अपने बीमार पिता का इलाज करवाने के लिए राजधानी रायपुर की 17 वर्षीय बेटी मधुबाला मसीह ने बारहवी की पढ़ाई के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ दी, पिता की दवाइयों का खर्च उठाने के अलावा उसके नाजुक कंधो पर पुरे घर का दारोमदार है|
वह सुबह प्रिंटिंग प्रेस में काम करने जाती है. जहाँ महज उसे प्रतिदिन के 100 रूपये और हफ्ते के 600 रूपये मिलते हैं| इतनी महंगाई में यह बेटी अपने बीमार पिता के इलाज और दवाइयों के लिये दर दर भटक रही है| यहाँ जिस बेटी की बात हो रहि है वह खुद भी पिछले डेढ़ महिने से टायफायड से पीड़ित है| लेकिन पिता के प्यार और इलाज के खातिर बीमारी में भी काम पर जा रही है|हम बात कर रहे हैं राजधानी रायपुर में महाराजा तालाब के पास रहने वाले माइकल मसीह और उनकी बेटी मधुबाला मसीह की| गार्ड की नौकरी कर रहे माइकल मसीह पिछले 30 सालो से अस्थमा से पीड़ित है| उन्हें कई बार अम्बेडकर और एम्स हॉस्पिटल में भारती करवाया गया..दोनों अस्पतालों के डॉक्टर्स ने दवाई बाहर से खरीदने को कहा| पूरा जीवन राजधानी में बिताने के बाद भी उनके पास ना गरीबी रेखा कार्ड है, ना ही स्मार्ट कार्ड| यही कारन है की वो अपनी दवाइयों और राशन के लिये तरश रहे हैं|
श्री मसीह से बातचीत करते करते उनकी आँखों में आसू आ गए, उन्होंने कहा की अगर मैं स्वस्थ रहता तो कभी बेटी से काम नहीं करवाता और उसे आगे की पढ़ाई करवाता| उन्होंने आंबेडकर और एम्स हॉस्पिटल के डॉक्टर्स को मुफ्त इलाज के लिए पत्र लिख कर गुहार लगाईं, लेकिन एक दो दिन के लिए भे=रति कर वो बाहर के मेडिकल से दवाईयं लाने कहते थे| ऐसे में उन्होंने अस्पताल जाना और दवाई खाना भी छोड़ दिया|
मधुबाला बताई है की उसे 100 रूपये रोजी मिलती है| उससे पिता व् भाई सहित तीन सदस्यीय परिवार के लिए राषन का इंतजाम भी मुश्किल से कर पाती है| इलाज के अभाव में अपनी माँ को 3 साल पहले खो चुकी उसकी मधुबाला का कहना है की शासन की गरीबो के लिए मदद की योजना की जानकारी तो है , लेकिन सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा लगाकर कर वह थक गयी है| उने परिवा के पास ना राशन कार्ड है ना स्मार्ट कार्ड| जिस झोपड़ी में वो रहते हैं उसका किराया भी तीन महीने से नहीं पटाया है| जिसकी वजह से उसे मकान मालिक के ताने सुनने पड़ते हैं| आज इस स्टोरी को नवभारत रायपुर के प्रतिक चौहान भैया ने भी कवर किया है|
दोस्तों मैं इस परिवार से मिल चुकी हु और हम इनकी मदद के लिए मुहिम शुरू कर रहे हैं, उम्मीद है आप सभी हर संभव सपोर्ट मिलेगा| आप भी अगर इस परिवार की मदद करना चाहते हैं तो इनके निचे दिए गए बैंक खातो में आर्थिक सहयोग करके मदद कर सकते हैं| जो रायपुर के दोस्त हो उनसे निवेदन है एक बार इस परिवार से मिलने जरुर जाए न और जो भी मदद हो सके जरुर करें| हम भी अपने ग्रुप के माध्यम से मदद की कोसिस कर रहे हैं| दोस्तों भगवान् किसी को ऐसा दिन ना दिखाएँ, इस बच्ची और उसके पिता की स्टोरी पढने के बाद आप अपने आसू नहीं रोक पाएंगे|| पेपर कटिंग में इनके घर का पता भी दिया हुआ है|\ प्लीज दोस्तों मदद के लिए आगे आइये| यह खबर आज के नवभारत रायपुर में छपी है| इस पोस्ट को आगे भी जरुर शेयर, कॉपी पेस्ट जरुर करें| अनीता ढीढी
Madhubala Masih (मधुबाला मसीह),
बैंक ऑफ़ बड़ोदा खाता नम्बर - 45760100001990 , IFSC code - BARB0SANRAI (ध्यान रहे कोड का पांचवा डिजिट "जीरो" है "ओ" नहीं है ) Mo number .. 8109728726,
जादा जानकारी के लिए आप जीवनदीप के रविन्द्र सिंह सर से 7415191234 संपर्क कर सकते हैं||
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अनीता ढीढी , पुलिस कांस्टेबल , रायपुर , छत्तीसगढ़ पुलिस. 28/12/2017
वह सुबह प्रिंटिंग प्रेस में काम करने जाती है. जहाँ महज उसे प्रतिदिन के 100 रूपये और हफ्ते के 600 रूपये मिलते हैं| इतनी महंगाई में यह बेटी अपने बीमार पिता के इलाज और दवाइयों के लिये दर दर भटक रही है| यहाँ जिस बेटी की बात हो रहि है वह खुद भी पिछले डेढ़ महिने से टायफायड से पीड़ित है| लेकिन पिता के प्यार और इलाज के खातिर बीमारी में भी काम पर जा रही है|हम बात कर रहे हैं राजधानी रायपुर में महाराजा तालाब के पास रहने वाले माइकल मसीह और उनकी बेटी मधुबाला मसीह की| गार्ड की नौकरी कर रहे माइकल मसीह पिछले 30 सालो से अस्थमा से पीड़ित है| उन्हें कई बार अम्बेडकर और एम्स हॉस्पिटल में भारती करवाया गया..दोनों अस्पतालों के डॉक्टर्स ने दवाई बाहर से खरीदने को कहा| पूरा जीवन राजधानी में बिताने के बाद भी उनके पास ना गरीबी रेखा कार्ड है, ना ही स्मार्ट कार्ड| यही कारन है की वो अपनी दवाइयों और राशन के लिये तरश रहे हैं|
श्री मसीह से बातचीत करते करते उनकी आँखों में आसू आ गए, उन्होंने कहा की अगर मैं स्वस्थ रहता तो कभी बेटी से काम नहीं करवाता और उसे आगे की पढ़ाई करवाता| उन्होंने आंबेडकर और एम्स हॉस्पिटल के डॉक्टर्स को मुफ्त इलाज के लिए पत्र लिख कर गुहार लगाईं, लेकिन एक दो दिन के लिए भे=रति कर वो बाहर के मेडिकल से दवाईयं लाने कहते थे| ऐसे में उन्होंने अस्पताल जाना और दवाई खाना भी छोड़ दिया|
मधुबाला बताई है की उसे 100 रूपये रोजी मिलती है| उससे पिता व् भाई सहित तीन सदस्यीय परिवार के लिए राषन का इंतजाम भी मुश्किल से कर पाती है| इलाज के अभाव में अपनी माँ को 3 साल पहले खो चुकी उसकी मधुबाला का कहना है की शासन की गरीबो के लिए मदद की योजना की जानकारी तो है , लेकिन सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा लगाकर कर वह थक गयी है| उने परिवा के पास ना राशन कार्ड है ना स्मार्ट कार्ड| जिस झोपड़ी में वो रहते हैं उसका किराया भी तीन महीने से नहीं पटाया है| जिसकी वजह से उसे मकान मालिक के ताने सुनने पड़ते हैं| आज इस स्टोरी को नवभारत रायपुर के प्रतिक चौहान भैया ने भी कवर किया है|
दोस्तों मैं इस परिवार से मिल चुकी हु और हम इनकी मदद के लिए मुहिम शुरू कर रहे हैं, उम्मीद है आप सभी हर संभव सपोर्ट मिलेगा| आप भी अगर इस परिवार की मदद करना चाहते हैं तो इनके निचे दिए गए बैंक खातो में आर्थिक सहयोग करके मदद कर सकते हैं| जो रायपुर के दोस्त हो उनसे निवेदन है एक बार इस परिवार से मिलने जरुर जाए न और जो भी मदद हो सके जरुर करें| हम भी अपने ग्रुप के माध्यम से मदद की कोसिस कर रहे हैं| दोस्तों भगवान् किसी को ऐसा दिन ना दिखाएँ, इस बच्ची और उसके पिता की स्टोरी पढने के बाद आप अपने आसू नहीं रोक पाएंगे|| पेपर कटिंग में इनके घर का पता भी दिया हुआ है|\ प्लीज दोस्तों मदद के लिए आगे आइये| यह खबर आज के नवभारत रायपुर में छपी है| इस पोस्ट को आगे भी जरुर शेयर, कॉपी पेस्ट जरुर करें| अनीता ढीढी
Madhubala Masih (मधुबाला मसीह),
बैंक ऑफ़ बड़ोदा खाता नम्बर - 45760100001990 , IFSC code - BARB0SANRAI (ध्यान रहे कोड का पांचवा डिजिट "जीरो" है "ओ" नहीं है ) Mo number .. 8109728726,
जादा जानकारी के लिए आप जीवनदीप के रविन्द्र सिंह सर से 7415191234 संपर्क कर सकते हैं||
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अनीता ढीढी , पुलिस कांस्टेबल , रायपुर , छत्तीसगढ़ पुलिस. 28/12/2017
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