दुर्ग में रहने वाले 15 साल के प्रद्युम्न को बचपन से सिकलीन की समस्या थी, साल में दो चार बार उसे ब्लड चढ़ता था | फिर अचानक उसे लगातार चक्कर आने की समस्या शुरु हुई| साइकिल चलाते वक्त एक दिन वह अचानक गिर पड़ा, पैर में चोट लगी, चोट ने घाव का रूप ले लिया और सूजन बढ़ गई, कंपकपी ले कर तेज बुखार आया और टेस्ट कराने पर मलेरिया निकला, हॉस्पिटल में लंबे समय तक भर्ती रहकर ईलाज कराने से वह ठीक हो गया| फिर कुछ दिनों बाद कमर में दर्द शुरू हुआ, सीने में अपने आप सूजन बढ़ने लगी,डॉक्टरो ने सीने में चीरा लगाया जिससे बहुत ही गन्दा व बदबूदार मवाद निकाला उसके बाद कमर में दर्द बढ़ने की समस्या शुरू हुई जो हद से ज्यादा थी |
MRI टेस्ट में पता चला कि रीढ़ की हड्डी में पस भर रहा है जिसकी वजह से हड्डी गलने लगी थी, बोन मेरो और टी.बी. टेस्ट भी हुए पर कमर दर्द बंद नहीं हुआ, और फिर एक दिन उसका चलना- फिरना बंद हो गया, साथ ही यूरिन भी बंद होने लगा प्रद्युम्न एक के बाद एक बीमारियों से घिरता जा रहा था | डॉक्टरों नें 7 जनवरी 2016 को प्रद्युम्न की रीढ़ की हड्डी का ऑपेरशन करना सुनिश्चित किया, प्रद्युम्न की बिगड़ती हालत देख कर उसके पिता श्री अजय सिंह ठाकुर यह सदमा बर्दास्त ना कर सके.....और जब प्रद्युम्न को ऑपरेशन के लिए ले जाया जा रहा था ठीक उसी समय व उसी दिन उनकी घर पर हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई | पिता की मृत्यु की वजह से डॉक्टर्स ने प्रद्युम्न की रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन टाल दिया जिसे फिर 13 जनवरी 2016 को किया गया|
प्रद्युम्न की रीढ़ की हड्डी में प्लेट्स लगी है , फिलहाल प्रद्युम्न सारा दिन बिस्तर पर ही रहता है, यूरिन पाइप भी लगी हुई है| प्रद्युम्न की माँ एक करीब के प्राईव्हेट स्कूल में पढ़ाती हैं, साथ ही पड़ोस के दो घरों में खाना भी बनाने जाती है, फिर शाम को घर में कुछ बच्चो को ट्यूशन भी पढ़ाती है, यह सब सिर्फ इसलिए कि प्रद्युम्न का ईलाज करवा सके और अपनी छोटी बेटी दीपशिखा को पढा सके, उन्हें उम्मीद है कि उनका बेटा एक दिन अपने पैरों पर जरुर खड़ा होगा | पर पैसों की तंगी उनकी सारी उम्मीद तोड़ कर रख देती है | मानवता के नाते एक बार अपने दिल पर हाथ रखकर सोचिये कि इतनी कम उम्र में प्रद्युम्न और उसके परिवार ने क्या-क्या नहीं झेला है | इतनी परेशानियाँ किसी को जिन्दा लाश में तब्दील करने के लिए काफी है| फिर भी प्रद्युम्न की जीवटता है कि वह हमेशा मुस्कुराता रहता है|
मैं रविन्द्र सिंह क्षत्री (सुमित फाउंडेशन- जीवनदीप) प्रद्युम्न के साथ हूँ और उसे उसके पैरो में खड़ा करने के लिए अपनी टीम के साथ हर संभव प्रयास करूँगा| क्या आप मेरे साथ हैं?
अगर आप मेरे साथ हैं तो यह स्टोरी अपनी प्रोफाइल पर कॉपी पेस्ट करके अथवा आर्थिक सहयोग करके प्रद्युम्न के आगे के ईलाज में मदद जरुर कीजिये, और यदि करीब में रहते हों तो उसके घर जा कर जरुर मिलिए | जीवनदीप की कोशिश है , प्रद्युम्न को बेस्ट से बेस्ट न्यूरो, आर्थो और स्पाईन के प्रसिद्ध डॉक्टर्स को दिखाने की | डॉक्टर्स का कहना है उसकी फिजियोथैरेपी काफी लम्बे समय तक चलेगी | तभी संभव है कि वो अपने पैरो पर दुबारा चल पाये......
स्टोरी- रविन्द्र सिंह क्षत्री Date (18/01/2018)
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मैं स्मिता तांडी (दुर्ग पुलिस) प्रद्युम्न के परिवार के इस दुःख की घड़ी में उनके साथ हूँ, और अपने सभी सहयोगियों के साथ मिलकर प्रद्युम्न के लिए बेहतर से बेहतर प्रयास जरुर करुँगी | आप मदद करना चाहें तो अपनी सहयोग राशि नीचे दिए गए खाते में जमा कर सकते हैं| आपके द्वारा सुमित फाउंडेशन को दी गयी सहयोग राशी का उपयोग प्रद्युम्न के बेहतर इलाज के लिए किया जाएगा..
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Sumit Foundation (सुमित फाउंडेशन),
Federal Bank a/c no. (फेडरल बैंक)- 16660100056756
IFSC कोड - FDRL0001666
व्यापार विहार ब्रांच, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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ज्यादा जानकारी के लिए आप जीवनदीप के रविन्द्र सिंह क्षत्री सर से 7415191234 मोबाईल नम्बर पर संपर्क कर सकते हैं||
इस बच्चे की सभी रिपोर्ट और अभी की वास्तविक स्थिति एवं संपूर्ण इलाज में जो भी खर्च लगना है उस हॉस्पिटल का कोटेशन के साथ मुख्यमंत्री आवास या कार्यालय में तत्काल संपर्क कीजिये
तत्काल मदद मिलेगी और अगर तत्काल सहायता नही मिलती है तो कृप्या सूचित कीजिये हम सभी मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के कार्यालय और निवास में तब तक धरने पर बैठेंगे जब तक सरकार उक्त परिवार की समस्या का पूर्ण निराकरण नही करती है
हमने अपनी मेहनत की कमाई का टैक्स ऐसे ही कामो के लिए सरकार को दिया है
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