Wednesday, March 28, 2018

तीनों दोस्त खान-पान के कारोबारियों से संपर्क करते हुए मनपसंद फूड की सप्लाई के काम में लग गए

तीनों दोस्त खान-पान के कारोबारियों से संपर्क करते हुए मनपसंद फूड की सप्लाई के काम में लग गए। ऑनलाइन आर्डर्स की लगभग रोजाना साठ-सत्तर से अधिक डिलीवरी के ऑर्डर बुक होने लगे। निशित का मानना है कि किसी भी काम की सफलता उसके बिजनेस आइडिया और अपनी मेहनत पर निर्भर करती है। जब खान-पान की डिलिवरी का आइडिया उनके दिमाग में आया तो एक तो बिरहाना रोड और सिविल लाइन क्षेत्रों में इस तरह के बिजनेस डिफरेंस पर ध्यान गया, दूसरे एक और आइडिया से बल मिला कि जो लोग कानपुर आते-जाते रहते हैं, उन्हें नापसंदगी के बावजूद होटलों में भोजन करना पड़ता है। यदि उन्हे घर जैसा भोजन उपलब्ध कराने लगें तो हमारा बिजनेस चल निकलेगा।
आज उन्होंने अपनी कंपनी के काम में लगभग दो दर्जन और लड़कों को जोड़ लिया है। ऑर्डर के मुताबिक शहर के किसी भी कोने में उनके लड़के खाने का सामान चटपट दे आते हैं। वे लड़के जितनी दूर जाना होता है, उसके हिसाब से सर्विस चार्ज ले लेते हैं। 'ओए काके' की तरह कम लागत के और भी कई सफल बिजनेस मॉडल आजमाए जा सकते हैं। मसलन, मात्र एक लाख रुपए की लागत से मेलों प्रदर्शनियों में लजीज व्यंजनों के स्टॉल लगाना। घर बैठे रेस्टोरेंट, होटल वालों के तालमेल से यह बिजनेस और भी कम लागत पर शुरू किया जा सकता है। बस करना कुछ नहीं है, साथ में कुछ लड़के रखकर होटल-रेस्टोरेंट से तैयार व्यंजन की मेला अथवा प्रदर्शनी स्थल तक आपूर्ति कर देना है।
इसी तरह खुद की एक बेवसाइट के माध्यम से कई तरह की डिलीवरी के ऑर्डर लिए जा सकते हैं। यह भी घर बैठे का काम है। ऐसा भी है कि एक काम से कई काम जुड़े रहते हैं। यदि आप मेला-प्रदर्शनियों में व्यंजन सप्लाई करते हैं, तो साथ में उन्ही होटलों एवं रेस्टोरेंट के लिए उन्हीं डिलीवरी ब्वॉय की मदद से पानी की बोतलें सप्लाई करने के ऑर्डर भी ले सकते हैं। ऐसे और भी तमाम काम हैं, जैसेकि शहर की महिलाओं को सैलून सर्विसेज देने के लिए ब्यूटी थेरेपिस्ट्स का काम। इस काम में करीब एक तिहाई बुकिंग उसी दिन के लिए होती है और थेरेपिस्ट्स एक-डेढ़ घंटे के भीतर सर्विसेज देने घर पर पहुंच जाते हैं। इसमें सावधानी बरतनी होती है कि वीकेंड्स पर कस्टमर्स से एक दिन पहले बुकिंग करा ली जाती है। इस काम में डिलीवरी बेस्ड सर्विसेज की जबरदस्त मांग है।
सबको पता है कि इन दिनों कई तरह के बिजनेस मॉडल वेबसाइट, वाट्सएप, मोबाइल के भरोसे चल रहे हैं। आजकल टिफिन सर्विस हर शहर की जरूरत बन गई है। घर से दूर रह रहे युवाओं की तो इस पर ही पूरी तरह निर्भरता बन गई है। जरुरत ज्यादातर कॉलेज स्टूडेंट या वर्किंग बैचलर को होती है। लड़कियां इस बिजनेस को ज्यादा सफलता से चला सकती हैं। बस इस काम को शुरू करने से पहले ठीक से स्वयं सर्वे कर लेना होगा यानी होम वर्क कि सीधे संपर्क कर पूछताछ कर लें, महीने में कितने पैसे देने हैं , कूपन सिस्टम किस तरह का होना चाहिए, रोजाना टिफिन में कौन कौन सा आइटम रखना बिजनेस प्रॉफिट की दृष्टि से ठीक रहेगा। इसमें पम्फलेट, मोबाइल एसएमएस, इंटरनेट आदि का सहारा लिया जा सकता है। ऐसे हजारों सक्सेज सामने आ चुके हैं।

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