आंधीजी जी की उत्तर क्रिया के पश्चात डेरा खान्ग्रेस ने मारदुं राम न छोड़से के उठावने की तरफ ध्यान लगाया ।
प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत हुआ ।
खोडसे ने लॉयर लेने से इंकार किया ।
Bicause hi wants dilevar truth not lai .
प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत हुआ ।
खोडसे ने लॉयर लेने से इंकार किया ।
Bicause hi wants dilevar truth not lai .
सुनवाई के दिन कोर्ट रूम में डेरा समर्थकों की अपार भीड़ थी । वे सब झुंड बनाकर कोर्ट आये थे ।
संगठन में शक्ति है ,अकेले में फटती है ...
संगठन में शक्ति है ,अकेले में फटती है ...
कोर्ट रूम में तमाशबीनों की वजह से भारी शोर हो रहा था । उन दिनों राजनितिक प्रदूषण की भाँती ध्वनि प्रदूषण को रोकने का भी कोई क़ानून नही था । अतः शोर रोकने हेतु कुछ किया नही जा सकता था ।
पुकार लगी
मारदूं राम न छोड़से हाजिर हो.....
मारदूं राम न छोड़से हाजिर हो.....
राष्ट्र को आंधी मुक्त करने का गौरव लिए आर्यावर्त का वह शेर कोर्ट रूम में प्रवेश कर गया । न्यायपीठ पर विराजे न्यायाधीश का उचित अभिवादन कर छोड़से ने कोर्ट रूम में बैठे डेरा सदस्यों का सिंहावलोकन किया ।
जब कोई शेर इतने नजदीक से आपसे नजरे चार करता है तो यकीन मानिए इंसानी शरीर में ऊपर मुँह से लेकर नीचे ठेठ तक सन्नाटा सा खिंच जाता है । हर प्रकार की ध्वनि का शमन हो जाता है , सो तत्काल ही कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया ।
जब कोई शेर इतने नजदीक से आपसे नजरे चार करता है तो यकीन मानिए इंसानी शरीर में ऊपर मुँह से लेकर नीचे ठेठ तक सन्नाटा सा खिंच जाता है । हर प्रकार की ध्वनि का शमन हो जाता है , सो तत्काल ही कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया ।
कुत्तो को भोंकना पड़ता है जंगल में अपनी मौजूदगी बताने के लिए ।
जंगल का सन्नाटा ही शेर की मौजूदगी बयां करता है ।
जंगल का सन्नाटा ही शेर की मौजूदगी बयां करता है ।
न्याय मूर्ति ने लकड़ी के हथौड़े से तीन बार मेज को ठोका और कहाँ आर्डर ..आर्डर ।
हालांकि इसकी जरूरत नही थी । जहाँ शेर के हाथो मर्डर का खतरा हो वहां लायनआर्डर स्वयं मेंटेन रहता है ।
जज ने कहा मारदूं राम न छोड़से तुम पर मोहर्रम दास भरम चंद आंधी की हत्या करने का इलजाम है , तुम्हे अपनी सफाई में कुछ कहना है ।
हालांकि इसकी जरूरत नही थी । जहाँ शेर के हाथो मर्डर का खतरा हो वहां लायनआर्डर स्वयं मेंटेन रहता है ।
जज ने कहा मारदूं राम न छोड़से तुम पर मोहर्रम दास भरम चंद आंधी की हत्या करने का इलजाम है , तुम्हे अपनी सफाई में कुछ कहना है ।
तब उस नर नाहर ने बयां किया ।
मी लार्ड ...............
क्यों कि मै सच बोलने का आदी हूं ,
इसलिए मुल्क का सबसे बड़ा फसादी हूं !!
ऐसा नहीं हैं कि मेरे में कोई ऐब नहीं हैं ,
पर सच कहता हूँ मेरे में कोई फरेब नहीं हैं !!
दिल मे न हो जुर्रत तो देशभक्ति नहीं मिलती
खैरात मे इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती।
कुछ लोग यू ही मुल्क मे हमसे भी खफा है
हर एक से अपनी भी तबियत नहीं मिलती
क्यों कि मै सच बोलने का आदी हूं ,
इसलिए मुल्क का सबसे बड़ा फसादी हूं !!
ऐसा नहीं हैं कि मेरे में कोई ऐब नहीं हैं ,
पर सच कहता हूँ मेरे में कोई फरेब नहीं हैं !!
दिल मे न हो जुर्रत तो देशभक्ति नहीं मिलती
खैरात मे इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती।
कुछ लोग यू ही मुल्क मे हमसे भी खफा है
हर एक से अपनी भी तबियत नहीं मिलती
मी लार्ड........
चिराग हो के न हो दिल जला के रखता हूं
मै आँधियों में भी तेवर बला के रखता हूं
मिला दिया है पसीना भले ही मिट्टी में
अपनी आँख का पानी बचा के रखता हूं
मुझे पसंद नहीं जंग में भी चालाकी
जिसे निशाने पे रक्खूँ बता के रखता हूं
कहीं देशभक्ति कहीं दोस्ती कहीं पे वफ़ा
बड़े करीने से हिन्द को सजा के रखता हूं
चिराग हो के न हो दिल जला के रखता हूं
मै आँधियों में भी तेवर बला के रखता हूं
मिला दिया है पसीना भले ही मिट्टी में
अपनी आँख का पानी बचा के रखता हूं
मुझे पसंद नहीं जंग में भी चालाकी
जिसे निशाने पे रक्खूँ बता के रखता हूं
कहीं देशभक्ति कहीं दोस्ती कहीं पे वफ़ा
बड़े करीने से हिन्द को सजा के रखता हूं
मी लार्ड......
जान ले समझले जमाना , क्यों किया संहार मैने आंधी का , इसलिए आज आपकी इस अदालत में , दुनिया के सामने मै अपनी बात रखता हूं ।
जान ले समझले जमाना , क्यों किया संहार मैने आंधी का , इसलिए आज आपकी इस अदालत में , दुनिया के सामने मै अपनी बात रखता हूं ।
मी लोर्ड......
आंधी नही देश को सुभाष चाहिए
देशहित में बोल सके वह भाष चाहिए
लौटाए जो खण्ड भारत का सम्मान
करे जो अखण्ड भारत का निर्माण
सेवा संकल्प वाली वह सरकार चाहिए
आंधी नही देश को सुभाष चाहिए
देशहित में बोल सके वह भाष चाहिए
लौटाए जो खण्ड भारत का सम्मान
करे जो अखण्ड भारत का निर्माण
सेवा संकल्प वाली वह सरकार चाहिए
मी लार्ड........
आंधी नही , देश को सुभाष चाहिए
मत बहलाओ , विभाजन नही है यह
माँ भारती के मस्तक पर वार है यह
माँ के भाल से रक्त पोछने वाला चाहिए
आंधी नही , देश को सुभाष चाहिए
मत बहलाओ , विभाजन नही है यह
माँ भारती के मस्तक पर वार है यह
माँ के भाल से रक्त पोछने वाला चाहिए
मी लार्ड.........
आंधी नही देश को सुभाष चाहिये
दहला सके उस गद्दार धृष्ट के मन को
खरोंच भी लगादे जो माँ भारती के तन को
ऐसे एक नही कोटि कोटि छोड़से चाहिए
मी लार्ड ......
आंधी नही देश को सुभाष चाहिए ।
आंधी नही देश को सुभाष चाहिये
दहला सके उस गद्दार धृष्ट के मन को
खरोंच भी लगादे जो माँ भारती के तन को
ऐसे एक नही कोटि कोटि छोड़से चाहिए
मी लार्ड ......
आंधी नही देश को सुभाष चाहिए ।
हाँ मी लार्ड .... किसी स्वार्थ से नही , किसी दुश्मनी से नही किसी भय से भी नही मैने आंधी को मारा है तो सिर्फ इसलिए की
लाख किताबे पड़ी हों सलीके की मगर जब दिल बगावत करता है तो जज्बात काबू में नही रहते
लाख किताबे पड़ी हों सलीके की मगर जब दिल बगावत करता है तो जज्बात काबू में नही रहते
मी लार्ड....
बुलबुलों के पंखो मे बंधे हुए कभी बाज़ नहीं रहते,
बुजदिलो और कायरों के हाथ कभी राज़ नहीं रहते
सर झुकाकर चलने की आदत पड़ जाये जिस इंसान को
उस इंसान के सर पर कभी ताज नहीं रहते
बुलबुलों के पंखो मे बंधे हुए कभी बाज़ नहीं रहते,
बुजदिलो और कायरों के हाथ कभी राज़ नहीं रहते
सर झुकाकर चलने की आदत पड़ जाये जिस इंसान को
उस इंसान के सर पर कभी ताज नहीं रहते
मी लार्ड..........
जिन लोगों ने माँ भारती की पीठ पर खंजर स्वीकारे हैं
जिस धरती पर मरे पड़े सब अखण्ड भारत के नारे हैं
जिन लोगों को निर्दोषों की हत्या पर अफसोस नहीं
घर में घुस कर मारो उनको तनिक भी इस में दोष नहीं !
जिन लोगों ने माँ भारती की पीठ पर खंजर स्वीकारे हैं
जिस धरती पर मरे पड़े सब अखण्ड भारत के नारे हैं
जिन लोगों को निर्दोषों की हत्या पर अफसोस नहीं
घर में घुस कर मारो उनको तनिक भी इस में दोष नहीं !
मी लार्ड ....
मेरा इन्साफ काले चोगे वाला नही नीली छतरी वाल करेगा ।
आप सिर्फ मेरे गले में फंदा डाले , ये बंदा उफ़ न करेगा ।
बस खुद्दारी ही मेरी दौलत हैं जो मेरी हस्ती में रहती है..
बाकी जिंदगी तो फकीरी हैं वो अपनी मस्ती मे रहती हैं. ।
भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता
मातृभूमि से प्यार करने वाला इसलिए बरबाद रहता है
मेरा इन्साफ काले चोगे वाला नही नीली छतरी वाल करेगा ।
आप सिर्फ मेरे गले में फंदा डाले , ये बंदा उफ़ न करेगा ।
बस खुद्दारी ही मेरी दौलत हैं जो मेरी हस्ती में रहती है..
बाकी जिंदगी तो फकीरी हैं वो अपनी मस्ती मे रहती हैं. ।
भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता
मातृभूमि से प्यार करने वाला इसलिए बरबाद रहता है
मी लार्ड...
अपनी सफाई में मुझे इतना ही कहना है ।
मै आपसे रहम की नही फांसी की गुजारिश करता हूं अब वही मेरा गहना है ।
वन्दे~~~ मातरम ।
अपनी सफाई में मुझे इतना ही कहना है ।
मै आपसे रहम की नही फांसी की गुजारिश करता हूं अब वही मेरा गहना है ।
वन्दे~~~ मातरम ।
कोर्ट रूम में बैठे डेरा सदस्य थर-थर काँप रहे थे । फरवरी माह में दिल्ली में इतनी ठण्ड भी नही होती ।
….........शेष अगली पोस्ट में
….........शेष अगली पोस्ट में
मित्रो छोड़से के बयान की एक पंक्ती ' आंधी नहीं , देश को सुभाष चाहिए ' मैने श्रीकृष्ण सरल जी की कविता से ली है । सो उनको नमन रहेगा । कविता की शेष पंक्तियां मैने वक्त जरूरत के हिसाब से अपनी मूर्खता से गढ़ली है । मै कवि नही हूं अतः ज्यादा अच्छा नही लिख पाया ।
कुछ शेरो को भी मैंने मार ठोक कर कथानक के हिसाब से फेरबदल कर बाकायदा नाथ डाल कर छोड़से के बयान में जोता है । लेकिन उन शायरों का मै आभार नही मानता क्यों कि ...
किसी ने बकरा पाला या ऊंट किसी के पास घोड़ी है ।
शेर तो जंगली होते है , किसी के बाप के थोड़ी है ।।
कुछ शेरो को भी मैंने मार ठोक कर कथानक के हिसाब से फेरबदल कर बाकायदा नाथ डाल कर छोड़से के बयान में जोता है । लेकिन उन शायरों का मै आभार नही मानता क्यों कि ...
किसी ने बकरा पाला या ऊंट किसी के पास घोड़ी है ।
शेर तो जंगली होते है , किसी के बाप के थोड़ी है ।।
आर्यावर्त भाग 1,2,3 मेरी टाइम लाइन पर उपलब्घ है ।
डिस्क्लेमर
इस पोस्ट के सभी किरदार काल्पनिक है ,जिनका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति या संगठन से कोई सम्बन्ध नही है । यह पोस्ट मात्र व्यंग है पाठक उसी रूप में ग्रहण करे । यह पोस्ट लेखक की राजनीतिक प्रतिबद्धता को इंगित नही करती। असहमत उचित दूरी बना कर रखे और मेरी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करें ।।
इस पोस्ट के सभी किरदार काल्पनिक है ,जिनका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति या संगठन से कोई सम्बन्ध नही है । यह पोस्ट मात्र व्यंग है पाठक उसी रूप में ग्रहण करे । यह पोस्ट लेखक की राजनीतिक प्रतिबद्धता को इंगित नही करती। असहमत उचित दूरी बना कर रखे और मेरी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करें ।।
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