Saturday, January 13, 2018

कव्वा तो पहले से ही नीच योनि में पड़ा है , अब ये इन पंचो को सोचना है कि इन्हें पदावनत हो कर कहां गिरना है ।

मित्रों, किसी तालाब के किनारे एक कव्वा रहता था, एक बार माइग्रेशन करते हुए हंसो के झुण्ड से एक जोड़ा जिसका नर घायल था वही आराम करने रुक गए ।
कव्वे ने उस जोड़े से मेलजोल बढ़ाया, और इस दौरान उसका दिल हंसनी पर आ गया ।
कुछ समय पश्चात जब नर हंस स्वस्थ हो गया तो उन्होंने वहां से आगे उड़ने की ठानी और कव्वे से विदा मांगी ।
लेकिन कव्वे ने हंसिनी पर दावा ठोक दिया और उसे अपनी पत्नी बता उन्हें कोर्ट में ले गया ।
कोर्ट के न्यायधीश बेईमान थे अतः कव्वे ने उन्हें ऑफर दिया की यदि आप मेरे पक्ष में फैसला करेंगे तो में आप को आपके पुरखों से मिलवाऊंगा ।
उन जजो ने यह सुन रखा था कि कव्वे पुरखों के प्रतिनिधी होते है, सो वे अपने पुरखों के दर्शन के एवज में हंसिनी को कव्वे की पत्नी घोषित कर देते है ।
अब कव्वा उन जजों को उनके पुरखों के दर्शन कराने हेतु गाँव बाहर एक गधे के सड़ते हुए शव के पास लेजाता है और शव में बिलबिलाते कीड़ों की और इशारा करते हुए कहता है कि...लो कर लो अपने पुरखों के दर्शन , ये भी तुम्हारे जैसे न्यायधीश ही थे जो रिश्वत खा कर हंसिनी को कव्वे की पत्नी घोषित करते थे ।
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कव्वा तो पहले से ही नीच योनि में पड़ा है , अब ये इन पंचो को सोचना है कि इन्हें पदावनत हो कर कहां गिरना है ।
मित्रों, कांग्रेस पार्टी ही वह कव्वा है जो सत्ता रूपी हंसनी को येन केन प्रकारेण हासिल करना चाहती है ।
अवार्ड वापसी , jnu , अख़लाक़ , कन्हैय्या , जनेऊ , भीमा-कोरेगांव जैसे कितने ही हथकंडे ये मोदी को रोकने के लिए अपना चुके हैं ।
लेकिन इस बार ये नीचता और सत्तालोलुपता की पराकाष्ठा पर कर गए ।
जब से Cji ने 84 के दंगो की फ़ाइल खोलने और राम मंदिर पर नियमित सुनवाई करने का फैसला लिया है तभी से खान्ग्रेस का असल सुलेमानी Dna बल खाने लगा था । रही सही कसर तीन तलाक पर Sc के फैसले ने पूरी कर दी ।
सोचिये अगर ये स्पर्म आज प्रेस कांफ्रेंस कर एक्सपोज न होते, और कल इन्ही में से एक CJI बनता तब ये जन्मभूमि केस, सिक्ख नरसंहार केस का क्या हश्र करते ।
वो तो रामजी ने इनकी मति हर ली, जो लोकतंत्र की हमेशा ढकी छुपी रहने वाली इस टेढ़ी इंद्री को शीघ्रपतन हो गया और कुछ नाजायज स्पर्म गटर में जा पहुंचे ।
कांग्रेस इन नाजायज स्पर्मो के सहारे न्यायपालिका की क्रेडिबिलिटी पर संदेह का राक्षस पैदा करना चाहती है ताकि आने वाले जन्मभूमि केस के फैसले में बाबर के वंशजों के सामने खुद को जस्टिफाई कर सकें, और सनातन संस्कृति को नष्ट करने के लिए अरब देशों से मिलने वाला चंदा जिसकी एक किश्त अभी बहरीन में अदा की गई वह बन्द न हो जाए ।
क्या ये हंसिनी को कव्वे की पत्नी घोषित नही करते ?
मित्रों, कल देर रात तक टीवी डिबेट सुनता रहा लेकिन ये समझ न सका की इनकी CJM को लिखी चिठ्ठी में वो कौन सी बात थी जिससे लोकतंत्र को खतरा हो सकता था ।
और यदि CJI ने आपकी नही सुनी तो मीडिया आखरी विकल्प कैसे होगया ।
राष्ट्रपति को भूल गए क्या आप ?
मि लोड, दरअसल लोकतंत्र को खतरा आप से है ।
CJM ने तो आज तक ऐसा कुछ नही किया जिससे भारत की सुप्रतिष्ठित न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर कोई आंच आती हो लेकिन आपने तो कालिख पोत ही दी, न सूत न कपास जुलाहों की लठम-लठ ।
उस चिठ्ठी में इन्होंने इस बात पर आपत्ति ली थी की राष्ट्रहित से जुड़े कुछ केस इनको इग्नोर कर SC के दूसरे जजों को दे दिए ।
इसका मतलब की वे जज जिन्होंने उन केसों सुनवाई करी वो भी बेईमान है ।और आप उन विशेष मुकदमो को क्यों सुनना चाहते थे ।
अरे भाई ऐसा भी तो हो सकता है कि SC ने आपको आपकी पृष्ठभूमि के कारण ही इन केसों से दूर रखा और अच्छा ही किया , टीवी डिबेट में आपके पक्ष में जो एक से बढ़ कर एक बगुले भगत वकील आपका समर्थन कर रहे हैं उससे पता लगता है कि, आप का फैसला उन केसों में क्या रहता ।
आप को उन केसों से दूर रखने के लिए भारत की धर्मप्रिय जनता , न्यायप्रिय जनता CJI श्री दीपक मिश्राजी की आभारी रहेगी ।
कल मैंने मि लोड से पूछा था कि " सावन जो अगन लगाए उसे कोन बुझाए " ।
मित्रों, अब सावन तो इंद्र-देव की कही मानता है और जब देवेंद्र आग लगाता है तो नरेंद्र बुझाता भी है ।
सिस्टम से एक एक कीड़े बाहर फेंके जाएंगे ।
मित्रों ये कठिनाइयां तो आनी ही है , सत्तर साल पुराना निजाम उखाड़ फेंकना मजाक है क्या ।
अगर 2014 में बीजेपी केंद्र में नही आती तो आज हमें यह मालूम ही नही पड़ता की इन गद्दारो की जड़ें कहाँ तक फैली हुई है ।
अब तो कव्वे का ब्याव हंसनी के साथ कराने के लिए मि लोड राजी हो गए । राम भली करे
हंसनी हंस की थी , जन्मभूमी राम की है और देश हिंदुओं का ।
कोई शक ?

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