अब जब कोलेजियम के 4 जजों ने बगावत कर दी है तो क्या केन्द्र सरकार राष्ट्रपति के जरिये रेफरेन्स भेजेगी? ... 5 वें जज तो खुद सीजे हैं ... क्या फिर एन.जे.ए.सी. की बात उठेगी?
इन जजों के झगड़े में लोहडी कब निकल गई पता ही नहीं चला वरना प्रदूषण के नाम पर एक न एक याचिका तो जरूर आती
इसे कहते हैं शुचिता! ... चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने प्रधानमंत्री के प्रधान मुख्य सचिव नृपेन्द्र मिश्रा से मिलने से इन्कार कर दिया जबकि वरिष्ठतम जज चेलामेश्वर खुले आम राजनेताओं और पत्रकारों से मुलाकातें करते रहे।
कुछ एन.जी.ओ. और विदेशी चन्दों पर पलने वाले एक्टिविस्टों ने जनहित याचिकाएं दायर करने का धन्धा बना लिया है, सुप्रीम कोर्ट का सारा वक्त इन्हीं में जाया हो जाता है
सारे झगड़े की जड़ ये जनहित याचिकाएं हैं, सुप्रीम कोर्ट इन्हें सुनता ही क्यूं है? सुप्रीम कोर्ट को अपीलेन्ट कोर्ट की तरह कार्य करना चाहिये ....
कम्युनिस्ट नेता डेनियल राजा ने तो महज विपक्ष की तरफ शक की सुई ही की थी मगर माकपा नेता प्रकाश कारंथ ने तो कांग्रेस-कम्युनिस्ट और झोलों की सारी पोल ही खोल कर रख दी ... अब यह साफ हो गया है कि जजों की बगावत राम जन्म भूमि मामले में फच्चर ठोकने हेतु थी
प्रकाश कारंथ मांग कर रहा कि राम जन्म भूमि मामले की सुनवाई कोलेजियम के जज ही करें यानि कि वे चारों जज जिन्होंने प्रेस कान्फ्रेन्स कर बगावत की
चारों जज अपना ही दोगलापन उजागर कर रहे ... एक तरफ तो वे कह रहे कि चीफ जस्टिस भी अन्य जजों के बराबर ही हैं, दूसरी तरफ ये मांग करते कि जनहित याचिकाएं सिर्फ कोलेजियम जजों को ही दी जाए ... कोलेजियम जज अन्यों से उपर कैसे हो सकते?
चीफ जस्टिस ने भी इन चारों जजों को अंगूठा दिखा दिया ... आधार मामले की सुनवाई जो 5 जज करेंगे इनमें ये चारों कोलेजियम जज शामिल नहीं
चारों बागी जज क्या संविधान से उपर? ... जब न्यायाधीशों की आचार संहिता से स्पष्ट है कि कोई जज मीडिया से बात नहीं करेगा तो इन चारों जजों पर कार्रवाई क्यूं नहीं?
अगले चीफ जस्टिस की बारी इन चारों बागी जजों में से एक रंजन गोगोई की। गोगोई को सुपरसीड कर किसी अन्य निर्विवाद जज को यह पद देना चाहिये। अतीत में कांग्रेस सरकारें भी एसा कर चुकी हैं
इन जजों के झगड़े में लोहडी कब निकल गई पता ही नहीं चला वरना प्रदूषण के नाम पर एक न एक याचिका तो जरूर आती
इसे कहते हैं शुचिता! ... चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने प्रधानमंत्री के प्रधान मुख्य सचिव नृपेन्द्र मिश्रा से मिलने से इन्कार कर दिया जबकि वरिष्ठतम जज चेलामेश्वर खुले आम राजनेताओं और पत्रकारों से मुलाकातें करते रहे।
कुछ एन.जी.ओ. और विदेशी चन्दों पर पलने वाले एक्टिविस्टों ने जनहित याचिकाएं दायर करने का धन्धा बना लिया है, सुप्रीम कोर्ट का सारा वक्त इन्हीं में जाया हो जाता है
सारे झगड़े की जड़ ये जनहित याचिकाएं हैं, सुप्रीम कोर्ट इन्हें सुनता ही क्यूं है? सुप्रीम कोर्ट को अपीलेन्ट कोर्ट की तरह कार्य करना चाहिये ....
कम्युनिस्ट नेता डेनियल राजा ने तो महज विपक्ष की तरफ शक की सुई ही की थी मगर माकपा नेता प्रकाश कारंथ ने तो कांग्रेस-कम्युनिस्ट और झोलों की सारी पोल ही खोल कर रख दी ... अब यह साफ हो गया है कि जजों की बगावत राम जन्म भूमि मामले में फच्चर ठोकने हेतु थी
प्रकाश कारंथ मांग कर रहा कि राम जन्म भूमि मामले की सुनवाई कोलेजियम के जज ही करें यानि कि वे चारों जज जिन्होंने प्रेस कान्फ्रेन्स कर बगावत की
चारों जज अपना ही दोगलापन उजागर कर रहे ... एक तरफ तो वे कह रहे कि चीफ जस्टिस भी अन्य जजों के बराबर ही हैं, दूसरी तरफ ये मांग करते कि जनहित याचिकाएं सिर्फ कोलेजियम जजों को ही दी जाए ... कोलेजियम जज अन्यों से उपर कैसे हो सकते?
चीफ जस्टिस ने भी इन चारों जजों को अंगूठा दिखा दिया ... आधार मामले की सुनवाई जो 5 जज करेंगे इनमें ये चारों कोलेजियम जज शामिल नहीं
चारों बागी जज क्या संविधान से उपर? ... जब न्यायाधीशों की आचार संहिता से स्पष्ट है कि कोई जज मीडिया से बात नहीं करेगा तो इन चारों जजों पर कार्रवाई क्यूं नहीं?
अगले चीफ जस्टिस की बारी इन चारों बागी जजों में से एक रंजन गोगोई की। गोगोई को सुपरसीड कर किसी अन्य निर्विवाद जज को यह पद देना चाहिये। अतीत में कांग्रेस सरकारें भी एसा कर चुकी हैं
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