Friday, August 24, 2018

गुलमेहँदी


लगभग 15 से 20 वर्ष पूर्व तक हमारे गांव में ढ़ेरो गुलतेवड़ी के पौधे बारिश में उग आते थे,जो श्रावण मास से क्वार मास तक के सभी त्योहारों पर अपने फूल हमे देते रहते थे.....इसके अनेक रंग होते थे,अधिकांश घर वाले इसके बीजो को सहेज कर रखते थे..पर अब स्थिति विपरीत है ,इसके दर्शन भी नही होते.....।
गुलतेवड़ी को बालसम,गौरी के फूल, तेरडा,गुलमेहँदी,गुला आदि नामों से जाना जाता है.......इसके फलों को छूते ही ये फूट कर इल्ली जैसे लगते है. दूसरों को डराने के लिए शरारती छोटे बच्चें इनका बहुत आनंद लेते है....।
जितना सुंदर गुलतेवड़ी का पौधा हैं,, उतने ही औषधीय गुणों से परिपूर्ण भी...गुलतेवड़ी पित्तशामक है.....इसके फूलों में एंटीबायोटिक की तरह गुण पाए गएँ है जो बैक्टीरिया और फंगस को मारते है......इसके फूल पौष्टिक और शीतल होते है.... जले हुए स्थान पर लगाने से आराम मिलता है. .....यह वनस्पति विरेचक (पेट साफ़ करने वाली ) , मूत्रल (शरीर का अतिरिक्त पानी हटाने वाली ) और अर्थराइटिस के लिए उपयोगी है......इसके बीजों से तेल निकलता है जो खाने में इस्तेमाल होता है और दिया जलाने के काम आता है......बाली द्वीप में इसके पत्तें खाए जाते है. ...चीन में इसके बीजों के चूर्ण का इस्तेमाल सुलभ प्रसूति के लिए किया जाता है....।
फिलिपिन्स में इसके फूलों का इस्तेमाल कटिशूल पर किया जाता है.....किसी कीड़े के काटने या सांप के काटने पर इसकी पत्तियों का रस लगाने से लाभ होता है...... इसके बीज कफ बाहर निकलने में सहायता करते है और इनका उपयोग कैंसर की चिकित्सा में होता है. ..।
हमारे मालवांचल में श्राद्ध पक्ष में संजा-सोलही के पर्व में इसके फूलो का उपयोग वर्षो से होता आया हैं...।

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