Saturday, January 13, 2018

मकर_संक्रांति

मित्रों, आज मकर-संक्रांति है । आज से सूर्य नित्य उत्तर दिशा की और गति करते जाएंगे ।सूर्य कल से उत्तरदिशा की और सरकते जाएंगे अर्थात प्रतिदिन सूर्योदय के समय सूर्य उत्तर दिशा की और बढ़ते जाएंगे । दिन बड़े और रातें छोटी होने लगेंगी अर्थात पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश अधिक मात्रा में उपलब्ध होगा । इस कारण उष्णता बढ़ेगी और प्रकृति में कई अन्य होंगे । आज सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के कारण इस पर्व को मकर संक्रांति पर्व कहते है ।
मित्रों , जिस प्रकार सूर्य के अंशो में होने वाले बदलाव का असर प्रकृति पर होता है ,वैसे ही हमारे शरीर पर भी होता है ।
हमारे शरीर का सर उत्तरी ध्रुव और चरण दक्षिणी ध्रुव है । रीढ़ की अंतिम कशेरुका और कूल्हे की हड्डी का जोड़ हमारे शरीर की कर्क रेखा है । अभी तक सूर्य किरणों का प्रभाव या ऊर्जा का अथवा प्राणों का प्रभाव नीचे की और था ,अधोगामी था ।
इन दिनों खाई जाने वाली वस्तु अपांन वायु उत्तपन्न करती थी ,आज से आगे खाई जाने वाली वस्तुओं से प्राण ऊर्जा की व्रद्धि होगी अतः भोजन में डाइट में कमी आएगी ।सूर्य या ऊर्जा की गति ऊर्ध्व होगी । अब से अपान वायु के निर्माण में कमी और उष्णता (कब्ज,एसिडिटी ) में वृद्धि होगी ।
रीढ़ और कूल्हे की अस्थि -संधि पर ही हमारी ऊर्जा का सूर्य स्थित रहता है । पैर की दोनों हड्डियों को मकर का जबड़ा और हमारी बल खाती रीढ़ को मकर की पूंछ मान ले तो मकार संक्रांति को हमारे शरीर में समझना आसान हो जाएगा ।
पिछले छः महीनों में जब ऊर्जा प्रवाह मकर के जबड़ो की और था तब जो ग्राह्य करना था वो कर लिया । अब अगले छः महीने ऊर्जा का प्रभाव मकर के पेट की और रहेगा अर्थात जो ग्राह्य किया है उसे पचाने का कार्य शुरु होगा ।
साधना की दृष्टि से अब महत्व पूर्ण समय प्रारम्भ होता है । क्योंकि हमारी ऊर्जा का प्रवाह प्राकृतिक रूप से अगले छः महीने ऊर्ध्व मुखी रहेगा और प्रकृति में सूर्य की ऊर्जा अधिक समय अधिक मात्रा में रहेगी , जो साधना को आसान बनाएगी ।
उत्तरायण सूर्य में प्राणों की गति स्वाभाविक रूप से ऊर्ध्व होने से इन दिनों शरीर छोड़ने वाले अभ्यासी साधक ऊर्ध्वगति प्राप्त करते है ।
Ashish Piplonia

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