Friday, September 27, 2019

स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत ग्राम पंचायत कालूडी में बनाए गए सार्वजनिक शौचालय सरपंच और उनके खास-खास लोगों के घरों में बना दिए गए हैं

पढ़ो! देखो! आंखें खोलो! सोचो!
सरपंच संघ पंचायत समिति बालोतरा, जिला बाड़मेर का मेरे विरुद्ध किया गया प्रदर्शन तथा मेरे खिलाफ उपखंड अधिकारी बालोतरा जिला बाड़मेर को दिया गया ज्ञापन।
इस ज्ञापन में भी घपला है अभी मैं इसे सिद्ध कर देता हूं कि इस ज्ञापन में कैसे घपला है। मेरे खिलाफ दिये गये ज्ञापन की प्रतियां में संलग्न कर रहा हूं आप उस ज्ञापन को पढ़िए और नीचे जो हस्ताक्षर किए गए हैं उनको भी देखिये! कई हस्ताक्षर कई महिला सरपंचों द्वारा भी किए गए हैं जबकि इन अखबार की फोटो मे और मेरे द्वारा अपलोड किए गए फोटो में कहीं पर भी एक भी महिला नहीं दिख रही है। इसका मतलब महिला सरपंचों के नाम पर उनके रिश्तेदारों ने या उनके पतियों ने फर्जी साइन किए हैं तथा फर्जी तरीके से ज्ञापन सुपुर्द कर विरोध किया है। मैं इन कमजोर और करप्ट लोगों से कहना चाहता हूं कि कम से कम इतनी तो हिम्मत रखिए कि जब एक महिला को सरपंच बनाते हो तो उसे उसका काम करने की आजादी भी दो। यहां पर भी घपला कर रहे हो, ठीक ऐसे ही हर ग्राम पंचायत में हो रहा है। जहां पर भी महिला सरपंच है वहां पर महिला सरपंच अपने चूल्हे चौके का काम करती हैं और उनके रिश्तेदार पंचायतों का काम संपादन करते हैं। जब कोई करप्शन की बात आती है तो उस महिला के खिलाफ कार्रवाई होती हैं और फिर यह लोग घूम-घूम कर कहते हैं कि फला-फला व्यक्ति ने महिला पर कार्यवाही कर दी यह कर दिया वह कर दिया। जबकि सबसे कमजोर वह लोग हैं जो महिलाओं की आड़ में उनकी पीठ पीछे छुप कर भ्रष्टाचार करते हैं। मर्द के बच्चे हो तो सामने आकर हमसे लड़ कर देखो। क्या महिलाओं की आड़ लेते हो।
मेरे हिसाब से इसे सरपंच संघ कहना गलत होगा बल्कि इसे गिरोह कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि संगठन अच्छे कार्य के लिए होता है जबकि मैं इनको इसलिए गिरोह कह रहा हूं क्योकि इनमें से कई लोगों के खिलाफ वारंट जारी हो चुके हैं कुछ सरपंच फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चुने गए सरपंच हैं। इनमें से ज्यादातर सरपंचों ने अपनी ग्राम पंचायतों में घोटाले किए हैं ग्रामीणों के पैसे खा गए गांव को बर्बाद कर दिया और इन्हीं की ग्राम पंचायतों में लगे ग्राम सेवकों ने तथा इन सरपंच लोगों के रिश्तेदारों में अपने-अपने नाम फर्जी कंपनियां बनाकर विकास अधिकारी से लगाकर उच्चाधिकारियों तक मिलावट कर फर्जी तरीके से विकास के नाम पर पैसे उठा कर हड़प कर गये है। ग्रामीण बेचारे देखते ही रह गए। सरकारों को लगता होगा कि वह जो बजट जारी करती है वह आम व्यक्ति तक पहुंचता होगा लेकिन यह भ्रष्टाचारी लोग आम जनता की खून पसीने की कमाई को दीमक की तरह चट कर लेते हैं और ग्रामीणों को पता ही नहीं चलता।
मेरे विरुद्ध ज्ञापन देने वाले सरपंचों तथा ग्राम पंचायतों के नाम क्रमशः निम्न प्रकार हैं :-
1 जालमसिंह राजपूत-सरपंच, ग्राम पंचायत जसोल तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
2 गंगाराम जाट- सरपंच, ग्राम पंचायत दुदवा तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
3 लूंगा देवी चौधरी- सरपंच, ग्राम पंचायत आसोतरा तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
4 टीना देवी मेघवाल-सरपंच, ग्राम पंचायत खेड़ तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
5 जबानाराम भील-सरपंच, ग्राम पंचायत टापरा, तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
6 कंचन कंवर चारण-सरपंच, ग्राम पंचायत आकड़ली, तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
7 मंजूदेवी चौधरी- सरपंच, ग्राम पंचायत जागसा तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
8 बबरीदेवी भील-सरपंच, ग्राम पंचायत जानियाना, तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
9 कैलाश कंवर पत्नी श्यामसिंह मेवानागर, महेचा- सरपंच ग्राम पंचायत मेवानगर तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
10 सरोज चौधरी-सरपंच, ग्राम पंचायत किटनोद तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
11 कल्याण सिंह राजपूत-सरपंच, ग्राम पंचायत गोपड़ी तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
12 जितेंद्र सिंह पुत्र भूरसिंह राजपूत-सरपंच ग्राम पंचायत मुंगड़ा तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
13 राजश्री कंवर पत्नी भगवतसिंह राठोड़ -सरपंच ग्राम पंचायत माजीवाला तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
14 शोभसिंह राजपूत-सरपंच ग्राम पंचायत तिलवाड़ा तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
15 संजय प्रताप सिंह राजपूत-सरपंच ग्राम पंचायत चांदेसरा तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
16 कमलेश कुमार चौधरी-सरपंच ग्राम पंचायत असाडा तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
17 जीताराम मेघवाल-सरपंच ग्राम पंचायत कितपाला तहसील पचपदरा जिला बाड़मेर।
व अन्य।
अब आप सोचिए कि यह लोग ज्ञापन, प्रदर्शन मे व हड़ताल में भी ईमानदारी नहीं रख रहे हैं व धांधली कर रहे है तो यह लोग पंचायतों में कैसा काम कर रहे होंगे ?
कुछ ही दिन पहले मैंने कुल 13 से ज्यादा भ्रष्टाचारी लोक सेवकों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी जिससे इनकी नींद उड़ गई है तथा यह लोग मुझ पर प्रेशर बनाने का नाटक कर रहे हैं तथा इसलिए फर्जी FIR करवा रहे है। इन लोगों की गलतफहमी यह है कि सुमेर लाल शर्मा इस FIR से डर जाएगा और राजीनामा कर लेगा और या फिर मुकदमा वापस ले लेगा, लेकिन इन मूर्खों के सरदारों को यह नहीं पता कि सुमेर लाल शर्मा अलग मिट्टी से बना हुआ व्यक्ति हैं जो ना तो हारना जानता है, ना टूटना जानता है और ना ही पीछे हटना जानता है, सिर्फ और सिर्फ लड़ना जानता है और जीतना जानता है।
यह लोग कह रहे हैं कि सुमेर लाल शर्मा ने ब्लैकमेल किया। तो मैं कहता हूं कि अगर मैंने ब्लैकमेल किया हो तो आप एसीबी के पास क्यों नहीं गए, जो रंगे हाथों गिरफ्तार करती हैं और सीधे जेल में डाल देती हैं क्या आप स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को नहीं जानते जो राजस्थान में अच्छे से अच्छे भ्रष्टाचारियों को सीधे जेल में भेजता है। क्या आपने इन विभागों के बारे में सुना ही नहीं है? लेकिन इन लोगों के पैरों तले जमीन ही नही है। और मैं दावे के साथ कहता हूं कि मेरी FIR में यह सारे के सारे लोग जेल जाएंगे और अगर किसी पुलिस अधिकारी ने या किसी अन्य लोक सेवक में इन लोगों को बचाने का प्रयास किया तो उस स्थिति में भी मैं विधिवत कार्यवाही करूंगा।
सरपंचों और ग्राम सेवकों को राज्य और केंद्रीय सरकार है पैसे देती हैं पंचायतों का विकास करने के लिए, ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधारने के लिए, ग्रामीणों को एस्टेब्लिश करने के लिए। लेकिन यह लोग फर्जी तरीके से भुगतान प्राप्त कर लेते हैं विकास कार्य जहां पर बताते हैं मौके पर विकास कार्य अस्तित्वविहीन होता है एक एक कार्य का दो दो, तीन तीन बार भुगतान प्राप्त कर लेते हैं।
सरकार कहती हैं कि सारे काम ऑनलाइन होने ही चाहिए अगर ऑनलाइन नहीं होते हैं तो भुगतान नहीं किया जाना चाहिए उन सभी आदेशों को ताक पर रखकर यह लोग उच्च स्तर तक सेटिंग करके मिलावट करके भुगतान प्राप्त कर लेते हैं और कार्यों को ऑनलाइन जानबूझकर नहीं करते ताकि किसी भी ग्रामीण को किए गए कार्यों और सरकार द्वारा आवंटित कार्य की भनक तक नहीं लगे और यह लोग बंदरबांट करते रहें।
पंचायत के अधिकारियों से लेकर विकास अधिकारी, अभियंताओं, जिला कलक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अधिकारियों तक सबकी सरकार ने एक गाइडलाइन बना रखी है कि हर माह को इनको इतनी ग्राम पंचायतों का निरीक्षण करना ही करना है। लेकिन सब भ्रष्टाचारी आपस में मिले हुए हैं विधिवत रूप से निरीक्षण नहीं करते और गाइडलाइन में यह भी लिखा है कि निरीक्षण में गड़बड़ी पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज करवाई जाए लेकिन न तो निरीक्षण करता है और ना ही कोई कानूनी कार्रवाई करता है।
आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि हर काम में इनका एक फिक्स कमीशन तय होता है उतना कमीशन देना ही देना होता है और उस कमीशन के बदले यह लोग क्या करते हैं कि अस्तित्व विहीन कार्य को भी पूर्णता प्रमाण पत्र दे देते हैं घटिया क्वालिटी वाले काम को अच्छा काम बता देते हैं और सरपंच व ग्रामसेवक के खिलाफ आई शिकायतों को दबाने का काम करते हैं उन शिकायतों को झूठी ठहराने का काम करते हैं और इस तरीके से लामबंद होने में उनका सहयोग देते हैं।
यह भ्रष्ट लोगों का काला चेहरा है। मैं तो कहता हूं कि इन लोगों का चेहरा तक नहीं देखना चाहिए सुबह उठते ही अगर किसी सरपंच के दर्शन होते हैं तो उस व्यक्ति को अपशकुन मानना चाहिए क्योंकि यह लोग गरीबों का खून चूसते हैं। मैं दावे के साथ कहता हूं व चुनौती देता हूं गवर्नमेंट मेरे द्वारा उठाये गये बिन्दुओं की जांच करें और भ्रष्टाचार को पकड़वाने की गारंटी मेरी। सभी भ्रष्ट सरपंचों से मैं कहना चाहता हूं कि वह मुझसे मुकाबला करे। जितने भी ज्ञापन देने हैं प्रदर्शन करने हैं सब कर लो, लेकिन मै डरने वाला नही हूं और ना ही चुप रहने वाला हूं। मैं सब की एक एक कर खोल खोल दूंगा।
मैंने ग्राम पंचायत कलूड़ी में किए गए करोड़ों रुपए के घोटालों को पकड़ लिया है तो अब यह लोग जानते हैं कि मेरे द्वारा करवाई गई FIR में निष्पक्ष जांच होने पर कोई नहीं बचेगा। 13 लोगों के अलावा और भी कई लोग हैं जो चपेट मे आयेंगे। अभियंताओं ने भौतिक सत्यापन किए बिना ही कई कार्यों को पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया, जबकि वह मौके पर अस्तीत्व मे नहीं है। कई अभियंताओं ने बहुत ही घटिया क्वालिटी के कार्यों को सही करार दे दिया हैं।
सुप्रिम कोर्ट द्वारा 2017 में बजरी खनन पर रोक लगा दी थी उसके बावजूद इन्होंने बजरी के नाम पर पैसा उठा लिया, जीएसटी टैक्स भरने के नाम पर लाखों का घोटाला किया है जबकि इनके द्वारा बनाई गई कंपनियां ही फर्जी है। कुछ मटेरियल सप्लाई फर्म ग्राम सेवक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष के बूढ़े बाप के नाम से बनी हुई है तथा कई ग्राम पंचायतों में सरपंच सोने एवं ग्राम सेवकों ने अपने रिश्तेदारों के नाम फर्जी फर्मे खोलकर फर्जीवाड़े के जरिए करोड़ों रुपए का भुगतान उठा लिया है। यह पैसा आम जनता का है, इनकी बपौती नहीं है।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत ग्राम पंचायत कालूडी में बनाए गए सार्वजनिक शौचालय सरपंच और उनके खास-खास लोगों के घरों में बना दिए गए हैं। ग्रेवल सड़कों के नाम पर डबल डबल भुगतान उठा लिया है तथा ग्रेवल, रोड रोलर, ग्रेवल ट्रांसपोर्टेशन के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान प्राप्त कर लिया है जबकि मौके पर सड़क ही नही है।
इन लोगों को मेरी आरटीआई लगाने से आपत्ति है, मेरी शिकायतों से आपत्ति है, मेरे मुकदमों से आपत्ति है तो यह लोग इस्तीफे देकर घर बैठ जाए या फिर घोटाले करे ही नही तो इन सब चीजों का उन पर कोई असर नहीं होगा। लेकिन यह सोचते हैं कि वह नौकरी भी करेंगे, तनखा भी लेंगे, लोक सेवक के नाम पर लोगों को बेवकूफ भी बनाएंगे, सरकारी धन का दुरुपयोग करेंगे, अपने पदों का दुरुपयोग करेंगे, गावों को बर्बाद करेंगे, लोगों के हिस्से का पास पैसा खाएंगे और मैं चुप बैठा रहूंगा! तो यह असंभव है, ये मैं नहीं होने दूंगा, यह मुझे यह मंजूर नहीं है, क्योंकि मैं एक जागरूक नागरिक हूं।
और भी ऐसे कई घोटाले हैं जो काफी मेहनत के बाद पकड़ में आए हैं मैं एक-दो दिन में सारा डाटा मेरी फेसबुक आईडी पर अपलोड कर दूंगा तथा व्हाट्सएप के जरिए वायरल कर दूंगा।
सुमेर लाल शर्मा...
आरटीआई कार्यकर्ता।

Monday, September 16, 2019

माननीय जिला आधिकारी महोदय

सेवा में
माननीय  जिला आधिकारी  महोदय
इटावा
बिषय - प्रार्थिनी की स्वंतत्रता संग्राम  सेनानी   अश्रित की  पारवारिक  पेंशन  शीघ्र  बनाये  जाने  के  सबंध  में
श्रीमान  जी
  प्रार्थनी  के पति  श्री  कृष्ण  बिहारी  अग्रवाल  1942  के भारत  छोड़ो  आंदोलन के स्वंत्रता  संग्राम  सेनानी  थे
उन्हें  प्रति माह  उत्तर प्रदेश  सरकार  से नियमानुसार पेंसिन  मिलती  थी दिनाँक 13 -10-2019  को उनकी  बीमारी  से मृत्यु  हो गयी  थी
प्रार्थनी ने  दिनाँक 13 -12 -2019  को श्री मान  कोषाधिकरी इटावा क़े  कार्यालय में   स्वंतत्रता संग्राम  सेनानी   अश्रित की  पारवारिक  पेंशन  बनाये  जाने  के लिए  आवेदन  किया  था | जिस पर  उप जिला अधिकरी  भरथना  द्वारा जिलाधकारी  इटावा के यहाँ  प्रार्थनी  के  पछ  में जाँच  भी प्रस्तुत  की  जा  चुकी  है प्रार्थनी  की उक्त  पत्रावली पर पाँच  माह  का  समय  बीत  जाने  के  बाद भी  प्रार्थिनी की स्वंतत्रता संग्राम  सेनानी अश्रित  पारवारिक  पेंशन  अभी  तक  नहीं  बनी  है | प्रार्थनी  की उम्र 82  बर्ष  है  चलने  फिरने में  असमर्थ  है  काफी  परेशानी  महसूस  करती  है | अतः  आपसे  सनम्र  प्रार्थना  है  कि  प्रार्थिनी की स्वंतत्रता संग्राम  सेनानी   अश्रित   पारवारिक  पेंशन  शीघ्र  बनाये  जाने  की  कृपा करें | प्रार्थनीआपकी  सदैव  आभारी  रहेगी |
प्रार्थनी
कमला  अग्रवाल
पत्नी  स्वर्गीय कृष्ण  बिहारी  अग्रवाल
आज़ाद  रोड  भरथना
जिला  इटावा
मो 0 -9761642016 

Sunday, September 15, 2019

बाड़मेर जिले की मीडिया के संबंध में खुलासा।

बाड़मेर जिले की मीडिया के संबंध में खुलासा।
काफी लंबे समय से कई लोग मीडिया वाले, सम्पादक, पत्रकार, News reporter वगेरह वगेरह... बन कर घूम रहे हैं। वह जनता को भी परेशान करते हैं जो चिंता का विषय हैं और कई बार यह लोग सरकारी कार्यालय में अधिकारियों को धमकाते हैं व परेशान करते हैं जो ठीक है क्योंकि भ्रष्टाचारियों को तंग करना कोई बुरी बात नहीं।
मुझे पहले से जानकारी थी कि यह सब ऐसे ही डराने धमकाने के लिए हो रहा है लेकिन मैंने इसका खुलासा करना तय किया और मैने आरटीआई फाइल की।
मेरी आरटीआई का जवाब देने में पहले तो सम्बंधित अधिकारी ने आनाकानी और नाटक किये लेकिन जब उसे स्पेशल तरीके से समझाया गया तो उसने निम्न प्रकार से बाड़मेर जिले के अधिस्वीकृत पत्रकारों की सूची और बाड़मेर जिले में डीपीआईआर से विज्ञापनों के लिए स्वीकृत समाचार पत्रों की सूची उप्लब्ध कराई जो निम्न प्रकार हैं :-
1. बाड़मेर जिले में डीपीआईआर से विज्ञापनों के लिए स्वीकृत समाचार पत्रों की संख्या कुल 14 हैं जो संलग्न है।
2. बाड़मेर जिले के अधिस्वीकृत पत्रकारों की संख्या कुल 9 है जो संलग्न है।
अब देखा जाए तो यह भी बड़ी विडंबना है कि 14 समाचार पत्र है और 9 पत्रकार है। कैसे चल रहे है बाकी के 5 अखबार।
गजब की मीडिया है हमारी।
दूसरों का भंडाफोड़ करते है, भंडाफोड़ करने की धमकी देते है, खुलासा करते है, पोल खोलने की बात करते हैं और खुद की पोल में ढोल बज रहा है।
कुछ लोग तो यूं ही यूट्यूब पर ही चैनल चलाते हैं कुछ व्हाट्सएप, फेसबुक तथा ब्लॉगर ब्राण्ड पत्रकार बने हुए हैं।
मुझे समझ में नहीं आता कि गले में कैमरा लटका कर घूमने से हाथ में एक मीडिया का नाम लिखा हुआ डंडा पकड़े हुए इधर-उधर घुमने से क्या होता है ?
यह पब्लिसिटी वगैरह कुछ नहीं होती है सब भ्रम जाल है, फालतू चीजें हैं।
इससे बेहतर है कि आप कोई अच्छा सा काम करें और पत्रकारिता के नाम पर चल रही अवैध दुकानें बंद होनी चाहिए, क्योकि यह ठीक नहीं है।

इंडिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स

विकास ने जीपीएस का ट्रैक रेकॉर्ड, पेट्रोल बिल्स, पेट्रोल पंप के कर्मचारियों के साथ फ़ोटो और विडियो, खाने के बिल, हर ज़िले के दो स्थानीय लोगों के फ़ोन नंबर और विडियो साक्ष्य, हर टोल प्लाज़ा पर किसी अधिकारी या कर्मचारी के साथ प्रमाण के रूप में फ़ोटो, हर ज़िले के राजपत्रित अधिकारी की लिखित औपचारिक स्वीकृति, रास्ते में गाड़ी की सर्विस का रेकॉर्ड, होटल में प्रवेश के दौरान फ़ोटो और होटल मैनेजर का के साथ फ़ोटो और विडियो, साक्ष्य के रूप में एकत्रित किए और इसके बाद रेकॉर्ड्स के लिए दावे की पेशकश की।

इंडिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स, दोनों ही के द्वारा विकास के साक्ष्यों की पुष्टि की जा चुकी है और उन्हें ख़िताब से सम्मानित

Tuesday, August 27, 2019

स्टेट बैंक खाता धारक के खाते से साइवर ठगों ने दस हजार रुपए निकाले


स्टेट बैंक खाता  धारक  के  खाते  से साइवर  ठगों ने दस  हजार  रुपए  निकाले
आजाद  रोड निवासी  वरुण तिवारी  स्टेट बैंक शाखा  में  बचत खाता  है 23  अगस्त को  5 :36  पर   का भर्थना खाता  धारक  के रेजिस्टर्ड  मोबाईल  न 0  पर 10 000 रुपए की  निकासी  का मैसिज  प्राप्त  हुआ | खाता  धारक ने शीघ्र  ही  बैंक स्टेट मेंट चेक  किया धन  निकासी   की  जानकारी  मिलने  पर  उपभोक्ता  ने   शेष  बची  धन  राशि  को  ऑफ़ लाइन  खाते में  ट्रांसफर  किया  स्टेट  बैंक  कस्टमर  केयर न 0  पर  साइवर  ठगी  की  सूचना  दी   इसके  अतरिक्त  प्रमुख पेमेंट  गेटवे  सेवा  प्रदाता  कंपनियों  को संदिग्ध   खाता  धारक के  लेन देन ब्लाक  करने  की  ईमेल  कर पूर्व  सूचना  दी  साथ  हीं इस घटना  की एफ आई आर  भर्थना   कोतवाली  में  भी   दे  दी  जन्मास्टमी अवकाश   के कारण   बैंक  26  तारीख  तक  नही  खुलेगी इस लिए   संबधित बैंक  sbi.00619@sbi.co.in पर  मेल कर  भी इस  संदिग्ध खाता  धारक   की  सूचना  दी

प्रमुख पेमेंट  गेटवे  सेवा  प्रदाता  कंपनियों  के ईमेल 

आर बी आई के  नए  नियमनुसार यदि  बैंक ग्राहक  के  खाते  से  कोई  धोख़ा  धड़ी  होती  है  तो  ग्राहक  को  72  घंटे अंदर घटना  की एफ आई आर   संबधित  बैंक  में निम्न  दस्ता वेजों के  साथ शिकायत  करनी  होती  है   इसके अतरिक्त सभी  दस्ता वेजों  की प्रमाणित स्कैनड  कॉपी  संबधित बैंक को  भेजनी  होंगी 

1 बैंक स्टेट मेंट  की स्व प्रमाणित  कॉपी 
2 निवास  प्रमाण  पत्र  की स्कैनड  कॉपी 
 3  थाने में लिखाई  एफ आई आर की मूल  प्रति 
इतना  सब  करने  के बाद यदि  बैंक   जांच  में  पाता  है  कि ग्राहक  का कोइ दोष     न ही है  तो 90  दिनों  के  अंदर ट्रांसफर  हुई  राशि  वापस  आजाती  है  यदि 90  दिनों  के  अंदर ग्राहक  की समस्या  का निराकरण  नहीं  होता  है  तो  संबधित उपभोक्ता www.bankingombudsman.rbi.org.in पर  अपनी  शिकायत  कर सकता  है bankingombudsman यदि बैंक के जबाब  से   संतुस्ट   नहीं  है  तो  सबधित  बैंक  पर  अर्थ  दंड  की  संस्तुति  कर  उप भोक्ता  को  न्याय  दिलाने में  महत्व  पूर्ण  भूमिका  अदा  करता है 
 एक जागरूक  ग्राहक  होने  के नाते ये पोस्ट  शेयर कर रहा  हूँ आशा  है बैंक  ठगी  के  शिकार  ग्राहकों  को   धन  की  वापसी  लेने  में  ये  पोस्ट काफी  सहूलियत  मिलेगी 

 अखिल  भारतीय  ग्राहक पंचयात  भर्थना  शाखा 


   

Friday, August 23, 2019

consumer conversasion


extremely disappointed due to d fact tht 1 of my cheques had been dishonoured due to insufficient balance inspite of having reqd. MOD balance. Who is responsible 4 d mental trauma & embarrassment I had to go thru bcoz of mere negligence of ur employee

Such fraudsters you are. First you take away my existing benefit without informing me or my confirmation and now being rude about the same.Disappointed!!@ConsumerReports
Quote Tweet

JALAUN POLICE CYBER CELL responded immediately to my complaint & the amount was refunded back to my account within 24hrs,helping instill great FAITH that our money is safe against Cyber Frauds!!!