Saturday, May 11, 2019

आई लव यू मम्मा

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आई लव यू मम्मा । सुना है आज मदर डे है ,शेष 364 दिन क्या माँ की राते है ? हम भारतीय माता ,पिता ,गुरु के दिवस कैसे मना सकते है ? पश्चिम सभ्यता कुछ भिन्न है,जहाँ माता पिता बदलते रहते है अपने जीवन साथी। बच्चो को ढूंढ़ना पड़ता है माँ किसके साथ है ओर बाप किसके। यह मदर डे फादर डे किसी अभाव ग्रस्त संस्कृति के हो सकते है भारत जैसे सुसंस्कृत देश मे हरगिज नहीं। हमारे जगत पिता सूर्य है। सम्पूर्ण सृष्टी की उत्पत्ति के उपादान कारण रेत या बीज सूर्य में ही पैदा होते है। वही बीज माता पिता के माध्यम से संग्रहित रहता है। बीज की पूर्णता का माध्यम बनते है माता पिता। सृष्टि कर्ता पितृ प्राणो के कारण ही पिता को पितृ कहा जाता है। श्राद्ध पक्ष में पितर से इन्ही को सम्बोधित किया जाता है। किस देश में मातृ देवौ भव पितृ देवों भव कह जाते है? केवल भारत में। माता पिता जीवन भर प्राण रुप मे शरीर मे प्रवाहित रहतें है तब कोन सा दिन मेरे लिए मदर डे ओर कोनसा फादर दे? उनके कारण ही मै हूँ। दिखाई दे रह हूँ । ज़िसके जीवन में अंधकार होता है वहॉँ माता पिता अभाव सूचक है। कभी कभी उनकी याद मे मोम पिघलता है। आज हमारे शिक्षक ,शिक्षा शास्त्री , शिक्षा नीतियों के निर्धारक इसलीए निरर्थक हो गये है क्योकि उन्हे प्राण रुप मे बहना नही आता। ज्ञान का यह अभाव ही मेरी जिंदगी के आर्दशों को एक ही दिन मे समेट जाता है। जुग जुग जिए ऐसे माता पिता जो असली सिखाते नही नकल कर के जीने को मजबूर करतें है।


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