छत्तीसगढ़ पुलिस में महिला कांस्टेबल हैं स्मिता टांडी. फ़ेसबुक पर एक्टिव रहती हैं. साढ़े 8 लाख के आस पास फॉलोवर्स हैं. दुर्ग में रहती हैं. इन्होंने एक फेसबुक पोस्ट लिखा जिसमें इन्होंने अपना गुस्सा ज़ाहिर करते हुए एक बात कही. इनकी प्रोफ़ाइल में एक आदमी जुड़ा हुआ था जिसका नाम था भीमेंद्र कुमार. ये आदमी खुद को मथुरा, उत्तर प्रदेश का रहने वाला बताता है. ऐसा इसने अपनी प्रोफाइल पर लिख रहा है. भीमेंद्र काफी रेगुलर रेट से स्मिता को फेसबुक पर मेसेज भेजता रहता था जिसका स्मिता कोई जवाब नहीं देती थीं. असल में उन्हें मालूम ही नहीं पड़ रहा था कि कोई ऐसा व्यक्ति इन्हें मेसेज भेज रहा है.
स्मिता ने मंगलवार, 4 दिसंबर को एक फ़ेसबुक पोस्ट में एक गरीब मरीज़ की मदद करने के लिए गुहार की. भीमेंद्र ने उस पोस्ट में स्मिता से बदतमीज़ी से बात करनी शुरू कर दी. अबे-तबे की भाषा से लेकर ‘अपने को बहुत स्मार्ट समझती है’ और ‘साली फेसबुक पर अपनी हवा बनाती है’ जैसी बातें कहीं गईं. इसके साथ ही ‘तेरे पास कोई काम नहीं है क्या’ जैसे सवाल भी पूछ डाले. जैसे कि सरकार ने भीमेंद्र को ही देश के नागरिकों के क्रियाकलाप पर नज़र रखने के लिए तैनात किया हो.
भीमेंद्र की बदतमीज़ी देखकर स्मिता ने इसकी प्रोफ़ाइल खंगाली और इसे मेसेज करने के लिए इनबॉक्स में गईं तो वहां पहले से मौजूद मेसेजेज़ से इन्हें दो-चार होना पड़ा. मालूम पड़ा कि अपना नम्बर उसने कितनी ही बार परोसा और साथ ही इमोजी के सहारे जितनी अश्लीलता फैलाई जा सकती थी, वहां फ़ैली हुई थी. अब सारी कहानी सामने आ रही थी. भीमेंद्र लगातार स्मिता को मेसेज भेज रहा था जिसके जवाब में उसे निराशा के सिवा कुछ भी हाथ नहीं लग रहा था. तो उसने अपनी नंगई अब कमेंट्स में आकर दिखानी शुरू कर दी. ‘ऐसे कैसे जवाब नहीं देगी?’ वाली मानसिकता अब रंग दिखा रही थी. ‘फेसबुक सारा दिन इस्तेमाल करती है और मेरा मेसेज इग्नोर?’ ये सवाल बार बार कौंध रहा होगा. लिहाज़ा सारा खेल अब खुले में हो रहा था.
स्मिता ने भीमेंद्र के भेजे गए नंबरों पर खुद तो नहीं कॉल किया मगर अपने साथियों से कॉल करवाया तो कॉल करने वाले को भीमेंद्र ने भद्दी गालियां बकीं और अपने ओहदे का रौब दिखाते हुए जो हो सके ‘उखाड़’ लेने का चैलेन्ज फेंका गया. इसके बाद स्मिता को फिर से इनबॉक्स में घटिया बातें कही जाने लगीं.
अब आती है एक और मुद्दे की बात – सेना में कार्यरत कोई भी इंसान को फेसबुक पर अपनी प्रोफ़ाइल बनाने की सख्त मनाही है. उन्हें ये साफ़ निर्देश दिए गए हैं कि वो किसी भी हाल में, कैसे भी अपने नाम और तस्वीर के साथ अपनी फ़ेसबुक प्रोफाइल नहीं चला सकते हो. अगर चलानी भी है तो उसे यूं चलाया जाए कि मालूम ही न पड़े कि ये एक सेना से जुड़े इंसान की प्रोफ़ाइल है. ऐसे में दो संभावनाएं बनती हैं – पहली, कि ये प्रोफ़ाइल खुद भीमेंद्र ही चला रहा है. और अगर ऐसा है तो भीमेंद्र पर इस एक वजह से भी कार्रवाई की जानी चाहिए. भीमेंद्र ने वर्दी में अपनी तस्वीरें डाली हुई हैं जहां उनका नेम-टैग साफ़ साफ़ दिखाई देता है, उनकी बन्दूक दिखाई दे रही है और साथ ही उन्होंने अपने कैम्पस वगैरह के बाहर की तस्वीरें भी डाली हुई हैं.
दूसरी संभावना ये कहती है कि भीमेंद्र की प्रोफ़ाइल कोई और ही चला रहा है. अगर ऐसा है तो भीमेंद्र का ग़लत फ़ायदा उठाया जा रहा है. हालांकि इसकी संभावना काफी कम नज़र आ रही है. लेकिन इस एक बात से भी मुंह चुराया नहीं ही जा सकता है.
सेना में मौजूद लोग हमें साहस देने को होते हैं. वो हमारी रक्षा के लिए होते हैं. कहा जाता है कि हम रात को चैन से इसलिए सोते हैं क्यूंकि सीमा पर खड़ा कोई जवान पहरा दे रहा होता है. लेकिन जब इसी पुण्य करने वाली जमात में से ही एक शख्स आकर ऐसे काम कर देता है तो वाकई बुरा लगता है. सेना में होने के गर्व को जब कोई अपनी धौंस बना लेता है और उसके दम पर भौकाल टाइट करता हुआ घूमता है तो ज़रा तकलीफ़ होती है. सेना का एक जवान अगर एक पुलिस की कांस्टेबल से कहता है ‘जो उखाड़ना है उखाड़ लो’ तो ज़रा सोचने का वक़्त निकालना चाहिए और इस बार में दिमाग दौड़ाना चाहिए कि वो एक आम इंसान के लिए कैसा नजरिया रखता होगा.
स्मिता टांडी से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि ये पहला मौका नहीं है जब उनसे रसूखदार लोगों ने बदतमीज़ी से बात की हो या उन्हें असहज महसूस करवाया हो लेकिन वो इस आस में कुछ नहीं बोलती थीं कि एक दिन सब बंद हो जायेगा. लेकिन जब एक सेना के जवान ने ऐसा किया तो उन्हें बेहद गुस्सा आया.
फिलहाल, भीमेंद्र के दिए गए नंबरों पर कॉल नहीं लग पा रही है. उनसे भी बात होती तो ज़रा ठीक रहता.





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