डेयरी स्थापना के लिये अब 10 लाख की जगह 50 लाख रू. तक मिलेगा ब्याज रहित ऋण
आचार्य विद्यासागर योजना में अब डेयरी स्थापना के लिये 50 लाख रूपये तक का ऋण दिया जा सकेगा। अभी इस योजना में देशी गौवंश से दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये अधिकतम 25 प्रतिशत के शासकीय अनुदान के साथ 10 लाख रूपये तक का ब्याज रहित ऋण दिया जाता है। यह निर्णय आज गौवंश संरक्षण उपाय समिति की बैठक में लिया गया।
बैठक में समिति के सदस्य पशुपालन एवं मत्स्योद्योग मंत्री श्री अंतर सिंह आर्य, गृह एवं परिवहन मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह, स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्री शिव चौबे, उपाध्यक्ष गौसंवर्धन बोर्ड महामण्डलेश्वर अखिलेश्वरानंद, अपर मुख्य सचिव वन एवं आर्थिक सांख्यिकी श्री दीपक खाण्डेकर, संचालक एवं प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड डॉ. आर.के. रोकड़े, प्रबंध संचालक स्टेट कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन श्रीमती अरूणा गुप्ता और प्रबंध संचालक राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम डॉ. एच.बी.एस. भदौरिया ने भाग लिया।
बैठक में गौ संरक्षण से संबधित अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये जिनमें ईधन के रूप में भूसे के उपयोग पर प्रतिबंध, आवारा पशु संरक्षण के लिये 5 ग्राम पंचायतों के मध्य एक गौशाला खोलना, चारा उत्पादन बढ़ाने के लिये किसानों को चारा किट प्रदाय, सूखा चारा के लिये फोडर ब्लॉक बनाना, कृषि उद्यानिकी तथा पशुपालन विभाग के प्रक्षेत्रों में चारा बैंकों का निर्माण, हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा रीपर की अनिवार्यता, मनरेगा के माध्यम से चारागाह निर्माण आदि शामिल हैं। बैठक में गौवंश संरक्षण से संबंधित नियमों का कडाई से पालन सुनिश्चित करना, गोबर गैस, गौमूत्र से कीटनाशक और जैविक खाद बनाकर गौशाला को आत्मनिर्भर बनाना, पशुधन बीमा का गौपालकों को लाभ सुनिश्चित करना, नियमितत रूप से विकासखंड जिला एवं राज्य स्तर पर सर्वाधिक दूध देने वाली देशी गाय गोपाल पुरस्कार देना आदि पर चर्चा की गई।
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बैठक में बताया गया कि गाय के दूध वितरण के लिये अलग के व्यवस्था की जा रही है जो इंदौर एवं भोपाल में आरंभ हो चुकी है। बैठक में बड़े शहरों की खूली जगह पर गौ ग्रास दान केन्द्र और गौ होस्टल बनाने पर भी चर्चा की गई। दान केन्द्र पर आम नागरिक गाय को चारा आदि खिला सकेंगे। वहीं गौ होस्टल में लोग गाय खरीद कर पालने के लिये दे सकेंगे। बैठक में निर्णय लिया गया कि किसानों को गोबर की जैविक खाद उपयोग करने के लिये प्रेरित किया जायेगा। गोबर की खाद जहाँ खेत को तीन साल तक उपजाऊ बनाये रखती है वहीं रसायनिक खाद का उपयोग भूमि की उर्वरा शक्ति को लगातार कम करता जाता है। जैविक खाद के उपयोग से उत्पन्न फसल पौष्टिकता से भरपूर होने के साथ कीमत भी अच्छी मिलती है।
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किसानो के हित के लिए नाबार्ड की कई लाभकारी योजनाये है - एक किसान
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