Saturday, April 14, 2018

जियो भीम के पट्ठों, कितनी खुदगर्जी दिखलाई है,

एक बार अवस्य पढे। बहुत ही वास्तविक रचना
____________**********______________
जियो भीम के पट्ठों, कितनी खुदगर्जी दिखलाई है,
संविधान के आदेशों पर मनमर्ज़ी दिखलाई है,
मत अतीत का बाजा फाड़ो,ज़ख्म तुम्हारा सिया गया,
जितना तुमने चाहा,उससे ज़्यादा अब तक दिया गया,
प्रतिभाओं की लाशों पर चलकर सिंघासन तुंम्हे मिला,
हर विभाग में बराबरी का उत्तम आसन तुंम्हे मिला,
साथ सफर करते हो सबके,होटल में सह भोज करो,
फिर भी तुम फ़र्ज़ी शोषण का रोना धोना रोज़ करो,
स्वार्थ और निज लालच की भी हद होती है शर्म करो,
भारत माँ भी देख कमीनापन रोती है शर्म करो,
जिस बाबा के संविधान में न्यायालय को मान मिला,
उसी भीम के बेटों से न्यायालय को अपमान मिला,
नीला झंडा,लाठी लेकर,सड़कों पर उत्पात किया,
भीम राव के संविधान पर भीमों ने आघात किया,
बसे जलायीं,कारें तोड़ी,आग लगा दी भारत में,
एक नए आतंक सूत्र की अलख जगा दी भारत में,
अपने हक़ की कुर्बानी देकर के तुमको खड़ा किया,
तुमने हमसे नफरत कर अहसान हमीं पर बड़ा किया,
सिर्फ नौकरी या सुविधाएँ,और नही अरमान कोई,
आग लगे बाकी भारत में,इस पर कोई ध्यान नही?
तुमने सिर्फ इसी लालच में,देश धर्म को छोड़ दिया,
प्रभू राम को गाली दी बाबर से नाता जोड़ लिया,
देव देवियों के चित्रों पर जूते तक भी मारे हैं,
फिर भी कहते हो तुम कितने सीधे हो बेचारे हो,
सबसे बडा निकम्मा या फिर अधिकारों का चोर कहूँ,
भारत बंद कराने वालों को कैसे कमज़ोर कहूँ,
अभी समय है आगे आकर,राष्ट्र हेतु सत्कर्म करो,
सच्चा मान चाहते हो तो खुद आरक्षण ख़त्म करो,
पूरा देश बराबर का हो,बतलाओ क्या सही नही?
भारत के हित में जीने की इच्छा तुममे रही नही?
आतंकी हरकत से लगता है,भड़काये लगते हो,
देश विरोधी संगठनों के ही बहकाये लगते हो,
दिल से कहता हूँ भीम का मटिया मेट करा लोगे,
इक दिन तुम सब मिलकर के अपना खतना करवा लोगे,
ऐसा ना हो,इसीलिए अर्जुन से पहले कर्ण बनो,
आरक्षण को त्यागो,निज पौरुष को लिए सवर्ण बनो!!

No comments:

Post a Comment