Wednesday, February 7, 2018

स्कूली शिक्षा में पिछले 25 साल काम करके मैंने इस Exam केंद्रित Rote education को Activity Based Learning से replace करने की जी जान से कोशिश की है । पर कामयाब न हुआ । क्योंकि parents नही चाहते ।

स्कूली शिक्षा में पिछले 25 साल काम करके मैंने इस Exam केंद्रित Rote education को Activity Based Learning से replace करने की जी जान से कोशिश की है । पर कामयाब न हुआ । क्योंकि parents नही चाहते ।
नही चाहिए उनको All round Personality Development ......... वो तो स्कूल में Games और Library Period तक का विरोध करते हैं ।
NCERT books का विरोध करते हैं ........ उनका काम सिर्फ 5 किताब से नही चलता क्योंकि फलाने स्कूल में तो 18 किताबें लगी हैं जहां उनके पड़ोसी का बच्चा पड़ता है ........ उनके पड़ोसी का बच्चा तो स्कूल से आते ही किताब ले के बैठ जाता है , और हमारा खेलने चल देता है ........ पड़ोसी के 99% आये , हमारे वाले के सिर्फ 77 %
पड़ोसी के 5 साल के लौंडे ने Noun की डिफनीसन रटी हुई है , तुम भी रटाओ ........
ये क्या मज़ाक बना रखा है ........ जब देखो तब हमारा लड़का Library की किताब Story books और उपन्यास पढ़ता रहता है । exams में सवाल क्या story book में से पूछे जाएंगे । ये क्या Activity Activity लगा रखा है ? Copy पे काम कराओ ।
Copy check क्यों नही की ? Exams में नंबर कम क्यों आये ।
मेरा बच्चा हर बार 1st आता था , इस बार 2nd क्यों आया ? अब आप लोग ध्यान नही देते ........
Tuition ....... Coaching ........ Exams ........ Percentage .........
Paper Out ........... नकल .......... Practical के marks ........ देश का parent इसी Rat Race में लगा है .......
Schools अब Brand बन गए हैं ।
Status Symbol बन गए हैं । लोग अपनी car के पीछे आजकल Sticker लगाते हैं ......... Cottonian , Stephanian, Yadvendran ............
Mayor World School जालंधर के बच्चों को summer vacations में होम वर्क मिला ........ छुट्टियों में आप कहाँ घूमने गए इसपे essay लिखो । अब Mrs शर्मा तो Singapore जा रही हैं और Mrs Dhingra मलेशिया तो हमारा बच्चा ये कैसे लिख दे कि वो छुट्टियों में अपनी नानी के घर झुमरी तलैया गया इसलिए ........ डार्लिंग लेट्स गो टू होनोलूलू ........ ये मानसिक दिवालियापन है हमारे parents का .......
मेरे स्कूल में एक parent ने बाकायदे इस विषय पे बहस की की आपने ये इतनी सस्ती घटिया NCERT की books क्यों लगाई हैं । उस फलाने स्कूल की किताब तो 400 रु की है ......... आखिर 60 रु की किताब 400 रु वाली किताब का मुकाबला कैसे करेगी ??????? हमारे स्कूल के बहुत से parents ने अपने बच्चे सिर्फ इसलिए हटा लिए क्योंकि हमारे यहां सिर्फ 5 किताब और फलाने स्कूल में 19 ठो किताब लगी है सो मेरा बच्चा उस स्कूल के बच्चों से कैसे मुकाबला कर पायेगा ?????
स्कूल के लिए parent ग्राहक है इसलिए भगवान है ........ और भगवान रुष्ट हो जाएं , ऐसे कैसे चलेगा ....... प्रभु आप प्रसन्न रहें ....... जब parent ऐसा चाहता है तो हम या सरकार की क्या औकात ?
हम दोनों masses की इच्छा के विपरीत नही जा सकते ।
हमारी औकात तो भीलवाड़ा के पप्पू जितनी है ।
कचौड़ी में मिर्च और स्कूल की पढ़ाई और शिक्षा नीति ........ ये जनता जनार्दन , पब्लिक , Parents तय करते हैं जनाब ।
इसके लिए स्कूल को और सरकार को गरियाना बंद कीजिए ।

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