
राष्ट्रहित का गला घोटकर छेद न करना थाली में, मिट्टी वाले दिए जलाना अबकी बार दिवाली में, देश के धन को देश में रखना नहीं बहाना नाली में, बने जो अपनी मिट्टी से वह दिएे बिके बाजारों में, छुपी है वैज्ञानिकता अपने सभी तीज त्योहारों में, चाइनीज झालर से आकर्षित कीट पतंगे आते हैं, जबकि दिए में जलकर बरसाती कीड़े भी मर जाते हैं, कार्तिक दीपदान से बदले पितृदोष खुशहाली में, कार्तिक की अमावस वाली रात न अब की काली हो, दीए बनाने वालों की भी खुशियों भरी दिवाली हो, अपने देश का पैसा जाए अपने भाई की झोली में, गया जो दुश्मन देश में पैसा लगेगा राइफल गोली में, देश की सीमा रहे सुरक्षित चूक ना हो रखवाली में, मिट्टी वाले दिए जलाना अबकी बार दिवाली में. राष्ट्रहित एवं जनहित में, जारी , निवेदक- ABGP- -अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, भरथना शाखा
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