एयरहोस्टेस ने सुरीली आवाज़ में विमान के कोच्चि एयरपोर्ट पर उतरने की घोषणा की । ज़मीन पर उतरने से पहले ही विमान की ऊँचाई से नीचे दिखते नारियल पेडों की सघनता ने संकेत दे दिया कि हम केरल के ऊपर मंडरा रहे है । एयरपोर्ट पर पहुँचते ही पतिदेव के मोबाइल की घण्टी बजी । फोन अगले दस दिनों तक हमारे साथ रहने वाले ड्राइवर रिज़वी का था । ड्राइवर ने अपने मलयाली लहज़े की हिंदी में बताया कि वह एयरपोर्ट के बाहर हमारे नाम की तख्ती लिए खड़ा है । बाहर आते ही ड्राइवर के हाथ में चतुर्वेदी लिखी तख्ती देख इशारा किया और ज़रा सी देर में इनोवा हमारे सामने खड़ी थी । ड्राइवर ने लगेज़ डिक्की में डाला और हमारी गाड़ी कोच्चि से मुन्नार की लगभग 5 घण्टे लम्बी यात्रा की ओर बढ़ चली । केरल की सबसे बड़ी नदी पर बने पुल से गुजरते हुए एक बारगी लगा जैसे गोआ में हूँ । नदी के दोनों मुहानों पर नारियल के तिरछे झुके पेड़ सलामी दे रहे थे । पेरियार के किनारों की वनस्पति के प्रतिबिम्बों से हरे रंग की नदी के चौड़े पाट विशालता में पसरे है । मंथर गति से प्रवाहित विशाल जलराशि ठहरे पानी का रूप धर भर्मित करती है ।
कान्हा ने अपनी सोशल बुक के हवाले से कहा - मम्मा आपको पता है वास्कोडिगामा ने भारत की खोज समुद्री रास्ते से केरल पहुँचकर ही की थी । इब्नबतूता भी सबसे पहले केरल ही आये थे। मम्मा हम इंडियन्स ने किस देश की खोज की थी ?? ड्राइवर रिज़वी ने मेरे पहले ही एक शानदार उत्तर दिया -- बेटा बाकी के देश हमकों ढूंढते पहुँचे । हम भारतीयों को किसी की जरूरत नही थी इसलिए हम शान से अपनी जगह पर जमे रहे। कार के भीतर ठहाके लगने लगे । रिज़वी ने कान्हा से पूछा -- बेटा आपका क्या नाम है ? " जी मेरा नाम कान्हा है ।" रिज़वी गाड़ी चलाते सड़क पर नज़र जमाए केरल के विषय में ढेर रोचक जानकारियां देते चल रहा था --- हमारे इदर कृष्ण भगवान को "कानन " बोलता । कान्हा हम आपको "कानन" बोलेगा । देको कानन ( कान्हा ) वो वाला बिल्डिंग ब्रिटिश लोगों के टाइम का है । ब्रिटिशर्स इदर स्पाइसेस (मसाले) और टी के लिए आता था । नार्थ इंडिया का लक्ष्मीबाई को सब जानता है । ये देखों ये केरल का सेदू लक्ष्मीबाई का मूर्ति । सोचों उस जमाने में ब्रिटिश अभी के पाकिस्तान से लेकर केरल तक पहुंचा था ।
शहरी आबो हवा अब काफी पीछे छूट चुकी थी और पहाड़ी घुमावदार रास्ते शुरू हो गए । आस पास का मनमोहक प्राकृतिक दृश्य बेहद खूबसूरत पेंटिंग सा था । सामने बड़ी सी हरी झील , झील के पीछे विशाल पहाड़ , पहाड़ो के ऊपर उड़ते नीले बादल , लहराते झुके नारियल पेड़ों की लम्बी कतार एक "परफेक्ट पेंटिंग " । कार अब तेज़ी से घूमती हुई पहाड़ों की ऊँचाई चढ़ रही थी । हमारे एक तरफ ऊँचे पहाड़ और दूसरी तरफ़ गहरी खाई थी । इन तंग पहाड़ी रास्तों पर पानी के अनगिनत स्रोत छोटे झरनों के रूप में झरझराते नीचे खायी की ओर गिर रहे थे । दाहिनी तरफ खाई में भी ऐसा घना जंगल की नीचे के दृश्य देखना सँभव न था । कही कही पेडों के बीच से कोई खुला झरोखा दिखता जहाँ से निचली पहाड़ियों की झलक देख हमें अपनी ऊँचाई का भान हो रहा था । इस बुलन्दी तक पहुँचते हुए हमारे कान पूरी तरह खुलकर सीटियां बजा रहे थे । बारिश की वजह से पिछले कई दिनों से यहाँ लैंड स्लाइडिंग या जिसे पहाड़ खसकना कहते है हो चुका था । पहाड़ों से चिपकर चलती कार हाल में हुई लैंड स्लाइड की ताजा भुरभूरी , लाल मिट्टी के पास से गुजर रही थी । सड़क किनारे के कई विशाल पेड़ पाँच फ़ीट से भी ज्यादा लम्बी अनावर्त्त जड़ दिखाते हम पर आ गिरने के लिए धमका रहे थे ।
"कलेजा मुँह को आना" यह हिंदी मुहावरा मुन्नार के पहाड़ी रास्तों पर ही पहली बार प्रयुक्त हुआ होगा । इन सर्पाकार ,तंग रास्तों पर बरसों पहले दुघटनाग्रस्त हुई कई गाड़ियों के जंग खाए मलबे पहाड़ों से चिपके फासिल का रूप ले चुके थे । भयावह अनहोनी की गूंगी तस्वीर इन गाड़ियों के अस्थि पंजर को जंगल ने अपनी बाँहों में लपेट लिया था । साँप की तरह लहराती कार तीखे, संकरे , अंधे पहाड़ी मोड़ों पर कई बार सामने से आती गाड़ी से टकराती बची । इस तरह की किसी भी सम्भावित दुर्घटना पर मलहम लगाने दाहिनी तरफ साथ साथ चलती गहरी खाई प्रेमपूर्वक हमें बाहों में लेने आतुर थी । वीरान पहाड़ों पर ऊपर और ऊपर जाते हुए एकाएक पानी का तेज़ शोर पास आने लगा ।अगले घुमाव पर मुड़ते ही ये क्या ?? ओह्ह , ओह्ह शानदार ! अद्भुत ! बायीं ओर ऊँचाई से एक विशाल , सफ़ेद जलप्रपात सड़क के बायीं तरफ सरसराता पूँछ पटक रहा था । मेरे देखे अब तक के सभी जलप्रपात ऊँचाई से गिरता पानी था लेकिन मुन्नार के रास्ते का ये। "चियापारा जलप्रपात" अपनी विशाल चौड़ाई के साथ बलखाता सीढ़ियों से उतर उतर झरझराता पानी था । नीचे की सड़क पर खड़े रहकर आसमान से उतरते पानी को मुग्ध हृदय से मैं आँखों के कटोरे में भर रही थी । क्या भागीरथी जमीन पर इसी तरह आयी होगी ?? सड़क किनारे लगे बोर्ड पर मलायलम में लिखे जलप्रपात का नाम "चियापारा " ड्राइवर ने बताया । सड़क किनारे लिखे होर्डिंग पर भिन्न भिन्न अर्धवर्त के घुमाव में लिखे मलायलम निर्देश की लिपि रंगोली की आकृति सी लगती है । ऊँचाई से गिरते पानी के छीटे हवा में उड़ रहे थे । हवा में लहराता ये गीला आँचल गालों को नरमाई से सहला रहा था । इस जलप्रपात के विंहगम दृश्य को जेहन में हमेशा के लिए कैद कर लेने का मन था ।
जलप्रपात सड़क पर जिस ओर गिर रहा था उसके पीछे की चट्टानी दीवार किसी मायावी तिलिस्म सी धुँधली भयावहता थी । गतिमान पानी उछलते ने आसपास की चट्टानों पर मोटी काईयुक्त चिकनाहट ला दी थी । इन जानलेवा चट्टानों पर भी कुछ जुझारू आशिकों ने "आर प्लस एस" लिख अपने प्रेम को अमर बना लेने की बचकानी कोशिश की थी । कुछ कातर प्रेमियों के दिल में तीर भी घुसा था ।
चारों तरफ़ उड़ते कोहरे ने इस ठंडे ,क्षितिज-विस्तारित पहाड़ों को स्वर्गिक बना दिया था । कान्हा को पानी में इस तरह खोया देख रिज़वी ने हँसते हुए -- कहा ये तो ट्रेलर है कानन । पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त । मुन्नार चलो फिर समजेगा कि जमीन का स्वर्ग केरल में है ।
केरल का पहला ही दिन लटालोप था । रिज़वी ने कान्हा से पूछा -- कानन तुम बाहुबली देखा न ?? तूमको माल्लुम उसका जंगल केरल का है । चेन्नई एक्सप्रेस में शाहरुख का जीप जिदर झील में डूबा न वो हम तुमकु कल ले जाएगा । कान्हा ने उत्साहित हो पूछा -- अंकल आप हिंदी फिल्म देखते हो ?? हाँ में तो किशोर कुमार का बड़ा फैन हूँ । बस फिर क्या था कार में पेन ड्राइव पर चलते गीत " पल पल दिल के पास तुम रहती हो ....कोई हमदम न रहा .. ..मेरे महबूब कयामत होगी ....एक लड़की भीगी भागी सी ...." से पहाड़ी हवा गूँजती रही ।
रात 9 बजे पर्वत की असीम ऊँचाई पर बसे छोटे से शहर मुन्नार की जगमगाहट शुरू हुई । रिज़वी पर्यटकों को घुमाने के अपने पेशे की वजह से हमारे द्वारा बुक किये गए होटल के रास्तों से अच्छी तरह परिचित था। गाड़ी हमारे होटल के सामने रुकी तो रिज़वी ने सारा सामान लाबी में रखी ट्राली में जमा दिया । होटल में चेक इन की औपचारिकता पूरी होते ही रिज़वी को सुबह 9 बजे तैयार रहने कह हम लिफ्ट की तरफ बढे । तभी पीछे से आवाज़ आयी -- कानन कल तैयार रहना अपन टी गार्डन और बाहुबली के गाँव चलेंगे । कान्हा ने हँसते हुए कहा -- ठीक है गुड नाईट अंकल ( शेष कल )
चारों तरफ़ उड़ते कोहरे ने इस ठंडे ,क्षितिज-विस्तारित पहाड़ों को स्वर्गिक बना दिया था । कान्हा को पानी में इस तरह खोया देख रिज़वी ने हँसते हुए -- कहा ये तो ट्रेलर है कानन । पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त । मुन्नार चलो फिर समजेगा कि जमीन का स्वर्ग केरल में है ।
केरल का पहला ही दिन लटालोप था । रिज़वी ने कान्हा से पूछा -- कानन तुम बाहुबली देखा न ?? तूमको माल्लुम उसका जंगल केरल का है । चेन्नई एक्सप्रेस में शाहरुख का जीप जिदर झील में डूबा न वो हम तुमकु कल ले जाएगा । कान्हा ने उत्साहित हो पूछा -- अंकल आप हिंदी फिल्म देखते हो ?? हाँ में तो किशोर कुमार का बड़ा फैन हूँ । बस फिर क्या था कार में पेन ड्राइव पर चलते गीत " पल पल दिल के पास तुम रहती हो ....कोई हमदम न रहा .. ..मेरे महबूब कयामत होगी ....एक लड़की भीगी भागी सी ...." से पहाड़ी हवा गूँजती रही ।
रात 9 बजे पर्वत की असीम ऊँचाई पर बसे छोटे से शहर मुन्नार की जगमगाहट शुरू हुई । रिज़वी पर्यटकों को घुमाने के अपने पेशे की वजह से हमारे द्वारा बुक किये गए होटल के रास्तों से अच्छी तरह परिचित था। गाड़ी हमारे होटल के सामने रुकी तो रिज़वी ने सारा सामान लाबी में रखी ट्राली में जमा दिया । होटल में चेक इन की औपचारिकता पूरी होते ही रिज़वी को सुबह 9 बजे तैयार रहने कह हम लिफ्ट की तरफ बढे । तभी पीछे से आवाज़ आयी -- कानन कल तैयार रहना अपन टी गार्डन और बाहुबली के गाँव चलेंगे । कान्हा ने हँसते हुए कहा -- ठीक है गुड नाईट अंकल ( शेष कल )
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