ईसाई-कैलेंडर की सच्चाई !
पहले यह रोमन कैलेंडर था जिसमें 304 दिन के एक वर्ष में 10 महीने थेl यह मुसलामानों के हिजरी कैलेंडर (चन्द्रमा की गति पर आधारित) जैसा थाl इनमें 6 महीनों के नाम ईसाई देवी-देवताओं के नाम पर थे :
1. जनवरी (जेनस – दो मुँह वाला देवता), 2. फ़रवरी (फेब्रुआ – चरवाहों का देवता/बलि का देवता), 3. मार्च (मार्स – युद्ध के देवता), 4. अप्रैल (अप्रिल्स – प्रेम की देवी), 5. मई (माया – प्रजनन और विकास की देवी), 6. जून (जूनो – विवाह की देवी) l
1. जनवरी (जेनस – दो मुँह वाला देवता), 2. फ़रवरी (फेब्रुआ – चरवाहों का देवता/बलि का देवता), 3. मार्च (मार्स – युद्ध के देवता), 4. अप्रैल (अप्रिल्स – प्रेम की देवी), 5. मई (माया – प्रजनन और विकास की देवी), 6. जून (जूनो – विवाह की देवी) l
देवताओं के नाम से उनके जीवन मूल्यों के स्तर का पता चल जाता हैl
बाकी चार महीनों के नाम नहीं मिले तो संस्कृत से संख्याओं के नाम चुरा कर नाम रख लिए गए।
7. सेप्टेम्बर – सातवां महीना (septem/सप्तम : 7) 8. ऑक्टोबर – आठवां महीना (Octo/अष्ट :
😎, 9. नॉवेम्बर – नवाँ महीना (novem/नवम : 9), 10. डिसेम्बर – दसवाँ महीना (decem/दशम : 10)
ईसा पूर्व 46 में रोमन सम्राट जुलिअस सीजर द्वारा गलती सुधार कर दो महीने और जोड़े गए और इसका नाम जूलियन कैलेंडर रखा गयाl
11. जुलाई (जूलिअस सीजर – रोमन सम्राट), 12. ऑगस्ट – (ऑगस्टस सीजर – रोमन सम्राट), जिन्हें क्रमशः सातवां और आठवां महीना बनाया गया और सेप्टेम्बर (7) को नौवाँ, ऑक्टोबर (8) को दसवाँ, नॉवेम्बर (9) को ग्यारहवाँ और डिसेम्बर (10) को बारहवाँ महीना कहा गया !
बाद में 1582 ईस्वी में पॉप ग्रेगोरी-13 द्वारा और सुधार कर इसका नाम ग्रोगेरियन कैलेंडर रखा गयाl
यह एक सौर कैलेंडर है जो सूर्य के चारों और पृथ्वी की परिक्रमण गति पर आधारित हैl इसमें चन्द्रमा की गति की कोई भूमिका नहीं हैl
वैदिक युग से हमारा विक्रम संवत का कैलेंडर इससे बहुत उन्नत है, जो चन्द्र गति और सूर्य गति दोनों पर आधारित है और सम्पूर्ण रूप से वैज्ञानिक है हम भी जनवरी में नये साल की शुभकामनाऐं सबको दे रहे हैं...केवल इसलिये कि जगत की गति के साथ चलना है...विश्व और समाज से कट कर हम नहीं रह सकते।सबके साथ चलना ही होगा।
.....किंतु इसके साथ साथ इस सच्चाई से भी सबको अवगत कराना होगा कि यह हमारा नव वर्ष नहीं हैं...यह तो केवल ऐसे है जैसे हम किसी दूसरे के बच्चे के जन्मदिन पर उसको बधाई देते हैं...उस दिन हम अपने बच्चे का जन्मदिन तो नहीं मनाते। ठीक इसी प्रकार आज के नव वर्ष की बधाई है...पर दूसरे के बच्चे का जन्मदिन मनाते समय हमें अपने बच्चे की न तो उपेक्षा करनी चाहिये और न उसे भूल जाना चाहिये।
.....किंतु इसके साथ साथ इस सच्चाई से भी सबको अवगत कराना होगा कि यह हमारा नव वर्ष नहीं हैं...यह तो केवल ऐसे है जैसे हम किसी दूसरे के बच्चे के जन्मदिन पर उसको बधाई देते हैं...उस दिन हम अपने बच्चे का जन्मदिन तो नहीं मनाते। ठीक इसी प्रकार आज के नव वर्ष की बधाई है...पर दूसरे के बच्चे का जन्मदिन मनाते समय हमें अपने बच्चे की न तो उपेक्षा करनी चाहिये और न उसे भूल जाना चाहिये।
आज हमारा हिन्दुओं का सनातन धर्म का नव वर्ष नहीं है....हमारा नव वर्ष चैत मास से प्रारम्भ होता है...’विक्रम संवत्सर’....यह कल्प सृष्टि युगादि का प्रारम्भिक दिन है- नक्षत्रों में परिवर्तन इसी दिन से प्रारम्भ होता है- चैत मास शुक्ल पक्ष (प्रथमा) नवरात्रों का प्रथम दिन। हम बचपन से ही सुनते आये हैं कि हमारा नव वर्ष चैत से प्रारम्भ होता है।
कुछ अंहकार के अतिकाधिक्य से ग्रस्त व्यक्तियों को यह सत्य स्वीकार नहीं...किंतु उनके मानने और न मानने से क्या होता है...जो सत्य है, शाश्वत है...वह तो रहेगा। जय श्री कृष्ण ....वंदेमातरम्
👏
👏
Manju.Gupta
कुछ अंहकार के अतिकाधिक्य से ग्रस्त व्यक्तियों को यह सत्य स्वीकार नहीं...किंतु उनके मानने और न मानने से क्या होता है...जो सत्य है, शाश्वत है...वह तो रहेगा। जय श्री कृष्ण ....वंदेमातरम्
Manju.Gupta
No comments:
Post a Comment