Sunday, April 15, 2018

भारतीय अपराधिक न्याय प्रशासन ( Criminal Justice administration ) की एक कमी अभी तक बनी हुई है !

भारतीय अपराधिक न्याय प्रशासन ( Criminal Justice administration ) की एक कमी अभी तक बनी हुई है !
पहले एक उदाहरण ले ..
अगर आप दिल्ली मे बैठे ..चाहे भले ही CC Tv की निगाह मे ..या ATM के कमैरे के सामने हो !
अगर उसी दिनांक और उसी समय कलकत्ता मे हुये किसी अपराध मे आपको ..साजिसन या भूल से मुल्जिम बना दिया जाता है !
तो आप पुलिस की कृपा पर ही रहेंगे ! आप अपनी तरफ से ..अपने निर्दोष होने का साक्ष्य तब तक न्यायालय मे नही दे सकते जब तक न्यायालय मे पुलिस जार्ज शीट दाखिल न कर दे है !
अब रही बात पुलिस की ..?
पुलिस रेगुलेशन ...जो 1861 का है ..उसके अनुसार पुलिस का अन्वेषण अधिकारी ..अभियुक्त के फेवर मे साक्ष्य एकत्रित करने के लिये बाध्य नही है ..!
तो ..जब तक चार्ज शीट दाखिल नही हो जाती ..ट्रायल सुरू नही हो जाता ..और अभियोजन का साक्ष्य समाप्त नही हो जाता तब तक आप पुलिस की कृपा पर ही है .!
अगर पुलिस की कृपा हुई ..कुछ खिला पिला दिया ..तो पुलिस दिल्ली जाके ...CC.Tv फूटेज ले सकती ..या जिन दोस्तो के साथ आप बैठे है ..उनका बयान ले सकती और आप के फेवर मे रिपोर्ट लिख सकती है !
वैसे अमूमन पुलिस ऐसा ..खाने पीने के बाद ही करती है . वर्ना आपको गिरफ्तार करके चार्ज शीट लगा देना सबसे आसान काम है . !
मैने तो यहाँ तक देखा है कि ..पुलिस वही FIR लिखाने गये .व्यक्ति से दो चार नाम .पता .पूंछ कर ..उस गवाह से बिना मिले ही ..उसका कथन ( Statement ) भी तैयार कर लेती है !
Cr.P.C. मे 164 है ..जहाँ जूडिसियस मजिस्ट्रेट .अन्वेषण के दौरान भी गवाहों के बयान सशपथ दर्ज कर सकता है ..लेकिन उच्चतम न्यायालय के निर्णयों से इसको टैक्निकल बना दिया गया है ! न्यायालयों का कहना है कि ..164 मे उसी साक्षी का बयान दर्ज हो सकता है जिसको पुलिस ..मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करे ..! कोई अपने से पहुँचता है ...तो उसका बयान नही दर्ज किया जायेगा !!
अब जरा सोंचिये ..कि जिस दिल्ली के जिस CC.Tv ..या ATM बूथ मे आपकी बेगुनाही अस्पष्ट सबूत है ...वो पाँच सात साल जब न्यायालय मे प्रस्तुत करने का आपका नम्बर आयेगा ...तब तक सुरक्षित रह सकते है ??
कानून मे ऐसा कोई प्रावधान नही है कि...अभियुक्त की तरफ से सबूत सुरक्षित रखने के लिये न्यायालय का कोई आदेश मिल सके ..जबकि ..अभियुक्त के खिलाफ सबुत को सुरक्षित करने का आदेश पुलिस आराम से प्राप्त कर सकती है ..तलाशी का वारंट जारी करवा के ?

No comments:

Post a Comment