जानो अपने देश को जानो...
यह पंचनद संगम है । विश्व का एक मात्र स्थान जहाँ पांच नदियों का एक ही स्थान पर मिलन होता है । यह स्थान है बुंदेलखंड के जालौन जिला में जगम्मनपुर के निकट । यहाँ यमुना नदी में चम्बल , सिन्ध , क्वारी , पहूज नदियों का मिलन होता है । यह पावन तीर्थ अब तक अनेक पुराणों में बर्णित होता रहा लेकिन घने जंगल दुर्गम रास्ते , आवागमन के साधनों का अभाव तथा दुर्दांत डाकुओं का आतंक एवं सरकारों में इच्छा शक्ति की कमी इस तीर्थ क्षेत्र के विकास में वाधक रहा । लेकिन अब स्थिति बदल गई है ।श्री मुलायम सिंह जी ने अपने शासन काल में यहाँ सड़को का जाल बिछवा दिया था। सडकें तथा नदियों पर पुल बन जाने से अब यहाँ इटावा औरैया भिण्ड व उर्ई से समान दूरी 60 किमी तय कर सरलता से यहाँ पहुंचा जा सकता है । पर्यटन की दृष्टि से यहाँ जगम्मनपुर का किला कर्ण के किला के खंडहर के बीच प्रसिद्ध कर्ण देवी मंदिर , पंचनद पर प्रसिद्ध बाबासाहव का मंदिर जहाँ तुलसीदास जी भी नमन करने आए। पांडवों द्वारा स्थापित कालेश्वर मंदिर (भरेह मंदिर)आदि अनेक दर्शनीय स्थल है । पुराणों में पंचनद का बहुत महत्व बताया गया है । यहाँ प्रति बर्ष कार्तिक की पूर्णिमा पर दस दिवसीय विराट मेला लगता है ।पंच नद पर प्राचीन शिव मंदिर तथा साधना केंद्र भी है।

यह पंचनद संगम है । विश्व का एक मात्र स्थान जहाँ पांच नदियों का एक ही स्थान पर मिलन होता है । यह स्थान है बुंदेलखंड के जालौन जिला में जगम्मनपुर के निकट । यहाँ यमुना नदी में चम्बल , सिन्ध , क्वारी , पहूज नदियों का मिलन होता है । यह पावन तीर्थ अब तक अनेक पुराणों में बर्णित होता रहा लेकिन घने जंगल दुर्गम रास्ते , आवागमन के साधनों का अभाव तथा दुर्दांत डाकुओं का आतंक एवं सरकारों में इच्छा शक्ति की कमी इस तीर्थ क्षेत्र के विकास में वाधक रहा । लेकिन अब स्थिति बदल गई है ।श्री मुलायम सिंह जी ने अपने शासन काल में यहाँ सड़को का जाल बिछवा दिया था। सडकें तथा नदियों पर पुल बन जाने से अब यहाँ इटावा औरैया भिण्ड व उर्ई से समान दूरी 60 किमी तय कर सरलता से यहाँ पहुंचा जा सकता है । पर्यटन की दृष्टि से यहाँ जगम्मनपुर का किला कर्ण के किला के खंडहर के बीच प्रसिद्ध कर्ण देवी मंदिर , पंचनद पर प्रसिद्ध बाबासाहव का मंदिर जहाँ तुलसीदास जी भी नमन करने आए। पांडवों द्वारा स्थापित कालेश्वर मंदिर (भरेह मंदिर)आदि अनेक दर्शनीय स्थल है । पुराणों में पंचनद का बहुत महत्व बताया गया है । यहाँ प्रति बर्ष कार्तिक की पूर्णिमा पर दस दिवसीय विराट मेला लगता है ।पंच नद पर प्राचीन शिव मंदिर तथा साधना केंद्र भी है।

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