आज एक पत्रकार ने फोन पर कहा कि जिन स्कूली लड़कियों के साथ सीआरपीएफ वालों ने दुष्कर्म किया है उन लड़कियों का विडिओ बयान दिलवा दीजिये तो हम खबर बना देंगें,
मैंने कहा कि सबूत तो है लेकिन मैं आपको दूंगा नहीं,
मुझे डर है कि लड़कियों की पहचान सार्वजनिक होने पर उन लड़कियों पर और ज्यादा मुसीबत आ सकती है,
मैं दूध का जला हुआ हूँ, इसलिए अब छाछ भी फूँक फूँक कर पीता हूँ,
पत्रकार ने पूछा क्यों क्या हुआ था ?
मैंने उन्हें जो बताया आप भी सुनिए,
छत्तीसगढ़ के सामसेट्टी गाँव की बात है,
पुलिस वालों ने सुरक्षा बलों के साथ मिलकर गाँव पर हमला बोला,
सरकार चाहती थी कि आदिवासी गाँव खाली करके भाग जाएँ ताकि उनकी ज़मीन कम्पनियों को दे दी जाय,
आदिवासियों को डराने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा महिलाओं से सामूहिक बलात्कार किये जाते थे,
आज भी किये जाते हैं,
इस गाँव में चार लड़कियों के साथ पुलिस वालों ने सामूहिक बलात्कार
किये,
किये,
लडकियां मदद मांगने हमारे आश्रम में आयीं,
हम लड़कियों को लेकर थाने पहुंचे लेकिन बलात्कारी तो थाने में ही बैठे हुए थे,
रिपोर्ट नहीं लिखी गयी,
कानून के मुताबिक हमने पुलिस अधीक्षक को रजिस्टर्ड पोस्ट से शिकायत भेजी,
पुलिस अधीक्षक ने पत्र का जवाब नहीं दिया,
हमने सुकमा कोर्ट में केस दायर कर दिया,
आरोपी पुलिस वालों के वारंट जारी हो गए,
लेकिन पुलिस विभाग ने कोर्ट को जवाब दिया कि बलात्कार के यह आरोपी सिपाही हमें मिल नहीं रहे यह तो फरार हैं,
जब कि वह आरोपी पुलिस वाले थाने में ही रह रहे थे और नियमित तनख्वाह ले रहे थे,
हिन्दुस्तान टाइम्स ने छापा कि 'एब्स्कोंडिंग बट ऑन ड्यूटी' फरार हैं पर ड्यूटी पर हाज़िर हैं,
मैंने गृह मंत्री पी चिदम्बरम को उन लड़कियों के बयान की सीडी दी,
गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने वह सीडी मुख्य मंत्री को दे दी,
इसका बाद डेढ़ सौ से भी ज्यादा सुरक्षा बल उन बलात्कारी पुलिस वालों के साथ सामसेट्टी गाँव में गए पुलिस वालों ने लड़कियों का अपहरण किया और दोरनापाल थाने में लाकर चारों लड़कियों के साथ दुबारा सामूहिक बलात्कार किया,
पांच दिन के बाद उन लड़कियों को पुलिस वालों ने सामसेट्टी गाँव के चौराहे पर फेंक दिया और चेतावनी दी कि अगर अबकी बार हिमांशु से बात करी तो पूरे गाँव को आग लगा देंगे,
मैं उन लड़कियों से मिलने गया, लड़कियों ने मुझसे मिलने से मना कर दिया,
लड़कियों का कहना था कि आपने कहा था कि देश में कानून है आगे आओ आवाज़ उठाओ,
लेकिन आपने हमें नहीं बचाया,
मेरा बचपन से जो विश्वास भारत के लोकतंत्र और संविधान में था तो चूर चूर हो गया,
मैं सर झुका कर वहाँ से वापिस आ गया,
पुलिस ने मेरे आश्रम पर बुलडोज़र चला दिया,
एक हफ्ते के अंदर पुलिस ने मेरे आश्रम में मुझ से मिलने आये बारह आदिवासियों का अपहरण कर लिया,
मेरे दो साथियों को जेल में डाल दिया गया,
मेरे वकील को थाने में उल्टा लटका कर रात भर मारा गया,
मेरे सभी कार्यकर्ताओं के घर पुलिस ने छापे मारे और सभी को मेरे साथ काम ना करने की धमकी दी,
पुलिस ने जिस रात मेरी हत्या की योजना बनाई,
अंत में उस रात मुझे छत्तीसगढ़ छोड़ना पड़ा,
अब जब कभी लोग मुझसे पीड़ित लोगों की जानकारी मांगते हैं तो मैं सोच में पड़ जाता हूँ,
कि पीड़ित को कौन बचाएगा ?
जब इस देश का गृह मंत्री और मुख्य मंत्री बलात्कार करवाते हों तो पीड़ितों की सुरक्षा कौन करेगा ?
मैंने इस देश के लोकतंत्र का जो भयानक चेहरा देखा है उससे मुझे अब किसी पर भरोसा नहीं रहा,
कोई भी पुलिस अधिकारी, कोई भी जज, मंत्री, मुख्य मंत्री बलात्कार करवा सकता है, बलात्कारी को बचा सकता है,
इसलिए मैं अब जितनी मेरी ताकत है मैं शोर मचाता हूँ,
मैं इस देश को बताना चाहता हूँ कि आँखें खोलो और देखो देशवासियों के साथ क्या हो रहा है,
कल आपके साथ भी यह सब हो सकता है,
मैं चाहता हूँ कि आप इस लड़ाई में शामिल हो जाएँ,
यह लड़ाई अब अदालत सरकार थाने के भीतर नहीं जीती जा सकती,
इसे तो अब जनता ही लड़ कर जीत सकती है,
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