Saturday, February 10, 2018

नवाचारी शिक्षक सुनील

नवाचारी शिक्षक सुनील_*
शिक्षक समुदाय में ऐसे बहुत से शिक्षक हैं जो अपने अपने विद्यालय में अद्भुत कार्य कर रहे हैं। उनकी यह कोशिश रहती है कि बच्चों को अधिकतम लाभ किस तरह पहुंचाया जाए। अपने सीमित संसाधनों और जितनी जानकारी होती है उसके आधार पर ऐसे छोटे-छोटे नवाचार करने से नहीं चूकते जिन को लागू करने में बहुत कम पैसों की जरूरत होती है परंतु जिनका प्रभाव व्यापक होता है।
आज आपको ऐसे ही एक सरकारी विद्यालय के अध्यापक, सुनील बैरासर से रूबरू कराना चाहूंगा । यह शिक्षक चुरू जिले के एक छोटे से गांव सादपुरा ढाणी मौजी के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं । यद्यपि यह शिक्षक एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में तृतीय श्रेणी अध्यापक के रूप कार्यरत है परंतु इनका उद्देश्य इन के बच्चों को अभी से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है जबकि ये प्रतियोगी परीक्षाएं कॉलेज स्तर पर जाकर बच्चों के काम आने वाली है। पर सच बात यही है कि भविष्य की तैयारी के लिए इंतजार क्यों किया जाए? वह तैयारी आज से ही क्यों ना की जाए? शायद यही सोच है सुनील जी की जो इस तरह के नवाचार करने के लिए प्रेरित करती है।
वर्ष 2012 में राजकीय सेवा में आए सुनिल बैरासर ने पूरे राजस्थान में शिक्षा से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी सोशल मीडिया का एक शानदार प्रयोग किया है। सुनिल बैरासर द्वारा व्हाटसअप के माध्यम से सोशल मीडिया में 3 साल पहले शुरू की गई सामान्य ज्ञान व्हाटसअप ग्रुप की सहायता से ऑनलाइन क्विज की तैयारी के देशभर से सामान्य ज्ञान व विभिन्न विषयों के व्हाटसअप ग्रुप संचालित है जिसमे 100 से अधिक व्हाटसअप ग्रुप है व देशभर से निःस्वार्थ सेवा करने वाले युवा साथ दे रहे है। इन्होंने एक शानदार टीम तैयार करके बिना कोई पैसा खर्च किए WhatsApp और Facebook को एक विश्वसनीय और बेहतरीन शैक्षिक समाचारों के आदान प्रदान का साधन बना दिया है । परंतु उनका नवाचार केवल शिक्षकों तक सूचनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है । अपने विद्यालय में अपने बच्चों के लिए भी जी जान से समर्पित हैं तभी तो वे OMR शीट के माध्यम से मासिक सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन कराने का कार्य कर रहे हैं।
मुझे याद है जब मैं नेशनल ICT अवार्ड के लिए आयोजित जूरी मीटिंग में बुलाया गया और वहां पर पूरे देश से सूचना तकनीक का शिक्षा में प्रयोग कर रहे शिक्षकों ने अपने-अपने नवाचारों का प्रदर्शन किया तो यह स्पष्ट दिखाई दिया कि उत्तर भारत में और विशेष रूप से राजस्थान में हो रहे नवाचारों की तुलना में दक्षिणी भारत में सूचना तकनीक के क्षेत्र में बहुत ज्यादा कार्य हो रहा है। राजस्थान के एक शिक्षक के रूप में मैंने इस कारण को जानने की कोशिश की। अन्य कारणों के साथ एक बात यह भी मिली…. राजस्थान में जो शिक्षक वाकई शानदार कार्य कर रहे हैं वे अपने दायरे तक सीमित है और ऐसे किसी पुरस्कार के लिए आवेदन ही नहीं नहीं कर पाते।
सोशल मीडिया के जरिए मैं बहुत सारे शिक्षकों से मिला और इस निष्कर्ष तक पहुंचा कि दक्षिण भारत में शिक्षा में सूचना तकनीक में बेहतर कार्य हो रहा है यह काफी हद तक ठीक है पर ऐसा नहीं है कि हम बहुत पीछे हैं और थोड़े से प्रयास और किये जाए तो काफी आगे निकल सकते हैं। सुनील बैरासर जैसे शिक्षकों के कार्य को देख कर लगता है कि हमारे यहां पर कर्मठ शिक्षकों की कमी नहीं है। जहां दक्षिण भारत में सरकारी प्रोत्साहन बहुत ज्यादा ऐसे शिक्षकों को मिलता है तब कुछ कर पाते हैं हमारे यहां अपने स्तर पर बिना किसी प्रोत्साहन के, बिना किसी पुरस्कार की लालसा के ऐसे बहुत से शिक्षक हैं जो वाकई शानदार कार्य कर रहे हैं। विपरीत हालातों के बावजूद सुनील बैरासर ने अपने विद्यालय में प्रतिमाह ओएमआर शीट का प्रयोग करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अभी से बच्चों को तैयार करने के लिए और सामान्य ज्ञान के स्तर को सुधारने के लिए जो यह नवाचार किया है, यह वाकई काबिले तारीफ है । हम सभी जानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाएं तो OMR शीट या आजकल ऑनलाइन माध्यम से ही संपन्न होती हैं और शायद आप यह भी माने कि जब भी ऐसी परीक्षाएं दी जाती हैं तो 1-2 चांस तो प्रॉपर तरीके से ओएमआर शीट के प्रयोग करने में ही बिगड़ जाते हैं। यदि हम अपने बच्चों को इन प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने से पूर्व ही इस तरह के हुनर में महारत हासिल करने का अवसर प्रदान करें तो यह वाकई एक बड़ी बात होगी । और यह एक नवाचार ही होगा । सुनील जी ने ऐसा ही किया है अन्य विद्यालय शिक्षक उनके इस कार्य को अपने विद्यालय में कर सकते हैं।
आज मेरी सुनील जी से बात हुई । जिससे मुझे लगा कि वर्तमान शिक्षक में क्या गुण होने चाहिए हैं वे गुण इनमें हैं। उन्होंने कहा अन्य शिक्षक भी अपने विद्यालय में इस तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करना चाहते हैं तो हम जो प्रश्न पत्र हमारे यहां के लिए तैयार करते हैं उसे उन विद्यालयों को भी भेज सकते हैं । और आसानी से ऐसी परीक्षाओं का आयोजन कर सकते हैं । क्योंकि हर माह नया प्रश्न पत्र बनाना विद्यालय के लिए अलग से कार्य है। यदि हमें कोई एक्सपर्ट ऐसे प्रश्न पत्र बनाकर विद्यालय में इस तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन के लिए प्रदान करता है तो समय भी बचेगा और एक स्तरीय प्रश्न पत्र भी हमें प्राप्त होगा।
एक बार फिर से सुनिल बैरासर को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं ! उम्मीद है कि आप राजस्थान का गौरव आगे बढ़ाने के लिए यूं ही निस्वार्थ भावना के साथ कार्य करते रहेंगे और छात्र हित में अनवरत प्रयासरत रहेंगे।

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