सिंधी जाति के लोग 1947 में देश में शरणार्थी बन कर आये थे। जयपुर में आज 'सिंधी केम्प' बस स्टैंड बन गया है। पर
जयपुर शहर के 3 बड़े बाज़ार पर आज इन्ही सिंधियों का कब्जा है। 70 साल में सिंधी जाति ने जो उनन्ति कि है वह किसी और् जाति ने कभी नही की। राजस्थान में मारवाड़ी, पंजाब में पंजाबी, केरल में कन्नड़, तमिल में तमिल...... ऐसे फर्राटे से बोलते है जैसे इनके पूर्वज यही जन्मे है..... पता है क्यों?
क्यों कि उनके यँहा सभी काम करते है। काम से प्यार है उन्हें... पाकर खोना और् खोकर पाना सिंधीयो से अच्छा कोई नही जानता। आज व्यापार में बनियो से कपड़ा, किराना, सुनार से सोना चांदी सभी व्यापार में अपने पैर जमा चुके है.....
अब इतना लिखने का कारण------
उन्होंने अपने बच्चों को खाली नही बैठने दिया... 8 साल से काम पर लग जाते है। पैसे बाले भी अपना बेटा बेटी किसी ना किसी के यँहा नौकरी करने के लिये भेजते है। बचपन में ही भाषा, व्यापार पर पकड़ कर लेते है। और् यही उचित समय होता है कुछ सीखने का....
जयपुर शहर के 3 बड़े बाज़ार पर आज इन्ही सिंधियों का कब्जा है। 70 साल में सिंधी जाति ने जो उनन्ति कि है वह किसी और् जाति ने कभी नही की। राजस्थान में मारवाड़ी, पंजाब में पंजाबी, केरल में कन्नड़, तमिल में तमिल...... ऐसे फर्राटे से बोलते है जैसे इनके पूर्वज यही जन्मे है..... पता है क्यों?
क्यों कि उनके यँहा सभी काम करते है। काम से प्यार है उन्हें... पाकर खोना और् खोकर पाना सिंधीयो से अच्छा कोई नही जानता। आज व्यापार में बनियो से कपड़ा, किराना, सुनार से सोना चांदी सभी व्यापार में अपने पैर जमा चुके है.....
अब इतना लिखने का कारण------
उन्होंने अपने बच्चों को खाली नही बैठने दिया... 8 साल से काम पर लग जाते है। पैसे बाले भी अपना बेटा बेटी किसी ना किसी के यँहा नौकरी करने के लिये भेजते है। बचपन में ही भाषा, व्यापार पर पकड़ कर लेते है। और् यही उचित समय होता है कुछ सीखने का....
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