Thursday, January 4, 2018

gopal das neeraj

चौथी क्लास में पढ़ता था. कानपुर में. बुआ जी के पास रहता था. दर्शनपुरवा में. सामने बड़ा सा पार्क था. सेंट्रल पार्क. उसमें कवि सम्मेलन हुआ था. हम भी गए. कभी कोई चाट कविता सुनाता. तो लगता घर जाकर सो जाएं. तभी कोई वीर रस वाला आ जाता. हिल हिल कर गाता. मैं चाहूं तो पत्थर को पाषाण बना सकता हूं. जनता हुल्लड़ काटने लगती. फिर लगा. चलो यार. ये पत्थर को नहीं हमें बना रहे हैं. तो भइया बोले. बल्कि पूछा. जा रहे हो सिब्बू. हमने कहा हां. बोले, नीरज को तो सुन लो. हमने पूछा. ये कौन हैं भइया. जो भइया ने बोला, वो उन्हीं के मुंह से. याददाश्त के सहारे.
नीरज वो हैं, जो सबसे किनारे बैठे हैं. मसनद पर. अधलेटे से. सन सी सफेद लटों को छटकते. सबसे लास्ट में गाएंगे. स्टार कवि हैं. शुरू में खर्च कर देंगे तो जनता रुकेगी नहीं. वैसे भी अभी उनका माहौल बन रहा होगा. (बाद में पता चला कि नीरज बिना सुरा के सुर नहीं खोलते)
खैर, नीरज से पहले नींद आ गई. ठीक ही रहा. वरना माटी के मानुष को निरख लेता तो अपने तईं खोज न पाता. हर्फों की हरारत न महसूस पाता.
इसकी शुरुआत हुई ‘शर्मीली’ से. डीडी मेट्रो पर आ रही थी. गाना था, ‘खिलते हैं गुल यहां, खिलके बिखरने को’. राखी कित्ती सुंदर लग रही थीं ‘शर्मीली’ में. बाद की फिल्मों में तो वह मुटा गई थीं. आवाज भी भर गई थी. और तब तो हमें पता भी नहीं था कि वो मेघना की मम्मी और गुलजार की शरीक-ए-हयात हैं. तो जम नहीं पाई अपनी दोस्ती. पर ‘शर्मीली’ में. वो कम शर्माती थी, हम ज्यादा. एक भाई साहब ने तब हमें बताया. नीरज ने लिखे हैं इसके गाने.
फिर स्कूल में अंकुर मिला. उनके पापा शौकीन थे. कवि सम्मेलनों की कैसेट खूब बजतीं उनके घर. वो सुनाता. भाईजी नीरज की वो कविता सुने हो, ‘कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे’. सुनी. उसी के घर. और डाकिया डाक लाया भी सुनी.
तब से अब तक जब तब नीरज को सुनता रहता हूं. अब वो कवि सम्मेलनों वगैरह में ज्यादा नहीं जाते. और फिल्मों के लिए लिखने का सिलसिला तो मेरे पैदा होने के भी दसियों साल पहले छूट गया था. जयकिशन मरे, एसडी बर्मन मरे. तो नीरज के लिए जैसे बंबई की फिल्मी दुनिया ही गुजर गई.
मोह के धागे टूटे. इटावा वाले नीरज अलीगढ़ में हिंदी की मास्टरी करते और सम्मेलनों में कविता सुनाते. कभी बहुत तरंग में होते, तो किसी किसी की कुंडली भी बना देते. कहने वाले कहते हैं कि नीरज को ज्योतिष की अच्छी नॉलेज है. अच्छी बात है. बाकी हम सितारों के सहारे रहते नहीं, इसलिए पता नहीं.
आज नीरज का जन्मदिन है. ऐसे बुजुर्ग जितना बने रहें, अच्छा है. बरगद कैसा भी हो, बरगद ही होता है. उनकी कविताएं पढ़िए. उनके लिखे गाने सुनिए. सोमवार की सुबह को सुरमयी बनाइए.

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