गोआ के बागा बीच पर एक शाम ।
रेत के एक विस्तृत मैदान में ढाबे और होटल के बीच की एक चीज की लंबी कतार है जिसे यहां शेक्स कहा जाता है। समंदर में नहा कर लोग यहां आराम कुर्सियों पर धूप सेंकते हैं , खाते पीते हैं । मैं एक ऐसे ही एक शेक की टेबल पर बैठकर बीयर पी रहा हूं । गोवा में शांति ढूंढना बेकार है । यह हंगामे की जगह है । मैं हंगामा नहीं कर पाता। यह मेरी नाकाबिलियत भी है और मर्जी भी , इसलिए चुपचाप बैठ कर ढलती शाम और आते-जाते लोगों को देख रहा हूं
बीच पर आसमान और ज़मीन में एक प्रतियोगिता चल रही है । अलग अलग रंग दिखाने की। ढलती शाम अपने कलर बॉक्स में अकेले नारंगी रंग के ही सैकड़ो शेड्स लायी है। हर पल एक नया शेड , पहले वाले से बिल्कुल अलग !
ज़मीन पर यह काम कुदरत ने अपने बन्दों को सौंप रखा है ।अलग अलग रंग ,आकर ,प्रकार के हज़ारों लोग। हरेक का शरीर अलग, मन अलग, आने की वजह अलग , गोआ को सेलिब्रेट करने का तरीका अलग । मैं कभी आसमान को देखता हूं कभी इन लोगों को !
एक अंतहीन सिलसिला है लोगों के कारवां का, जो मेरे सामने से गुजर रहे हैं ।
अभी एक कॉलेज के लड़कों का एक ग्रुप मेरे सामने से गुजर रहा है। सबके हाथों में बीयर के कैन हैं। वे खुले में बीयर पीने की आजादी से अचंभित हैं । वे अपने घोसलों से पहली बार बाहर निकले चिड़िया के बच्चों की तरह शोर मचा रहे हैं। वर्जनाओं से मुक्ति का उनका यह पहला अनुभव है । वे अपनी इस आजादी का हर कतरा पी लेना चाहते हैं । ज्यादा से ज्यादा। क्योंकि उनकी दुनिया में ज्यादा पीना मर्दानगी का सबूत है । टैंकर होना किसी पौराणिक आख्यान में किसी बलशाली योद्धा होने जैसा ही सम्मानजनक है। गोवा दरअसल इनके लिए ही है।
इसके पीछे पीछे किसी कस्बे से आए कुछ परिवारों का एक ग्रुप है । वे लोग अभी अभी पानी में खेल कर निकले हैं । बीयर ,बीच और बिकनी के लिये आये पुरुषों के साथ आई गृहस्थनों के लिए गोआ में क्या हो सकता है ? पर वे खुश लग रही हैं। गोआ उनके लिए परिधान पर्यटन है । गोवा वे कपड़ों की आजादी का जश्न मनाने आई हैं।शॉटस, फ्रॉक , स्विमसूट। आम दिनों में ब्लाऊज की गहराई में एकाध इंच की घट-बढ़ पर एतराज उठाने वाले मियाँजी ने इस इस टूर में स्वीमिंग कॉस्ट्यूम के खुले गले की कुनमुनाते हुए ही सही इजाजत दे दी है। शायद यह सोचकर कि गोरी मेमें जहाँ सारा खजाना लुटा रही हों ; उनकी वाली की क्लीवेज की चिंदी कौन देखेगा । अपनी सहेेली, बहन, देवरानी को वे अपनी गुप्त फोटो दिखाएँगी , कि वे भी आधुनिक हैं। सरला भाभी क्या समझती हैं खुद को ...,! जीन्स पहनकर ! अरे हम तो स्वीमिंग कास्ट्यूम भी पहने हैं..। खुद को ठेलठाल कर इन कपड़ों में बिठाना और उन्हें कैरी करने में एक तरह की असहजता कोई बड़ी कीमत नहीं है इस खुशी के लिए।
पर मैं सोच रहा हूँ कि अगर आजादी और आधुनिकता कपड़ों की लंबाई-चौड़ाई से नापी जा रही हो तो हमें सचमुच आधुनिक होने के लिए हमें कितने सारे ‘गोवा’ चाहिए..
बीच पर आसमान और ज़मीन में एक प्रतियोगिता चल रही है । अलग अलग रंग दिखाने की। ढलती शाम अपने कलर बॉक्स में अकेले नारंगी रंग के ही सैकड़ो शेड्स लायी है। हर पल एक नया शेड , पहले वाले से बिल्कुल अलग !
ज़मीन पर यह काम कुदरत ने अपने बन्दों को सौंप रखा है ।अलग अलग रंग ,आकर ,प्रकार के हज़ारों लोग। हरेक का शरीर अलग, मन अलग, आने की वजह अलग , गोआ को सेलिब्रेट करने का तरीका अलग । मैं कभी आसमान को देखता हूं कभी इन लोगों को !
एक अंतहीन सिलसिला है लोगों के कारवां का, जो मेरे सामने से गुजर रहे हैं ।
अभी एक कॉलेज के लड़कों का एक ग्रुप मेरे सामने से गुजर रहा है। सबके हाथों में बीयर के कैन हैं। वे खुले में बीयर पीने की आजादी से अचंभित हैं । वे अपने घोसलों से पहली बार बाहर निकले चिड़िया के बच्चों की तरह शोर मचा रहे हैं। वर्जनाओं से मुक्ति का उनका यह पहला अनुभव है । वे अपनी इस आजादी का हर कतरा पी लेना चाहते हैं । ज्यादा से ज्यादा। क्योंकि उनकी दुनिया में ज्यादा पीना मर्दानगी का सबूत है । टैंकर होना किसी पौराणिक आख्यान में किसी बलशाली योद्धा होने जैसा ही सम्मानजनक है। गोवा दरअसल इनके लिए ही है।
इसके पीछे पीछे किसी कस्बे से आए कुछ परिवारों का एक ग्रुप है । वे लोग अभी अभी पानी में खेल कर निकले हैं । बीयर ,बीच और बिकनी के लिये आये पुरुषों के साथ आई गृहस्थनों के लिए गोआ में क्या हो सकता है ? पर वे खुश लग रही हैं। गोआ उनके लिए परिधान पर्यटन है । गोवा वे कपड़ों की आजादी का जश्न मनाने आई हैं।शॉटस, फ्रॉक , स्विमसूट। आम दिनों में ब्लाऊज की गहराई में एकाध इंच की घट-बढ़ पर एतराज उठाने वाले मियाँजी ने इस इस टूर में स्वीमिंग कॉस्ट्यूम के खुले गले की कुनमुनाते हुए ही सही इजाजत दे दी है। शायद यह सोचकर कि गोरी मेमें जहाँ सारा खजाना लुटा रही हों ; उनकी वाली की क्लीवेज की चिंदी कौन देखेगा । अपनी सहेेली, बहन, देवरानी को वे अपनी गुप्त फोटो दिखाएँगी , कि वे भी आधुनिक हैं। सरला भाभी क्या समझती हैं खुद को ...,! जीन्स पहनकर ! अरे हम तो स्वीमिंग कास्ट्यूम भी पहने हैं..। खुद को ठेलठाल कर इन कपड़ों में बिठाना और उन्हें कैरी करने में एक तरह की असहजता कोई बड़ी कीमत नहीं है इस खुशी के लिए।
पर मैं सोच रहा हूँ कि अगर आजादी और आधुनिकता कपड़ों की लंबाई-चौड़ाई से नापी जा रही हो तो हमें सचमुच आधुनिक होने के लिए हमें कितने सारे ‘गोवा’ चाहिए..
मेरे साथ की मेज पर एक शादीशुदा जोड़ा बैठा है। सिर्फ 30 -32 साल की उम्र में ही इनके बीच सब कुछ बीत चुका है । लड़का शायद लड़की के दबाव में बेमन से आया लगता है ,जैसे कह रहा हो , लो दिखा दिया गोवा ।अब छःमहीने तक परेशान मत करना। लड़का अपने मोबाइल में व्यस्त है। लड़की पनीर के टुकड़े टूँग रही है ।इनके उदास चेहरे गोवा के इस हंगामाखेज माहौल से कतई मेल नहीं खा रहे । वे गोवा में नहीं है । वे बस गोवा टूर के बीत जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं । लड़की ने क्या सोच कर ज़िद की थी गोआ आने की ? कि गोवा उनकी बेजान ,मुर्दा ,बेरंग शादीशुदा जिंदगी में कोई चमत्कार कर देगा ? वह गोवा से बहुत ज्यादा उम्मीद लगा बैठी है। जैसे कोई कैंसर का मरीज पेन किलर से अपना इलाज करने की कोशिश करे ।
कुछ नए जोड़े भी आए हैं। हनीमून पर । ज्यादातर लड़कियों ने कोहनी तक पंजाबी चूड़े पहन रखे हैं ।सिंदूर से भरी चौड़ी मांग, मंगलसूत्र और उसके साथ शॉर्ट्स और टी-शर्ट ! अजीब सा कंबीनेशन है । मैं पहनने-ओढ़ने की आजादी का सम्मान करता हूं , पर यह मेरी आंखों में चुभ रहा है । पहनावे की तरह इन नवयौवनाओं ने अपने जीवन विश्वास और जीने के तौर-तरीके में भी अपनी सुविधा के अनुसार नए पुराने तौर तरीकों की खिचड़ी बना ली है। जब अच्छा लगा आधुनिक हो गए और जब पाप -पुण्य , स्वर्ग नरक , टोने टोटके , कर्मकांड निभाने में फायदा दिखा तो परंपरा की दुहाई देकर पुरातनपंथी बन गए । काश पहनावे की तरह इनकी सोच भी वैज्ञानिक होती। मुझे इन पढ़ी लिखी लड़कियों और उन गृहस्थनों में कोई फर्क नहीं लगा।
बच्चों के साथ आया एक परिवार लगातार फोटो खिंचवा रहा है । वह बहुत दबाव में है । उन्हें इस शाम की खूबसूरती से कोई मतलब नहीं है। उन्हें बहुत सारे फोटो इकट्ठे करने हैं ।अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को दिखाने के लिए । ताकि वे साबित कर सकें कि वे भी लाइफ एंजॉय कर रहे हैं ।उनकी दुनिया में छुट्टियों में ट्रेवल न करना पीछे छूट जाना है , और हर ट्रैवल डेस्टिनेशन के सामने खींची हुई तस्वीर एक मैडल है । वे ये मेडल्स अपनी फेसबुक वॉल और व्हाट्सएप प्रोफाइल पर चिपकाएंगे ।पूरे टूर के संदर्भ और प्रसंगों से काटकर तस्वीरों के ये चमकीले हिस्से फिर इनके जैसे दूसरे जोड़ों पर एक वैसा ही दबाव पैदा करेंगे जिसके चलते इन्हें गोवा आना पड़ा है ।
पास की टेबल पर बैठे एक बुजुर्ग दंपति से बात करता हूं । वे यहां भेजे गए हैं । बेटा अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है ।वह साल में दो बार अपने बूढ़े मां बाप के लिए पैकेज टूर बुक करता है ।ऑल पेड फाइव स्टार टूर। पर बूढ़ा इतने भर से खुश नहीं लग रहा । उसे बेटे का साथ चाहिए । बेटा आना नहीं चाहता पर इन्हें घुमाकर अपना अपराध बोध कम कर लेता है । अच्छा है । ट्रेवल कंपनियों को इस तरह के स्पेशल टूर डिजाइन करने चाहिए । बहुत से बेटे हैं जो मां-बाप के प्रति अपना फर्ज निभाने का कोई शॉर्टकट ढूंढ रहे हैं ।
पड़ोस की मेज पर एक अकेला नौजवान व्हिस्की पी रहा है ।वह लगातार पाँच पेग पी चुका है । हर बार नया पेग उठाते वक्त वह मेरी अकेली बीयर की तरफ अपना गिलास उठाकर चीयर्स कहता है। मेरी वही बोतल अब छठवीं बार चीयर्स करते शर्मा रही है । वह तेजी से पी रहा है । जैसे उसके पास समय न हो ।पर वह तो जवान है ! शायद किसी कारपोरेट कंपनी का एग्जिक्यूटिव लगता है ,जो लगातार काम से परेशान होकर छुट्टी मनाने आया है । वह जानता है कि उसे यहां से लौटकर वापस सुबह से शाम कंप्यूटर स्क्रीन पर आंखें गड़ाए आंकड़ों से सिर फोड़ना है । वह अपनी इस मोहलत का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना चाहता है । पर वह कुछ खा नहीं रहा । मुझे उसकी फिक्र हो रही है । क्या मैं उससे जाकर कहूं कि उसे बीच-बीच में कुछ खा लेना चाहिए । या उसे थोड़ा धीरे-धीरे पीना चाहिए। पर चियर्स करने भर से ने मुझे कोई इतना अधिकार तो नहीं मिल जाता कि मैं उसका गार्जियन बन जाऊं । मैं उससे अपना ध्यान हटाने की कोशिश करता हूं ।
पड़ोस की मेज पर एक अकेला नौजवान व्हिस्की पी रहा है ।वह लगातार पाँच पेग पी चुका है । हर बार नया पेग उठाते वक्त वह मेरी अकेली बीयर की तरफ अपना गिलास उठाकर चीयर्स कहता है। मेरी वही बोतल अब छठवीं बार चीयर्स करते शर्मा रही है । वह तेजी से पी रहा है । जैसे उसके पास समय न हो ।पर वह तो जवान है ! शायद किसी कारपोरेट कंपनी का एग्जिक्यूटिव लगता है ,जो लगातार काम से परेशान होकर छुट्टी मनाने आया है । वह जानता है कि उसे यहां से लौटकर वापस सुबह से शाम कंप्यूटर स्क्रीन पर आंखें गड़ाए आंकड़ों से सिर फोड़ना है । वह अपनी इस मोहलत का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना चाहता है । पर वह कुछ खा नहीं रहा । मुझे उसकी फिक्र हो रही है । क्या मैं उससे जाकर कहूं कि उसे बीच-बीच में कुछ खा लेना चाहिए । या उसे थोड़ा धीरे-धीरे पीना चाहिए। पर चियर्स करने भर से ने मुझे कोई इतना अधिकार तो नहीं मिल जाता कि मैं उसका गार्जियन बन जाऊं । मैं उससे अपना ध्यान हटाने की कोशिश करता हूं ।
तीन खिलखिलाती शहरी लड़कियों को दो कन्नड बच्चियां ,दीदी- दीदी कह कर फूलों वाला हेयर बैंड बेचने की कोशिश कर रही हैं । पर दीदियों का कहना है कि तुम बहुत ज्यादा पैसा मांग रही हो । कन्नड़ बच्चियों के चेहरे पर उदासी इतनी बढ़ गई है कि सारा आसमान उसकी गिरफ्त में आ गया है । मैं अचानक ऊपर देखता हूं । आसमान में नारंगी खुशनुमा रंग की जगह गहरा काला रंग छा गया है।
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