मेरे लिए हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय दिनांक 18.05.2018"
1. (वर्ष 2010 में) पुलिस के अफसरों(हबीब खान गौराण आईपीएस, राघवेन्द्र सुहासा आईपीएस आदि) ने वर्दी की आड़ में, कानून हाथ में लेकर, गोवर्धन सिंह के जीवन को तहस नहस कर दिया....
2. पुलिस के इस समस्त कृत्य पर FIR दर्ज कर, सीबीआई को जांच दी जानी चाहिए अथवा न्यायिक जांच के आदेश किए जाने चाहिए...
3. राजस्थान सरकार गोवर्धन सिंह की सुरक्षा सहित यह सुनिश्चित करे कि गोवर्धन सिंह को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं हो सके....
4. गोवर्धन सिंह खुद के खिलाफ दर्ज सभी झूठे मुकदमों का विवरण सारणी बनाकर पेश करे और प्रकरण दिनांक 03.07.2018 को पुनः सुनवाई के लिए रखा जाए...
जस्टिस निर्मलजीत कौर
राजस्थान उच्च न्यायालय,
जोधपुर
राजस्थान उच्च न्यायालय,
जोधपुर
आपको याद होगा वर्ष 2010 में मेरे खिलाफ बहुत सारे झूठे मुकदमे दर्ज हुए थे, RTI के तहत सूचना लेकर जिन भ्रष्ट लोगों के खिलाफ मैंने ACB में मुकदमे दर्ज कराए थे, उन सब लोगों ने हबीब खान गौराण आईपीएस, राघवेन्द्र सुहासा आईपीएस आदि को खरीद कर, मुझ पर घृणित आरोप लगाए थे। जिनमें से कुछ झूठे आरोप ऐसे थे:-
1. सेना के नक्शे मिले हैं पाकिस्तान से सम्बंध हो सकता है
2. नकली नोट छापने का आरोप
3. कम्प्यूटर में महिलाओं की नग्न तस्वीरें मिली है, हो सकता है इनको ब्लैकमेल किया गया हो
4. चोरी
5. लूट
6. धोखाधड़ी
7. ब्लेकमेलिंग
8. राजकार्य में बाधा
9. मानहानि
10. षडयंत्र
11. मारपीट
12. अन्य अनेकानेक झूठे आरोप भी...
2. नकली नोट छापने का आरोप
3. कम्प्यूटर में महिलाओं की नग्न तस्वीरें मिली है, हो सकता है इनको ब्लैकमेल किया गया हो
4. चोरी
5. लूट
6. धोखाधड़ी
7. ब्लेकमेलिंग
8. राजकार्य में बाधा
9. मानहानि
10. षडयंत्र
11. मारपीट
12. अन्य अनेकानेक झूठे आरोप भी...
बहुत सारे मुकदमे दर्ज करने के बाद हिष्ट्रीशीटर बना दिया गया और पुलिस अधीक्षक की अधिकतम सीमा का 2000 रुपये का ईनाम घोषित कर, राजस्थान के प्रत्येक पुलिस थाने में मेरा फोटो भी लगा दिया गया था, चोरी का झूठा आरोप लगाकर घर से मेरी कार ले गए, घर-कार्यालय का सारा सामान ले जाकर ताले लगा दिए, बैंक खाते सील कर दिए, भाई-बहनोई-साथियों को भी इन झूठे मामलों में फंसा दिया गया, मेरे एक साथी को नकली नोट छापने के मामले में 29 दिन जेल में रखा, मेरा मकान तोड़ने के लिए तहसीलदार ने नोटिस दिया जिसको न्यायालय ने 'स्टे' देकर रोका....
आख़िरकार सभी मुक़दमे हाईकोर्ट के सुपरविजन के कारण वर्ष 2010 में ही झूठे पाए गए और सभी मुकदमों में नकारात्मक अंतिम रिपोर्ट न्यायालयों में पेश कर दी गई। भ्रष्टाचारी लोग, अपराधी किस्म के पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर इन झूठे मुकदमों में मुझे एक मिनट के लिए भी बन्द नहीं रख पाए....
राई का पहाड़ बनाने के बारे में तो सुना है लेकिन बिना राई के भी पहाड़ बनाने की असफल कोशिश का अद्वितीय उदाहरण साबित हुआ है उक्त सम्पूर्ण प्रकरण.....बिना राई के पहाड़ बनाने की उक्त असफल कोशिश करने वालों में कई नेता, पत्रकार, सरकारी अफसर, ज़ज़ सहित कई अन्य लोग भी शामिल थे....
उन दिनों में कुछ लोगों ने अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए मुझे ब्लैकमेलर के रूप में प्रचारित किया, मैं उन लोगो को चुनौती देता हूँ कि वे इस तथ्य को प्रमाणित करना तो दूर, पूरी धरती से केवल एक व्यक्ति ऐसा लेकर आये जो मुझ पर ऐसा आरोप तक भी लगा सके, मुझे पता है कि जिन लोगों में सत्य के साथ खड़ा होने और भ्रष्टाचारियों से लड़ने का सामर्थ्य नहीं होता है उनके पास केवल ऐसी ओछी, तथ्यहीन एवं आधारहीन बातें ही होती हैं, लेकिन मेरी झूठी आलोचना मुझे लगातार ऊर्जावान बनाए रखती है.....
RTI लगाने वाली जनता यानि मालिकों को ब्लैकमेलर कहने वाले सभी नेता, अफसर और भ्रष्टाचारी मुझ पर ऐसा कोई आरोप साबित करके दिखाए अन्यथा नागरिकों के संवैधानिक अधिकार RTI का इस्तेमाल करने वालों पर ऐसा आरोप लगाकर राष्ट्र का अहित नहीं करें....यही चुनौती मैंने पूर्व DGP श्री ओमेन्द्र भारद्वाज को उनके चैम्बर में श्री प्रदीप व्यास IPS और श्री अनिल पालीवाल IPS के सामने दी थी, उसके बाद DGP साहब की आवाज़ ही नहीं निकली थी क्योंकि आरोप लगाना सरल है RTI लगाकर जिम्मेदार नागरिक(मालिक) बनना कठिन है.....मेरा दावा है ईमानदार से भी ईमानदार नागरिक जिस दिन पहली RTI लगा देगा, भ्रष्टाचारी उसी दिन से उसे ब्लैकमेलर कहने लगेंगे....
मेरे विरुद्ध झूठे आपराधिक प्रकरण दर्ज कराये थे, पुलिस मेरे विरूद्ध थी परन्तु सत्य, सत्य ही रहता है, सत्य के पथ पर सदा चला हूँ और चलता रहूँगा, पीठ पीछे बोलने वालों के कथनों से मेरी यात्रा कभी नहीं थमेगी, क्योंकि मेरा लक्ष्य व्यवस्था परिवर्तन के लिए है, मेरा संघर्ष भ्रष्टाचार के विरुद्ध है, सत्य का पथ, परमात्मा प्रदत्त हौसला और सच्चे साथियों के कारण मैं मेरे लक्ष्य की ओर अग्रसर हूँ....
आपका ही
गोवर्धन सिंह
गोवर्धन सिंह
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