शीशम घरों में ईमारती लकड़ी के लिए विख्यात है। शीशम वृक्ष भारत, नेपाल, लंका, इत्यादि जगहों पर बहु मात्रा में मिलते हैं.....शीशम पेड़ की लम्बाई लगभग 80 से 100 फीट के आसपास होती है...... शीशम को शीशु, शिनसपा, विटी, शीशम, शिसु, अगुरू, बिराडी, शिशावी, प्रारादु आदि नामों से जाना जाता है...... शीशम ईमारती लकड़ी के साथ-साथ एक अमूल्य आयुर्वेदिक ओषधि है
त्वचा रोगों, कुष्ठ रोगों, धातु रोगों, पीरियड्स के रोगों, प्रमेह, जोड़ों के दर्द, उल्टी के रोगों में अत्यंत प्रभावकारी है.....
.....धातु रोग में शीशम के पत्ते 8-10 ले कर इसमें 25 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर प्रातः काल शौच जाने के 15 मिनट बाद साधारण जल से नियमित सेवन करने से धातु रोग में लाभ होता है....आओ #शीशम लगाये
.....धातु रोग में शीशम के पत्ते 8-10 ले कर इसमें 25 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर प्रातः काल शौच जाने के 15 मिनट बाद साधारण जल से नियमित सेवन करने से धातु रोग में लाभ होता है....आओ #शीशम लगाये
#कैंसर होने पर रोज सुबह शाम शीशम हरे पत्तों का 1-2 चम्मच रस दाल चीनी पाउडर के साथ मिलाकर सेवन करने से तेजी से कैंसर में सुधार होता है। 30-40 दिन लगातार सेवन कर जरूर देंखें.....आर्युवेद औषधि असर धीरे धीरे करती है। परन्तु बीमारी जड़ से समाप्त कर देती है।
#हड्डी फैक्चर, टूटने पर दुबारा तेजी से जोड़ने में शीशम लेप सक्षम है.... शीशम के हरी पत्तियां, बीज, छाल और कुल्थ दाल बारीक पीसकर लेप लगाने से फैक्चर हड्डी जल्दी जुड़ती है....नये शोध में शीशम फैक्चर हड्डियां जोड़ने में सफल सक्षम पाया गया है।
इस बारिश में लगाये ...शीशम
इस बारिश में लगाये ...शीशम
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