Saturday, December 30, 2017

अनार नान-क्लामेट्रिक फल है जब फल पूर्ण रूप से पक जाये तभी पौंधे से तोड़ना चाहिए।

अनार नान-क्लामेट्रिक फल है जब फल पूर्ण रूप से पक जाये तभी पौंधे से तोड़ना चाहिए। पौधों में फल सेट होने के बाद 120-130 दिन बाद तुड़ाई के तैयार हो जाते हैं। पके फल पीलापन लिए लाल हो जाते हैं। उपज पौधे रोपण के 2-3 वर्ष पश्चात फलना प्रारम्भ कर देते हैं। लेकिन व्यावसायिक रूप से उत्पादन रोपण के 4-5 वर्षों बाद ही लेना चाहिए। अच्छी तरह से विकसित पौधा 60-80 फल प्रति वर्ष 25-30 वर्षो तक देता है। श्रेणीकरण अनार के फलों के वजन,आकार एवं बाहरी रंग के आधार पर निम्नलिखित श्रेणियों मे रखा जाता है। सुपर साईज-इस श्रेणी में चमकदार लाल रंग के बिना धब्बे वाले फल जिनका भार 750 ग्राम से अधिक हो आते हैं। किंग साईज-इस श्रेणी में आर्कषक लाल रंग के बिना धब्बे वाले फल जिनका भार 500 से 750 ग्राम हो आते हैं। क्वीन साईज-इस श्रेणी में चमकदार लाल रंग के बिना धब्बे वाले फल जिनका भार 400-500 ग्राम हो आते हैं। प्रिंन्स साईज- पूर्ण पके हुए लाल रंग के 300 से 400 ग्राम के फल इस श्रेणी में आते हैं। शेष बचे हुए फल दो श्रेणीयों 12-ए. एवं 12-बी. के अंर्तगत आते हैं। 12-बी. के अंर्तगत 250-300 ग्राम भार वाले फल जिनमें कुछ धब्बे हो जाते हैं।

भंड़ारण

शीत गृह में 5 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 2 माह तक भण्डारित किया जा सकता है।

पौध रोपण की आपसी दूरी मृदा का प्रकार एवं जलवायु पर निर्भर करती है। सामान्यतः 4-5 मीटर की दूरी पर अनार का रोपण किया जाता है। सघन रोपण पद्धति में 5X2 मीटर (1,000 पौधें/हें.), 5Xमीटर (666 पौधें/हें.), 4.5X3 (740 पौधें/हें.) की आपसी अन्तराल पर रोपण किया जा सकता है। पौध रोपण के एक माह पूर्व 60X 60X60 से.मी. (लम्बाई*चौड़ाई*गहराई) आकार के गड्‌ढे खोद कर 15 दिनों के लिए खुला छोड़ दें। तत्पश्चात गड्‌ढे की ऊपरी मिट्‌टी में 20 किग्रा.पकी हुई गोबर की खाद 1 किग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट, 50 ग्राम क्लोरो पायरीफास चूर्ण मिट्‌टी में मिलाकर गड्‌डों को सतह से 15 से.मी. ऊंचाई तक भर दें।

गड्‌ढे भरने के बाद सिंचाई करें ताकि मिट्‌टी अच्छी तरह से जम जाए तदुपरान्त पौधों का रोपण करें एवं रोपण पश्चात तुरन्त सिचाई करें।


एक वर्ष पुरानी शाखाओं से 20-30 से.मी.लम्बी कलमें काटकर पौध शाला में लगा दी जाती हैं। इन्डोल ब्यूटारिक अम्ल (आई.बी.ए.) 3000 पी.पी.एम. से कलमों को उपचारित करने से जड़ें शीघ्र एवं अधिक संख्या में निकलती हैं।

गूटी द्वारा अनार का व्यावसायिक प्रर्वधन गूटीद्वारा किया जाता है। इस विधि में जुलाई-अगस्त में एक वर्ष पुरानी पेन्सिल समान मोटाई वाली स्वस्थ, ओजस्वी, परिपक्व, 45-60 से.मी. लम्बाई की शाखा का चयन करें । चुनी गई शाखा से कलिका के नीचे 3 से.मी. चौड़ी गोलाई में छाल पूर्णरूप से अलग कर दें। छाल निकाली गई शाखा के ऊपरी भाग में आई. बी.ए.10,000 पी.पी.एम. का लेप लगाकर नमी युक्त स्फेगनम मास चारों ओर लगाकर पॉलीथीन शीट से ढंककर सुतली से बांध दें। जब पालीथीन से जड़े दिखाई देने लगें उस समय शाखा को स्केटियर से काटकर क्यारी या गमलो में लगा दें।

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