Sunday, December 3, 2017

हजारों किसानों ने waste decomposer से सिर्फ 20/- रूपए में की जैविक खेती और बम्पर उत्पादन

हजारों किसानों ने waste decomposer से सिर्फ 20/- रूपए में की जैविक खेती और बम्पर उत्पादन


खेती में रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र जैविक खादों पर जोर दे रहा है। केंद्र ने वेस्ट डिकम्पोस्ट waste decomposer के जरिये खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। 20 रुपए के waste decomposer से कई एकड़ के लिए खाद बनाई जा सकती है। इस waste decomposer का प्रयोग फसलों की सिंचाई, तैयार फसल में छिड़काव और बीजों के शोधन में किया जा सकता है।
केंद्र किसानों को इस के प्रयोग की विधि को बताता है और डेमो करके भी दिखाता है। खेती में रासायनिक खादों और रसायन के हो रहे अंधा-धुंध प्रयोग से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। साथ ही धीरे-धीरे उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इस प्रयोग को कम करने के लिए जैविक खादों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। इस काम को और तेजी से करने के लिए राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र गाजियाबाद भी आगे आया है। केंद्र ने waste decomposer को विकसित किया है।
गाय के गोबर से इस डिकम्पोस्ट को बनाया गया है। इसका प्रयोग जैविक खाद के साथ-साथ फसलों में छिड़काव, बीजों के शोधन में भी किया जा सकता है। प्रदेश के सैकड़ों किसान इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, किसानों ने इसके परिणाम भी बेहतर बताए हैं।

राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र के निदेशक कृष्ण चंद्र के मुताबिक, डिकम्पोस्ट waste decomposer का इस्तेमाल प्रदेश के सैकड़ों किसान कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इसके इस्तेमाल से उत्पादन भी बढ़ेगा।
waste decomposer एक छोटी सी शीशी में होता है। 200 लीटर पानी में 2 किलो गुड़ डालकर मिला दें। इसके बाद डिकम्पोस्ट को मिला दें। इसको ठीक प्रकार से मिला दें। गर्मियों में दो दिन और सर्दियों में 4 दिन तक इसे रखें। इसके बाद इसका इस्तेमाल करें। इस दौ सौ लीटर घोल से एक बाल्टी घोल को फिर 200 लीटर पानी में मिला लें। इस तरह यह घोल बनाते रहें। खेत की सिंचाई करते समय पानी में इस घोल को डालते रहें।
ड्रिप सिंचाई के साथ इस घोल का प्रयोग कर सकते हैं। इससे पूरे खेत में यह फैल जाएगा। कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए 1 टन कूड़े-कचरे (कम्पोस्ट बनाने के लिए) में 20 लीटर waste decomposer का तैयार घोल छिड़क दें। इसके ऊपर फिर एक परत बिछा दें। फिर घोल का छिड़काव करें। 40 दिन में कम्पोस्ट खाद तैयार हो जाएगी। इसके अलावा फसलों की बीमारी को दूर करने के लिए हर एक महीने में एक बार waste decomposer का छिड़काव करें।
नमामि गंगे योजना के तहत गंगा के दोनों किनारों में जैविक खेती की जाएगी। इसके लिए ग्राम पंचायतों का चयन हो चुका है। किसानों के साथ वार्ता करके इस योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यक्रम भी होंगे। किसानों को बाजार भी उपलब्ध करवाया जाएगा ताकी उनका उत्पादन बिक सके। उन्हें सही कीमत मिल सके।

Waste Decomposer की एक शीशी से 20 किलो बीज का शोधन

एक शीशी जैविक खाद (डिकम्पोस्ट) से 20 किलो बीज का शोधन किया जा सकता है। एक शीशी डिकम्पोस्ट को 30 ग्राम गुड़ में मिला दें। यह मिश्रण 20 किलो बीज के लिए पर्याप्त है। शोधन के आधे घंटे बाद बीज बुआई के लिए तैयार है।

किसान जैविक खाद (waste decomposer) का उपयोग कर रहे हैं। इसके परिणाम भी सार्थक आ रहे हैं। इसका अधिक से अधिक प्रयोग करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
कृष्णचंद्र, निदेशक, राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र
मिलने का पता :- National Centre of Organic Farming at Ghaziabad and its eight Regional Centres at Bangalore, Bhubaneshwar, Panchkula, Ghaziabad, Imphal, Jabalpur, Nagpur and Patna. Besides working for realisation of targets under NPOF, NCOF and RCOFs are also performing specific roles in promotion of organic farming.

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