सब्जियां
गर्मिया- करेला, भिंडी, घीया, तोरी, टिंडा, लोबिया, ककड़ी आदि। ककड़ी व बैंगन जनवरी के आखिर तक लगा दें, जबकि बाकी सब्जियां फरवरी-मार्च में लगाएं।
सर्दियां- मूली, गाजर, टमाटर, गोभी, पत्ता गोभी, पालक, मेथी, लहसुन, बैंगन, मटर आदि। ये सभी सब्जियां अक्टूबर, नवंबर में लगाई जाती हैं।
कितना पानी, कितनी धूप जरूरी
- किसी भी पौधे के लिए धूप बहुत जरूरी है। यह नियम सब्जियों के पौधों पर भी लागू होता है। अंकुर फूटते समय बीजों को धूप लगना जरूरी है। ऐसा न करने पर ये आकार में छोटे और कमजोर रह जाएंगे। रोजाना 3-4 घंटे की धूप काफी है लेकिन गर्मियों में दोपहर की कड़ी धूप से पौधों को बचाएं। इसके लिए पौधों के थोड़ा ऊपर एक जालीदार शेड बनवा दें तो बेहतर है।
- ज्यादा पानी से मिट्टी के कणों के बीच मौजूद ऑक्सिजन पौधों की जड़ों को नहीं पहुंच पाती इसलिए जब गमले सूखे लगें, तभी पानी डालें। मौसम का भी ध्यान रखें। सर्दियों में हर चौथे-पांचवें दिन और गर्मियों में हर दूसरे दिन पानी डालना चाहिए। बारिश वाले और उससे अगले दिन पौधों में पानी देने की जरूरत नहीं होती।
- पानी सुबह या शाम के वक्त ही देना चाहिए। भूलकर भी तेज धूप में पौधों में पानी न डालें। इससे पौधों के झुलसने का खतरा रहता है।
- अगर किसी वजह से पौधों को अकेला छोड़कर कुछ दिनों के लिए बाहर जाना पड़े, तो उनके गमलों में पानी ऊपर तक भर दें। गर्मियों में गमलों को किसी टब में रखकर, टब में भी थोड़ा पानी भर दें।
- अगर 10-15 दिनों के लिए घर से बाहर जा रहे हैं तो जाने से पहले गमले या पॉट में लीचन मॉस तालाब में उगने वाले कुछ खास पौधे जो नर्सरी से मिल जाएंगे को अच्छी तरह बिछा कर पानी डालें इससे लंबे समय तक पौधों में नमी बनी रहेगी।
खाद कितना लगाएं
किसी भी पौधे को ज्यादा खाद की जरूरत नहीं होती। आमतौर पर पौधे लगाते समय और दोबारा उनमें फल-फूल या सब्जी आते समय खाद दी जाती है। खाद हमेशा जैविक ऑर्गनिक ही इस्तेमाल करें। यह खाद जीवों से बनती है, जैसे गोबर की खाद, पशुओं-मनुष्यों के मल-मूत्र से बनने वाली खाद आदि। इनमें हानिकारक केमिकल्स नहीं होते।
- नीम, सरसों या मूंगफली की खली भी खाद के रूप में इस्तेमाल की जाती है। इनमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है।
- किसी अच्छी नर्सरी से ऑर्गेनिक खाद के पैकेट मिल जाते हैं। यह आमतौर पर 40 से 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलती है।
नोट- खाद तभी डालें, जब गमलों की मिट्टी सूखी हो। खाद देने के बाद मिट्टी की गुड़ाई कर दें। इसके बाद ही पानी दें।
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