Friday, December 29, 2017

अखलाख शारीरिक रूप से हो सकता है कि कमजोर रहा हो लेकिन जेहनी तौर पर जहरीला ही था

मित्र , आपकी व्यग्रता समझ आती है । दूसरी बात यह है कि अखलाख शारीरिक रूप से हो सकता है कि कमजोर रहा हो लेकिन जेहनी तौर पर जहरीला ही था । और एक कमजोर अख़लाक़ के वध का ये प्रभाव है कि आज गौ वध पर एक हद तक रोक लगी है । आगे आप लिखते है कि इस्लामाबाद में आत्म घाती हमला किया जाय ।
मित्र हमारी संस्कृति आत्मघाती कार्य करने के संस्कार नही देती वो तो आत्मोत्थान करना सिखाती है । फिर आपने लिखा की क्या मुँह से ही विश्व जीत लेंगे , तो मै यह कहना चाहता हु की यदि विचारधारा में दम हो तो विश्व मुँह से भी जीता जा सकता है । हजारो लाखो वर्ष से लहरा रही सनातन पातका इस बात का सबूत है जो बावजूद अनेको सशत्र एवं सांस्कृतिक हमलो के बाद आज भी शान से फहरा रही है । विवेकानन्द ने मुँह से जो जीत अमरीकन धर्म संसद में हासिल करी थी वो बढ़त आज भी कायम है , जबकि शस्त्र से जीत हासिल करने वाले हिटलर , मुसलोनी , नेपोलियन , सिकन्दर,मुगल आदि की मजार पे आज कोई चिराग रोशन करने वाला भी नही है । और सनातन रोशन है ।

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