक्ष की छत में आज भी प्राचीन चित्रकारी देखने को मिलती है। जिनके रंग फीके नहीं पडे हैं। मन्दिर के चारों कोनों में चार बुर्ज बने हैं। जिनकी ऊँचाई भूतल से 50 फीट के लगभग है। प्रथम तल के चारों बुर्जों में शिवलिंग मध्य में स्थित है और आलों में गणेश, लक्ष्मी, हनुमान, राम-लक्ष्मण-सीता और राधाकृष्ण आदि अन्य देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित है। भूतल और प्रथम तल पर बने गलियारों के स्तम्भ सुन्दर और कलात्मक हैं। जिनके कारण गलियारे भी दर्शनीय हो गये हैं। मन्दिर का मुख्य चबूतरा लगभग 150 फीट चैडा और 200 फीट लम्बा है। जिसके चारों ओर बने रास्तों पर उतरने के लिए सीढियां हैं। इस मन्दिर की ऊँचाई अपने धरातल से शिखर तक लगभग 150 फीट है, जो दो किमी0 दूर से भी साफ दिखाई देता है। मुख्य मन्दिर की 200 मीटर की दूरी पर दक्षिण की ओर एक छोटा शिव मन्दिर, प्राचीन बरगद वृक्ष के छांव तले है। इसका भी आध्यात्मिक महत्व कम नहीं है। रमायन गांव के किनारे से ही इटावा से कन्नौज जाने वाला प्राचीन कलक्टरी मार्ग निकला है, जो आज अतिक्रमण का शिकार होकर संकरा हो गया है। ब्रिटिश काल में रमायन में ही तहसील मुख्यालय था, जो बाद में भरथना नगर में आ गया। इस गांव ने आज भी अपने प्राचीन भव्य शिव मन्दिर और विशाल झील के कारण अपना आध्यात्मिक और प्राकृतिक महत्व नहीं खोया है। इस क्षेत्र की एक विशेषता और भी है गांव और झील के आसपास के खेतों में काफी बडी संख्या में सारस के जोडे उडते हुए और कलरव क्रीडा करते हुए दिखाई देते हैं। जिसके कारण यह क्षेत्र सारस पक्षी के अन्तर्गत आता है। केन्द्रीय सरकार की पूरा योजना के अन्तर्गत यहाँ एक ग्रामीण युवाओं को खेलकूद प्रोत्साहन हेतु स्टेडियम का निर्माण हुआ है, जो दयनीय दशा में है। हरवर्ष महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इस शिव मन्दिर प्रांगण में मेला का आयोजन होता है। जो ग्रामीण संस्कृति की झलक पेश करता है। वर्ष भर यहाँ कथा, भागवत और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है।
वर्ष 1983 तक इस मन्दिर की दशा काफी जीर्ण शीर्ण थी। मीडिया की नजर यहाँ पडी और समाचार पत्रों में इस क्षेत्र की विशेषताओं का उल्लेख किया। तत्पश्चात तत्कालीन ग्राम प्रधान ने क्षेत्रीय श्रद्धालु जनता के सहयोग से शिव मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया। तालाब का पुर्ननिर्माण कर सौन्दर्यीकरण भी हुआ। फिर भी जो विकास और सौन्दर्यीकरण होना चाहिए, वह नहीं हुआ है। इस सन्दर्भ में श्रद्धालु ग्रामवासियों ने दिनांक 20-12-2005 को भरथना का पयर्टन विकास एवं सौन्दर्यीकरण कार्यक्रम के अन्तर्गत रमायन के प्राचीन शिव मन्दिर के विकास एवं सौन्दर्यीकरण कार्य हेतु सरकार से प्रार्थना पत्र संख्या- 110 रमायन शिव मन्दिर भेजकर 377.77 लाख रूपये की मांग की थी। लेकिन मामला अधर में लटक गया। वर्तमान में नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान विमला भदौरिया ने भी इस क्षेत्र के विकास हेतु अग्रसर है। उन्होंने श्रद्धालु ग्रामवासियों और नगर व क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों के साथ शासन और प्रशासन से झील और प्राचीन शिव मन्दिर के विकास और सौन्दर्यीकरण करने की मांग की है। उन्होंने पुरातत्व और पर्यटन विभाग से भी मांग की है कि वह इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थलों का अवलोकन और निरीक्षण कर बहुमुखी विकास हेतु ठोस कदम उठायें।