Sunday, February 25, 2018

जीपीएस का शानदार प्रयोग

जीपीएस का शानदार प्रयोग
किस्सा एक... रात के बारह बजे मैं और दीप्ति घाघरा नदी का पुल पार करके खड़े थे... उधर से अपर्णा जी ने अपनी लाइव लोकेशन शेयर कर दी और इधर से हमने... उनकी लोकेशन 5 मीटर के दायरे में आ रही थी... यानी एकदम सटीक... दूरी और रास्ता देखा... साढ़े सात किमी... मोबाइल दीप्ति को पकड़ा दिया और बाइक चलाने लगा... "लेकिन ध्यान रखना, अयोध्या की सुनसान गलियों में कुत्ते भी भौंकेंगे, डरकर या घबराकर मोबाइल मत फेंक देना"... दीप्ति मोबाइल में देखकर रास्ता बताती रही...
उधर अपर्णा जी के मैसेज भी आते रहे... फलां जगह से बाएँ मुड़ जाना... मस्जिद के सामने से निकलना... लेकिन हमने ये मैसेज नहीं पढ़े... जब दूरी आधा किमी रह गयी, दीप्ति ने उन्हें मैसेज कर दिया... "बाहर आ जाओ, हम पहुँचने ही वाले हैं"...
और उधर उन्होंने बालकनी का दरवाजा खोला, इधर हमारी मोटरसाइकिल उनके दरवाजे पर जा लगी... फैज़ाबाद की एक घनी बसी कालोनी में, जहाँ रात के इस समय सन्नाटा पसरा था... सिवाय एक कुत्ते के भौंकने के...
किस्सा नम्बर दो... हम बाराबंकी बाईपास पर मोटरसाइकिल में हवा भरवा रहे थे... मतलब टायरों में... उधर लखनऊ से अजय सिंह राठौर साब का मैसेज आया "घर पर आ जाना लखनऊ"...
"घर की लोकेशन भेजो"...
लोकेशन आ गयी... एयरपोर्ट की तरफ था... "लेकिन हमें तो सीतापुर की तरफ निकलना है, इसलिए हम आपके यहाँ नहीं आ सकते"...
"तो कोई बात नहीं... मैं आ जाता हूँ... सीतापुर रोड़ पर मिलते हैं"...
"हाँ, ठीक है... लेकिन अपनी लाइव लोकेशन शेयर कर देना"...
उन्होंने अपनी लाइव लोकेशन शेयर कर दी... वे बाईपास होते हुए सीतापुर रोड़ की ओर बढ़ने लगे... और हम भी सीतापुर रोड़ की ही तरफ चल दिये...
सुबह के नौ बजे... लखनऊ में हर सड़क, हर चौराहे पर भारी भीड़... उनकी लोकेशन देखी... वे भी सीतापुर रोड़ के उस चौराहे पर अभी अभी पहुँचे थे... लेकिन उनकी लोकेशन सड़क पार करके आ रही थी... एक्यूरेसी 3 मीटर... यानी मोबाइल में वे जहाँ खड़े दिख रहे हैं, उसके 3 मीटर के दायरे में वे हैं... 3 मीटर होता ही कितना है?... अपने हाथ फैलाइये, हो गया 3 मीटर...
मैंने सड़क पार की... फिर से मोबाइल देखा... वे मेरे पीछे थे... मैं पीछे मुड़ा... चार कदम चला और एक आदमी के कंधे पर हाथ रख दिया... वे भी फटाक से घूमे...
और इस तरह एक भीड़ भरे चौराहे पर बिना फोन किये, बिना हाथ लहराये, अलानी स्वीट शॉप, फलाने बैंक का रेफरेंस दिये बिना हम मिल गये...
अब एक किस्सा जीपीएस के बिना...
शाहजहांपुर के पास रोजा फ्लाईओवर... नीरज पांडेय जी को फोन किया "सर, हम रोजा फ्लाईओवर के पास हैं... अब बताइये कैसे आना है..."
"बाईपास पर आओ... इधर उधर कहीं नहीं मुड़ना... पूरे 5 किलोमीटर के बाद हुंडई का शोरूम आएगा... मैं वहीं मिलूंगा..."
5 किलोमीटर बाद... बाइक रोककर चारों ओर देखा... दीप्ति से भी कह दिया... "अच्छी तरफ ढूंढ... हुंडई का शोरूम यहीं कहीं होना चाहिए..."
लेकिन खेतों के अलावा कुछ ना दिखा... ढूंढते ढूंढते 2 किमी और आ गये... आखिरकार फोन करना पड़ा...
"3 किमी और आओ..."
3 किमी बाद फिर से रुके... शोरूम ढूंढा... लेकिन नहीं मिला... आखिरकार साढ़े तीन किमी बाद हुंडई का शोरूम मिला... फोन किया तो 100 मीटर आगे पांडेय जी का हाथ लहरता दिख गया...
अब जीपीएस, लाइव लोकेशन की मुझसे मत पूछिए... आपमें इच्छा होगी, तो आप इनका इस्तेमाल करने लगेंगे... नहीं होगी, तो सिखाने के बाद भी नहीं करेंगे...
और हाँ, आपके हाथ में जो स्मार्टफोन है ना... वह इस काम के लिए बेस्ट है...

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