आर्टिफिशियल इन्टेलिजन्स से चलती विश्व की प्रथम प्लास्टिक और धातु से बनी नकली महिला भारत आयी । बडे बडे वी.आइ.पी की सभा में भाषण देने लगी । बोलते बोलत अचानक बंद पड गयी । वहां कोइ अंडे टमाटर फैंकनेवाले नही थे । लोगोंने शांत भाव से कारण पूछा....महिला के साथ रहे इन्जिनियर तत फफ करने लगे......कुछ सुजा नही तो बोल दिया कि नेटवर्क डाउन हो गया है ।
असली कारण कुछ भी रहा हो लेकिन ऐसे साधन नेटवर्क डाउन होने से, बॅटरी डाउन होने से या अंदरूनी पार्ट गरम हो जाने से या अन्य बीगाड से अटक जाते हैं ।
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शुक्र है मोदी सरकार नागरिक के जीवन को कॅशलॅस और नेटवर्क के साथ पूरी तरह जोडने में असफल रहा है । वरना आजकल महाराष्ट्र में भीम सेना की वजह से अनेक जगह पर नेट बंद करने से मानव जीवन बिलकु ठप हो जाता ।
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असली कारण कुछ भी रहा हो लेकिन ऐसे साधन नेटवर्क डाउन होने से, बॅटरी डाउन होने से या अंदरूनी पार्ट गरम हो जाने से या अन्य बीगाड से अटक जाते हैं ।
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शुक्र है मोदी सरकार नागरिक के जीवन को कॅशलॅस और नेटवर्क के साथ पूरी तरह जोडने में असफल रहा है । वरना आजकल महाराष्ट्र में भीम सेना की वजह से अनेक जगह पर नेट बंद करने से मानव जीवन बिलकु ठप हो जाता ।
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असली जीवन में प्रमुख नेटवर्क विश्वास है, एक दुसरे पर विश्वास का नेटजाल सदियों से काम कर रहा है । मोदी का नेटवर्क बंद भी हो जाए तो आज की तारिख में कोइ भूका नही मरेगा । अगर जरूरत पड गयी तो दुकानदार या पडोसी विश्वास के नेटवर्क से मदद कर देन्गे, उधार देकर । लेकिन ये विश्वास का नेटवर्क दानव समाजी तंत्र तोडना चाहता है । समाज और परिवार व्यवस्था को तोडकर मानव को बिलकुल अकेला कर देनेके अनेक उपाय हम देख ही रहे हैं ।
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जब दानव समाजी सिस्टम नागरिक की विश्वास जाल को तोडकर अपनी नेटजाल में पूरी तरह दबोच लेन्गे तब क्या होगा?
देखते हैं...
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कोइ दुकानदार बीना नेट सामान नही देगा । विश्वास जाल खतम हो गया है तो उधार भी नही देगा । कॅश बंध है, बेन्क का चेक भी विश्वास का प्रतिक था वो भी बंद हो गया है । एक नागरिक को पडोसी पर विश्वास नही है तो पडोसी को भी उस नागरिक पर विश्वास नही रहा है । मदद मांगना या करना व्यर्थ है ।
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बीना नेट डोक्टर दरदी का हाथ नही पकडेगा । क्यों कि दरदी के आधार डेटा के साथ जुडे उसके रिपोर्टस और हेल्थ हिस्टरी दिखाई नही देते हैं और ना दरदी से पैसे लेने का नेटवर्क चालू है । दवाई की दुकानवाला भी बीना नेट दवाई नही देगा । अस्पताल वाले दरदी को दाखिल नही कर पाएन्गे क्यों कि दरदी के अंगुठे आधार कार्ड को वेरिफाय नही कर रहे हैं, नेटवर्क नही है ना !
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कहीं जाना हो तो रिक्षा या टेसी बीना नेट ले जाएन्गे नही, बस या ट्रेन बीना नेट टिकट देन्गे नही । अपना वाहन भी पेट्रोल हो तब तक ही चलेगा पेट्रोल पंपवाला बीना नेट पेट्रोल नही देगा ।
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उस नकली महिला का तो नेटवर्क डाउन हो गया था तो वो बंद पड गयी थी, नागरिकों की तो बॅटरी (भूक) डाउन हो जाएगी । इसके साथ न जाने क्या क्या डाउन हो जाएगा !
नकली महिला भले दिनो तक बीना नेटवर्क बंद रही हो लेकिन जब नेटवर्क मिले तो सहजता के साथ चालू हो सकती है, मानव जीवन इतनी सहजता से चुलू नही हो सकता, बीच में बहुत कुछ खोना पडता है ।
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जब दानव समाजी सिस्टम नागरिक की विश्वास जाल को तोडकर अपनी नेटजाल में पूरी तरह दबोच लेन्गे तब क्या होगा?
देखते हैं...
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कोइ दुकानदार बीना नेट सामान नही देगा । विश्वास जाल खतम हो गया है तो उधार भी नही देगा । कॅश बंध है, बेन्क का चेक भी विश्वास का प्रतिक था वो भी बंद हो गया है । एक नागरिक को पडोसी पर विश्वास नही है तो पडोसी को भी उस नागरिक पर विश्वास नही रहा है । मदद मांगना या करना व्यर्थ है ।
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बीना नेट डोक्टर दरदी का हाथ नही पकडेगा । क्यों कि दरदी के आधार डेटा के साथ जुडे उसके रिपोर्टस और हेल्थ हिस्टरी दिखाई नही देते हैं और ना दरदी से पैसे लेने का नेटवर्क चालू है । दवाई की दुकानवाला भी बीना नेट दवाई नही देगा । अस्पताल वाले दरदी को दाखिल नही कर पाएन्गे क्यों कि दरदी के अंगुठे आधार कार्ड को वेरिफाय नही कर रहे हैं, नेटवर्क नही है ना !
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कहीं जाना हो तो रिक्षा या टेसी बीना नेट ले जाएन्गे नही, बस या ट्रेन बीना नेट टिकट देन्गे नही । अपना वाहन भी पेट्रोल हो तब तक ही चलेगा पेट्रोल पंपवाला बीना नेट पेट्रोल नही देगा ।
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उस नकली महिला का तो नेटवर्क डाउन हो गया था तो वो बंद पड गयी थी, नागरिकों की तो बॅटरी (भूक) डाउन हो जाएगी । इसके साथ न जाने क्या क्या डाउन हो जाएगा !
नकली महिला भले दिनो तक बीना नेटवर्क बंद रही हो लेकिन जब नेटवर्क मिले तो सहजता के साथ चालू हो सकती है, मानव जीवन इतनी सहजता से चुलू नही हो सकता, बीच में बहुत कुछ खोना पडता है ।
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