ऐसे चलता है कबाड़ का बिजनेस
- डोर-टू-डोर कबाड़ उठाने की कोई लिमिट नहीं है, लेकिन ऑनलाइन या मोबाइल से बुकिंग पर मिनिमम 50 किलो वेस्ट (पेपर, लोहा, कॉपी-किताब, कार्टून, दफ्ती) उठाया जाता है।
- कबाड़ को अलग-अलग छांट लिया जाता है। इसके बाद बल्क में इसे ट्रक या कंटेनर में भरकर रिसाइक्लिंग करने वाली फैक्ट्रियों को भेज दिया जाता है। इन फैक्ट्रियों से ही हमें पेमेंट लेते हैं।
- पेपर, किताब, कॉपी और दफ्ती मुरादाबाद, काशीपुर, मेरठ और लोहा चुनार को जाता है।
- हमारे साथ 70 से ज्यादा छोड़े-बड़े कबाड़ी वाले जुड़े है। इनका पूरा माल हम लोग सीधे उनके यहां अपनी गाड़ी भेजकर उठाते है।
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