Thursday, April 19, 2018

दक्ष यज्ञ में दक्ष का वीरभद्र द्वारा काटे गए सिर के स्थान पर शंकरजी ने बकरे का सिर लगा दिया था । तब दक्ष ने बकरे के सिर से बकरे की आवाज मे शिव स्तुति करी थी जिससे शिव प्रसन्न हुए थे

मित्रों , बहुत समय से मन में एक प्रश्न चल रहा था ,कि शिवलिंग की पूजा करते समय अंत में दोनों होठों को तर्जनी से हिला कर अजीब सी आवाज क्यों निकाली जाती है ।
हालांकि परम्परा से यह ज्ञात था कि , दक्ष यज्ञ में दक्ष का वीरभद्र द्वारा काटे गए सिर के स्थान पर शंकरजी ने बकरे का सिर लगा दिया था । तब दक्ष ने बकरे के सिर से बकरे की आवाज मे शिव स्तुति करी थी जिससे शिव प्रसन्न हुए थे । अतः आज भी हम पूजा अवसान के समय शिवजी की प्रसन्नता हेतु तर्जनी द्वारा होठों को हिला कर बकरे के सामान आवाज निकालते हैं ।
किन्तु मित्रों , यह कारण मेरे तार्किक मन को स्वीकार नही था क्योकि दक्ष यज्ञ शिवजी के लिए एक दुखद प्रसंग था और कौन अपनी पूजा में इस प्रसंग को याद कर खुश होगा । अतः मैं निरन्तर खोज में लगा रहा ।
कल एक नब्बे वर्षीय प्रकांड पंडितजी ने जो फोटो में विराजे हुए है जिनि शरण में मै समय समय पर जाता हूं , उन्होंने इस जिज्ञासा का समाधान दिया ।
समाधान सुन कर सनातन की गहराई का अनुभव होता है ।
उन्होंने बताया की हिंदी वर्ण माला के 33 व्यंजन अन्य रूप में 33 कोटि देवता है । जिसकी चर्चा फिर कभी करेंगे ।
इन व्यंजनों को " क वर्ग " (क , ख , ग , घ ) , च वर्ग , प वर्ग आदि में बांट रखा है ।
यह वर्गीकरण इन वर्गो के उच्चारण में कंठ , ओष्ठ , जिव्हा , दन्त आदि अवयवों के प्रयोग के आधार पर किया गया है ।
इन व्यंजनों में " प वर्ग " जिसका उच्चारण ओठों से होता है इस वर्ग में ' प , फ , ब , भ , म ' ये पांच वर्ण आते है शिवजी अपने श्रंगार में इन पांचों वर्णो को धारण करते है ।
' प ' - पार्वती , ' फ ' - फणीन्द्र , ' ब - बालेंदु ,
' भ ' - भस्म , ' म '- मंदाकिनी ।
चूंकि इन पांचों वर्णो का उच्चारण ओठों के कम्पन्न से हो जाता है अतः शिव लिंग पूजन या पार्थिव पूजन के अवसान पर तर्जनी से ओठों पर कम्पन्न कर इन पांच वर्णो के उच्चारण द्वारा शिवजी का श्रंगार पूर्ण होता है । जो लिंग या पार्थिव पूजन में हम भौतिक रूप से नही कर सकते ।
इस बात की पूरी संभावना है मित्रों कि आदत से मीनमेख निकालने वाले इस समाधान में किन्तु परन्तु लगाएंगे लेकिन मै अपने प्रश्न का समाधान प्राप्त कर सन्तुष्ट हुआ ।

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